मुंबई में विश्व ओजोन दिवस 2026: भारत की जलवायु प्रतिबद्धता और नेट ज़ीरो पोर्टल का शुभारंभ

मुंबई में 32वें विश्व ओजोन दिवस समारोह में भारत ने ओजोन परत संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराई — diagram

मुंबई में विश्व ओजोन दिवस 2026: भारत की जलवायु प्रतिबद्धता और नेट ज़ीरो पोर्टल का शुभारंभ

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ओजोन संरक्षण ढांचा

✎ भारत ने 32वें विश्व ओजोन दिवस समारोह में अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं को दोहराते हुए नेट ज़ीरो पोर्टल और जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना डैशबोर्ड का शुभारंभ किया, जो सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के प्रति देश की गंभीरता को…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  |  GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध
  • Prelims: विश्व ओजोन दिवस, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, ओजोन परत क्षरण, नेट ज़ीरो पोर्टल, जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC), मिशन लाइफ, विकसित भारत @2047
  • Essay: भारत की जलवायु प्रतिबद्धताएँ और आर्थिक विकास के बीच संतुलन, सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत ने 32वें विश्व ओजोन दिवस समारोह में अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं को दोहराते हुए नेट ज़ीरो पोर्टल और जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना डैशबोर्ड का शुभारंभ किया, जो सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के प्रति देश की गंभीरता को दर्शाता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मुंबई में 32वें विश्व ओजोन दिवस समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर भारत ने ओजोन परत संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम में भारत के नेट ज़ीरो पोर्टल और जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) डैशबोर्ड का भी शुभारंभ किया गया, जो देश की जलवायु संबंधी पहलों की निगरानी और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पृष्ठभूमि

  • विश्व ओजोन दिवस प्रतिवर्ष 16 सितंबर को मनाया जाता है, जो ओजोन परत के संरक्षण के लिए मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (Montreal Protocol) पर हस्ताक्षर की याद दिलाता है।
  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है जिसे ओजोन परत को कम करने वाले पदार्थों (Ozone Depleting Substances – ODS) के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करके ओजोन परत की रक्षा के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • भारत मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का एक हस्ताक्षरकर्ता देश है और इसने ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धताओं को सफलतापूर्वक पूरा किया है।
  • जलवायु परिवर्तन (Climate Change) एक वैश्विक चुनौती है, जिसके प्रभावों को कम करने के लिए भारत सहित सभी देश प्रतिबद्ध हैं।
  • भारत ने आर्थिक विकास से समझौता किए बिना पर्यावरण संरक्षण के प्रति सक्रिय नेतृत्व दिखाया है, जो सतत विकास के लक्ष्य के अनुरूप है।
  • प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण में कार्बन उत्सर्जन में कमी, सतत विकास और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

नेट ज़ीरो पोर्टल और जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) डैशबोर्ड

  • नेट ज़ीरो पोर्टल भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं की निगरानी, समन्वय और उन्हें प्रदर्शित करने के लिए एक केंद्रीय संग्रह के रूप में कार्य करेगा।
  • यह पोर्टल उद्योगों, संगठनों और सरकारी निकायों को स्वेच्छा से पंजीकरण करने और नेट-ज़ीरो उत्सर्जन (उत्सर्जन और अवशोषण के बीच पूर्ण संतुलन) की दिशा में अपनी प्रगति प्रदर्शित करने में सक्षम बनाएगा।
  • नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का अर्थ है वातावरण में उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा और वातावरण से हटाई गई ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा के बीच संतुलन स्थापित करना।
  • जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) डैशबोर्ड भारत की व्यापक राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना को प्रदर्शित करने के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल गेटवे है।
  • डैशबोर्ड में राष्ट्रीय मिशनों की निगरानी और विषयगत गहन जानकारी शामिल होगी, जिससे जलवायु परिवर्तन से संबंधित डेटा और प्रगति को आसानी से देखा जा सकेगा।
  • यह डैशबोर्ड विभिन्न सॉफ्टवेयर, वेबसाइट या ऐप की मुख्य जानकारी, डेटा और आंकड़ों को एक ही जगह पर ग्राफ, चार्ट या टेबल के रूप में दिखाता है।
  • इन पहलों का उद्देश्य भारत की जलवायु कार्रवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
नेट ज़ीरो पोर्टल का शुभारंभ भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं की निगरानी, समन्वय और प्रदर्शन के लिए केंद्रीय संग्रह। उद्योगों, संगठनों और सरकारी निकायों को स्वैच्छिक पंजीकरण तथा नेट-ज़ीरो उत्सर्जन की दिशा में प्रगति प्रदर्शित करने में सक्षम बनाएगा।
जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) डैशबोर्ड का शुभारंभ भारत की व्यापक राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना प्रदर्शित करने के लिए केंद्रीकृत डिजिटल गेटवे, जिसमें राष्ट्रीय मिशनों की निगरानी और विषयगत गहन जानकारी शामिल है।
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की प्रतिबद्धताओं का पालन भारत ने आर्थिक विकास से समझौता किए बिना ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों को रोकने की वैश्विक संधि का सफलतापूर्वक पालन किया है।
मिशन लाइफ (LiFE) की रूपरेखा सरल, रोजमर्रा के कामों में पर्यावरण संरक्षण उपायों के लिए पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देना, संसाधनों के सजग उपयोग पर बल।
तकनीशियनों का प्रशिक्षण और उद्योग सहयोग अगली पीढ़ी के तकनीशियनों को उद्योग मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित करने के लिए 12 रेफ्रिजरेशन और एयर कंडीशनिंग विनिर्माणकर्ताओं द्वारा 248 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को अपनाया गया।

