09 Aug यूपीएससी के लिए महत्वपूर्ण: नड्डा ने इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026 में सीईओ गोलमेज की अध्यक्षता की
✎ भारत का मेडटेक क्षेत्र घरेलू विनिर्माण, नवाचार और साक्ष्य-आधारित प्रतिपूर्ति नीतियों के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — स्वास्थ्य, मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोजमर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव
- Prelims: मेडिकल डिवाइस क्षेत्र, राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC), स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (HTA), फार्मास्युटिकल्स विभाग, फिक्की (FICCI)
- Essay: भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र का आधुनिकीकरण और नवाचार, आत्मनिर्भर भारत और चिकित्सा उपकरण उद्योग
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत का मेडटेक क्षेत्र घरेलू विनिर्माण, नवाचार और साक्ष्य-आधारित प्रतिपूर्ति नीतियों के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय रसायन और उर्वरक तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने नई दिल्ली में ‘इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026’ के सीईओ राउंडटेबल सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस सम्मेलन का आयोजन फार्मास्युटिकल्स विभाग और फिक्की (FICCI) के सहयोग से किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत के मेडटेक (MedTech) क्षेत्र के भविष्य पर चर्चा करना, नवाचार और निवेश को बढ़ावा देना तथा घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करना था।
पृष्ठभूमि
- भारत का मेडिकल डिवाइस बाजार तेजी से बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
- सरकार ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
- सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage – UHC) के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किफायती और सुलभ चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।
- स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (Health Technology Assessment – HTA) एक महत्वपूर्ण उपकरण है जो नई चिकित्सा प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में मदद करता है।
- नियामक, प्रतिपूर्ति (Reimbursement) और खरीद संबंधी निर्णय ठोस नैदानिक सबूतों पर आधारित होने चाहिए ताकि नवाचार का लाभ मरीजों तक पहुंच सके।
- कोविड-19 महामारी ने भारत में स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे और चिकित्सा उपकरण आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की आवश्यकता को उजागर किया है।
भारत का मेडटेक (मेडिकल डिवाइस) क्षेत्र
- मेडटेक क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के चिकित्सा उपकरण शामिल हैं, जैसे निदान उपकरण, सर्जिकल उपकरण, प्रत्यारोपण, इमेजिंग उपकरण और अस्पताल के उपकरण।
- यह क्षेत्र स्वास्थ्य सेवा वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे रोगों का निदान, उपचार और प्रबंधन संभव होता है।
- भारत सरकार ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां और योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (Production-Linked Incentive – PLI) योजना भी शामिल है।
- घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने से न केवल आयात पर निर्भरता कम होती है, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को भी बढ़ावा मिलता है।
- नवाचार और अनुसंधान एवं विकास (Research & Development) इस क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिससे नई और बेहतर प्रौद्योगिकियों का विकास हो सके।
- स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (HTA) एक ऐसी प्रक्रिया है जो नई चिकित्सा प्रौद्योगिकियों की नैदानिक प्रभावशीलता, लागत-प्रभावशीलता और सामाजिक प्रभाव का मूल्यांकन करती है।
- प्रतिपूर्ति (Reimbursement) प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि नई और अभिनव प्रौद्योगिकियों को स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में अपनाया जा सके और मरीजों के लिए सुलभ बनाया जा सके।
- इस क्षेत्र में एमएसएमई (MSME) की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो नवाचार और स्थानीय उत्पादन में योगदान करते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सीईओ राउंडटेबल सम्मेलन | भारत के मेडटेक (MedTech) सेक्टर के भविष्य पर चर्चा हेतु उद्योग के नीति-निर्माताओं और लीडर्स को एक मंच पर लाना। |
| घरेलू विनिर्माण क्षमताओं में वृद्धि | मेडिकल उपकरणों के लिए आयात पर निर्भरता कम करना और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करना। |
| नवाचार और निवेश को बढ़ावा | मेडिकल डिवाइस इकोसिस्टम में अनुसंधान और विकास (R&D) को प्रोत्साहित करना तथा नई तकनीकों को अपनाना। |
