16 Aug मिशन सुदर्शन चक्र : आत्मनिर्भर भारत की स्वदेशी तकनीक आधारित सुरक्षा पहल
पाठ्यक्रम – मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र – 3 – के अंतर्गत – विज्ञान और प्रौद्योगिकी, आतंरिक सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन
प्रारंभिक परीक्षा के अंतर्गत – ‘मिशन सुदर्शन चक्र’, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वदेशी नवाचार, भारत की सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक नवाचार का संगम
खबरों में क्यों ?

- हाल ही में दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से 15 अगस्त 2025 को भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अत्यंत महत्त्वाकांक्षी और निर्णायक पहल ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ की घोषणा की है।
- यह पहल भारत की सुरक्षा रणनीतियों को आधुनिक तकनीक, स्वदेशी नवाचार और प्राचीन सांस्कृतिक मूल्यों के सम्मिलन से सशक्त बनाने की दिशा में उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम है।
मिशन सुदर्शन चक्र का मूल दृष्टिकोण और आत्मनिर्भर भारत की सुरक्षा नीति :
- प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में स्पष्ट शब्दों में कहा – “ हर नागरिक को न केवल सुरक्षित होना चाहिए, बल्कि उसे खुद को सुरक्षित महसूस भी होना चाहिए। ”
- इसी भावना को साकार करने के लिए ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ की रचना की गई है, जो अगले दस वर्षों में सन 2035 तक चरणबद्ध रूप से कार्यान्वित किया जाएगा।
- इस मिशन के माध्यम से भारत की रणनीतिक, नागरिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण संस्थानों को ऐसे सुरक्षा कवच में ढाला जाएगा जो पूरी तरह भारत में विकसित तकनीक पर आधारित होगा।
- इस पहल का मुख्य उद्देश्य है कि भारत विदेशी सुरक्षा प्रणालियों पर अपनी निर्भरता को खत्म करे और हर प्रकार के उभरते खतरों — चाहे वे भौतिक हों या डिजिटल — का सटीक और त्वरित जवाब देने में सक्षम हो।
मिशन सुदर्शन चक्र के प्रमुख उद्देश्य और प्राथमिकताएँ :
- बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था का निर्माण — जो विकसित होते खतरों के प्रत्येक स्तर पर त्वरित और प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करे।
- स्वदेशी तकनीक पर आधारित आत्मनिर्भर सुरक्षा मॉडल — जिससे भारत विदेशी प्रणालियों पर अपनी निर्भरता कम करे और अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित कर सके।
- निगरानी, साइबर और भौतिक सुरक्षा का एकीकृत ढांचा — जिससे समस्त सुरक्षा घटक एक दूसरे के पूरक बनें।
- पूर्व-चेतावनी और प्रतिक्रिया क्षमता का सशक्तीकरण — ताकि संभावित खतरों की पहचान समय रहते हो और उनका मुकाबला किया जा सके।
सांस्कृतिक प्रतीकवाद का प्रयोग और महाभारत से प्रेरणा :
- अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने महाभारत के युद्ध का एक प्रेरक प्रसंग साझा किया। जब अर्जुन को जयद्रथ का वध करना था और सूर्यास्त निकट था, तब भगवान कृष्ण ने माया से सूर्य को ढक दिया, जिससे युद्ध की दिशा बदल गई। इसी प्रसंग को उदाहरण बनाकर उन्होंने कहा – “आज हमें भी अपने राष्ट्र के महत्वपूर्ण संस्थानों को अदृश्य और अजेय सुरक्षा कवच प्रदान करना है — ठीक उसी तरह जैसे कृष्ण ने अर्जुन के लिए समय बनाया था।”
- इस प्रतीकवाद के माध्यम से उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि मिशन सुदर्शन चक्र केवल तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक नवाचार का संगम है।
मिशन सुदर्शन चक्र’ प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ :
