राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन: उद्देश्य, घटक एवं भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन: उद्देश्य, घटक एवं भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों का संग्रहण, वृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; निवेश मॉडल; बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़कें, विमानपत्तन, रेलवे आदि।
  • Prelims: राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM), तकनीकी वस्त्र, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना, वस्त्र मंत्रालय, व्यापार अधिशेष, मानव निर्मित फाइबर (MMF)
  • Essay: आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में तकनीकी नवाचार की भूमिका, भारत में विनिर्माण क्षेत्र का विकास और निर्यात संवर्धन

त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) भारत में तकनीकी वस्त्र क्षेत्र के समग्र विकास और संवर्धन के लिए 2020 में शुरू की गई एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी उत्पादन, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

वस्त्र मंत्रालय ने हाल ही में लोकसभा में राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) के तहत की गई प्रगति की जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि मिशन के घटक-II (प्रचार एवं बाजार विकास) के अंतर्गत तकनीकी वस्त्रों के अनुप्रयोगों और लाभों को बढ़ावा देने के लिए 47 राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया गया है। इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू तकनीकी वस्त्र उद्योग ने 3,420.20 करोड़ रुपये का शुद्ध व्यापार अधिशेष दर्ज किया है, जो इस क्षेत्र के बढ़ते महत्व और क्षमता को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार ने देश में तकनीकी वस्त्र क्षेत्र के समग्र विकास और संवर्धन के उद्देश्य से वर्ष 2020 में राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) का शुभारंभ किया।
  • तकनीकी वस्त्र (Technical Textiles) ऐसे वस्त्र उत्पाद हैं जिनका उपयोग सौंदर्य या सजावटी उद्देश्यों के बजाय कार्यात्मक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। इनमें उच्च प्रदर्शन वाले फाइबर और सामग्री शामिल होती हैं।
  • तकनीकी वस्त्रों के अनुप्रयोग कृषि, चिकित्सा, निर्माण, खेल और सुरक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में फैले हुए हैं।
  • घरेलू मांग को प्रोत्साहित करने के लिए, विभिन्न अंतिम-उपयोगकर्ता मंत्रालयों/विभागों और राज्य सरकारों को चिन्हित अनुप्रयोग क्षेत्रों में तकनीकी वस्त्रों को अनिवार्य रूप से अपनाने की अनुशंसा की गई है।
  • वस्त्रों के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना भी तकनीकी वस्त्रों को एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में शामिल करती है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है।

राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) क्या है?

  • राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) वस्त्र मंत्रालय द्वारा वर्ष 2020 में शुरू की गई एक प्रमुख पहल है, जिसका लक्ष्य भारत को तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में वैश्विक नेता बनाना है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य कृषि वस्त्र (Agro-textiles), भू-वस्त्र (Geo-textiles), चिकित्सा वस्त्र (Medical textiles), औद्योगिक वस्त्र (Industrial textiles), सुरक्षात्मक वस्त्र (Protective textiles) और खेल प्रौद्योगिकी (Sportech) जैसे मूल्यवर्धित तकनीकी वस्त्र उत्पादों के स्वदेशी विकास, उत्पादन और व्यावसायीकरण को बढ़ावा देना है।
  • मिशन का एक महत्वपूर्ण घटक तकनीकी वस्त्रों के अनुप्रयोगों और लाभों के बारे में हितधारकों, उपयोगकर्ता मंत्रालयों/विभागों और आम जनता के बीच जागरूकता बढ़ाना है। इसके लिए कार्यशालाओं, सम्मेलनों, प्रदर्शनियों और कौशल विकास कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
  • यह मिशन मानव निर्मित फाइबर (MMF) और तकनीकी वस्त्रों की मूल्य श्रृंखला में भारत की वर्तमान संरचनात्मक कमियों को दूर करने और उच्च मूल्यवर्धित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है।
  • NTTM का लक्ष्य उत्पादन क्षमता में वृद्धि, उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा देना और वस्त्र क्षेत्र की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करना है।
  • मिशन के तहत अनुसंधान एवं विकास पर विशेष जोर दिया गया है ताकि तकनीकी वस्त्रों में नवाचार और गुणवत्ता को बढ़ावा दिया जा सके।
  • उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना के साथ मिलकर, यह मिशन घरेलू तकनीकी वस्त्र उद्योग के विकास को महत्वपूर्ण प्रोत्साहन देने और वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की अपेक्षा रखता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
शुभारंभ वस्त्र मंत्रालय द्वारा वर्ष 2020 में देश में तकनीकी वस्त्र क्षेत्र के समग्र विकास एवं संवर्धन हेतु।
घटक-II (प्रचार एवं बाजार विकास) तकनीकी वस्त्रों के अनुप्रयोगों, संभावनाओं एवं लाभों के प्रचार-प्रसार तथा बाजार विकास को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन।
व्यापार अधिशेष वित्त वर्ष 2025-26 में 3,420.20 करोड़ रुपये का शुद्ध व्यापार अधिशेष, जो क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
उद्देश्य मूल्यवर्धित तकनीकी वस्त्र उत्पादों के स्वदेशी विकास, उत्पादन एवं व्यावसायीकरण को बढ़ावा देना।
जागरूकता कार्यशालाओं, सम्मेलनों, प्रदर्शनियों तथा कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से हितधारकों एवं आम जनता में जागरूकता बढ़ाना।
अनिवार्य उपयोग की अनुशंसा घरेलू मांग को प्रोत्साहित करने हेतु विभिन्न अंतिम उपयोगकर्ता मंत्रालयों/विभागों तथा राज्य सरकारों द्वारा तकनीकी वस्त्रों को अनिवार्य रूप से अपनाने की अनुशंसा।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • तकनीकी वस्त्रों में 3,420.20 करोड़ रुपये का शुद्ध व्यापार अधिशेष दर्ज करना, जो निर्यात वृद्धि और आयात प्रतिस्थापन की क्षमता को दर्शाता है।
  • उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना के माध्यम से बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता विकसित करना और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना।
  • उच्च मूल्यवर्धित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित कर आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा देना और रोजगार सृजन करना।

