06 Aug महा जल मिशन: जल संकट समाधान हेतु अनुसंधान एवं नवाचार की नई दिशा
✎ महा जल कार्यक्रम, ANRF और जल शक्ति मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य जल क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करने के लिए मिशन-उन्मुख और समाधान-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे। | GS Paper III — विज्ञान और प्रौद्योगिकी-विकास और उनके अनुप्रयोग और रोजमर्रा के जीवन पर प्रभाव; पर्यावरण और पारिस्थितिकी; आपदा प्रबंधन।
- Prelims: महा जल मिशन, नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF), जल शक्ति मंत्रालय, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), जल शक्ति हैकाथॉन, WIN पोर्टल, मिशन मोड अनुसंधान, जल संसाधन प्रबंधन, सर्कुलर इकोनॉमी, जलवायु अनुकूलन
- Essay: भारत में जल सुरक्षा: चुनौतियाँ और समाधान, सतत विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: महा जल कार्यक्रम, ANRF और जल शक्ति मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य जल क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करने के लिए मिशन-उन्मुख और समाधान-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, जल शक्ति राज्यमंत्री श्री राज भूषण चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में ‘महा जल कार्यक्रम’ (MAHA Jal Karyakram) के कार्यान्वयन से संबंधित जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) और जल शक्ति मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य जल क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने के लिए मिशन-उन्मुख और समाधान-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देना है। यह खबर जल सुरक्षा और सतत जल प्रबंधन के लिए भारत सरकार के प्रयासों को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
- भारत में जल संसाधन प्रबंधन एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है, जिसमें बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, औद्योगीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण जल की उपलब्धता और गुणवत्ता पर दबाव बढ़ रहा है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 ने अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की सिफारिश की थी।
- इसी के परिणामस्वरूप, ANRF अधिनियम, 2023 के तहत नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की स्थापना की गई, जो प्राकृतिक विज्ञान, मानविकी और सामाजिक विज्ञान के वैज्ञानिक व तकनीकी इंटरफेस के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाला एक सांविधिक निकाय है।
- मिशन फॉर एडवांसमेंट इन हाई-इम्पैक्ट एरियाज़ (MAHA) ANRF के अंतर्गत एक कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य देश की प्रमुख आवश्यकताओं के अनुसार कुछ विशेष क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए मिशन मोड में प्राथमिकता-केंद्रित, समाधान-आधारित शोध को बढ़ावा देना है।
- जल शक्ति मंत्रालय भारत में जल संसाधनों के विकास, संरक्षण और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार नोडल मंत्रालय है।
महा जल कार्यक्रम (MAHA Jal Karyakram) क्या है?
- महा जल कार्यक्रम, ANRF और जल शक्ति मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है।
- इसका मुख्य उद्देश्य जल क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों के समाधान हेतु मिशन-उन्मुख और समाधान-आधारित अनुसंधान का समर्थन करना है।
- यह एक बहुविषयक, बहुसंस्थागत और बहु-अन्वेषक परियोजना है जिसमें औद्योगिक साझेदारियों को भी शामिल किया गया है।
- महा जल कार्यक्रम के पाँच प्रमुख विषय हैं: जल संसाधन का आकलन और सतत प्रबंधन; पेयजल; जल गुणवत्ता; मानव और पारिस्थितिक स्वास्थ्य; जल उपयोग दक्षता एवं सर्कुलर इकोनॉमी; तथा जलवायु रिजिलियंस और अनुकूलन।
- ANRF इस कार्यक्रम के तहत कंसोर्टियम मोड में प्रस्ताव आमंत्रित करता है, जिसमें अकादमिक संस्थानों/प्रयोगशालाओं, अनुसंधान संगठनों और पात्र कंपनियों के साथ-साथ कम से कम एक स्टार्ट-अप/MSME/इंडस्ट्री पार्टनर की भागीदारी अनिवार्य है।
- स्टार्ट-अप/MSME की भागीदारी को सुगम बनाने और जल से जुड़ी नई तकनीकों के विकास और लागू करने की गति बढ़ाने के लिए ‘WIN पोर्टल’ की शुरुआत की गई है।
- व्यावहारिक, बड़े पैमाने पर लागू की जा सकने वाली और फील्ड-रेडी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘जल शक्ति हैकाथॉन-2025’ का भी आयोजन किया गया है।
