08 Aug लोकसभा में उठा एआई का अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं में उपयोग का सवाल
✎ अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग डिजिटल शासन को प्रभावी बनाने का एक प्रयास है, जिसे डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और इंडिया AI गवर्नेंस दिशानिर्देशों के तहत डेटा गोपनीयता व भेदभाव-रहित…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंडिया AI मिशन, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, हज सुविधा ऐप, डिजिटल शासन, डेटा गोपनीयता, भेदभाव-रहित AI
- Essay: कृत्रिम बुद्धिमत्ता और समावेशी विकास, प्रौद्योगिकी का उत्तरदायी उपयोग: शासन और नागरिक अधिकार
त्वरित पुनरावृत्ति: अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग डिजिटल शासन को प्रभावी बनाने का एक प्रयास है, जिसे डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और इंडिया AI गवर्नेंस दिशानिर्देशों के तहत डेटा गोपनीयता व भेदभाव-रहित सुनिश्चित करते हुए कार्यान्वित किया जाना चाहिए।
यह खबर चर्चा में क्यों?
मैसूरु-कोडागु लोकसभा सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग पर लोकसभा में प्रश्न उठाया है। उन्होंने AI के उपयोग के उद्देश्यों, कार्यान्वयन के लिए नियोजित योजनाओं, व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा, भेदभाव की रोकथाम और स्वतंत्र मूल्यांकन तंत्रों के बारे में जानकारी मांगी। मंत्रालय ने जवाब में कहा कि वह इंडिया AI मिशन के तहत डिजिटल शासन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए AI-आधारित प्रौद्योगिकियों की जांच कर रहा है, जो डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 का अनुपालन करेगा।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार डिजिटल शासन को बढ़ावा देने और नागरिक सेवाओं को सुगम बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का सक्रिय रूप से उपयोग कर रही है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) विभिन्न क्षेत्रों में दक्षता, पारदर्शिता और पहुंच बढ़ाने की क्षमता रखती है, जिसमें सरकारी सेवाएं भी शामिल हैं।
- हालांकि, AI के उपयोग से डेटा गोपनीयता (Data Privacy), डेटा सुरक्षा (Data Security), एल्गोरिथम संबंधी पूर्वाग्रह (Algorithmic Bias) और भेदभाव (Discrimination) जैसी चिंताएं भी उत्पन्न होती हैं, विशेषकर संवेदनशील क्षेत्रों जैसे अल्पसंख्यक कल्याण में।
- सरकार ने AI के सुरक्षित, निष्पक्ष और उत्तरदायी उपयोग के लिए 5 नवंबर, 2025 को इंडिया AI गवर्नेंस दिशानिर्देश (India AI Governance Guidelines) जारी किए हैं।
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act, 2023) व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
- अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है, जिसमें बहुभाषी AI चैटबॉट, वर्चुअल असिस्टेंट सिस्टम और हज सुविधा ऐप शामिल हैं, ताकि नागरिक सेवाओं को और आसान बनाया जा सके।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और शासन में इसका उपयोग क्या है?
