05 Aug यूपीएससी हेतु महत्वपूर्ण: हाथ से मैला उठाने वालों का पूर्ण उन्मूलन, जानिए सरकारी प्रयास
✎ भारत सरकार हाथ से मैला उठाने की प्रथा के पूर्ण उन्मूलन और चिह्नित किए गए मैला उठाने वाले कर्मियों के पुनर्वास के लिए राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम कार्य-योजना (नमस्ते) के तहत वित्तीय सहायता, कौशल विकास और आजीविका सहायता…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय समाज, सामाजिक सशक्तिकरण | GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएँ, कमजोर वर्गों का उत्थान
- Prelims: हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013, राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम कार्य-योजना (नमस्ते), राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, स्वरोजगार योजना (SRMS), संविधान की सातवीं अनुसूची
- Essay: भारत में सामाजिक न्याय और हाशिए पर पड़े वर्गों का सशक्तिकरण, गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार और मानवीय स्वच्छता का भविष्य
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत सरकार हाथ से मैला उठाने की प्रथा के पूर्ण उन्मूलन और चिह्नित किए गए मैला उठाने वाले कर्मियों के पुनर्वास के लिए राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम कार्य-योजना (नमस्ते) के तहत वित्तीय सहायता, कौशल विकास और आजीविका सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, 2024-25 के दौरान किए गए एक नए देशव्यापी सर्वेक्षण में हाथ से मैला उठाने वाला कोई व्यक्ति नहीं मिला है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम कार्य-योजना (नमस्ते) योजना के तहत इस प्रथा के पूर्ण उन्मूलन और चिह्नित किए गए मैला उठाने वालों के पुनर्वास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जिसमें वित्तीय सहायता, कौशल विकास और आजीविका सहायता शामिल है।
पृष्ठभूमि
- हाथ से मैला उठाने की प्रथा भारत में एक गंभीर सामाजिक बुराई रही है, जो मानवीय गरिमा का उल्लंघन करती है और मुख्य रूप से दलित समुदायों को प्रभावित करती है।
- इस प्रथा को समाप्त करने और मैला उठाने वाले कर्मियों के पुनर्वास के लिए सरकार ने विभिन्न कानून और योजनाएँ लागू की हैं।
- हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम (Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act), 2013, इस प्रथा को प्रतिबंधित करता है और पुनर्वास का प्रावधान करता है।
- 2013 और 2018 में हुए देशव्यापी सर्वेक्षणों में 58,098 हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों को चिह्नित किया गया था, जिन्हें 40,000 रुपये की एकमुश्त नकद सहायता (OTCA) प्रदान की गई है।
- राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) सफाई कर्मचारियों के कल्याण और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक वैधानिक निकाय है।
- स्वच्छता संविधान की सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) के अंतर्गत राज्य सूची का विषय है, जिससे राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
- जनवरी 2023 से जून 2026 के बीच सीवर और सेप्टिक टैंक की जोखिमपूर्ण सफाई के कारण 182 सफाईकर्मियों की मौतें दर्ज की गई हैं, जो इस क्षेत्र में चुनौतियों को उजागर करती हैं।
राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम कार्य-योजना (नमस्ते) योजना
- नमस्ते योजना का उद्देश्य भारत में सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई को समाप्त करना और मशीनीकृत स्वच्छता को बढ़ावा देना है।
- यह योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है।
- इसका लक्ष्य सभी सफाई कर्मचारियों की गरिमा, सुरक्षा और स्थायी आजीविका सुनिश्चित करना है।
- योजना के तहत, हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों और उनके आश्रितों को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है ताकि वे वैकल्पिक रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें।