- इस कार्यक्रम के तहत प्राप्त अनुसंधान एवं विकास परिणामों को राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, सहयोगी मंत्रालयों और परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ साझा किया जाता है ताकि उन्हें अपनाया और कार्यान्वित किया जा सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) | अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के लिए उच्च-स्तरीय रणनीतिक दिशा प्रदान करने वाला सांविधिक निकाय। |
| मिशन फॉर एडवांसमेंट इन हाई-इम्पैक्ट एरियाज़ (MAHA) | ANRF के अंतर्गत एक कार्यक्रम, जो देश की प्रमुख आवश्यकताओं के अनुरूप प्राथमिकता-केंद्रित, समाधान-आधारित शोध को बढ़ावा देता है। |
| MAHA जल कार्यक्रम | जल शक्ति मंत्रालय और ANRF की संयुक्त पहल, जिसका उद्देश्य जल क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान हेतु मिशन-उन्मुख अनुसंधान का समर्थन करना है। |
| बहुविषयक और बहु-संस्थागत दृष्टिकोण | औद्योगिक साझेदारियों सहित विभिन्न क्षेत्रों, संस्थानों और अन्वेषकों को एक साथ लाना, जिससे व्यापक समाधान मिल सकें। |
| स्टार्ट-अप/MSME/इंडस्ट्री पार्टनर की भागीदारी | परियोजना लागत के 10% नकद योगदान के साथ अनिवार्य भागीदारी, नवाचार और व्यावसायीकरण को बढ़ावा देना। |
| WIN पोर्टल और जल शक्ति हैकाथॉन-2025 | स्टार्ट-अप्स की भागीदारी को सुगम बनाना, नई तकनीकों के विकास और लागू करने की गति बढ़ाना, तथा व्यावहारिक प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- जल उपयोग दक्षता और सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) पर ध्यान केंद्रित करके संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और अपशिष्ट न्यूनीकरण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आर्थिक लागत कम होगी।
- स्टार्ट-अप, MSME और औद्योगिक भागीदारों की अनिवार्य भागीदारी से जल क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिलेगी।
पर्यावरणीय महत्व
- जल संसाधन के आकलन और सतत प्रबंधन पर जोर देने से प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण होगा और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
- जलवायु रेजिलिएंस (Climate Resilience) और अनुकूलन (Adaptation) जैसे विषयों पर अनुसंधान से जलवायु परिवर्तन के जल संसाधनों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करने में सहायता मिलेगी।
सामाजिक महत्व
- पेयजल और जल गुणवत्ता पर केंद्रित अनुसंधान से स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होगा।
- मानव और पारिस्थितिक स्वास्थ्य के बीच संबंधों का अध्ययन करने से जल-जनित बीमारियों की रोकथाम और समग्र सामुदायिक कल्याण में योगदान मिलेगा।
शासनिक महत्व
- यह कार्यक्रम जल शक्ति मंत्रालय और ANRF की संयुक्त पहल है, जो विभिन्न सरकारी निकायों के बीच समन्वय और सहयोग को दर्शाता है, जिससे नीतियों का प्रभावी कार्यान्वयन संभव होगा।
- अनुसंधान एवं विकास परिणामों को राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य हितधारकों के साथ साझा करने से जमीनी स्तर पर नीतियों को अपनाने और लागू करने में पारदर्शिता और दक्षता आएगी।
चुनौतियाँ
1. अनुसंधान परिणामों का प्रभावी कार्यान्वयन
- विकसित समाधानों को प्रयोगशाला से निकालकर वास्तविक दुनिया में बड़े पैमाने पर लागू करना एक बड़ी चुनौती है, खासकर राज्यों और स्थानीय निकायों के स्तर पर।
- तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) और हितधारकों के बीच समन्वय की कमी से कार्यान्वयन में देरी हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. वित्तपोषण और संसाधनों का सतत प्रवाह
- मिशन-मोड में अनुसंधान के लिए पर्याप्त और निरंतर वित्तीय सहायता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है, विशेषकर लंबी अवधि की परियोजनाओं के लिए।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को बनाए रखना और उनके निवेश को आकर्षित करना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजट, संसाधन जुटाना
3. बहु-विषयक और बहु-संस्थागत समन्वय
- विभिन्न अकादमिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और औद्योगिक भागीदारों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना और हितों के टकराव से बचना एक जटिल कार्य है।
