07 Aug राज्यसभा ने पारित किया विनियोग (संख्या 3) विधेयक, लोकसभा ने कर विधेयक बिना बहस पास किया
✎ विनियोग विधेयक सरकार को भारत की संचित निधि से व्यय करने का अधिकार देता है, जबकि कराधान विधेयक कर कानूनों को संशोधित करता है, और दोनों ही धन विधेयक होने के कारण लोकसभा में अधिक शक्ति रखते हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान, संसद और राज्य विधायिका—संरचना, कार्यपद्धति, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय। | GS Paper III — सरकारी बजट।
- Prelims: विनियोग विधेयक, कराधान विधेयक, भारत की संचित निधि, धन विधेयक, राज्यसभा की शक्तियाँ, लोकसभा की शक्तियाँ
- Essay: भारतीय संसद में विधायी प्रक्रिया और जवाबदेही का महत्व।, राजकोषीय संघवाद और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध।
त्वरित पुनरावृत्ति: विनियोग विधेयक सरकार को भारत की संचित निधि से व्यय करने का अधिकार देता है, जबकि कराधान विधेयक कर कानूनों को संशोधित करता है, और दोनों ही धन विधेयक होने के कारण लोकसभा में अधिक शक्ति रखते हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
संसद के मानसून सत्र के 14वें दिन, राज्यसभा ने विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी, जबकि लोकसभा ने कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को बिना किसी बहस के पारित कर दिया। ये दोनों विधेयक सरकार के वित्तीय प्रबंधन और कराधान नीतियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, और इनका पारित होना विधायी प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण चरण को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) सरकार को भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से धन निकालने और खर्च करने का अधिकार देता है।
- धन विधेयक (Money Bill) की श्रेणी में आने वाले ये विधेयक लोकसभा में ही प्रस्तुत किए जा सकते हैं और राज्यसभा की शक्तियाँ इन पर सीमित होती हैं।
- राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकृत या संशोधित नहीं कर सकती, बल्कि केवल सिफारिशें कर सकती है, जिन्हें लोकसभा स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।
विनियोग विधेयक और कराधान विधेयक क्या हैं?
- विनियोग विधेयक: यह एक धन विधेयक है जो सरकार को वित्तीय वर्ष के लिए भारत की संचित निधि से धन निकालने और खर्च करने की अनुमति देता है। यह बजट प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है।
- उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के लिए आवश्यक व्यय को अधिकृत करना है, ताकि वे अपने कार्यों को पूरा कर सकें।
- राज्यसभा की भूमिका: राज्यसभा विनियोग विधेयक को केवल 14 दिनों के लिए रोक सकती है और उस पर सिफारिशें कर सकती है, लेकिन इसे अस्वीकृत या संशोधित नहीं कर सकती। लोकसभा इन सिफारिशों को मानने के लिए बाध्य नहीं है।
- कराधान विधेयक: यह विधेयक कराधान से संबंधित कानूनों में संशोधन करता है, जैसे आयकर अधिनियम (Income-tax Act) या वित्त अधिनियम (Finance Act)। इसका उद्देश्य सरकार के राजस्व संग्रह को प्रभावित करना और आर्थिक नीतियों को लागू करना है।
- धन विधेयक की प्रकृति: कराधान से संबंधित अधिकांश विधेयक भी धन विधेयक की श्रेणी में आते हैं, जिससे उनकी विधायी प्रक्रिया विनियोग विधेयक के समान होती है।
- लोकसभा की प्रधानता: धन विधेयक होने के कारण, कराधान विधेयक को भी लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जाता है और लोकसभा के पास इसे पारित करने में अधिक शक्तियाँ होती हैं।
- प्रभाव: ये विधेयक देश की अर्थव्यवस्था, सरकारी राजस्व और व्यय पर सीधा प्रभाव डालते हैं, जिससे नागरिकों और व्यवसायों पर भी असर पड़ता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026 | यह विधेयक भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से वित्तीय वर्ष 2025-26 की सेवाओं के लिए कुछ अतिरिक्त राशियों के भुगतान और विनियोग को अधिकृत करता है। यह सरकार को अपने व्यय को पूरा करने के लिए धन निकालने की अनुमति देता है। |
| कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 | यह विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में संशोधन करना चाहता है। यह देश की कराधान और वित्तीय प्रणालियों को अद्यतन करने और विनियमित करने में महत्वपूर्ण है। |
| संसदीय बहस का अभाव | लोकसभा में कराधान विधेयक बिना बहस के पारित किया गया, जो महत्वपूर्ण वित्तीय विधानों पर विधायी जांच की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है। |
| जम्मू-कश्मीर पर केंद्रीय प्रशासन | वित्त मंत्री ने अनुच्छेद 370 (Article 370) के निरसन के बाद जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय प्रशासन के तहत किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला, जिसमें क्षेत्र के विकास और ‘ओवरहैंग्स’ को दूर करने पर जोर दिया गया। |
| फरक्का संधि, 1996 | एक सांसद ने भारत-बांग्लादेश फरक्का संधि के नवीनीकरण न करने का अनुरोध किया, जो गंगा जल-बंटवारे से संबंधित है और बिहार के हितों को प्रभावित करती है। यह अंतर-राज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय जल-बंटवारे के मुद्दों की संवेदनशीलता को दर्शाता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- विनियोग विधेयक सरकार को अपने व्यय को पूरा करने के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों तक पहुँच प्रदान करता है, जिससे सरकारी सेवाओं और कार्यक्रमों का निर्बाध संचालन सुनिश्चित होता है।
- कराधान विधेयक में संशोधन देश की वित्तीय नीतियों को अद्यतन करते हैं, जो आर्थिक स्थिरता और राजस्व संग्रह को प्रभावित कर सकते हैं।
विधायी महत्व
- विधेयकों का पारित होना संसदीय प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है, जो कानून बनाने और सरकार के कामकाज को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
- कराधान विधेयक पर बहस की कमी विधायी जांच और लोकतंत्र में पारदर्शिता के महत्व पर सवाल उठाती है।
संघवाद और अंतर-राज्यीय संबंध
- फरक्का संधि का मुद्दा अंतर-राज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय जल-बंटवारे के समझौतों के महत्व और उनके राज्यों पर पड़ने वाले प्रभावों को उजागर करता है।
- जम्मू-कश्मीर पर केंद्रीय प्रशासन के तहत किए गए कार्यों पर चर्चा संघवाद (Federalism) और केंद्र-राज्य संबंधों की गतिशीलता को दर्शाती है।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया
- विपक्ष द्वारा गृह मंत्री से बयान की मांग और विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की इच्छा लोकतंत्र में जवाबदेही और सरकार की पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करती है।
चुनौतियाँ
1. विधायी जांच का अभाव
- महत्वपूर्ण वित्तीय विधेयकों, जैसे कराधान विधेयक, का बिना बहस के पारित होना विधायी जांच की गुणवत्ता को कम करता है।
- यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त चर्चा और जांच के बिना कानून पारित होने से संभावित कमियों या अनपेक्षित परिणामों का जोखिम बढ़ जाता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संसद और उसकी कार्यप्रणाली
2. केंद्र-राज्य संबंध और जल-बंटवारा
- फरक्का संधि के नवीनीकरण पर बिहार के हितों से संबंधित चिंताएँ केंद्र-राज्य संबंधों और अंतर-राज्यीय जल-बंटवारे के समझौतों की जटिलताओं को दर्शाती हैं।
- नदी जल-बंटवारे के मुद्दे अक्सर राज्यों के बीच तनाव पैदा करते हैं और राष्ट्रीय एकता के लिए चुनौती बन सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
3. कानून और व्यवस्था तथा नागरिक स्वतंत्रताएँ
- विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई और गृह मंत्री से बयान की विपक्ष की मांग कानून और व्यवस्था बनाए रखने और नागरिक स्वतंत्रता (Civil Liberties) के अधिकार के बीच संतुलन की चुनौती को उजागर करती है।
- सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है, खासकर जब बल प्रयोग का आरोप हो।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, मौलिक अधिकार
4. संसदीय गतिरोध