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कंप्यूटर विज्ञान का एक क्षेत्र है जो मशीनों को मानव बुद्धि की नकल करने और सीखने, समस्या-समाधान तथा निर्णय लेने जैसे कार्यों को करने में सक्षम बनाता है।
- शासन में AI का उपयोग सरकारी सेवाओं की दक्षता, पारदर्शिता और पहुंच में सुधार के लिए किया जाता है। इसमें डेटा विश्लेषण, स्वचालित प्रक्रियाएं और नागरिक इंटरफेस शामिल हो सकते हैं।
- इंडिया AI मिशन (IndiaAI Mission) भारत में AI पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने और AI के अनुसंधान, विकास तथा अनुप्रयोग को गति देने के लिए एक व्यापक सरकारी पहल है।
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 भारत में व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण को विनियमित करने और व्यक्तियों के डेटा गोपनीयता अधिकारों की रक्षा करने के लिए बनाया गया एक कानून है।
- AI चैटबॉट और वर्चुअल असिस्टेंट सिस्टम नागरिकों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं के बारे में जानकारी प्रदान करने, प्रश्नों का उत्तर देने और प्रक्रियाओं में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
- अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं में AI का उपयोग लक्षित लाभार्थियों की पहचान करने, सेवाओं के वितरण को अनुकूलित करने और योजना के कार्यान्वयन की निगरानी करने में मदद कर सकता है।
- AI के उत्तरदायी उपयोग के लिए व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता सुनिश्चित करना, एल्गोरिथम संबंधी पूर्वाग्रहों को रोकना और एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना महत्वपूर्ण है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| AI का उपयोग | डिजिटल शासन को अधिक प्रभावी बनाना और नागरिक सेवाओं को सुगम बनाना। |
| बहुभाषी AI चैटबॉट और वर्चुअल असिस्टेंट | नागरिकों के लिए सेवाओं तक पहुँच को आसान बनाना, विशेषकर भाषाई विविधता वाले देश में। |
| हज सुविधा ऐप | तीर्थयात्रियों के लिए सेवाओं को डिजिटल और सुव्यवस्थित करना। |
| डेटा गोपनीयता और सुरक्षा | नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दुरुपयोग को रोकना। |
| भेदभाव की रोकथाम | यह सुनिश्चित करना कि AI-आधारित प्रणालियाँ किसी भी समुदाय के खिलाफ भेदभाव न करें। |
| स्वतंत्र मूल्यांकन और समीक्षा तंत्र | AI प्रणालियों की प्रभावशीलता, निष्पक्षता और सुरक्षा की निरंतर निगरानी। |
महत्व
शासनिक महत्व
- AI के माध्यम से सरकारी सेवाओं की पारदर्शिता, प्रभावशीलता और नागरिक-मित्रता में वृद्धि।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म के विकास से नागरिक सेवाओं तक पहुँच में सुधार और दक्षता में वृद्धि।
- विशेष रूप से अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं में AI का उपयोग लक्षित लाभार्थियों तक पहुँच को बेहतर बना सकता है।
सामाजिक महत्व
- बहुभाषी AI चैटबॉट जैसी सुविधाओं से भाषाई बाधाओं को कम कर अधिक समावेशी सेवाएँ प्रदान करना।
- व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करके नागरिकों के विश्वास को बनाए रखना और उनके अधिकारों की रक्षा करना।
- भेदभाव-रहित AI प्रणालियों के विकास से समाज के सभी वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना।
तकनीकी महत्व
- भारतAI मिशन के तहत घरेलू AI संस्थानों के साथ सहयोग से देश में AI क्षमताओं का विकास।
- नवीन AI प्रौद्योगिकियों का सरकारी प्रक्रियाओं में एकीकरण, जिससे तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
- डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 (Digital Personal Data Protection Act, 2023) का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए सुरक्षित AI परिनियोजन के लिए एक मॉडल स्थापित करना।
चुनौतियाँ
1. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा
- बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत डेटा के संग्रह और प्रसंस्करण में गोपनीयता भंग होने का जोखिम।
- साइबर हमलों और डेटा उल्लंघनों से संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. भेदभाव और पूर्वाग्रह
- AI एल्गोरिदम में निहित पूर्वाग्रह (bias) के कारण अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ अनजाने में भेदभाव की संभावना।
