मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना : स्वस्थ धरती – हरा खेत

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना : स्वस्थ धरती – हरा खेत

पाठ्यक्रम – सामान्य अध्ययन – 3 – भारतीय कृषि- मृदा स्वास्थ्य कार्ड : “स्वस्थ धरा, खेत हरा” देश भर में 25 करोड़ से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित

प्रारंभिक परीक्षा के लिए : मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना क्या है? यह किसानों को मृदा उर्वरता और फसल उत्पादकता में सुधार करने में कैसे मदद करती है?

मुख्य परीक्षा के लिए : मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की सफलता में मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएँ और ग्राम स्तरीय मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएँ क्या भूमिका निभाती हैं?

 

खबरों में क्यों?

 

  • हाल ही में वर्ष 2015 में “अंतर्राष्ट्रीय मृदा वर्ष” के दौरान शुरू की गई मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना ने वर्ष 2025 में अपने 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। जुलाई 2025 तक देशभर में 25 करोड़ से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। इससे किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग व बेहतर मृदा प्रबंधन में सहायता मिली है। 
  • केंद्र सरकार द्वारा इस योजना को लागू करने के लिए राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को ₹1706.18 करोड़ की सहायता प्रदान की गई है।
  • साल 2022–23 में इस योजना को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में ‘मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता’ के रूप में समाहित किया गया। 
  • इस योजना के अंतर्गत 290 लाख हेक्टेयर भूमि का मृदा मानचित्रण किया गया है, जिसमें 40 आकांक्षी जिलों को शामिल किया गया। साथ ही, 1,987 गांव स्तरीय मृदा उर्वरता मानचित्र भी तैयार किए गए हैं।

 

मृदा स्वास्थ्य कार्ड क्या है?

 

मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को उनके खेत के लिए प्रदान किया जाने वाला एक मुद्रित रिपोर्ट कार्ड है, जिसमें मृदा की स्थिति को 12 प्रमुख मापदंडों के आधार पर दर्शाया जाता है:

  • मुख्य पोषक तत्व : नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सल्फर 
  • सूक्ष्म पोषक तत्व : जिंक, आयरन, कॉपर, मैंगनीज, बोरॉन 
  • अन्य मापदंड : pH मान, विद्युत चालकता (EC), जैविक कार्बन (OC) 

यह कार्ड हर 2 वर्ष में किसानों को प्रदान किया जाता है ताकि वे अपनी मिट्टी की पोषण स्थिति के आधार पर उर्वरकों का संतुलित उपयोग कर सकें।

 

मृदा सैंपलिंग और परीक्षण प्रक्रिया : 

 

  1. मिट्टी के नमूने 15-20 सेमी की गहराई से ‘V’ आकार में चार कोनों और खेत के केंद्र से लिए जाते हैं।
  2. सिंचित क्षेत्रों में 2.5 हेक्टेयर और वर्षा-आधारित क्षेत्रों में 10 हेक्टेयर की ग्रिड में नमूने लिए जाते हैं।
  3. नमूने GPS और राजस्व नक्शों की सहायता से एकत्र किए जाते हैं।
  4. परीक्षण रबी और खरीफ फसल की कटाई के बाद किया जाता है।

 

गुणवत्ता और लागत : 

 

  • कुल नमूनों का 1% परीक्षण रेफरल प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता आश्वासन के लिए किया जाता है।
  • प्रति नमूना परीक्षण के लिए केंद्र सरकार द्वारा ₹190 की सहायता प्रदान की जाती है।

 

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का मुख्य उद्देश्य : 

 

उद्देश्य विवरण
नियमित मृदा परीक्षण हर किसान को हर दो साल में मृदा स्वास्थ्य कार्ड देना
मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं का सशक्तिकरण ICAR व कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से बुनियादी ढांचे को मजबूत करना
एकरूप सैंपलिंग व सिफारिशें सभी राज्यों में एक समान सैंपलिंग प्रक्रिया व ब्लॉक/तालुका स्तर पर उर्वरक सिफारिशें
पोषक प्रबंधन का प्रोत्साहन परीक्षण-आधारित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देना
वित्तीय सहायता संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए किसानों को सहायता
प्रशिक्षण अधिकारियों व प्रगतिशील किसानों को प्रशिक्षण

