मेघालय की लकाडोंग हल्दी को वैश्विक ब्रांड बनाने हेतु ‘गोल्डन स्पाइस मिशन’ शुरू

मेघालय की लकाडोंग हल्दी को वैश्विक ब्रांड बनाने हेतु ‘गोल्डन स्पाइस मिशन’ शुरू

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (कृषि, संसाधन)  |  GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (कृषि, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, बुनियादी ढांचा, समावेशी विकास, पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास)
  • Prelims: मिशन गोल्डन स्पाइस, लकाडोंग हल्दी, GI-टैग, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER), करक्यूमिन, अष्टलक्ष्मी
  • Essay: पूर्वोत्तर भारत का विकास: चुनौतियाँ और अवसर, कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन और किसानों की आय दोगुनी करना

त्वरित पुनरावृत्ति: मिशन गोल्डन स्पाइस मेघालय की जीआई-टैग प्राप्त लकाडोंग हल्दी को वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करने और पूर्वोत्तर क्षेत्र के किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक एकीकृत मूल्य-श्रृंखला विकास परियोजना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने मेघालय के मुख्यमंत्री श्री कॉनराड के. संगमा के साथ मिलकर मेघालय में हल्दी की खेती और मूल्य श्रृंखला विकास के लिए ₹175.45 करोड़ की ‘मिशन गोल्डन स्पाइस – एकीकृत लकाडोंग हल्दी मूल्य श्रृंखला संवर्धन परियोजना’ का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य मेघालय की विशिष्ट जीआई-टैग प्राप्त लकाडोंग हल्दी को एक वैश्विक प्रतिस्पर्धी और लक्जरी मसाला ब्रांड के रूप में विकसित करना है, जो प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर नॉर्थ ईस्ट’ के विज़न को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पृष्ठभूमि

  • पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) और उत्तर पूर्वी परिषद (NEC) के नेतृत्व में, यह मिशन राज्य में एक एकीकृत हल्दी मूल्य-श्रृंखला पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और संगठनों के साथ समन्वय पर आधारित है।
  • लकाडोंग हल्दी अपनी असाधारण रूप से उच्च करक्यूमिन सामग्री (7-10%), विशिष्ट सुगंध और प्रबल पोषक गुणों के लिए जानी जाती है, जो इसे विश्व की औसत करक्यूमिन मात्रा से लगभग चार गुना अधिक बनाती है।
  • बावजूद इसके, अपर्याप्त प्रसंस्करण सुविधाओं, कमजोर बाजार संबंधों और उच्च मूल्यवर्धन के अभाव के कारण छोटे किसानों की आय सीमित बनी हुई है।
  • यह मिशन फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान, एकीकृत कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे की कमी, वाणिज्यिक पैमाने पर प्रसंस्करण सुविधाओं का अभाव, कमजोर ब्रांडिंग और संरचित जीआई मुद्रीकरण जैसी संरचनात्मक कमियों को दूर करने पर केंद्रित है।
  • यह पहल प्रधानमंत्री के ‘अष्टलक्ष्मी’ विज़न का हिस्सा है, जिसके तहत पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के विकास के केंद्र में लाया जा रहा है।

मिशन गोल्डन स्पाइस क्या है?