| ग्लोबल पहुंच बढ़ाना | भारतीय मेडिकल डिवाइस कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाना। |
| यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) की राह में इनोवेटिव थेरेपी के लिए रीइम्बर्समेंट | नवीन चिकित्सा प्रौद्योगिकियों तक पहुंच सुनिश्चित करना और स्वास्थ्य सेवा संसाधनों का प्रभावी उपयोग। |
| सबूत-आधारित निर्णय लेना | मेडिकल इनोवेशन के मूल्यांकन, प्रतिपूर्ति और खरीद में वैज्ञानिक प्रमाणों को प्राथमिकता देना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने से आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और व्यापार घाटा कम होगा।
- मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में नवाचार और निवेश से रोजगार के अवसर सृजित होंगे और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिलेगी।
- भारतीय कंपनियों की ग्लोबल पहुंच बढ़ने से निर्यात में वृद्धि होगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
सामरिक महत्व
- मेडिकल उपकरणों के घरेलू उत्पादन से स्वास्थ्य सुरक्षा (Health Security) सुनिश्चित होगी, विशेषकर आपातकालीन स्थितियों में।
- नवीनतम चिकित्सा प्रौद्योगिकियों तक पहुंच से देश की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली अधिक सुदृढ़ और आत्मनिर्भर बनेगी।
सामाजिक महत्व
- किफायती और सुलभ मेडिकल उपकरणों की उपलब्धता से यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (Universal Health Coverage) के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
- सबूत-आधारित निर्णय लेने से मरीजों को बेहतर और प्रभावी उपचार मिल सकेगा, जिससे स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होगा।
चुनौतियाँ
1. विनिर्माण क्षमताएं और आत्मनिर्भरता
- उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल और घटकों के लिए आयात पर निर्भरता।
- घरेलू स्तर पर अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश की कमी।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: औद्योगिक नीति, आत्मनिर्भरता
2. नियामक और प्रतिपूर्ति ढाँचा
- नई मेडिकल तकनीकों के लिए स्पष्ट और त्वरित नियामक अनुमोदन प्रक्रियाओं का अभाव।
- इनोवेटिव थेरेपी के लिए टिकाऊ प्रतिपूर्ति (Reimbursement) प्रणाली की कमी, जिससे उनकी पहुंच सीमित होती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: स्वास्थ्य नीतियां, नियामक निकाय
3. नवाचार और निवेश
- मेडटेक क्षेत्र में निजी और सार्वजनिक निवेश को आकर्षित करने में चुनौतियाँ।
- नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम (जैसे इनक्यूबेटर, फंडिंग) की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: निवेश मॉडल, नवाचार
4. गुणवत्ता और मानकीकरण
- घरेलू स्तर पर निर्मित मेडिकल उपकरणों के लिए अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना।
- जागरूकता और प्रशिक्षण की कमी के कारण स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा नई तकनीकों को अपनाने में संकोच।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: गुणवत्ता नियंत्रण, स्वास्थ्य
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| आयात निर्भरता | मेडिकल उपकरणों के लिए महत्वपूर्ण घटकों और प्रौद्योगिकियों हेतु विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर अत्यधिक निर्भरता। |
| नियामक बाधाएँ | नवीन चिकित्सा प्रौद्योगिकियों के अनुमोदन और बाजार में प्रवेश के लिए जटिल और समय लेने वाली प्रक्रियाएँ। |
| प्रतिपूर्ति प्रणाली | नवीन और महंगी थेरेपी के लिए एक स्थायी और पारदर्शी प्रतिपूर्ति तंत्र का अभाव, जिससे मरीजों तक पहुंच बाधित होती है। |
| अनुसंधान और विकास निवेश | मेडटेक क्षेत्र में पर्याप्त अनुसंधान और विकास निवेश की कमी, जो नवाचार को धीमा करती है। |
| कौशल विकास | मेडिकल डिवाइस विनिर्माण और रखरखाव के लिए आवश्यक कुशल कार्यबल की कमी। |
| डेटा और साक्ष्य | मेडिकल प्रौद्योगिकियों के नैदानिक प्रभाव और लागत-प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले साक्ष्य डेटा की कमी। |
आगे की राह
- मेडिकल डिवाइस क्षेत्र के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति विकसित करना जो घरेलू विनिर्माण, नवाचार और निर्यात को प्रोत्साहित करे।
- नवीन चिकित्सा प्रौद्योगिकियों के लिए एक सुव्यवस्थित और पारदर्शी नियामक अनुमोदन प्रक्रिया स्थापित करना।
- इनोवेटिव थेरेपी के लिए एक टिकाऊ और न्यायसंगत प्रतिपूर्ति तंत्र (Reimbursement Mechanism) विकसित करना, जो पहुंच और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करे।
- मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को प्रोत्साहित करना और वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना।
- मेडिकल डिवाइस विनिर्माण और उपयोग के लिए आवश्यक कौशल विकास कार्यक्रमों और प्रशिक्षण सुविधाओं को मजबूत करना।