 

आवेदन की प्रक्रिया और तकनीकी पहल : 

 

 

  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड पोर्टल : यह एक ऑनलाइन व मोबाइल आधारित प्लेटफ़ॉर्म है, जो किसानों को 22 भाषाओं और 5 स्थानीय बोलियों में कार्ड उपलब्ध कराता है।
  • मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएँ : मृदा परीक्षण मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में किया जाता है। मृदा परीक्षण परिणाम पोर्टल पर अपलोड होते हैं और वहीं से कार्ड तैयार किए जाते हैं।
  • गाँव स्तरीय प्रयोगशालाएँ : वर्ष 2023 में VLSTL (Village Level Soil Testing Labs) की गाइडलाइन जारी की गई। इस योजना के तहत 18–27 वर्ष की आयु के युवा, SHGs व FPOs आवेदन कर सकते हैं। वर्तमान समय में अब तक 665 ग्राम स्तरीय प्रयोगशालाएं 17 राज्यों में स्थापित हो चुकी हैं।

 

स्कूल मृदा स्वास्थ्य कार्यक्रम :

 

  • कृषि मंत्रालय द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के 20 स्कूलों में पायलट परियोजना के तहत मृदा प्रयोगशालाएं स्थापित की गईं।
  • इस योजना के तहत छात्रों (कक्षा 6–12) को प्रशिक्षण देकर नमूना संग्रहण, परीक्षण और कार्ड निर्माण में शामिल किया गया।
  • इसमें अब तक 1,021 स्कूलों में 1,000 प्रयोगशालाएं और 1.32 लाख से अधिक छात्र इस कार्यक्रम में सम्मिलित हो चुके हैं।

 

तकनीकी उन्नयन : 

 

तकनीकी पहल विवरण
GIS इंटीग्रेशन पोर्टल में इंटरैक्टिव मैप के साथ GIS इंटीग्रेशन
मोबाइल ऐप किसानों व अधिकारियों के लिए SHC मोबाइल ऐप। 
स्वचालित जियोटैगिंग नमूना स्थान का सटीक अक्षांश-देशांतर रिकॉर्ड।
QR कोड प्रत्येक नमूने को यूनिक QR कोड दिया जाता है।
डिजिटल वर्कफ्लो अप्रैल 2023 से पूरी प्रक्रिया डिजिटल के रूप में उपलब्ध है।
NIC द्वारा विकास पूरा सिस्टम NIC द्वारा विकसित किया गया है।

 

 

निष्कर्ष : 

 

  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना ने खेती को विज्ञान आधारित निर्णय प्रक्रिया में बदल दिया है। किसानों को उनकी मिट्टी की सटीक जानकारी देकर उर्वरक लागत में कमी, उत्पादकता में वृद्धि और दीर्घकालीन मृदा संरक्षण में सहायता मिली है। 
  • देश भर के स्कूलों, प्रयोगशालाओं और डिजिटल टूल्स के साथ यह योजना एक समावेशी व डेटा-आधारित कृषि परिवर्तन की मिसाल बनी है।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना देश में सतत और जलवायु-संवेदनशील कृषि की ओर भारत के सफर में यह योजना एक मजबूत स्तंभ के रूप में कार्य कर रही है।

 

स्त्रोत – पी. आई. बी एवं द हिन्दू। 

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

 

Q.1. मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

  1. यह योजना 2015 में अंतर्राष्ट्रीय मृदा वर्ष के दौरान शुरू की गई थी।
  2. मृदा स्वास्थ्य कार्ड में मिट्टी के मुख्य और सूक्ष्म पोषक तत्वों की जानकारी होती है।
  3. यह योजना 2022–23 से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में ‘मृदा स्वास्थ्य और उर्वरता’ के रूप में समाहित की गई है।

उपर्युक्त विकल्पों में से सही कथन चुनिए:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3


उत्तर – (d) 1, 2 और 3

 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

 

Q.1. मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना ने 2025 में अपने कार्यान्वयन के दस वर्ष पूरे कर लिए हैं। इसके उद्देश्यों, तकनीकी प्रगति एवं भारत में सतत कृषि को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर चर्चा कीजिए। ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

 

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
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