  • मिशन गोल्डन स्पाइस मेघालय की जीआई-टैग वाली लकाडोंग हल्दी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और लक्जरी मसाला ब्रांड के रूप में विकसित करने के लिए एक समन्वित पहल है।
  • यह ₹175.45 करोड़ की परियोजना है जिसे पांच साल (2025-2030) के चरणबद्ध रोडमैप के तौर पर तैयार किया गया है, जिसे दो चरणों में लागू किया जाएगा: पहला चरण मूल्य-श्रृंखला को मजबूत करना और दूसरा चरण विस्तार और बड़े पैमाने पर काम करना।
  • इसका मुख्य उद्देश्य लकाडोंग हल्दी की पूर्ण आर्थिक क्षमता को उजागर करना, छोटे किसानों की आय में वृद्धि करना और प्रसंस्कृत व निर्यात योग्य उत्पादों के माध्यम से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उच्च मूल्य प्राप्त करना है।
  • यह मिशन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय, APEDA, मसाला बोर्ड, राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड, ICAR, मीत्यवाई, NABARD, SFAC और मेघालय सरकार की योजनाओं व हस्तक्षेपों के साथ समन्वय स्थापित करता है।
  • मिशन का लक्ष्य कटाई के बाद के नुकसान को कम करना, एकीकृत कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे का विकास करना, वाणिज्यिक पैमाने पर प्रसंस्करण सुविधाएं स्थापित करना और मजबूत ब्रांडिंग व जीआई मुद्रीकरण प्रणालियों को बढ़ावा देना है।
  • यह पहल ‘आत्मनिर्भर नॉर्थ ईस्ट’ और ‘अष्टलक्ष्मी’ के प्रधानमंत्री के विज़न के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों के विशिष्ट उत्पादों को बढ़ावा देकर क्षेत्र का समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
लकाडोंग हल्दी का GI-टैग उत्पाद की विशिष्टता और भौगोलिक उत्पत्ति को प्रमाणित करता है, जिससे वैश्विक बाजार में पहचान और प्रीमियम मूल्य मिलता है।
उच्च करक्यूमिन सामग्री (7-10%) विश्व औसत से लगभग चार गुना अधिक, जो इसे औषधीय और पोषण संबंधी अनुप्रयोगों के लिए अत्यधिक मूल्यवान बनाता है।
जैविक खेती की क्षमता मेघालय को जैविक हल्दी का एक प्रमुख वैश्विक स्रोत बनने में मदद करता है, जो स्वास्थ्य-सचेत उपभोक्ताओं को आकर्षित करता है।
महिलाओं की भूमिका हल्दी उत्पादन और प्रसंस्करण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी, जो ग्रामीण महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है।
वैश्विक ब्रांडिंग क्षमता जी7 शिखर सम्मेलन जैसे मंचों पर प्रधानमंत्री द्वारा इसे प्रस्तुत किया जाना, वैश्विक प्रीमियम ब्रांड के रूप में इसकी क्षमता को दर्शाता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • किसानों की आय में वृद्धि: मूल्य संवर्धन और बेहतर बाजार संबंधों के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
  • निर्यात प्रोत्साहन: लकाडोंग हल्दी को एक वैश्विक प्रीमियम उत्पाद के रूप में विकसित करके भारत के कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
  • क्षेत्रीय विकास: पूर्वोत्तर क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के अवसर सृजित होंगे और क्षेत्रीय असमानताएं कम होंगी।

सामाजिक महत्व

  • महिला सशक्तिकरण: हल्दी उत्पादन और प्रसंस्करण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता और समर्थन मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ेगी।
  • ग्रामीण विकास: बेहतर बुनियादी ढांचे और प्रसंस्करण सुविधाओं के विकास से ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार होगा।
  • स्थानीय पहचान का संरक्षण: जीआई-टैग वाले उत्पाद को बढ़ावा देकर स्थानीय कृषि परंपराओं और विशिष्ट पहचान को संरक्षित किया जाएगा।

सामरिक महत्व

  • आत्मनिर्भर पूर्वोत्तर: प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर नॉर्थ ईस्ट’ विज़न को साकार करने में मदद, जो क्षेत्र को आत्मनिर्भर और विकासोन्मुखी बनाता है।
  • ब्रांड नॉर्थ ईस्ट: लकाडोंग हल्दी को ‘ब्रांड नॉर्थ ईस्ट’ के प्रमुख उत्पाद के रूप में स्थापित करना, जिससे अन्य क्षेत्रीय उत्पादों को भी पहचान मिलेगी।
  • अंतर्राष्ट्रीय संबंध: जी7 जैसे मंचों पर भारतीय कृषि उत्पादों की प्रस्तुति भारत की सॉफ्ट पावर को बढ़ाती है और व्यापार संबंधों को मजबूत करती है।

