मिशन पोषण 2.0: कुपोषण से लड़ने की केंद्र सरकार की नवीनतम रणनीति

मिशन पोषण 2.0, कुपोषण से समग्र रूप से निपटने और बाल विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार का नवीनतम प्रयास है, जो पिछले कार् — diagram

मिशन पोषण 2.0: कुपोषण से लड़ने की केंद्र सरकार की नवीनतम रणनीति

Map of Andhra Pradesh, Telangana, Bihar, Madhya Pradesh, Maharashtr highlighted on the map of India — Mission Poshan 2.0 UPSC
मानचित्र व माइंड-मैप: मिशन पोषण 2.0: कुपोषण निवारण की राष्ट्रीय रणनीति

✎ मिशन पोषण 2.0 एक समन्वित सरकारी प्रयास है जो 'पोषण ट्रैकर' जैसे डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके कुपोषण से समग्र रूप से निपटने और बाल विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS पेपर II — सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय। गरीबी और भूख से संबंधित विषय।  |  GS पेपर III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: सूचना प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग।  |  GS पेपर I — भारतीय समाज: महिलाओं और बच्चों से संबंधित मुद्दे।
  • Prelims: मिशन पोषण 2.0, पोषण अभियान, पोषण ट्रैकर, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, नीति आयोग, आंगनवाड़ी सेवाएँ, कुपोषण, बौनापन, एनीमिया, स्तनपान
  • Essay: भारत में कुपोषण की चुनौती और समावेशी विकास के लिए इसका समाधान, डिजिटल तकनीक का उपयोग करके सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का सशक्तिकरण

त्वरित पुनरावृत्ति: मिशन पोषण 2.0 एक समन्वित सरकारी प्रयास है जो ‘पोषण ट्रैकर’ जैसे डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके कुपोषण से समग्र रूप से निपटने और बाल विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में जानकारी दी कि मिशन पोषण 2.0 कुपोषण से समग्र रूप से निपटने और बाल विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार का नवीनतम प्रयास है। यह पिछले कार्यक्रमों पर आधारित एक समन्वित और सुदृढ़ दृष्टिकोण अपनाता है। इस मिशन के तहत लाभार्थियों को दी जा रही सेवाओं की निगरानी और समीक्षा के लिए ‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) और आधार-आधारित ट्रैकिंग जैसी उन्नत सुविधाएँ शामिल हैं।

पृष्ठभूमि

  • भारत में कुपोषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है, जो बच्चों में बौनापन (Stunting), कम वज़न (Underweight) और महिलाओं में एनीमिया (Anaemia) जैसी स्थितियों को जन्म देती है।
  • कुपोषण से निपटने के लिए भारत सरकार ने विभिन्न कार्यक्रम और नीतियाँ लागू की हैं, जिनमें एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (Integrated Child Development Services – ICDS) और पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan) प्रमुख हैं।
  • पोषण अभियान को 2018 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में पोषण संबंधी परिणामों में सुधार करना था।
  • नीति आयोग (NITI Aayog) और विश्व बैंक (World Bank) द्वारा किए गए मूल्यांकन अध्ययनों ने पोषण अभियान की प्रासंगिकता और पोषण संबंधी व्यवहार में सुधार लाने में इसकी सफलता को संतोषजनक पाया।
  • इन पिछले कार्यक्रमों के अनुभवों और सीखों के आधार पर, सरकार ने एक अधिक व्यापक और समन्वित दृष्टिकोण अपनाने के लिए मिशन पोषण 2.0 की शुरुआत की है।

मिशन पोषण 2.0 क्या है?

