12 Aug लोकसभा ने बिना बहस खनन विधेयक पारित किया, विपक्ष ने किया विरोध प्रदर्शन
✎ यह विधेयक राज्यों को खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर लगाने से रोकता है और केंद्र को खनिज विनियमन पर अधिक नियंत्रण देता है, जिससे संघवाद पर बहस छिड़ गई है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: संघ और राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघवाद से संबंधित मुद्दे और चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ। | GS Paper II — संसद और राज्य विधानमंडल — संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय। | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोजगार।
- Prelims: खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957, संघवाद, राज्य सूची, संघ सूची, समवर्ती सूची, खनिज अधिकार, अतिरिक्त कर, संसदीय प्रक्रिया
- Essay: भारत में संघवाद की चुनौतियाँ और भविष्य, संसदीय लोकतंत्र में बहस और असहमति का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: यह विधेयक राज्यों को खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर लगाने से रोकता है और केंद्र को खनिज विनियमन पर अधिक नियंत्रण देता है, जिससे संघवाद पर बहस छिड़ गई है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
लोकसभा ने हाल ही में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026) को बिना किसी बहस के पारित कर दिया है। विपक्षी सदस्यों ने इस विधेयक का विरोध किया, विशेषकर इस आधार पर कि यह संघवाद (Federalism) के सिद्धांतों के विरुद्ध है और राज्यों के खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर (Additional Tax) लगाने की शक्ति को सीमित करता है।
पृष्ठभूमि
- खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957) भारत में खनन क्षेत्र को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है।
- संविधान की सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) के तहत, ‘खनन और खनिजों का विनियमन’ संघ सूची (Union List) और राज्य सूची (State List) दोनों में शामिल है, जिससे केंद्र और राज्य दोनों को कानून बनाने की शक्ति मिलती है।
- राज्यों को अपने अधिकार क्षेत्र में खनिजों पर रॉयल्टी (Royalty), उपकर (Cess) और अन्य शुल्क लगाने का अधिकार रहा है।
- यह संशोधन विधेयक राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर, उपकर या लेवी लगाने पर प्रतिबंध लगाता है।
- विधेयक का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में अनिश्चितता को कम करना, लागत बढ़ाना और घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं (Domestic Supply Chains) को कमजोर करना है, जैसा कि कोयला और खान मंत्री ने बताया।
- विपक्षी सदस्यों ने विधेयक को संघीय ढांचे के विरुद्ध बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया, जिससे सदन में बहस नहीं हो सकी।
खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 क्या है?
- यह विधेयक खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम में संशोधन करता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य राज्यों को खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर, उपकर या किसी अन्य प्रकार की लेवी (Levy) लगाने से रोकना है।
- यह केंद्र सरकार को खनिज-संपन्न भूमि (Mineral-laden Lands) के विनियमन पर अधिक नियंत्रण प्रदान करता है।
- सरकार का तर्क है कि राज्यों द्वारा लगाए गए विभिन्न राजकोषीय शुल्क (Fiscal Levies) ने खनिज क्षेत्र में अनिश्चितता पैदा की है, जिससे लागत बढ़ सकती है और आयात को प्रोत्साहन मिल सकता है।
- विधेयक का लक्ष्य खनिज क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना और घरेलू खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है।
- इस विधेयक के प्रावधानों से राज्यों के राजस्व पर संभावित प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि उनकी कर लगाने की शक्ति सीमित हो जाएगी।
- विपक्षी दलों ने इसे संघवाद के सिद्धांत के खिलाफ बताया है, क्योंकि यह राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता (Financial Autonomy) को प्रभावित करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| राज्य सरकारों पर अतिरिक्त करों पर प्रतिबंध | खनिज अधिकारों पर राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले अतिरिक्त करों, उपकरों या शुल्कों पर रोक लगाता है। यह खनिज क्षेत्र में अनिश्चितता को कम करने और लागत को स्थिर करने में सहायक होगा। |
| केंद्र सरकार का अधिक नियंत्रण | खनिज-समृद्ध भूमि के विनियमन पर केंद्र सरकार को अधिक नियंत्रण प्रदान करता है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर एकरूपता सुनिश्चित हो सकेगी। |