महत्व

पर्यावरण संरक्षण

  • भारत ने ओजोन परत संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है, जो वैश्विक पर्यावरणीय लक्ष्यों के प्रति देश के समर्पण को दर्शाता है।
  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत प्रतिबद्धताओं का सफल कार्यान्वयन यह सिद्ध करता है कि आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण संभव है।

शासन और नीति

  • नेट ज़ीरो पोर्टल और NAPCC डैशबोर्ड का शुभारंभ जलवायु कार्रवाई की निगरानी और समन्वय के लिए डिजिटल साधनों का उपयोग करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • यह पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देगा, जिससे विभिन्न हितधारक भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं की प्रगति को ट्रैक कर सकेंगे।

आर्थिक और तकनीकी

  • रेफ्रिजरेशन और एयर कंडीशनिंग (RAC) क्षेत्र में तकनीशियनों के प्रशिक्षण से हरित प्रौद्योगिकियों को अपनाने और ऊर्जा-कुशल उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
  • यह पहल सतत शीतलन समाधानों को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था के हरित संक्रमण में योगदान करेगी।

सामाजिक और व्यवहारिक

  • मिशन लाइफ (LiFE) पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देकर व्यक्तिगत स्तर पर व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करता है, जिससे बड़े पैमाने पर पर्यावरण संरक्षण में योगदान मिल सकता है।
  • लोगों को संवहनीय शीतलन के उपाय अपनाने के लिए प्रेरित करना, जैसे AC का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस पर सेट करना और पर्यावरण अनुकूल रेफ्रिजरेंट का उपयोग करना, नागरिक भागीदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

चुनौतियाँ

1. उत्सर्जन में कमी और आर्थिक विकास के बीच संतुलन

  • तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में, भारत को अपने विकास लक्ष्यों को प्राप्त करते हुए उत्सर्जन में कमी लाने की चुनौती का सामना करना पड़ता है।
  • उद्योगों और बुनियादी ढाँचे के विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय मानकों को बनाए रखना एक जटिल कार्य है।

2. प्रौद्योगिकी और नवाचार का अभाव

  • पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियों को अपनाने और विकसित करने के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश की आवश्यकता है।
  • पुरानी प्रौद्योगिकियों से नई, हरित प्रौद्योगिकियों में संक्रमण के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय और तकनीकी सहायता की आवश्यकता होगी।

3. जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन

  • मिशन लाइफ (LiFE) जैसी पहलों के बावजूद, बड़े पैमाने पर जनता के व्यवहार में स्थायी परिवर्तन लाना एक चुनौती है।
  • पर्यावरण संरक्षण के महत्व और व्यक्तिगत कार्यों के प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।

4. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वित्तपोषण

  • जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक मुद्दा है जिसके लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और विकसित देशों से विकासशील देशों को वित्तपोषण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की आवश्यकता है।
  • भारत को अपनी जलवायु महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त अंतर्राष्ट्रीय समर्थन सुनिश्चित करने की चुनौती का सामना करना पड़ता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
नेट ज़ीरो लक्ष्य प्राप्त करना 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ऊर्जा, उद्योग और कृषि जैसे प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन की आवश्यकता होगी।
शीतलन क्षेत्र में उत्सर्जन बढ़ती आय और शहरीकरण के साथ एयर कंडीशनिंग और रेफ्रिजरेशन की मांग बढ़ रही है, जिससे हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) जैसे शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है।
डेटा की सटीकता और निगरानी नेट ज़ीरो पोर्टल और NAPCC डैशबोर्ड पर प्रस्तुत डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना, साथ ही विभिन्न स्रोतों से डेटा को एकीकृत करना एक चुनौती है।
राज्य सरकारों का समन्वय जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मजबूत समन्वय और सहयोग आवश्यक है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मिशन लाइफ (LiFE)
  • जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (National Action Plan on Climate Change – NAPCC)

आगे की राह

  • हरित प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना, विशेष रूप से ऊर्जा-कुशल शीतलन समाधानों और ओजोन-अनुकूल रेफ्रिजरेंट के क्षेत्र में।
  • नेट ज़ीरो पोर्टल और NAPCC डैशबोर्ड जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना, डेटा की सटीकता और पहुंच में सुधार करना।
  • मिशन लाइफ (LiFE) के तहत व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान और शैक्षिक कार्यक्रम चलाना।
  • उद्योगों, अकादमिक संस्थानों और सरकारी निकायों के बीच सहयोग को मजबूत करना ताकि सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जा सके।
  • अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय रूप से भाग लेना और जलवायु वित्तपोषण तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए विकसित देशों के साथ सहयोग को बढ़ावा देना।
  • रेफ्रिजरेशन और एयर कंडीशनिंग (RAC) क्षेत्र में कुशल तकनीशियनों के प्रशिक्षण और प्रमाणन कार्यक्रमों का विस्तार करना, ताकि सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा दिया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

ओजोन परत संरक्षण · मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल · जलवायु परिवर्तन · नेट ज़ीरो उत्सर्जन · राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) · मिशन लाइफ · सतत विकास · विकसित भारत 2047 · पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली · शीतलन प्रौद्योगिकियाँ

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्धन और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा
  • अनुच्छेद 51A (g): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसमें सुधार

अवधारणा प्रवाह

ओजोन परत क्षरण और जलवायु परिवर्तन  →  मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और अन्य अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ  →  भारत की प्रतिबद्धताएँ और राष्ट्रीय नीतियाँ (जैसे NAPCC)  →  नेट ज़ीरो पोर्टल और NAPCC डैशबोर्ड जैसे डिजिटल उपकरण  →  सतत विकास और विकसित भारत का लक्ष्य

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का संबंध ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों के उत्पादन और उपभोग को नियंत्रित करने से है।
2. भारत ने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को विकास से समझौता किए बिना पूरा किया है।
3. राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) का उद्देश्य भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं की निगरानी और समन्वय करना है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ओजोन परत क्षरणकारी पदार्थों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है। कथन 2 सही है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत ने विकास से समझौता किए बिना मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की प्रतिबद्धताओं का पालन किया है। कथन 3 सही नहीं है। NAPCC भारत की व्यापक राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना को प्रदर्शित करने का एक डिजिटल गेटवे है, जबकि नेट ज़ीरो पोर्टल भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं की निगरानी, समन्वय और इन्हें दर्शाने का केंद्रीय संग्रह है।

Q2. भारत के ‘नेट ज़ीरो पोर्टल’ के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं की निगरानी, समन्वय और इन्हें दर्शाने का केंद्रीय संग्रह है।
2. यह उद्योगों, संगठनों और सरकारी निकायों को स्वेच्छा से पंजीकरण करने और नेट-ज़ीरो उत्सर्जन की दिशा में प्रगति प्रदर्शित करने में सक्षम बनाएगा।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2

उत्तर: 1 और 2 दोनों — कथन 1 और 2 दोनों सही हैं। नेट ज़ीरो पोर्टल का शुभारंभ भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं की निगरानी, समन्वय और उन्हें प्रदर्शित करने के लिए किया गया है, साथ ही यह विभिन्न संस्थाओं को अपनी नेट-ज़ीरो प्रगति दर्शाने में भी सक्षम बनाएगा।

Q3. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
सूची-I (अवधारणा) सूची-II (विवरण)
A. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1. पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देना
B. नेट ज़ीरो उत्सर्जन 2. ओजोन परत क्षरणकारी पदार्थों का नियंत्रण
C. मिशन लाइफ 3. उत्सर्जन और अवशोषण के बीच पूर्ण संतुलन