- मेडिकल प्रौद्योगिकियों के नैदानिक प्रभाव और लागत-प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए एक मजबूत साक्ष्य-आधारित ढाँचा स्थापित करना।
- भारतीय मेडिकल डिवाइस कंपनियों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए निर्यात प्रोत्साहन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मेडिकल डिवाइस क्षेत्र · घरेलू विनिर्माण · नवाचार और निवेश · यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) · हेल्थ टेक्नोलॉजी असेसमेंट (HTA) · सबूत-आधारित निर्णय · रीइम्बर्समेंट इकोसिस्टम · मेडटेक सेक्टर · आत्मनिर्भर भारत · सार्वजनिक स्वास्थ्य
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 21’: ‘स्वास्थ्य का अधिकार, जीवन का अधिकार’}
- {‘अनुच्छेद 47’: ‘राज्य का कर्तव्य, जन स्वास्थ्य में सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
सीईओ राउंडटेबल सम्मेलन आयोजित → मेडटेक सेक्टर में नवाचार और निवेश पर चर्चा → घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर → नवीन चिकित्सा प्रौद्योगिकियों के लिए प्रतिपूर्ति तंत्र पर विचार → सबूत-आधारित निर्णय लेने का महत्व → यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज की दिशा में प्रगति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. ‘इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026’ सम्मेलन का आयोजन रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल्स विभाग द्वारा किया गया था।
2. नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास ने ‘भारत की यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज की राह में इनोवेटिव थेरेपी के लिए रीइम्बर्समेंट के तरीके’ विषय पर सत्र की अध्यक्षता की।
3. मेडिकल इनोवेशन का लक्ष्य किफायती, आसानी से उपलब्ध और टिकाऊ हेल्थकेयर होना चाहिए।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। ‘इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026’ का आयोजन रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल्स विभाग ने फिक्की के सहयोग से किया था। कथन 2 गलत है। इस सत्र की अध्यक्षता स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने की थी, न कि नीति आयोग के सदस्य ने। कथन 3 सही है। डॉ. राजीव बहल ने इस बात पर जोर दिया कि मेडिकल इनोवेशन का नतीजा किफायती, आसानी से उपलब्ध और टिकाऊ हेल्थकेयर के रूप में सामने आना चाहिए।
Q2. अभिकथन (A): भारत में इनोवेटिव मेडिकल टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए भरोसेमंद क्लिनिकल सबूत और पारदर्शी हेल्थ टेक्नोलॉजी असेसमेंट (HTA) प्रक्रियाएं आवश्यक हैं।
कारण (R): सबूत जुटाने से छूट मांगने पर टेक्नोलॉजी के लिए HTA, रीइम्बर्समेंट और खरीद अधिकारियों के सामने अपनी वैल्यू साबित करना मुश्किल हो सकता है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं। सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि इनोवेटिव मेडिकल टेक्नोलॉजी को अपनाने के लिए भरोसेमंद क्लिनिकल सबूत और पारदर्शी HTA प्रक्रियाएं ज़रूरी हैं। साथ ही, यह भी कहा गया कि सबूत जुटाने से छूट मांगने पर टेक्नोलॉजी के लिए अपनी वैल्यू साबित करना मुश्किल हो सकता है, जो HTA प्रक्रियाओं के महत्व को दर्शाता है। इस प्रकार, R, A की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में नवाचार और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का विश्लेषण करें। यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) प्राप्त करने में यह क्षेत्र किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत के मेडिकल डिवाइस क्षेत्र का संक्षिप्त परिचय और इसका महत्व।
2. सरकार द्वारा उठाए गए कदम (नवाचार और घरेलू विनिर्माण): ‘इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026’ जैसे सम्मेलनों का उल्लेख, फार्मास्युटिकल्स विभाग की भूमिका, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं, चिकित्सा उपकरण पार्कों का विकास, ‘मेक इन इंडिया’ पहल का समर्थन, नियामक सुधार, निवेश प्रोत्साहन नीतियां।
3. यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) में भूमिका: किफायती और सुलभ चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच, रोकथाम और निदान में सहायता, नवाचारी उपचारों का एकीकरण, स्वास्थ्य परिणामों में सुधार।
4. चुनौतियाँ और आगे की राह: अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश की कमी, नियामक ढाँचे की जटिलता, आयात पर निर्भरता, कुशल कार्यबल की कमी, रीइम्बर्समेंट तंत्र में सुधार की आवश्यकता, हेल्थ टेक्नोलॉजी असेसमेंट (HTA) का प्रभावी कार्यान्वयन।
5. निष्कर्ष: एक मजबूत और आत्मनिर्भर मेडिकल डिवाइस क्षेत्र के महत्व पर बल देते हुए, UHC लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण का सुझाव।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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