मोकामा- मुंगेर ग्रीनफील्ड राजमार्ग को मंजूरी : कैबिनेट ने भारत के हाई-स्पीड कॉरिडोर का विस्तार

मोकामा- मुंगेर ग्रीनफील्ड राजमार्ग को मंजूरी : कैबिनेट ने भारत के हाई-स्पीड कॉरिडोर का विस्तार

यह लेख भारतीय अर्थशास्त्र और बुनियादी ढांचा – मोकामा- मुंगेर ग्रीनफील्ड राजमार्ग को मंजूरी : कैबिनेट ने भारत के हाई-स्पीड कॉरिडोर का विस्तार के हिस्से के रूप में मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड राजमार्ग को मंजूरी दी है।

पाठ्यक्रम :

जीएस-3भारतीय अर्थशास्त्र और बुनियादी ढांचा –  मोकामा- मुंगेर ग्रीनफील्ड राजमार्ग को मंजूरी : कैबिनेट ने भारत के हाई-स्पीड कॉरिडोर का विस्तार के हिस्से के रूप में मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड राजमार्ग को मंजूरी दी है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए

भारत में अच्छी सड़क अवसंरचना के क्या लाभ हैं?

मुख्य परीक्षा के लिए

भारत की विकास रणनीति में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे और आर्थिक गलियारों का क्या महत्व है?

समाचार में क्यों?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बिहार में बक्सर-भागलपुर हाई-स्पीड कॉरिडोर के 4-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-नियंत्रित मोकामा-मुंगेर खंड के निर्माण को मंजूरी दे दी है।
यह परियोजना हाइब्रिड एन्युइटी मोड (एचएएम) पर क्रियान्वित की जाएगी।
कुल लंबाई: 82.4 किमी
अनुमानित व्यय: ₹4447.38 करोड़

समग्र बहुआयामी विकास में सड़कों की भूमिका:

1. आर्थिक विकास

(क) व्यापार एवं वाणिज्य विस्तार:सड़कें परिवहन लागत कम करती हैं, जिससे माल सस्ता होता है और बाजार अधिक सुलभ होते हैं।
उदाहरण: स्वर्णिम चतुर्भुज ने माल ढुलाई में सुधार किया, जिससे 2000 के दशक में भारत की जीडीपी वृद्धि को बढ़ावा मिला।
(ख) औद्योगिक विकास एवं निवेश:बेहतर सड़कें सुचारू संचालन सुनिश्चित करके उद्योगों को आकर्षित करती हैं।
उदाहरण: दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा (डीएमआईसी) एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी पर आधारित है।
(ग) रोजगार सृजन:राजमार्ग परियोजनाएं प्रत्यक्ष रोजगार (निर्माण) और अप्रत्यक्ष रोजगार (आतिथ्य, रसद) पैदा करती हैं।
उदाहरण: पीएमजीएसवाई ग्रामीण सड़कों के क्रियान्वयन के दौरान लाखों मानव दिवस रोजगार का सृजन हुआ।

2. सामाजिक विकास

(क) शिक्षा तक पहुंच:सड़कें दूरदराज के गांवों को स्कूलों/कॉलेजों से जोड़ती हैं।
उदाहरण:आदिवासी झारखंड में पीएमजीएसवाई सड़कों के कारण स्कूलों में उपस्थिति बढ़ी।
(ख) स्वास्थ्य सेवा पहुंच:एम्बुलेंस और स्वास्थ्य सेवाएं सड़क नेटवर्क पर निर्भर करती हैं।
उदाहरण:मध्य प्रदेश में जननी एक्सप्रेस योजना से सड़क मार्ग से जुड़ी एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से मातृ मृत्यु दर में कमी आई।
(ग) सामाजिक समावेशन एवं गतिशीलता:सड़कें एकाकीपन को कम करती हैं, जिससे महिलाओं और हाशिए पर पड़े समुदायों को अवसरों तक पहुंच प्राप्त करने में मदद मिलती है।
उदाहरण:पूर्वोत्तर भारत में बेहतर कनेक्टिविटी ने जनजातीय समुदायों को मुख्यधारा के बाजारों और संस्थानों के करीब ला दिया।

3. क्षेत्रीय एवं संपर्क विकास

(क) संतुलित क्षेत्रीय विकास:सड़कें पिछड़े क्षेत्रों को विकास केन्द्रों से जोड़ती हैं।
उदाहरण: भारतमाला परियोजना क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स अंतराल को कम करने पर केंद्रित है।
(ख) पर्यटन को बढ़ावा:बेहतर सड़क पहुंच से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में वृद्धि होती है।
उदाहरण: उत्तराखंड में चारधाम राजमार्ग परियोजना तीर्थ पर्यटन को सुगम बनाती है।
(ग) सामरिक एवं सीमापार संपर्क:सड़क सुरक्षा और व्यापार संबंधों को मजबूत बनाती हैं।
उदाहरण:भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग एक्ट ईस्ट नीति के तहत क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा देता है।