कूट:
A B C

  1. 2 3 1
  2. 1 2 3
  3. 3 1 2
  4. 2 1 3

उत्तर: 2 3 1 — मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ओजोन परत क्षरणकारी पदार्थों के नियंत्रण से संबंधित है। नेट ज़ीरो उत्सर्जन का अर्थ है उत्सर्जन और अवशोषण के बीच पूर्ण संतुलन। मिशन लाइफ (LiFE) पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ ओजोन परत संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारत की प्रतिबद्धताओं का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, ‘मिशन लाइफ’ की प्रासंगिकता और ‘नेट ज़ीरो पोर्टल’ की भूमिका पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत ओजोन परत संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में भारत की वैश्विक प्रतिबद्धताओं (जैसे मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, पेरिस समझौता) का संक्षिप्त परिचय देकर करें।

पहले भाग में, ओजोन परत संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारत की प्रतिबद्धताओं का आलोचनात्मक परीक्षण करें:
* **सकारात्मक पक्ष:** मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत भारत द्वारा ओजोन क्षरणकारी पदार्थों (ODS) को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने में की गई प्रगति का उल्लेख करें, विशेष रूप से विकास से समझौता किए बिना लक्ष्यों को प्राप्त करना। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) जैसे जलवायु परिवर्तन शमन प्रयासों का उल्लेख करें।
* **चुनौतियाँ/आलोचनात्मक विश्लेषण:** बढ़ती ऊर्जा मांग, औद्योगिक विकास, शहरीकरण और कृषि क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन जैसी चुनौतियों पर प्रकाश डालें। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों (जैसे चरम मौसमी घटनाएँ) के प्रति संवेदनशीलता का भी उल्लेख करें।

दूसरे भाग में, ‘मिशन लाइफ’ की प्रासंगिकता और ‘नेट ज़ीरो पोर्टल’ की भूमिका पर प्रकाश डालें:
* **मिशन लाइफ (LiFE) की प्रासंगिकता:** इसकी अवधारणा (पर्यावरण के लिए जीवनशैली), व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की क्षमता, और सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर चर्चा करें। उदाहरण के तौर पर, संवहनीय शीतलन के तीन उपाय (AC सर्विसिंग, तापमान सेटिंग, ऊर्जा-कुशल उपकरण) का उल्लेख करें।
* **नेट ज़ीरो पोर्टल की भूमिका:** इसके उद्देश्य (जलवायु प्रतिबद्धताओं की निगरानी, समन्वय और प्रदर्शन), उद्योगों व संगठनों को नेट-ज़ीरो उत्सर्जन की दिशा में प्रगति प्रदर्शित करने में सक्षम बनाने, और पारदर्शिता व जवाबदेही बढ़ाने में इसकी क्षमता पर चर्चा करें। राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) डैशबोर्ड के साथ इसके समन्वय का भी उल्लेख करें।

निष्कर्ष में, भारत के प्रयासों की सराहना करते हुए, इन पहलों को प्रभावी ढंग से लागू करने और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक कार्रवाई और नवाचार की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: मुंबई में आयोजित 32वें विश्व ओजोन दिवस समारोह (2024) में भारत द्वारा व्यक्त की गई ओजोन परत संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की प्रमुख प्रतिबद्धता क्या थी?

  1. A. 2040 तक सभी हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC) का पूर्ण उन्मूलन
  2. B. 2030 तक ओजोन-क्षयकारी पदार्थों के उपयोग में 50% कमी
  3. C. 2047 तक ‘विकसित भारत’ लक्ष्य के तहत ओजोन संरक्षण और जलवायु अनुकूलन में नेतृत्वकारी भूमिका
  4. D. 2035 तक वैश्विक ओजोन परत के पूर्ण पुनर्प्राप्ति का लक्ष्य

उत्तर: C. 2047 तक ‘विकसित भारत’ लक्ष्य के तहत ओजोन संरक्षण और जलवायु अनुकूलन में नेतृत्वकारी भूमिका — मुंबई में आयोजित 32वें विश्व ओजोन दिवस समारोह में भारत ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ लक्ष्य के तहत ओजोन संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

Mains: विश्व ओजोन दिवस समारोह में भारत द्वारा व्यक्त की गई ओजोन परत संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की प्रतिबद्धता का महाराष्ट्र राज्य के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए। महाराष्ट्र में ओजोन परत संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों का उल्लेख करते हुए, इन प्रतिबद्धताओं के प्रभाव का मूल्यांकन कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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