सामरिक महत्व

  • कृषि, चिकित्सा, सुरक्षा और औद्योगिक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्वदेशी विकास और उत्पादन को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) प्राप्त करना।
  • उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने और वस्त्र क्षेत्र की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करके भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक सशक्त भागीदार के रूप में स्थापित करना।

सामाजिक महत्व

  • कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित करना।
  • सुरक्षात्मक वस्त्रों जैसे उत्पादों के विकास से सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य में सुधार लाना।

पर्यावरणीय महत्व

  • भू-वस्त्र (Geotextiles) जैसे तकनीकी वस्त्रों का उपयोग करके बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में स्थिरता और दीर्घायु को बढ़ावा देना।

चुनौतियाँ

1. जागरूकता एवं अंगीकरण का अभाव

  • अंतिम उपयोगकर्ता मंत्रालयों/विभागों और आम जनता के बीच तकनीकी वस्त्रों के अनुप्रयोगों और लाभों के बारे में पर्याप्त जागरूकता की कमी।
  • पारंपरिक वस्त्रों की तुलना में तकनीकी वस्त्रों की उच्च प्रारंभिक लागत के कारण अंगीकरण (Adoption) में हिचकिचाहट।

2. अनुसंधान एवं विकास में निवेश की कमी

  • तकनीकी वस्त्रों में नवाचार और उत्पाद विकास के लिए पर्याप्त अनुसंधान एवं विकास (R&D) निवेश का अभाव।
  • अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों और विशेषज्ञता तक सीमित पहुंच।

3. कौशल विकास एवं जनशक्ति

  • तकनीकी वस्त्रों के उत्पादन और अनुप्रयोग के लिए विशिष्ट कौशल वाले प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी।
  • उद्योग की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कौशल विकास कार्यक्रमों का अभाव।

4. घरेलू मांग को प्रोत्साहित करना

  • विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी वस्त्रों के अनिवार्य उपयोग की अनुशंसा के बावजूद, वास्तविक कार्यान्वयन में चुनौतियाँ।
  • घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने की आवश्यकता।

5. वैश्विक प्रतिस्पर्धा

  • अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में स्थापित खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना।
  • गुणवत्ता, लागत और नवाचार के मामले में वैश्विक मानकों को पूरा करने का दबाव।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
जागरूकता और स्वीकार्यता तकनीकी वस्त्रों के लाभों के बारे में जानकारी की कमी और पारंपरिक विकल्पों पर निर्भरता।
अनुसंधान एवं विकास निवेश नवाचार और उत्पाद विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी सहायता का अभाव।
कौशल अंतराल तकनीकी वस्त्रों के उत्पादन और अनुप्रयोग के लिए विशिष्ट कौशल वाले प्रशिक्षित कार्यबल की कमी।
घरेलू मांग विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी वस्त्रों के अनिवार्य उपयोग को सुनिश्चित करने में कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियाँ।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में स्थापित खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता मानकों को पूरा करने का दबाव।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (National Technical Textiles Mission)
  • उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना (वस्त्रों के लिए)