  • मिशन पोषण 2.0 भारत सरकार का एक एकीकृत पोषण सहायता कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य कुपोषण से समग्र रूप से निपटना और बाल विकास को बढ़ावा देना है।
  • यह पिछले पोषण कार्यक्रमों, विशेष रूप से पोषण अभियान की सफलताओं और सीखों पर आधारित एक समन्वित और सुदृढ़ दृष्टिकोण अपनाता है।
  • इस मिशन का उद्देश्य पूरक पोषण (Supplementary Nutrition), प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (Early Childhood Care and Education), विकास निगरानी (Growth Monitoring) और पोषण परामर्श जैसी आंगनवाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करना है।
  • मिशन पोषण 2.0 के तहत लाभार्थियों को दी जा रही सेवाओं की निगरानी और समीक्षा के लिए ‘पोषण ट्रैकर’ नामक एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (Information and Communication Technology – ICT) आधारित डिजिटल एप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा है।
  • पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन में फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) और आधार-आधारित ट्रैकिंग जैसी सुविधाएँ शामिल हैं, जो सेवा वितरण की अंतिम चरण की ट्रैकिंग सुनिश्चित करती हैं, लाभार्थियों की सही पहचान करती हैं और डेटा लीक व फर्जी प्रविष्टियों को रोकती हैं।
  • यह मिशन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development) के तत्वावधान में कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सक्रिय भागीदारी शामिल है।
  • इसका लक्ष्य बच्चों में बौनापन, कम वज़न, एनीमिया और महिलाओं में एनीमिया जैसी पोषण संबंधी चुनौतियों को कम करना है, जिससे देश में मानव विकास सूचकांक में सुधार हो सके।
  • नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (Development Monitoring and Evaluation Office – DMEO) द्वारा 2025 में किए गए परिणाम-आधारित मूल्यांकन अध्ययन ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 को कुपोषण से निपटने में एक प्रभावी प्रयास पाया है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
समग्र दृष्टिकोण कुपोषण के विभिन्न आयामों (बौनापन, कम वज़न, एनीमिया) को एक साथ संबोधित करता है, जिससे अधिक प्रभावी परिणाम मिलते हैं।
समन्वित एवं सुदृढ़ रणनीति विभिन्न मंत्रालयों और कार्यक्रमों के बीच तालमेल स्थापित करता है, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और दोहरीकरण से बचा जा सकता है।
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित निगरानी पोषण ट्रैकर डिजिटल एप्लिकेशन के माध्यम से लाभार्थियों की वास्तविक समय पर ट्रैकिंग और सेवा वितरण की निगरानी सुनिश्चित करता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।
परिणाम-आधारित मूल्यांकन नीति आयोग और विश्व बैंक जैसे संस्थानों द्वारा नियमित मूल्यांकन से कार्यक्रम की प्रभावशीलता का आकलन होता है और आवश्यक सुधारों की पहचान की जाती है।
आधार आधारित ट्रैकिंग और फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करता है, डेटा लीक और फर्जी प्रविष्टियों को रोकता है, जिससे लीकेज कम होता है और लक्षित वितरण संभव होता है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • कुपोषण से मुक्ति स्वस्थ बाल विकास को बढ़ावा देती है, जिससे बच्चों की संज्ञानात्मक और शारीरिक क्षमता में सुधार होता है।
  • महिलाओं में एनीमिया जैसी समस्याओं का समाधान करके मातृ स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता में सुधार होता है।
  • स्वस्थ आबादी देश के मानव पूंजी सूचकांक (Human Capital Index) को बेहतर बनाती है, जिससे दीर्घकालिक सामाजिक विकास सुनिश्चित होता है।

आर्थिक महत्व

  • कुपोषण के कारण होने वाली बीमारियों और उत्पादकता हानि को कम करके स्वास्थ्य सेवा पर होने वाले व्यय को कम करता है।
  • स्वस्थ कार्यबल देश की आर्थिक उत्पादकता और संवृद्धि (Growth) में योगदान देता है।
  • बच्चों के बेहतर शैक्षिक परिणामों से भविष्य में उच्च आय और गरीबी में कमी आती है।

शासनिक महत्व

  • ICT-आधारित उपकरण जैसे पोषण ट्रैकर, कार्यक्रम के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाते हैं।
  • डेटा-संचालित निर्णय लेने को बढ़ावा मिलता है, जिससे कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी ढंग से लक्षित और अनुकूलित किया जा सकता है।
  • संघीय ढांचे में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करता है, जिससे राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद मिलती है।

चुनौतियाँ

1. जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन

  • पोषण संबंधी सही व्यवहारों (जैसे स्तनपान, पूरक आहार) को अपनाने के लिए ग्रामीण और वंचित समुदायों में जागरूकता बढ़ाना अभी भी एक चुनौती है।
  • सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएँ और मिथक सही पोषण प्रथाओं को अपनाने में बाधा डाल सकते हैं।

2. सेवा वितरण की गुणवत्ता

  • आंगनवाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता और निरंतरता सुनिश्चित करना, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, एक चुनौती बनी हुई है।
  • पूरक पोषण की आपूर्ति श्रृंखला में लीकेज और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करना।

3. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा

  • पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत डेटा एकत्र किया जाता है, जिसकी गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
  • आधार आधारित ट्रैकिंग के दुरुपयोग की संभावना को रोकना।

4. संसाधन और क्षमता निर्माण

  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में निरंतर निवेश की आवश्यकता है ताकि वे नई तकनीकों और पोषण संदेशों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
  • कार्यक्रम के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
व्यवहार परिवर्तन पोषण संबंधी सही प्रथाओं को अपनाने में सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएँ।
सेवाओं की पहुँच दूरदराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण आंगनवाड़ी सेवाओं की निरंतर उपलब्धता।
डेटा प्रबंधन पोषण ट्रैकर पर एकत्र व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा।
संसाधन की कमी कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त वित्तीय और प्रशिक्षित मानव संसाधन।
समन्वय की कमी विभिन्न विभागों और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan)
  • मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (Mission Saksham Anganwadi and POSHAN 2.0)