चुनौतियाँ

1. अपर्याप्त प्रसंस्करण सुविधाएं

  • कच्ची हल्दी को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने के लिए आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों की कमी।

2. कमजोर बाजार संबंध

  • किसानों और घरेलू/अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों के बीच सीधा संपर्क न होना, जिससे बिचौलियों की भूमिका बढ़ जाती है।

3. बुनियादी ढांचे की कमी

  • फसल कटाई के बाद के नुकसान को कम करने के लिए एकीकृत कोल्ड चेन और भंडारण सुविधाओं का अभाव।

4. ब्रांडिंग और जीआई मुद्रीकरण का अभाव

  • जीआई-टैग होने के बावजूद, प्रभावी ब्रांडिंग और इसके आर्थिक लाभों को भुनाने की व्यवस्थित प्रणाली की कमी।

5. उच्च मूल्यवर्धन का अभाव

  • हल्दी को केवल कच्चे माल के रूप में बेचने पर ध्यान केंद्रित करना, जबकि प्रसंस्कृत उत्पादों में अधिक लाभ की क्षमता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
फसल कटाई के बाद का नुकसान अनुचित भंडारण और परिवहन के कारण उपज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खराब हो जाता है।
एकीकृत कोल्ड चेन अवसंरचना की कमी उत्पादों की ताजगी और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक शीत भंडारण और परिवहन सुविधाओं का अभाव।
वाणिज्यिक पैमाने पर प्रसंस्करण सुविधाओं का अभाव छोटे पैमाने पर प्रसंस्करण के कारण बड़े बाजारों की मांग को पूरा करने में अक्षमता और उच्च लागत।
कमजोर ब्रांडिंग और संरचित जीआई मुद्रीकरण उत्पाद की विशिष्टता को प्रभावी ढंग से बाजार में प्रस्तुत करने और जीआई-टैग का अधिकतम आर्थिक लाभ उठाने में विफलता।
क्रेता संपर्क प्रणालियों की कमी किसानों और संभावित खरीदारों के बीच सीधा और कुशल संपर्क स्थापित करने में बाधाएं।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मिशन गोल्डन स्पाइस – एकीकृत लकाडोंग हल्दी मूल्य श्रृंखला संवर्धन परियोजना

आगे की राह

  • आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना: करक्यूमिन निष्कर्षण और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के लिए अत्याधुनिक प्रसंस्करण सुविधाएं विकसित करना।
  • एकीकृत कोल्ड चेन और भंडारण सुविधाओं का विकास: फसल कटाई के बाद के नुकसान को कम करने और उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए।
  • सशक्त ब्रांडिंग और विपणन रणनीति: ‘ब्रांड नॉर्थ ईस्ट’ के तहत लकाडोंग हल्दी को एक प्रीमियम वैश्विक उत्पाद के रूप में बढ़ावा देना।
  • जीआई-टैग का प्रभावी मुद्रीकरण: जीआई-टैग के माध्यम से उत्पाद की प्रामाणिकता और विशिष्टता का लाभ उठाकर प्रीमियम मूल्य प्राप्त करना।
  • किसान-बाजार संपर्क को मजबूत करना: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और क्रेता-विक्रेता बैठकों के माध्यम से किसानों को सीधे बाजारों से जोड़ना।
  • अनुसंधान और विकास को बढ़ावा: हल्दी की नई किस्मों, बेहतर कृषि पद्धतियों और नवीन उत्पादों के विकास पर ध्यान केंद्रित करना।
  • महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन: हल्दी मूल्य श्रृंखला में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने और उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करना।
  • अंतर-मंत्रालयी समन्वय: कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, वाणिज्य और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालयों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मिशन गोल्डन स्पाइस · लकाडोंग हल्दी · भौगोलिक संकेतक (GI) टैग · पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) · आत्मनिर्भर नॉर्थ ईस्ट · मूल्य श्रृंखला विकास · करक्यूमिन सामग्री · कृषि निर्यात · महिला सशक्तिकरण · नीचे से ऊपर का दृष्टिकोण · अष्टलक्ष्मी · कृषि-प्रसंस्करण उद्योग