आगे की राह

  • तकनीकी वस्त्रों के अनुप्रयोगों और लाभों के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं, विशेषकर अंतिम उपयोगकर्ता मंत्रालयों/विभागों और उद्योगों के बीच।
  • अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) मॉडल को प्रोत्साहित किया जाए और अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं की स्थापना की जाए।
  • तकनीकी वस्त्रों के लिए विशिष्ट कौशल विकास कार्यक्रम और व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू किए जाएं ताकि प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी को पूरा किया जा सके।
  • घरेलू मांग को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी खरीद नीतियों में तकनीकी वस्त्रों के अनिवार्य उपयोग को सख्ती से लागू किया जाए और इसके लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं।
  • तकनीकी वस्त्रों के उत्पादन में गुणवत्ता मानकों और प्रमाणन प्रक्रियाओं को मजबूत किया जाए ताकि वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सके।
  • निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में भारतीय तकनीकी वस्त्रों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
  • लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) को तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में प्रवेश करने और नवाचार करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और तकनीकी सहायता प्रदान की जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

तकनीकी वस्त्रों की पहचान  →  राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन का शुभारंभ  →  अनुसंधान, विकास और जागरूकता पर ध्यान  →  उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना का समर्थन  →  घरेलू उत्पादन और निर्यात में वृद्धि  →  व्यापार अधिशेष और वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका शुभारंभ वस्त्र मंत्रालय द्वारा वर्ष 2020 में किया गया था।
2. इसका उद्देश्य केवल कृषि वस्त्र और चिकित्सा वस्त्र जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना है।
3. उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना, जिसमें तकनीकी वस्त्र एक प्रमुख क्षेत्र है, वस्त्र उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए शुरू की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन का शुभारंभ वस्त्र मंत्रालय द्वारा वर्ष 2020 में किया गया था। कथन 2 गलत है क्योंकि इसका उद्देश्य स्वदेशी विकास, उत्पादन और व्यावसायीकरण को बढ़ावा देना है, न कि केवल निर्यात को। इसमें कृषि वस्त्र, भू-वस्त्र, चिकित्सा वस्त्र, औद्योगिक वस्त्र, सुरक्षात्मक वस्त्र और खेल प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। कथन 3 सही है क्योंकि PLI योजना का उद्देश्य वस्त्र उद्योग को वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता विकसित करने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए है, जिसमें तकनीकी वस्त्र एक प्रमुख क्षेत्र है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-से क्षेत्र राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) के अंतर्गत मूल्यवर्धित तकनीकी वस्त्र उत्पादों के स्वदेशी विकास, उत्पादन एवं व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए लक्षित हैं?
1. कृषि वस्त्र
2. भू-वस्त्र
3. चिकित्सा वस्त्र
4. औद्योगिक वस्त्र
5. सुरक्षात्मक वस्त्र
6. खेल प्रौद्योगिकी
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1, 2 और 3
  2. केवल 4, 5 और 6
  3. 1, 2, 3, 4, 5 और 6
  4. केवल 1, 3, 5 और 6

उत्तर: 1, 2, 3, 4, 5 और 6 — राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन का उद्देश्य कृषि वस्त्र, भू-वस्त्र, चिकित्सा वस्त्र, औद्योगिक वस्त्र, सुरक्षात्मक वस्त्र तथा खेल प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों सहित मूल्यवर्धित तकनीकी वस्त्र उत्पादों के स्वदेशी विकास, उत्पादन एवं व्यावसायीकरण को बढ़ावा देना है। अतः सभी विकल्प सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) के उद्देश्यों और प्रमुख घटकों का विश्लेषण कीजिए। भारत में तकनीकी वस्त्र उद्योग के विकास में यह मिशन किस प्रकार सहायक सिद्ध हो सकता है? चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) के उद्देश्यों और प्रमुख घटकों का विस्तार से उल्लेख करें। इसमें मिशन के शुभारंभ, लक्ष्य क्षेत्रों (जैसे कृषि वस्त्र, चिकित्सा वस्त्र आदि), और बाजार विकास, कौशल उन्नयन तथा नवाचार पर इसके फोकस को शामिल करें। दूसरे भाग में, चर्चा करें कि यह मिशन भारत में तकनीकी वस्त्र उद्योग के विकास में कैसे योगदान दे सकता है। इसमें घरेलू मांग को प्रोत्साहित करने, निर्यात बढ़ाने, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना के साथ तालमेल, उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करने जैसे बिंदुओं पर प्रकाश डालें। अंत में, एक संक्षिप्त निष्कर्ष दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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