- डेटासेट की गुणवत्ता और विविधता सुनिश्चित करना ताकि AI निर्णय निष्पक्ष हों।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, कमजोर वर्ग
3. तकनीकी अवसंरचना और पहुँच
- देश के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में पर्याप्त डिजिटल अवसंरचना और इंटरनेट पहुँच की कमी।
- डिजिटल साक्षरता (digital literacy) का अभाव AI-आधारित सेवाओं का लाभ उठाने में बाधा बन सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, ई-गवर्नेंस
4. जवाबदेही और शिकायत निवारण
- AI-आधारित निर्णयों में त्रुटि या अन्याय होने पर जवाबदेही तय करना मुश्किल हो सकता है।
- प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना ताकि नागरिक अपनी चिंताओं को उठा सकें।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
5. लागत और संसाधन
- AI प्रणालियों के विकास, परिनियोजन और रखरखाव के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों की आवश्यकता।
- विशेषज्ञ AI प्रतिभा की कमी एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| व्यक्तिगत डेटा का दुरुपयोग | संवेदनशील अल्पसंख्यक डेटा के गलत हाथों में पड़ने या अनधिकृत उपयोग का जोखिम। |
| एल्गोरिथम संबंधी पूर्वाग्रह | AI मॉडल में निहित पूर्वाग्रहों के कारण अल्पसंख्यक समूहों के प्रति अनुचित या भेदभावपूर्ण परिणाम। |
| डिजिटल डिवाइड | इंटरनेट और स्मार्टफोन तक पहुँच की कमी वाले अल्पसंख्यकों के लिए AI-आधारित सेवाओं से बाहर रह जाने का खतरा। |
| जवाबदेही की कमी | AI द्वारा लिए गए निर्णयों के लिए स्पष्ट जवाबदेही तंत्र का अभाव, जिससे गलतियों को ठीक करना मुश्किल हो सकता है। |
| पारदर्शिता का अभाव | AI प्रणालियों के ‘ब्लैक बॉक्स’ स्वभाव के कारण उनके निर्णय लेने की प्रक्रिया को समझना मुश्किल। |
| शिकायत निवारण की जटिलता | AI-आधारित सेवाओं में समस्याओं का सामना करने वाले नागरिकों के लिए प्रभावी और सुलभ शिकायत निवारण तंत्र की आवश्यकता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- भारतAI मिशन (IndiaAI Mission)
आगे की राह
- डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना और डेटा सुरक्षा उपायों को मजबूत करना।
- AI एल्गोरिदम में पूर्वाग्रहों की पहचान और उन्हें दूर करने के लिए नियमित ऑडिट और परीक्षण करना।
- AI प्रणालियों के विकास में विविधता और समावेशिता सुनिश्चित करना, जिसमें अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।
- नागरिकों के लिए AI-आधारित सेवाओं तक पहुँच को आसान बनाने हेतु डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
- AI-आधारित निर्णयों के लिए स्पष्ट जवाबदेही ढाँचा स्थापित करना और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित करना।
- AI के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ाना, ताकि नागरिक समझ सकें कि उनके डेटा का उपयोग कैसे किया जा रहा है और निर्णय कैसे लिए जा रहे हैं।
- घरेलू AI संस्थानों के साथ सहयोग को मजबूत करना और भारत को AI अनुसंधान एवं विकास का केंद्र बनाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अल्पसंख्यक कल्याण योजनाएँ · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) · डिजिटल शासन · भारत AI मिशन · डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 · डेटा गोपनीयता · भेदभाव की रोकथाम · नागरिक अधिकार · पारदर्शिता · जवाबदेही · नैतिक AI · सुशासन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 14’, ‘note’: ‘कानून के समक्ष समानता’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 15’, ‘note’: ‘धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग के आधार पर भेदभाव का निषेध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा AI का उपयोग करने का निर्णय → अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं में AI का एकीकरण → डेटा गोपनीयता और भेदभाव संबंधी चिंताएँ → इंडियाAI गवर्नेंस दिशानिर्देशों का प्रकाशन → डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 का अनुपालन → पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित शासन का लक्ष्य
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत AI मिशन का उद्देश्य देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रौद्योगिकियों के विकास और उपयोग को बढ़ावा देना है।
2. डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, AI के उपयोग में व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता सुनिश्चित करता है।
3. अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने AI-आधारित तकनीकों का उपयोग केवल हाज सुविधा ऐप तक सीमित रखा है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। भारत AI मिशन AI प्रौद्योगिकियों के विकास और अनुप्रयोग को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक पहल है। कथन 2 भी सही है। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, AI सहित विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। कथन 3 गलत है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय AI-आधारित तकनीकों का उपयोग केवल हाज सुविधा ऐप तक सीमित नहीं रख रहा है, बल्कि डिजिटल शासन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न नागरिक सेवाओं में इसके उपयोग की जांच कर रहा है, जिसमें बहुभाषी AI चैटबॉट और वर्चुअल असिस्टेंट सिस्टम भी शामिल हैं।
Q2. भारत AI शासन दिशानिर्देश, जो 5 नवंबर, 2025 को जारी किए गए थे, का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- AI प्रौद्योगिकियों के निर्यात को बढ़ावा देना।
- AI के सुरक्षित, निष्पक्ष और जिम्मेदार उपयोग के लिए व्यापक दिशानिर्देश प्रदान करना।
- घरेलू AI संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
- AI के माध्यम से केवल रक्षा क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करना।
उत्तर: AI के सुरक्षित, निष्पक्ष और जिम्मेदार उपयोग के लिए व्यापक दिशानिर्देश प्रदान करना। — भारत AI शासन दिशानिर्देशों का प्राथमिक उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित, निष्पक्ष और जिम्मेदार उपयोग के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करना है, जैसा कि समाचार में उल्लिखित है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग से जुड़ी संभावनाओं और चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, नागरिक अधिकारों और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं में AI के उपयोग के संदर्भ में संक्षिप्त परिचय, इसकी बढ़ती प्रासंगिकता का उल्लेख।
2. **AI के उपयोग की संभावनाएँ:**
* **पारदर्शिता और दक्षता:** योजनाओं के वितरण में सुधार, लीकेज कम करना।
* **लक्ष्यीकरण:** पात्र लाभार्थियों की पहचान में सटीकता।
* **पहुँच:** बहुभाषी चैटबॉट और वर्चुअल असिस्टेंट के माध्यम से सेवाओं तक आसान पहुँच।
* **निगरानी और मूल्यांकन:** योजनाओं के प्रभाव का बेहतर विश्लेषण।
3. **AI के उपयोग से जुड़ी चुनौतियाँ:**
* **डेटा पूर्वाग्रह (Bias):** ऐतिहासिक डेटा में निहित पूर्वाग्रहों के कारण भेदभाव की संभावना।
* **गोपनीयता और डेटा सुरक्षा:** संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम।
* **जवाबदेही:** AI-आधारित निर्णयों में त्रुटि होने पर जवाबदेही तय करने में कठिनाई।
* **डिजिटल डिवाइड:** तकनीकी पहुँच की कमी वाले समुदायों को बाहर किए जाने का जोखिम।
* **मानवीय हस्तक्षेप का अभाव:** संवेदनशीलता वाले मामलों में मानवीय निर्णय की कमी।
4. **सरकार द्वारा उठाए गए कदम:**
* **भारत AI मिशन:** AI के विकास और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक पहल।
* **भारत AI शासन दिशानिर्देश (5 नवंबर, 2025):** AI के सुरक्षित, निष्पक्ष और जिम्मेदार उपयोग के लिए व्यापक ढाँचा।
* **डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023:** व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता, सुरक्षा और शिकायत निवारण तंत्र सुनिश्चित करना।
* **घरेलू AI संस्थानों के साथ सहयोग:** डिजिटल शासन को प्रभावी बनाने के लिए।
5. **समालोचनात्मक मूल्यांकन:** इन कदमों की पर्याप्तता और कार्यान्वयन की चुनौतियों पर चर्चा। क्या ये कदम AI के संभावित नकारात्मक प्रभावों को प्रभावी ढंग से संबोधित करते हैं? नागरिक अधिकारों और डेटा सुरक्षा के लिए और क्या किया जा सकता है?
6. **निष्कर्ष:** AI के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग के महत्व पर बल देते हुए, प्रौद्योगिकी और मानवाधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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