- स्वरोजगार के अवसर शुरू करने के लिए लाभार्थियों को पूंजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy) भी प्रदान की जाती है।
- यह योजना मशीनीकृत सफाई उपकरणों की खरीद और उनके उपयोग को प्रोत्साहित करती है, जिससे मानव हस्तक्षेप कम हो सके।
- नमस्ते योजना ‘स्वरोजगार योजना (SRMS) के तहत हाथ से मैला उठाने वालों के पुनर्वास’ की पहल को अपने में समाहित करती है।
- इसका अंतिम लक्ष्य भारत को ‘मैला ढोने से मुक्त’ बनाना और सभी शहरों तथा कस्बों में 100% मशीनीकृत स्वच्छता प्राप्त करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 2024-25 का देशव्यापी सर्वेक्षण | यह दर्शाता है कि भारत में अब हाथ से मैला उठाने वाला कोई व्यक्ति नहीं है, जो इस प्रथा के उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। |
| 58,098 चिह्नित मैला उठाने वालों का पुनर्वास | इन सभी व्यक्तियों को 40,000 रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता मिली है, जो उनके आर्थिक पुनर्वास में सहायक है। |
| कौशल विकास प्रशिक्षण | 2023-24 से 2025-26 तक 5,632 लाभार्थियों को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया, जिससे उन्हें वैकल्पिक आजीविका के अवसर मिल सके। |
| पूंजीगत सब्सिडी | 483 लाभार्थियों को स्वरोजगार शुरू करने के लिए पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की गई, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। |
| राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम कार्य-योजना (नमस्ते) योजना | यह योजना हाथ से मैला उठाने की प्रथा के पूर्ण उन्मूलन और सफाई कर्मचारियों के पुनर्वास के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करती है। |
| सीवर और सेप्टिक टैंक की जोखिमपूर्ण सफाई से मौतें | जनवरी 2023 से जून 2026 के बीच 182 मौतें दर्ज की गईं, जो अभी भी इस क्षेत्र में चुनौतियों को उजागर करती हैं। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- हाथ से मैला उठाने की प्रथा का उन्मूलन मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- यह हाशिए पर पड़े समुदायों के जीवन स्तर और सामाजिक स्थिति में सुधार करता है।
- पुनर्वास प्रयासों से इन व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर मिलता है।
आर्थिक महत्व
- एकमुश्त वित्तीय सहायता और कौशल विकास प्रशिक्षण मैला उठाने वालों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाता है।
- वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करने से उनकी आय में वृद्धि होती है और गरीबी कम होती है।
- मशीनीकृत स्वच्छता समाधानों को बढ़ावा देने से स्वच्छता क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
शासनिक महत्व
- सरकार की प्रतिबद्धता और नमस्ते योजना का प्रभावी कार्यान्वयन नीति निर्माण और क्रियान्वयन की सफलता को दर्शाता है।
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर काम करना संघवाद (Federalism) के सिद्धांतों को मजबूत करता है।
- कानून के उल्लंघन पर एफआईआर दर्ज करना जवाबदेही और कानून के शासन को बनाए रखने में मदद करता है।
चुनौतियाँ
1. सीवर और सेप्टिक टैंक में जोखिमपूर्ण सफाई
- अभी भी बड़ी संख्या में सफाईकर्मियों की इन जोखिमपूर्ण कार्यों के कारण मौतें हो रही हैं।
- तकनीकी समाधानों और सुरक्षा उपकरणों की कमी या उनके उपयोग में लापरवाही एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, कमजोर वर्ग, सरकारी नीतियां
2. कानून का प्रवर्तन
- स्वच्छता राज्य का विषय होने के कारण केंद्रीय स्तर पर उल्लंघनकर्ताओं का डेटा उपलब्ध नहीं है, जिससे प्रभावी निगरानी और कार्रवाई में बाधा आती है।
- कानून का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों के खिलाफ पर्याप्त और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, संघवाद, सामाजिक न्याय
3. पुनर्वास की निरंतरता
- पुनर्वासित व्यक्तियों के लिए टिकाऊ आजीविका सुनिश्चित करना और उन्हें समाज में पूरी तरह से एकीकृत करना एक सतत प्रक्रिया है।
- कौशल विकास के बाद रोजगार के अवसरों की उपलब्धता और बाजार की मांग के साथ उनका तालमेल बिठाना महत्वपूर्ण है।