अवधारणा प्रवाह

उच्च करक्यूमिन वाली लकाडोंग हल्दी की पहचान  →  अपर्याप्त प्रसंस्करण और बाजार संबंधों की चुनौती  →  मिशन गोल्डन स्पाइस का शुभारंभ  →  एकीकृत मूल्य श्रृंखला विकास और ब्रांडिंग  →  किसानों की आय में वृद्धि और वैश्विक बाजार में पहचान

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. ‘मिशन गोल्डन स्पाइस’ के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह मिशन विशेष रूप से मेघालय की लकाडोंग हल्दी के उत्पादन और मूल्य श्रृंखला विकास पर केंद्रित है।
2. इस मिशन का उद्देश्य लकाडोंग हल्दी में उच्च करक्यूमिन सामग्री का लाभ उठाकर इसे एक वैश्विक प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित करना है।
3. यह पहल केवल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। ‘मिशन गोल्डन स्पाइस’ मेघालय की जीआई-टैग वाली लकाडोंग हल्दी के उत्पादन, प्रसंस्करण और वैश्विक ब्रांडिंग पर केंद्रित है, जिसमें इसकी उच्च करक्यूमिन सामग्री का लाभ उठाया जाएगा। कथन 3 गलत है क्योंकि यह पहल MDoNER और NEC के नेतृत्व में विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के समन्वय से कार्यान्वित की जा रही है, न कि केवल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा।

Q2. भौगोलिक संकेतक (GI) टैग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. GI टैग किसी उत्पाद की विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति और उससे जुड़े गुणों को इंगित करता है।
2. भारत में GI टैग का पंजीकरण बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights) के तहत होता है।
3. एक बार GI टैग प्राप्त होने के बाद, इसे किसी अन्य क्षेत्र में उत्पादित समान उत्पाद के लिए भी उपयोग किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। GI टैग उन उत्पादों को दिया जाता है जिनकी एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति होती है और उनमें उस क्षेत्र के कारण विशेष गुण या प्रतिष्ठा होती है। भारत में, यह बौद्धिक संपदा अधिकार के तहत आता है। कथन 3 गलत है क्योंकि GI टैग उस विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र के उत्पादकों के लिए अनन्य होता है और इसे किसी अन्य क्षेत्र में उत्पादित समान उत्पाद के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ ‘मिशन गोल्डन स्पाइस’ जैसी पहलें पूर्वोत्तर भारत के कृषि-आधारित उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देने में किस प्रकार सहायक हो सकती हैं? विस्तार से चर्चा कीजिए।

रूपरेखा: प्रश्न का उत्तर देते समय, सबसे पहले ‘मिशन गोल्डन स्पाइस’ और लकाडोंग हल्दी के महत्व का संक्षिप्त परिचय दें। फिर, चर्चा करें कि कैसे यह मिशन जीआई-टैग वाले उत्पादों को बढ़ावा देकर, मूल्य श्रृंखला विकास को मजबूत करके, प्रसंस्करण सुविधाओं में सुधार करके, और महिला किसानों को सशक्त बनाकर कृषि निर्यात को बढ़ावा दे सकता है। अंत में, ‘आत्मनिर्भर नॉर्थ ईस्ट’ और ‘अष्टलक्ष्मी’ के विज़न के संदर्भ में क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास पर इसके व्यापक प्रभावों का विश्लेषण करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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