आगे की राह

  • पोषण संबंधी व्यवहार परिवर्तन संचार (BCC) रणनीतियों को सुदृढ़ करना, जिसमें स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक संदेशों का उपयोग किया जाए।
  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए नियमित और उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना, उन्हें डिजिटल उपकरणों के उपयोग में कुशल बनाना।
  • पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की डेटा सुरक्षा और गोपनीयता प्रोटोकॉल को मजबूत करना, साथ ही उपयोगिता को सरल बनाना।
  • स्थानीय समुदायों, पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को पोषण कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल करना।
  • पूरक पोषण की गुणवत्ता, विविधता और समय पर वितरण सुनिश्चित करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन को बेहतर बनाना।
  • कुपोषण के बहुआयामी स्वरूप को देखते हुए स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों के साथ बेहतर अंतर-क्षेत्रीय समन्वय स्थापित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मिशन पोषण 2.0 · कुपोषण · बाल विकास · पोषण अभियान · आंगनवाड़ी सेवाएँ · पोषण ट्रैकर · सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) · पूरक पोषण · एनीमिया · बौनापन · व्यवहार परिवर्तन · आधार आधारित ट्रैकिंग

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार): स्वस्थ जीवन के लिए पोषण का अधिकार निहित।
  • अनुच्छेद 39(e) (राज्य नीति के निदेशक तत्व): बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर सुनिश्चित करना।
  • अनुच्छेद 47 (राज्य नीति के निदेशक तत्व): राज्य का कर्तव्य है कि वह पोषण स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाए।

अवधारणा प्रवाह

कुपोषण की उच्च व्यापकता  →  मिशन पोषण 2.0 का शुभारंभ  →  पोषण ट्रैकर (ICT) का उपयोग  →  सेवा वितरण और निगरानी में सुधार  →  पोषण संबंधी व्यवहार में परिवर्तन  →  बाल विकास और मातृ स्वास्थ्य में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. मिशन पोषण 2.0 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
2. इसका उद्देश्य कुपोषण से समग्र रूप से निपटना और बाल विकास को बढ़ावा देना है।
3. पोषण ट्रैकर डिजिटल एप्लिकेशन का उपयोग लाभार्थियों की निगरानी के लिए किया जाता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1: मिशन पोषण 2.0 महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। यह सही है।
कथन 2: मिशन पोषण 2.0 का मुख्य उद्देश्य कुपोषण से समग्र रूप से निपटना और बाल विकास को बढ़ावा देना है। यह सही है।
कथन 3: पोषण ट्रैकर डिजिटल एप्लिकेशन को मिशन पोषण 2.0 के अंतर्गत लाभार्थियों को दी जा रही सेवाओं की निगरानी और समीक्षा के लिए लॉन्च किया गया है। यह सही है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से मिशन पोषण 2.0 का/के प्रमुख घटक है/हैं?
1. पूरक पोषण कार्यक्रम
2. विकास निगरानी
3. पोषण संबंधी परामर्श
4. आधार आधारित लाभार्थी ट्रैकिंग
सही विकल्प का चयन कीजिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — मिशन पोषण 2.0 में पूरक पोषण, विकास निगरानी और परामर्श जैसी आंगनवाड़ी सेवाएँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन में आधार आधारित ट्रैकिंग और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) भी शामिल है, जो सेवा वितरण की अंतिम चरण की ट्रैकिंग सुनिश्चित करता है। अतः सभी चार घटक मिशन पोषण 2.0 के प्रमुख भाग हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ मिशन पोषण 2.0, कुपोषण से निपटने और बाल विकास को बढ़ावा देने में सरकार के प्रयासों में एक समन्वित दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और इसके प्रमुख घटकों तथा प्रौद्योगिकी के उपयोग पर प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: मिशन पोषण 2.0 का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्य और पिछले कार्यक्रमों से जुड़ाव।
2. समन्वित दृष्टिकोण का परीक्षण: यह कैसे पिछले कार्यक्रमों (जैसे पोषण अभियान) पर आधारित है और एक समग्र रणनीति अपनाता है। विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के समन्वय का उल्लेख।
3. प्रमुख घटक: पूरक पोषण, विकास निगरानी, पोषण संबंधी परामर्श, स्वास्थ्य सेवाएँ (टीकाकरण आदि) और प्रारंभिक बाल विकास।
4. प्रौद्योगिकी का उपयोग: ‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन का विस्तृत वर्णन, ICT आधारित शासन उपकरण के रूप में इसकी भूमिका, आधार आधारित ट्रैकिंग और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) का महत्व। डेटा लीक की रोकथाम और फर्जी प्रविष्टियों को खत्म करने में इसकी भूमिका।
5. प्रभाव और सफलता के संकेत: नीति आयोग और विश्व बैंक के मूल्यांकन अध्ययनों के निष्कर्षों का उल्लेख, पोषण संबंधी व्यवहार में सुधार, संदेशों की पहुँच और स्तनपान दर में वृद्धि।
6. चुनौतियाँ और आगे की राह: कार्यक्रम के कार्यान्वयन में संभावित चुनौतियाँ (जैसे दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुँच, डिजिटल डिवाइड) और उन्हें दूर करने के लिए सुझाव।
7. निष्कर्ष: कुपोषण मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में मिशन पोषण 2.0 की क्षमता का सारांश।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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