- उन्नत निगरानी प्रणाली का होना : संवेदनशील क्षेत्रों की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरों और मल्टी-सेंसर युक्त उन्नत प्रणाली का प्रयोग। यह प्रणाली संदिग्ध गतिविधियों की स्वतः पहचान और त्वरित सूचना संप्रेषण में सक्षम होगी।
- सशक्त साइबर सुरक्षा प्रणाली : अत्याधुनिक फायरवॉल, एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल और एआई आधारित खतरा पहचान तकनीकों से युक्त बहुस्तरीय साइबर सुरक्षा ढाँचा, जो डेटा उल्लंघन और साइबर हमलों से संरक्षा सुनिश्चित करता है। इस मिशन के तहत एक सुदृढ़ साइबर सुरक्षा ढाँचा तैयार किया गया है, जिसमें अत्याधुनिक फायरवॉल, एन्क्रिप्शन तकनीकें और एआई आधारित खतरा पहचान प्रणाली शामिल हैं, जो किसी भी साइबर हमले से प्रभावी रूप से सुरक्षा प्रदान करती हैं।
- भौतिक अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण : भौतिक अवसंरचना को भी सुदृढ़ किया गया है, जिसके अंतर्गत महत्वपूर्ण स्थलों पर बुलेटप्रूफ दीवारों का निर्माण, सुरक्षित प्रवेश प्रणालियों की स्थापना और त्वरित प्रतिक्रिया बलों की तैनाती की गई है।
- एकीकृत खुफिया-संचार तंत्र : मिशन में एक एकीकृत खुफिया और प्रतिक्रिया नेटवर्क की स्थापना की गई है, जो सुरक्षा बलों, खुफिया एजेंसियों, तकनीकी विशेषज्ञों और शोध संस्थानों के बीच रीयल-टाइम समन्वय को सुनिश्चित करता है।
- जन-निजी सहयोग प्रणाली को प्रोत्साहित करना : इस अभियान की सफलता हेतु जन-निजी सहयोग को प्रोत्साहित किया गया है, जिसमें DRDO, ISRO, BEL, BHEL जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के साथ-साथ IITs, निजी स्टार्टअप्स और अनुसंधान केंद्रों का सक्रिय साझेदारी में योगदान शामिल है।
मिशन सुदर्शन चक्र की वैश्विक और रणनीतिक पृष्ठभूमि :
- यह मिशन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर साइबर युद्ध, डिजिटल जासूसी, और हाइब्रिड हमलों की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
- भारत ने 2008 के मुंबई हमलों, 2016 के उरी हमले, और हाल में 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस सच्चाई को प्रत्यक्ष अनुभव किया है कि खतरे अब केवल सीमाओं से नहीं आते — वे इंटरनेट, ड्रोन और डेटा के माध्यम से भी प्रवेश करते हैं।
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब पाकिस्तान ने 15 से अधिक भारतीय शहरों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए, तो भारत की वायु रक्षा प्रणाली — जिसमें रूस से प्राप्त एस-400 मिसाइल प्रणाली भी शामिल थी — ने इन हमलों को विफल किया। इस दौरान IACCS (Integrated Air Command and Control System) की भूमिका महत्वपूर्ण रही। परंतु, अब भारत का लक्ष्य है ऐसी प्रणाली का विकास जो पूरी तरह स्वदेशी हो और भारतीय परिदृश्य के अनुसार अनुकूलित हो।
मिशन सुदर्शन चक्र से संबंधित प्रमुख चुनौतियाँ :
- तकनीकी आत्मनिर्भरता के तहत एक संपूर्ण स्वदेशी प्रणाली विकसित करना : भारत को उच्चस्तरीय रक्षा टेक्नोलॉजी में अब तक दूसरों पर निर्भर रहना पड़ा है। एक संपूर्ण स्वदेशी प्रणाली विकसित करना एक दीर्घकालिक चुनौती है।
- संसाधनों का आपस में संयोजन एवं खुफिया एजेंसियों के बीच प्रभावी तालमेल सुनिश्चित करना : रक्षा, विज्ञान, तकनीक, नीति निर्माण और खुफिया एजेंसियों के बीच प्रभावी तालमेल सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
- साइबर खतरे की बदलती प्रकृति के अनुसार भारत को लगातार अद्यतन रहना : साइबर अपराधी लगातार अपनी रणनीतियाँ बदलते हैं, ऐसे में भारत को लगातार अद्यतन रहना होगा।
- निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बीच संतुलन बनाए रखना : तकनीकी विकास में निजी कंपनियों की भूमिका अहम है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा बनाए रखना एक कठिन संतुलन है।