| खनिज क्षेत्र में निवेश प्रोत्साहन | राज्यों द्वारा भिन्न-भिन्न राजकोषीय शुल्कों से उत्पन्न होने वाली अनिश्चितता को समाप्त कर घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद करेगा। |
| घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करना | उच्च लागत और आयात पर निर्भरता को कम करके घरेलू खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखता है। |
| खनिज विकास और विनियमन अधिनियम में संशोधन | खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026, मौजूदा नियमों में बदलाव करके खनिज क्षेत्र के प्रशासन को सुव्यवस्थित करेगा। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह विधेयक खनिज क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देगा, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिलेगी।
- खनिज उत्पादन लागत को स्थिर करके और आयात पर निर्भरता कम करके घरेलू उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
- खनिज क्षेत्र में नीतिगत स्थिरता लाकर व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) में सुधार करेगा।
सामरिक महत्व
- खनिज संसाधनों पर केंद्र का अधिक नियंत्रण राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
- घरेलू खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करके महत्वपूर्ण खनिजों के लिए विदेशी निर्भरता को कम करेगा।
शासन संबंधी महत्व
- खनिज क्षेत्र में राज्यों और केंद्र के बीच राजकोषीय विवादों को कम करने में सहायक होगा।
- खनिज संसाधनों के कुशल प्रबंधन और विनियमन के लिए एक समान राष्ट्रीय ढांचा प्रदान करेगा।
चुनौतियाँ
1. संघवाद पर प्रभाव
- विधेयक राज्यों को खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर लगाने से प्रतिबंधित करता है, जिसे कुछ राज्यों द्वारा संघवाद (Federalism) के सिद्धांतों के विरुद्ध माना जा रहा है।
- यह राज्यों के राजस्व स्रोतों को प्रभावित कर सकता है, जिससे केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों में तनाव उत्पन्न हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएं – संघवाद
2. राज्यों के राजस्व पर असर
- खनिज-समृद्ध राज्यों के लिए, खनिज अधिकारों से प्राप्त होने वाला राजस्व एक महत्वपूर्ण आय स्रोत होता है। इस पर प्रतिबंध से उनके विकास कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- यह राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता (Financial Autonomy) को कम कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध
3. विधायी प्रक्रिया में बहस का अभाव
- लोकसभा में बिना बहस के विधेयक पारित होने से इसकी लोकतांत्रिक वैधता पर सवाल उठ सकते हैं।
- महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा के अभाव में कानून की गुणवत्ता और स्वीकार्यता प्रभावित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: संसद और राज्य विधायिकाएँ – कार्यप्रणाली
4. खनिज क्षेत्र में केंद्र का बढ़ता नियंत्रण
- विधेयक केंद्र को खनिज-समृद्ध भूमि के विनियमन पर अधिक नियंत्रण देता है, जिससे राज्यों की भूमिका सीमित हो सकती है।
- यह स्थानीय आवश्यकताओं और विशिष्टताओं की अनदेखी का कारण बन सकता है।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य संबंध – विधायी और प्रशासनिक
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| संघवाद का उल्लंघन | राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और खनिज संसाधनों पर उनके अधिकार का हनन। |
| राज्यों के राजस्व में कमी | खनिज-समृद्ध राज्यों के लिए आय के एक महत्वपूर्ण स्रोत पर प्रतिबंध से विकास कार्यों पर असर। |
| लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अभाव | बिना बहस के विधेयक पारित होने से विधायी प्रक्रिया की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल। |
| केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव | खनिज क्षेत्र में केंद्र के बढ़ते नियंत्रण से राज्यों के साथ विवाद की संभावना। |
| स्थानीय आवश्यकताओं की अनदेखी | केंद्र के अत्यधिक नियंत्रण से स्थानीय विशिष्टताओं और जरूरतों को पूरा करने में कठिनाई। |
आगे की राह
- केंद्र और राज्यों के बीच खनिज राजस्व साझाकरण के लिए एक पारदर्शी और न्यायसंगत तंत्र विकसित किया जाना चाहिए।
- विधेयकों पर संसद में पर्याप्त और सार्थक बहस सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि सभी हितधारकों के विचारों को सुना जा सके।
- खनिज क्षेत्र के विनियमन में राज्यों की भूमिका और स्वायत्तता को बनाए रखने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
- खनिज संसाधनों के सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति तैयार की जानी चाहिए।
- केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देने के लिए अंतर-राज्यीय परिषदों (Inter-State Councils) जैसे मंचों का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए।