4. ग्रामीण विकास

(क) किसानों के लिए बाजार पहुंच:सड़कें किसानों को सीधे उत्पाद बेचने में मदद करती हैं, जिससे बिचौलियों की समस्या कम हो जाती है।
उदाहरण: पीएमजीएसवाई के अंतर्गत सड़क संपर्क के बाद महाराष्ट्र में ग्रामीण हाटों का विकास हुआ।
(ख) गैर-कृषि अवसर:सड़कें ग्रामीण क्षेत्रों को आपूर्ति श्रृंखलाओं (डेयरी, हस्तशिल्प) से जोड़ती हैं।
उदाहरण:अमूल का डेयरी मॉडल मजबूत ग्रामीण सड़क संपर्क पर आधारित है।
(ग) गरीबी में कमी:सड़कें स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देकर प्रवासन दबाव को कम करती हैं।
उदाहरण: पीएमजीएसवाई पर विश्व बैंक के एक अध्ययन से पता चला है कि इससे जुड़े गांवों में गरीबी में उल्लेखनीय कमी आई है।

भारत के सड़क बुनियादी ढांचे में बदलाव: प्रमुख योजनाएं और उपलब्धियां

योजना / पहल फोकस क्षेत्र मुख्य सफलतायें
राष्ट्रीय राजमार्ग विस्तार (NHAI) पूंजीगत व्यय और राष्ट्रीय राजमार्ग वृद्धि राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क: 91,287 किमी (2014) → 1,46,126 किमी (2024); पूंजी निवेश में भारी वृद्धि
भारतमाला परियोजना आर्थिक गलियारे, एक्सप्रेसवे, बंदरगाह और सीमा संपर्क 26,425 किमी आवंटित, 17,411 किमी का निर्माण; व्यय ₹4.59 लाख करोड़
ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे उच्च गति वाले प्रवेश-नियंत्रित गलियारे 5 एक्सप्रेसवे + 22 राजमार्ग (कुल 9,860 किमी); परियोजना लागत ₹4,19,130 करोड़
रोजगार सृजन (NHAI परियोजनाओं से) निर्माण के दौरान रोजगार सृजन 24,050 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग (5 वर्षों में); 45 करोड़ प्रत्यक्ष, 57 करोड़ अप्रत्यक्ष, 532 करोड़ प्रेरित मानव-दिवस
उत्तर-पूर्व सड़क संपर्क (NER) क्षेत्रीय एकीकरण और एक्ट ईस्ट नीति 9,984 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग (₹1,07,504 करोड़); 265 चालू परियोजनाएँ (₹1,18,894 करोड़); बजट का 10% निर्धारित
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) ग्रामीण क्षेत्रों में सभी मौसमों में सड़क कनेक्टिविटी 8,10,250 किमी स्वीकृत; 7,65,601 किमी (94%) का निर्माण; व्यय ₹3.24 लाख करोड़; चरण IV में 25,000 और बस्तियाँ
हरित राजमार्ग नीति (2015) स्थिरता और पर्यावरण संतुलन राजमार्गों के किनारे 402.28 लाख पौधे लगाए गए
EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर राजमार्गों पर स्वच्छ गतिशीलता 5,293 ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित (4,729 पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा); ₹800 करोड़ सब्सिडी से विस्तार
GNSS-आधारित टोलिंग (पायलट) स्मार्ट टोल संग्रह पायलट: NH-275 (बेंगलुरु–मैसूर) और NH-709 (पानीपत–हिसार)
सड़क एवं पुल रखरखाव (CRIF एवं IBMS) राज्य सड़क परियोजनाएँ और संरचनात्मक सुरक्षा 1,209 परियोजनाएँ (14,369 किमी, ₹37,098 करोड़); IBMS से पुल स्वास्थ्य निगरानी
सड़क सुरक्षा (4E: इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, शिक्षा, आपातकाल) दुर्घटना एवं मृत्यु दर में कमी लक्ष्य: 2030 तक सड़क मौतों में 50% कमी; सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य; ATM और Rajmaarg Yatra App का शुभारंभ