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4. जागरूकता और सामाजिक दृष्टिकोण
- हाथ से मैला उठाने की प्रथा के प्रति सामाजिक पूर्वाग्रहों और रूढ़ियों को दूर करना अभी भी एक चुनौती है।
- समुदायों और स्थानीय निकायों में मशीनीकृत स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।
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चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सीवर/सेप्टिक टैंक में मौतें | सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन और मशीनीकृत समाधानों की अपर्याप्तता के कारण सफाईकर्मियों की जान जा रही है। |
| राज्य विषय का मुद्दा | स्वच्छता राज्य सूची का विषय होने के कारण केंद्रीय स्तर पर डेटा और प्रवर्तन में समन्वय की कमी। |
| पुनर्वास की स्थिरता | एकमुश्त सहायता के बाद लाभार्थियों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और सामाजिक एकीकरण सुनिश्चित करना। |
| कानूनी कार्रवाई की धीमी गति | उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बावजूद, न्याय प्रक्रिया में देरी और दोषियों को सजा मिलने में चुनौतियां। |
| तकनीकी अपनाने में बाधाएं | छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में मशीनीकृत स्वच्छता उपकरणों को अपनाने में वित्तीय और तकनीकी बाधाएं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम कार्य-योजना (नमस्ते) योजना
- हाथ से मैला उठाने वालों के पुनर्वास के लिए स्वरोजगार योजना (एसआरएमएस)
आगे की राह
- सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए मशीनीकृत समाधानों को अनिवार्य बनाना और सुरक्षा उपकरणों के उपयोग को सख्ती से लागू करना।
- राज्य सरकारों के साथ मिलकर कानून के उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करना।
- पुनर्वासित मैला उठाने वालों के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण को बाजार की मांग के अनुरूप बनाना और उन्हें ऋण व विपणन सहायता प्रदान करना।
- स्वच्छता कर्मचारियों के लिए बीमा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार करना ताकि उनके परिवारों को सुरक्षा मिल सके।
- हाथ से मैला उठाने की प्रथा के प्रति सामाजिक कलंक को दूर करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाना।
- स्थानीय निकायों को मशीनीकृत स्वच्छता समाधानों को अपनाने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
- राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) को और अधिक सशक्त बनाना ताकि वह प्रभावी ढंग से निगरानी और प्रवर्तन कर सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
हाथ से मैला उठाने की प्रथा · मैला ढोने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 · राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम कार्य-योजना (नमस्ते) योजना · सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय · पुनर्वास पहल · कौशल विकास प्रशिक्षण · पूंजीगत सब्सिडी · सफाई कर्मचारी · राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) · राज्य का विषय
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 23’, ‘note’: ‘मानव दुर्व्यापार और बलात् श्रम का प्रतिषेध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘स्वच्छता राज्य सूची का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
हाथ से मैला उठाने की प्रथा का अस्तित्व → सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों का उल्लंघन → सरकार द्वारा सर्वेक्षण और पुनर्वास योजनाएं (जैसे नमस्ते) → वित्तीय सहायता, कौशल विकास और वैकल्पिक आजीविका → हाथ से मैला उठाने वालों की संख्या में कमी/उन्मूलन → मशीनीकृत स्वच्छता पर जोर और सुरक्षा उपायों की आवश्यकता → सीवर/सेप्टिक टैंक में जोखिमपूर्ण सफाई से मौतें
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के तहत 2024-25 के दौरान किए गए सर्वेक्षण में देश में कोई भी हाथ से मैला उठाने वाला व्यक्ति नहीं पाया गया।
2. ‘नमस्ते’ योजना का उद्देश्य हाथ से मैला उठाने की प्रथा का पूर्ण उन्मूलन और चिह्नित मैला उठाने वालों का पुनर्वास करना है।
3. संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत स्वच्छता एक समवर्ती सूची का विषय है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 1 के अनुसार, 2024-25 के सर्वेक्षण में कोई हाथ से मैला उठाने वाला व्यक्ति नहीं मिला। कथन 2 ‘नमस्ते’ योजना के उद्देश्य को सही बताता है। कथन 3 गलत है क्योंकि स्वच्छता संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत राज्य सूची का विषय है, न कि समवर्ती सूची का।
Q2. राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम कार्य-योजना (नमस्ते) योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह योजना हाथ से मैला उठाने वालों को एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
2. यह योजना केवल शहरी क्षेत्रों में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई पर केंद्रित है।
3. यह योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 3
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है, क्योंकि नमस्ते योजना के तहत पुनर्वास पहलों में वित्तीय सहायता शामिल है। कथन 2 गलत है, क्योंकि योजना का व्यापक उद्देश्य हाथ से मैला उठाने की प्रथा का उन्मूलन करना है, न कि केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित रहना। कथन 3 सही है, क्योंकि यह योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में हाथ से मैला उठाने की प्रथा के उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों और चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में ‘राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम कार्य-योजना (नमस्ते)’ की भूमिका पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** हाथ से मैला उठाने की प्रथा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इसके मानवाधिकार उल्लंघन के रूप में संक्षिप्त उल्लेख।
2. **सरकारी प्रयास:**
* **कानूनी ढाँचा:** मैला ढोने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013।
* **सर्वेक्षण:** 2013, 2018 और 2024-25 के देशव्यापी सर्वेक्षणों का उल्लेख। 2024-25 के सर्वेक्षण में कोई मैला उठाने वाला न मिलने का तथ्य।
* **पुनर्वास पहल:** 58,098 चिह्नित मैला उठाने वालों को 40,000 रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता (OTCA)।
* **स्वरोजगार योजना (SRMS):** इसके तहत कौशल विकास प्रशिक्षण (5,632 लाभार्थी) और पूंजीगत सब्सिडी (483 लाभार्थी) का प्रावधान।
* **राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम कार्य-योजना (नमस्ते):** जुलाई 2023 में SRMS को इसमें शामिल करना। इसका उद्देश्य मशीनीकृत स्वच्छता को बढ़ावा देना, निरंतर वित्तीय सहायता, कौशल विकास और आजीविका सहायता प्रदान करना।
3. **चुनौतियाँ:**
* **सीवर और सेप्टिक टैंक में मौतें:** 1 जनवरी 2023 से 30 जून 2026 के बीच 182 सफाईकर्मियों की मौत का डेटा।
* **कानून का प्रवर्तन:** स्वच्छता का राज्य का विषय होना और केंद्रीय स्तर पर उल्लंघनकर्ताओं के डेटा की कमी। 123 FIR दर्ज होने के बावजूद, प्रभावी दंड का अभाव।
* **सामाजिक कलंक और जागरूकता:** प्रथा के पीछे के सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक कारकों का उल्लेख।
* **वैकल्पिक आजीविका के अवसर:** पुनर्वास के बाद स्थायी और गरिमापूर्ण रोजगार के अवसरों की उपलब्धता।
* **तकनीकी समाधानों का अभाव:** मशीनीकृत सफाई के लिए पर्याप्त बुनियादी ढाँचा और उपकरणों की कमी।
4. **नमस्ते योजना की भूमिका:**
* मशीनीकृत सफाई को बढ़ावा देकर जोखिम को कम करना।
* कौशल विकास और आजीविका सहायता के माध्यम से स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित करना।
* राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर काम करने पर जोर।
5. **निष्कर्ष:** प्रथा के पूर्ण उन्मूलन के लिए निरंतर प्रयासों, प्रभावी कानून प्रवर्तन, सामाजिक जागरूकता और तकनीकी नवाचारों की आवश्यकता पर बल देते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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