- ज्ञान साझाकरण और बौद्धिक संपदा अधिकारों (Intellectual Property Rights) का प्रबंधन भी एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: विकास प्रक्रियाएं और उद्योग
4. डेटा की उपलब्धता और गुणवत्ता
- जल संसाधनों से संबंधित विश्वसनीय और अद्यतन डेटा की कमी अनुसंधान की गुणवत्ता और समाधानों की सटीकता को प्रभावित कर सकती है।
- विभिन्न स्रोतों से डेटा को एकीकृत करना और उसका मानकीकरण (Standardization) करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जल गुणवत्ता में गिरावट | औद्योगिक प्रदूषण, कृषि अपवाह और अनुपचारित सीवेज के कारण जल स्रोतों का दूषित होना, जिससे मानव और पारिस्थितिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। |
| जल संसाधनों का अत्यधिक दोहन | बढ़ती जनसंख्या और कृषि व औद्योगिक मांगों के कारण भूजल (Groundwater) और सतही जल (Surface Water) का अत्यधिक उपयोग, जिससे जल स्तर में कमी और उपलब्धता का संकट। |
| जलवायु परिवर्तन का प्रभाव | अनियमित वर्षा पैटर्न, सूखे और बाढ़ की बढ़ती आवृत्ति, जिससे जल सुरक्षा और कृषि उत्पादकता पर गंभीर खतरा। |
| बुनियादी ढांचे की कमी | जल संचयन (Water Harvesting), भंडारण, वितरण और अपशिष्ट जल उपचार (Wastewater Treatment) के लिए पर्याप्त और आधुनिक बुनियादी ढांचे का अभाव, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में। |
| अंतर-राज्यीय जल विवाद | नदी जल बंटवारे को लेकर राज्यों के बीच विवाद, जिससे एकीकृत जल प्रबंधन और विकास परियोजनाओं में बाधा आती है। |
| जागरूकता और जनभागीदारी का अभाव | जल संरक्षण और कुशल उपयोग के महत्व के बारे में आम जनता में जागरूकता की कमी, जिससे व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देना मुश्किल होता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission)
आगे की राह
- अनुसंधान परिणामों को नीति निर्माण और कार्यान्वयन में एकीकृत करने के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करना।
- जल क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट-अप्स और MSME को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
- जल संसाधन प्रबंधन के लिए एक व्यापक और एकीकृत डेटा प्लेटफॉर्म विकसित करना, जो सभी हितधारकों के लिए सुलभ हो।
- जल संरक्षण और कुशल उपयोग के लिए जन जागरूकता अभियान और सामुदायिक भागीदारी कार्यक्रमों को मजबूत करना।
- जलवायु परिवर्तन के अनुकूल जल प्रबंधन रणनीतियों को विकसित और लागू करने के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाना।
- अंतर-राज्यीय सहयोग को बढ़ावा देने और जल विवादों के समाधान के लिए प्रभावी मध्यस्थता तंत्र (Arbitration Mechanism) स्थापित करना।
- जल क्षेत्र में कौशल विकास (Skill Development) कार्यक्रमों को बढ़ावा देना ताकि नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने और लागू करने के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति उपलब्ध हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूची में जल’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 262’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों का न्यायनिर्णयन’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘राज्य सूची में जल (प्रविष्टि 17)’}
अवधारणा प्रवाह
जल क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियाँ (जैसे गुणवत्ता, उपलब्धता) → MAHA जल कार्यक्रम का शुभारंभ (ANRF और जल शक्ति मंत्रालय) → मिशन-उन्मुख, समाधान-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा → औद्योगिक साझेदारियों और स्टार्ट-अप्स की भागीदारी → नई तकनीकों का विकास और कार्यान्वयन (जैसे WIN पोर्टल) → जल क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान और सतत प्रबंधन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ANRF की स्थापना ANRF अधिनियम, 2023 के अंतर्गत की गई है।
2. यह केवल प्राकृतिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देता है।
3. MAHA जल कार्यक्रम ANRF और जल शक्ति मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ANRF की स्थापना ANRF अधिनियम, 2023 के अंतर्गत की गई है। कथन 2 गलत है क्योंकि ANRF प्राकृतिक विज्ञान के साथ-साथ मानविकी व सामाजिक विज्ञान के वैज्ञानिक व तकनीकी इंटरफेस के क्षेत्र में भी अनुसंधान को बढ़ावा देता है। कथन 3 सही है क्योंकि MAHA जल कार्यक्रम ANRF तथा जल शक्ति मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से MAHA जल कार्यक्रम का/के प्रमुख विषय है/हैं?