भारत के सड़क बुनियादी ढांचे में प्रमुख चुनौतियाँ

वर्ग प्रमुख चुनौतियाँ
1. वित्तीय एवं राजनीतिक चुनौतियाँ • निधि संचय में व्यवधान: 2022–2040 के लिए भारत को सड़क अवसंरचना हेतु $1.4 ट्रिलियन की आवश्यकता (नीति आयोग)
• भूमि अधिग्रहण में देरी: 700+ परियोजनाएँ कानूनी विवादों व प्रतिरोध के कारण रुकी हुई (MoRTH 2023)
• भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप: CAG (2022) ने राष्ट्रीय राजमार्ग अनुबंधों में अनियमितताओं व घटिया निष्पादन को उजागर किया
2. पर्यावरण एवं जलवायु चुनौतियाँ • बाढ़ और भूस्खलन: केरल बाढ़ (2018) में 12,000 किमी सड़क क्षतिग्रस्त, ₹6,000+ करोड़ की लागत; उत्तराखंड (2025) में BRO को ₹100 करोड़ का नुकसान
• प्रदूषण: सड़क परिवहन भारत के कुल CO₂ उत्सर्जन का 11% करता है (IEA 2023)
3. योजना और तकनीकी चुनौतियाँ • देरी: 44% राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ निर्धारित समय से पीछे (MoRTH 2024)
• भीड़ (Congestion): 70% सड़कें अभी भी एकल/मध्यवर्ती लेन वाली
• रखरखाव घाटे: केवल 40% PWD सड़कों का वार्षिक रखरखाव (विश्व बैंक 2023); साथ ही कुशल श्रमिकों की कमी और गुणवत्ता नियंत्रण समस्याएँ

भारत के सड़क अवसंरचना के लिए सुधार और समाधान

वर्ग सुधार / समाधान
रणनीतिक योजना और वित्तीय सुधार • इन्फ्रास्ट्रक्चर डेट फंड (IDF) की स्थापना ताकि दीर्घकालिक निजी पूंजी आकर्षित हो सके
• PPP मॉडल में सुधार — न्यायसंगत जोखिम साझाकरण हेतु रियायती समझौतों का पुनः डिज़ाइन
• रखरखाव को प्राथमिकता — वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्ग रखरखाव बजट <1%; PRS India ने खर्च बढ़ाने की सिफारिश की
• भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण — अधिग्रहण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और कानूनी विवादों को कम करने हेतु
शासन और परियोजना निष्पादन • निगरानी सुधार — मई 2024 तक 458 परियोजनाओं की लागत ₹5.71 लाख करोड़ तक बढ़ी और 831 विलंबित; बेहतर मॉनिटरिंग आवश्यक
• PM Gati Shakti का उपयोग — मंत्रालयों में एकीकृत मंजूरी और तेज परियोजना निष्पादन के लिए
प्रौद्योगिकी और नवाचार • बुद्धिमान यातायात प्रणाली (ITS) की तैनाती — दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में यातायात प्रबंधन सुधार
• हरित निर्माण को प्रोत्साहन — सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, और कम-कार्बन सामग्री का उपयोग
• बहु-मॉडल परिवहन विस्तार — 2024 तक 21 शहरों में 945 किमी मेट्रो नेटवर्क, 1 करोड़ दैनिक यात्रियों को सेवा
सामाजिक एवं सुरक्षा उपाय • गड्ढों और खराब डिजाइन से होने वाली मौतों में कमी — 2022 में 4,446 दुर्घटनाएं और 1,856 मौतें दर्ज
• ब्लैक स्पॉट रीडिज़ाइन और अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट लागू करना
• श्रमिक प्रशिक्षण — MoRTH ने ₹100 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं पर कार्यरत श्रमिकों के लिए प्रशिक्षण एवं वजीफा अनिवार्य किया

निष्कर्ष:

  • सड़कें न केवल परिवहन का एक साधन हैं, बल्कि शांति और स्थिरता के मार्ग भी हैं। पर्याप्त सड़क अवसंरचना आर्थिक विकास, सामाजिक सामंजस्य और क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा देती है, जिससे अशांति और अस्थिरता कम होती है।
  • यदि भारत व्यापक संपर्क सुनिश्चित करता है, तो नेपाल में अलगाव और कम पहुँच के कारण हाल ही में हुई उथल-पुथल जैसी स्थितियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है,
  • जो राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में मजबूत सड़क नेटवर्क के रणनीतिक महत्व को उजागर करता है।

प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न

Q. भारतमाला परियोजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारतमाला परियोजना सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत एक केन्द्र प्रायोजित योजना है।
2. इस योजना का एक प्रमुख घटक यात्रा समय को कम करने के लिए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का निर्माण है।
3. यह योजना मुख्य रूप से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा कार्यान्वित की जाती है।
उपरोक्त में से कौन सा कथन सही है?
A. केवल एक
B. केवल दो
C. तीनों
D. कोई नहीं
उत्तर: B

मुख्य परीक्षा के प्रश्न

Q.  चर्चा कीजिए कि भारत में सड़क अवसंरचना आर्थिक विकास, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण में किस प्रकार योगदान देती है। अपने उत्तर के समर्थन में प्रासंगिक उदाहरण दीजिए।   

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