- विपक्ष द्वारा बयान की मांग और सरकार द्वारा प्रतिक्रिया की कमी के कारण अक्सर संसदीय कार्यवाही में गतिरोध (Logjam) होता है, जिससे महत्वपूर्ण विधायी कार्यों में बाधा आती है।
यूपीएससी लिंक: संसदीय कार्यप्रणाली, लोकतंत्र
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| कराधान विधेयक पर बहस का अभाव | लोकतांत्रिक जवाबदेही और विधायी जांच की कमी। |
| फरक्का संधि का नवीनीकरण | अंतर-राज्यीय हितों का टकराव और जल-बंटवारे के मुद्दे। |
| विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई | नागरिक स्वतंत्रता और सरकार की जवाबदेही पर सवाल। |
| संसदीय गतिरोध | विधायी कार्यों में बाधा और सार्वजनिक धन का अपव्यय। |
आगे की राह
- महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त संसदीय बहस और जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि कानून निर्माण की गुणवत्ता और लोकतांत्रिक जवाबदेही बनी रहे।
- केंद्र और राज्यों के बीच जल-बंटवारे जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) के सिद्धांतों का पालन करते हुए आम सहमति बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
- विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई के संबंध में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए, और गृह मंत्री को संसद में बयान देने पर विचार करना चाहिए।
- संसदीय कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार और विपक्ष के बीच रचनात्मक संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों के लिए विकास और शासन संबंधी पहलों में स्थानीय लोगों की भागीदारी और उनकी आकांक्षाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- कानून और व्यवस्था बनाए रखते हुए नागरिकों के मौलिक अधिकारों, विशेषकर विरोध करने के अधिकार का सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विनियोग विधेयक · कराधान विधेयक · भारत की संचित निधि · संसदीय प्रक्रिया · धन विधेयक · लोकसभा की शक्तियाँ · राज्यसभा की भूमिका · राजकोषीय नीतियाँ · संसदीय संप्रभुता · अनुच्छेद 110 · अनुच्छेद 114 · वित्तीय विधेयक
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 114’, ‘note’: ‘विनियोग विधेयक से संबंधित प्रावधान’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 265’, ‘note’: ‘कानून के प्राधिकार के बिना कर नहीं लगाया जाएगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 266’, ‘note’: ‘भारत की संचित निधि और लोक लेखा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 370’, ‘note’: ‘जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति (निरसित)’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 262’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों का न्यायनिर्णयन’}
अवधारणा प्रवाह
संसद में विधेयक पारित → सरकार को धन का अधिकार → कराधान और वित्तीय नीतियों में संशोधन → विधायी जांच पर बहस का अभाव → केंद्र-राज्य संबंधों पर प्रभाव → लोकतांत्रिक जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) एक धन विधेयक (Money Bill) है।
2. कराधान विधेयक (Taxation Bill) को लोकसभा में पारित होने के बाद राज्यसभा में चर्चा के लिए भेजा जाता है, जहाँ वह अधिकतम 14 दिनों तक रोका जा सकता है।
3. भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से धन निकालने के लिए विनियोग विधेयक का पारित होना आवश्यक है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। विनियोग विधेयक, जो भारत की संचित निधि से धन के विनियोग को अधिकृत करता है, एक धन विधेयक होता है।
कथन 2 सही है। कराधान विधेयक भी धन विधेयक की श्रेणी में आ सकता है, और धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा की शक्तियाँ सीमित होती हैं; वह इसे अधिकतम 14 दिनों तक रोक सकती है या संशोधनों की सिफारिश कर सकती है, जिन्हें लोकसभा स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।
कथन 3 सही है। संविधान के अनुच्छेद 114 के अनुसार, भारत की संचित निधि से कोई भी धन तब तक नहीं निकाला जा सकता जब तक कि संसद द्वारा पारित विनियोग विधेयक द्वारा ऐसा करने के लिए कानून द्वारा अधिकृत न किया गया हो।