- खनिज क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के अधिकारों और हितों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक · संघवाद · राज्य के अधिकार · केंद्र-राज्य संबंध · खनिज क्षेत्र · संसदीय प्रक्रिया · विधेयक पारित होना · राजकोषीय संघवाद · संविधान की सातवीं अनुसूची · खनन नीति
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों से संबंधित’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 265’, ‘note’: ‘कानून के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ या राज्य द्वारा किए गए व्यय’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची’}
अवधारणा प्रवाह
खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया गया। → विधेयक राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त करों पर प्रतिबंध लगाता है। → विधेयक खनिज विनियमन पर केंद्र को अधिक नियंत्रण देता है। → विपक्षी सदस्यों ने संघवाद के उल्लंघन का आरोप लगाया। → लोकसभा में बिना बहस के विधेयक पारित किया गया। → यह राज्यों के राजस्व और केंद्र-राज्य संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची में ‘खनिज’ विषय को राज्य सूची में शामिल किया गया है।
2. खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957, केंद्र सरकार को खनिजों के विनियमन का अधिकार देता है।
3. हाल ही में पारित खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026, राज्यों को खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर लगाने से प्रतिबंधित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 गलत है। संविधान की सातवीं अनुसूची में ‘खान और खनिज’ विषय को संघ सूची की प्रविष्टि 54 में शामिल किया गया है, जिसका अर्थ है कि केंद्र सरकार के पास इस पर कानून बनाने की शक्ति है। हालांकि, राज्य सरकारें भी कुछ हद तक विनियमन कर सकती हैं यदि संसद कानून द्वारा अन्यथा प्रदान न करे। कथन 2 सही है। खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957, केंद्र सरकार को खनिजों के विकास और विनियमन का अधिकार देता है। कथन 3 सही है। हालिया संशोधन विधेयक राज्यों को खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर, उपकर या शुल्क लगाने से रोकता है।
Q2. अभिकथन (A): खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026, संघवाद के सिद्धांत के विरुद्ध है।
कारण (R): यह विधेयक राज्यों को खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर लगाने से प्रतिबंधित करता है और केंद्र को खनिज-समृद्ध भूमि के विनियमन पर अधिक नियंत्रण देता है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं। विधेयक का मुख्य प्रावधान, जिसमें राज्यों को खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर लगाने से प्रतिबंधित किया गया है और केंद्र को अधिक नियंत्रण दिया गया है, को कुछ वर्गों द्वारा संघवाद के सिद्धांत के विरुद्ध माना जा रहा है क्योंकि यह राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और उनके प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण को सीमित करता है। इसलिए, कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधानों का विश्लेषण कीजिए। क्या यह विधेयक भारत में केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों और संघवाद की भावना को प्रभावित करता है? समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का संक्षिप्त परिचय दें और इसके पारित होने के संदर्भ का उल्लेख करें।
2. **विधेयक के प्रमुख प्रावधान:** विधेयक के मुख्य प्रावधानों का विस्तार से वर्णन करें, विशेष रूप से राज्यों द्वारा अतिरिक्त कर लगाने पर प्रतिबंध और केंद्र के बढ़े हुए नियंत्रण पर।
3. **केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों पर प्रभाव:** इस बात पर चर्चा करें कि विधेयक राज्यों के राजस्व स्रोतों और वित्तीय स्वायत्तता को कैसे प्रभावित करता है। अनुच्छेद 246, सातवीं अनुसूची की संघ सूची की प्रविष्टि 54 और राज्य सूची की प्रविष्टि 23 का संदर्भ दें।
4. **संघवाद पर प्रभाव:** इस बात का विश्लेषण करें कि विधेयक संघवाद के सिद्धांत (विशेषकर राजकोषीय संघवाद) को कैसे प्रभावित करता है। उन तर्कों को प्रस्तुत करें जो इसे संघवाद के विरुद्ध मानते हैं (जैसे राज्यों के अधिकारों का हनन) और उन तर्कों को भी प्रस्तुत करें जो इसके पक्ष में हैं (जैसे खनिज क्षेत्र में एकरूपता, निवेश को बढ़ावा)।
5. **न्यायिक समीक्षा और संवैधानिक निहितार्थ:** यदि प्रासंगिक हो, तो ऐसे कानूनों की न्यायिक समीक्षा की संभावना और संवैधानिक चुनौतियों पर संक्षेप में चर्चा करें।
6. **निष्कर्ष:** एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें जो विधेयक के महत्व और संघवाद पर इसके संभावित दीर्घकालिक प्रभावों को सारांशित करे।
स्रोत: The Hindu
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