1. जल संसाधन का आकलन और सतत प्रबंधन
2. पेयजल और जल गुणवत्ता
3. मानव और पारिस्थितिक स्वास्थ्य
4. जल उपयोग दक्षता एवं सर्कुलर इकोनॉमी
5. जलवायु रिजिलियंस और अनुकूलन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3, 4 और 5
- केवल 1, 3, 4 और 5
- 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर: 1, 2, 3, 4 और 5 — MAHA जल कार्यक्रम के पाँच प्रमुख विषय हैं: जल संसाधन का आकलन और सतत प्रबंधन; पेयजल; जल गुणवत्ता; मानव और पारिस्थितिक स्वास्थ्य; जल उपयोग दक्षता एवं सर्कुलर इकोनॉमी; तथा जलवायु रिजिलियंस और अनुकूलन। अतः सभी कथन सही हैं।
Q3. अभिकथन (A): MAHA जल कार्यक्रम में औद्योगिक साझेदारियों सहित एक बहुविषयक, बहुसंस्थागत तथा बहु-अन्वेषक परियोजना शामिल है।
कारण (R): इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्टार्ट-अप/MSME की भागीदारी को सुगम बनाना और जल से जुड़ी नई तकनीकों के विकास और लागू करने की गति बढ़ाना है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि MAHA जल कार्यक्रम वास्तव में औद्योगिक साझेदारियों सहित एक बहुविषयक, बहुसंस्थागत और बहु-अन्वेषक परियोजना है। कारण (R) भी सही है क्योंकि कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य स्टार्ट-अप/MSME की भागीदारी को सुगम बनाना और नई जल तकनीकों के विकास और कार्यान्वयन को गति देना है। कारण (R) सीधे तौर पर अभिकथन (A) में वर्णित परियोजना के बहु-आयामी स्वरूप और उसके उद्देश्यों की व्याख्या करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के अंतर्गत MAHA जल कार्यक्रम के उद्देश्यों और प्रमुख विषयों पर चर्चा कीजिए। जल क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने में यह कार्यक्रम किस प्रकार सहायक सिद्ध होगा? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) और MAHA जल कार्यक्रम का संक्षिप्त परिचय, जिसमें ANRF अधिनियम, 2023 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति का संदर्भ शामिल हो।
2. **MAHA जल कार्यक्रम के उद्देश्य:** कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्यों का विस्तार से वर्णन करें, जैसे मिशन-उन्मुख और समाधान-आधारित अनुसंधान का समर्थन करना, देश की प्रमुख आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करना।
3. **प्रमुख विषय:** कार्यक्रम के पाँच प्रमुख विषयों का उल्लेख करें: जल संसाधन का आकलन और सतत प्रबंधन; पेयजल; जल गुणवत्ता; मानव और पारिस्थितिक स्वास्थ्य; जल उपयोग दक्षता एवं सर्कुलर इकोनॉमी; तथा जलवायु रिजिलियंस और अनुकूलन।
4. **अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने में सहायता:**
* **कंसोर्टियम मोड:** प्रधान अन्वेषकों, अकादमिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और पात्र कंपनियों के कंसोर्टियम मोड में प्रस्तावों का आमंत्रण।
* **औद्योगिक भागीदारी:** स्टार्ट-अप/MSME/इंडस्ट्री पार्टनर की अनिवार्य भागीदारी और कुल परियोजना लागत का 10% नकद योगदान।
* **WIN पोर्टल:** स्टार्ट-अप/MSME की भागीदारी को सुगम बनाने और नई तकनीकों के विकास को गति देने के लिए WIN पोर्टल की भूमिका।
* **जल शक्ति हैकाथॉन-2025:** व्यावहारिक, बड़े पैमाने पर लागू की जा सकने वाली और फील्ड-रेडी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका।
* **बहुविषयक और बहुसंस्थागत दृष्टिकोण:** विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना।
* **परिणामों का साझाकरण:** अनुसंधान एवं विकास परिणामों को राज्यों, सहयोगी मंत्रालयों और कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ साझा करना।
5. **निष्कर्ष:** जल सुरक्षा, सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति और भारत को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में कार्यक्रम के संभावित प्रभाव पर बल दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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