Q2. अभिकथन (A): लोकसभा में कराधान विधेयक बिना किसी बहस के पारित हो सकता है।
कारण (R): धन विधेयक होने के कारण, कराधान विधेयक पर राज्यसभा की शक्तियाँ सीमित होती हैं और लोकसभा को इस पर व्यापक अधिकार प्राप्त होते हैं।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि समाचार के अनुसार, कराधान विधेयक लोकसभा में बिना बहस के पारित किया गया। कारण (R) भी सही है। कराधान विधेयक अक्सर धन विधेयक की श्रेणी में आते हैं (अनुच्छेद 110)। धन विधेयक के संबंध में, लोकसभा को विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं और राज्यसभा की शक्तियाँ सीमित होती हैं। हालांकि, बिना बहस के पारित होना एक प्रक्रियात्मक निर्णय है, जो सदन के नियमों और सदस्यों की सहमति पर निर्भर करता है, न कि केवल धन विधेयक होने पर। फिर भी, लोकसभा की सर्वोच्चता और सीमित बहस की संभावना धन विधेयक के संदर्भ में अधिक होती है।
Q3. भारत में ‘धन विधेयक’ के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. इसे केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है।
2. इसे राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश पर ही पेश किया जा सकता है।
3. राज्यसभा इसे अस्वीकार या संशोधित नहीं कर सकती है।
4. लोकसभा अध्यक्ष यह तय करता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं।
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — कथन 1 सही है। धन विधेयक केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है।
कथन 2 सही है। इसे राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश पर ही पेश किया जा सकता है।
कथन 3 गलत है। राज्यसभा इसे अस्वीकार या संशोधित नहीं कर सकती, लेकिन संशोधनों की सिफारिश कर सकती है, जिन्हें लोकसभा स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है। यह इसे पूरी तरह से अस्वीकार नहीं कर सकती।
कथन 4 सही है। लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ विनियोग विधेयक और कराधान विधेयक भारतीय संसदीय वित्तीय प्रक्रिया के महत्वपूर्ण उपकरण हैं। इन विधेयकों के संवैधानिक प्रावधानों और पारित होने की प्रक्रिया का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, धन विधेयक के रूप में इनकी प्रकृति भारतीय संघवाद में लोकसभा की सर्वोच्चता को कैसे दर्शाती है, चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: विनियोग और कराधान विधेयकों का संक्षिप्त परिचय, भारतीय वित्तीय प्रणाली में उनकी भूमिका।
2. विनियोग विधेयक (Appropriation Bill):
a. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 114 (विनियोग विधेयक) और अनुच्छेद 266 (भारत की संचित निधि)।
b. उद्देश्य: भारत की संचित निधि से धन निकालने की अनुमति।
c. प्रक्रिया: लोकसभा में पेश, बहस, मतदान, राज्यसभा की सीमित भूमिका (धन विधेयक के रूप में)।
3. कराधान विधेयक (Taxation Bill):
a. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 110 (धन विधेयक की परिभाषा) और अनुच्छेद 265 (कानून के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं)।
b. उद्देश्य: नए कर लगाना, मौजूदा करों को संशोधित करना या समाप्त करना।
c. प्रक्रिया: लोकसभा में पेश, बहस, मतदान, राज्यसभा की सीमित भूमिका (धन विधेयक के रूप में)।
4. धन विधेयक के रूप में प्रकृति और लोकसभा की सर्वोच्चता:
a. अनुच्छेद 110: धन विधेयक की परिभाषा और लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका।
b. राज्यसभा की सीमित शक्तियाँ: अधिकतम 14 दिन तक रोक सकती है, सिफारिशें कर सकती है जिन्हें लोकसभा स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।
c. वित्तीय मामलों में लोकसभा की निर्णायक शक्ति: ‘जनता का सदन’ होने के नाते वित्तीय नियंत्रण।
d. संघवाद पर प्रभाव: राज्यों के वित्तीय हितों पर केंद्र का नियंत्रण।
5. निष्कर्ष: भारतीय वित्तीय प्रणाली में इन विधेयकों का महत्व और लोकसभा की केंद्रीय भूमिका का सारांश।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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