समाधान की राह और आगे की दिशा :

- नवाचार के लिए निवेश बढ़ाना अनिवार्य होना : नवाचार के लिए निवेश बढ़ाना अनिवार्य है, जिसके तहत सरकार को अनुसंधान और विकास (R&D) के क्षेत्र में विशेष रूप से साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वचालित सुरक्षा प्रणालियों में पर्याप्त संसाधन और वित्तीय सहायता प्रदान करनी होगी।
- जनशक्ति के विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत : जनशक्ति के विकास पर विशेष ध्यान देना होगा, जिसके लिए तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं को मिशन से जोड़ने हेतु व्यापक और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाने चाहिए।
- नीतिगत पारदर्शिता और स्पष्टता सुनिश्चित करने की आवश्यकता : नीतिगत पारदर्शिता और स्पष्टता सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि मिशन सुदर्शन चक्र का क्रियान्वयन एक संगठित, जवाबदेह और प्रभावी ढंग से किया जा सके।
- सार्वजनिक सहभागिता को सशक्त बनाने की आवश्यकता : सार्वजनिक सहभागिता को सशक्त बनाना इस मिशन की सफलता की कुंजी है, इसलिए नागरिकों को डिजिटल एवं भौतिक सुरक्षा के प्रति जागरूक और सजग बनाने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
निष्कर्ष : भारत की सुरक्षा का नया अध्याय :
- मिशन सुदर्शन चक्र केवल एक आधुनिक सुरक्षा पहल नहीं, बल्कि यह भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता, तकनीकी सक्षमता और सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मिलित प्रतीक है।
- यह मिशन भारत को न केवल वर्तमान और भविष्य के खतरों से सुरक्षित रखने में सक्षम बनाएगा, बल्कि उसे वैश्विक पटल पर एक प्रेरणादायक सुरक्षा मॉडल के रूप में भी स्थापित करेगा।
- जिस प्रकार महाभारत के युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र धर्म, न्याय और सत्य की रक्षा का प्रतीक था, उसी प्रकार यह मिशन भी सुरक्षा, न्याय और समावेशी विकास की भावना से प्रेरित होकर भारत को एक सुरक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में गढ़ने की दिशा में एक नया अध्याय लिखेगा।
- यह मिशन भारत को न केवल वर्तमान और भविष्य के खतरों से सुरक्षित रखने में सक्षम बनाएगा, बल्कि वैश्विक पटल पर यह भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता, तकनीकी सक्षमता और सांस्कृतिक मूल्यों के आदर्श स्वरूप के रूप में भी स्थापित करेगा।
स्त्रोत – पी. आई. बी एवं द हिन्दू।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. मिशन सुदर्शन चक्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- यह मिशन भारत को वैश्विक सुरक्षा निर्यातक बनाने के उद्देश्य से आरंभ किया गया है।
- इसका उद्देश्य बहु-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली और स्वदेशी तकनीक के आधार पर आत्मनिर्भर सुरक्षा मॉडल विकसित करना है।
- यह मिशन केवल साइबर सुरक्षा तक सीमित है।
- यह निगरानी, साइबर और भौतिक सुरक्षा का एक एकीकृत ढांचा प्रदान करता है।
उपर्युक्त कथन / कथनों में से कौन सा कथन सही है ?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 4
C. इनमें से कोई नहीं।
D. उपरोक्त सभी।
उत्तर – B
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. चर्चा कीजिए कि ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ क्या है, इसके उद्देश्य, तकनीकी विशेषताएँ, सांस्कृतिक आधार, वैश्विक संदर्भ, प्रमुख चुनौतियाँ एवं समाधान क्या हैं? ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

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