22 Jul विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन: 2047 तक 100 गीगावाट लक्ष्य
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन
- Prelims: परमाणु ऊर्जा मिशन, लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR), विकसित भारत @2047, शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन, शांति अधिनियम, 2025, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL), दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR), उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर (HTGCR), परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC)
- Essay: भारत का ऊर्जा संक्रमण और परमाणु ऊर्जा की भूमिका, विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का योगदान
त्वरित पुनरावृत्ति: परमाणु ऊर्जा मिशन का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है, जो ‘विकसित भारत’ और शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
संसद में एक प्रश्न के जवाब में, परमाणु ऊर्जा विभाग ने ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण और वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन (Net Zero Carbon Emission) के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन की घोषणा की पुष्टि की है। इस मिशन का उद्देश्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता प्राप्त करना है। इस संदर्भ में, ‘शांति अधिनियम, 2025’ भी अधिनियमित किया गया है, जो निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के द्वार खोलता है।
पृष्ठभूमि
- भारत ने वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का विस्तार आवश्यक है।
- वर्तमान में भारत की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता 8.78 गीगावाट है, जिसे वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
- परमाणु ऊर्जा मिशन को केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित किया गया था, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण है।
- ‘शांति अधिनियम, 2025’ परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी को सक्षम बनाता है, जिससे निवेश और प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों के डिजाइन और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
- परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के साथ मिलकर, भारत के ऊर्जा मिश्रण में स्थिरता और विश्वसनीयता प्रदान कर सकती है।
परमाणु ऊर्जा मिशन और संबंधित अवधारणाएँ
- विकसित भारत @2047: यह भारत सरकार का एक दृष्टिकोण है जिसका लक्ष्य भारत को अपनी स्वतंत्रता के 100वें वर्ष तक एक विकसित राष्ट्र बनाना है, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा एक प्रमुख स्तंभ है।
- शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन: यह लक्ष्य वर्ष 2070 तक वातावरण में उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा को अवशोषित की गई मात्रा के बराबर करना है, जिसके लिए परमाणु ऊर्जा जैसे स्वच्छ स्रोतों की आवश्यकता है।
- लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR): ये पारंपरिक परमाणु रिएक्टरों की तुलना में छोटे, मॉड्यूलर और कम क्षमता वाले रिएक्टर होते हैं, जिन्हें कारखाने में निर्मित कर साइट पर स्थापित किया जा सकता है। ये सुरक्षा, लागत और स्थापना में लचीलापन प्रदान करते हैं।
- भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC): यह भारत का प्रमुख परमाणु अनुसंधान केंद्र है, जो परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए अनुसंधान और विकास में संलग्न है, जिसमें SMRs का डिजाइन भी शामिल है।
- शांति अधिनियम, 2025: यह अधिनियम परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को कानूनी ढाँचा प्रदान करता है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
- उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर (HTGCR): यह एक उन्नत रिएक्टर डिज़ाइन है जो उच्च तापमान पर संचालित होता है और विद्युत उत्पादन के साथ-साथ हाइड्रोजन उत्पादन जैसे औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए भी ऊष्मा प्रदान कर सकता है।
- दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR): यह भारत में परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली एक स्वदेशी और सिद्ध रिएक्टर प्रौद्योगिकी है, जो प्राकृतिक यूरेनियम को ईंधन के रूप में उपयोग करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य | वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के विजन और 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक। |
| लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) का विकास | परमाणु ऊर्जा उत्पादन में लचीलापन, सुरक्षा और त्वरित तैनाती सुनिश्चित करना, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों के लिए। |
| शांति अधिनियम, 2025 | परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सक्षम बनाना और स्वदेशी प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना। |
| विभिन्न व्यावसायिक मॉडल | परमाणु ऊर्जा क्षमता विस्तार में केंद्र व राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी क्षेत्र की सहभागिता को बढ़ावा। |
| भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) की भूमिका | स्वदेशी SMRs (जैसे BSMAR-200, SMR-55, HTGR) के डिजाइन और विकास में अग्रणी भूमिका, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना: परमाणु ऊर्जा जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करती है।
- दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि: स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत उद्योगों को बढ़ावा देता है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि होती है।
- रोजगार सृजन: परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण और संचालन से उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
पर्यावरणीय महत्व
- कार्बन उत्सर्जन में कमी: परमाणु ऊर्जा संयंत्र ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं करते, जिससे भारत को 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
- जलवायु परिवर्तन से मुकाबला: स्वच्छ ऊर्जा के रूप में परमाणु ऊर्जा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सामरिक महत्व
- ऊर्जा आत्मनिर्भरता: स्वदेशी परमाणु प्रौद्योगिकी का विकास और क्षमता विस्तार भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाता है।
- तकनीकी प्रगति: लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) का विकास परमाणु प्रौद्योगिकी में भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करता है।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में भारत की प्रगति अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उसकी साख बढ़ाती है।
सामाजिक महत्व
- जीवन स्तर में सुधार: विश्वसनीय और सस्ती बिजली की उपलब्धता से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार होता है।
- स्वास्थ्य और शिक्षा: ऊर्जा की उपलब्धता से स्वास्थ्य सेवाओं और शैक्षणिक संस्थानों के संचालन में सुविधा होती है।
चुनौतियाँ
1. उच्च प्रारंभिक लागत
- परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना में बहुत अधिक पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है, जिससे परियोजनाएं महंगी हो जाती हैं।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी के बावजूद, बड़े पैमाने पर निवेश जुटाना एक चुनौती बनी हुई है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: बुनियादी ढांचा, निवेश मॉडल
2. दीर्घ निर्माण अवधि
- परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण में लंबा समय लगता है, जिससे लक्ष्य प्राप्ति में देरी हो सकती है।
- नियामक मंजूरियों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण निर्माण प्रक्रिया जटिल हो जाती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: ऊर्जा क्षेत्र
3. परमाणु अपशिष्ट प्रबंधन
- परमाणु अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान और भंडारण की चुनौती बनी हुई है, जिसके लिए दीर्घकालिक समाधानों की आवश्यकता है।
- जनता की स्वीकार्यता और पर्यावरणीय चिंताओं को दूर करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण: प्रदूषण एवं अपशिष्ट प्रबंधन
4. सुरक्षा संबंधी चिंताएं
- परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों (जैसे दुर्घटनाएं, विकिरण रिसाव) के कारण जनता में भय व्याप्त रहता है।
- अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: आपदा प्रबंधन
5. तकनीकी विशेषज्ञता और मानव संसाधन
- परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में उच्च तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशिक्षित मानव संसाधन की निरंतर आवश्यकता होती है।
- स्वदेशीकरण और निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ कौशल विकास एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन: कौशल विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वित्तीय संसाधन | 100 गीगावाट क्षमता के लिए आवश्यक भारी निवेश जुटाना, विशेषकर निजी क्षेत्र से। |
| भूमि अधिग्रहण | परमाणु संयंत्रों के लिए उपयुक्त और सुरक्षित स्थलों का चयन तथा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया। |
| सार्वजनिक स्वीकार्यता | परमाणु ऊर्जा से जुड़े सुरक्षा जोखिमों और अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर जनता की आशंकाओं को दूर करना। |
| नियामक ढांचा | निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए एक मजबूत और पारदर्शी नियामक ढांचे का विकास। |
| अंतर्राष्ट्रीय सहयोग | परमाणु ईंधन की आपूर्ति और उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय समझौतों पर निर्भरता। |
आगे की राह
- निजी क्षेत्र के लिए आकर्षक निवेश मॉडल विकसित करना और वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना।
- परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और नियामक मंजूरियों में तेजी लाना।
- परमाणु अपशिष्ट के सुरक्षित और दीर्घकालिक प्रबंधन के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना।
- परमाणु ऊर्जा की सुरक्षा और लाभों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना तथा सार्वजनिक संवाद को प्रोत्साहित करना।
- परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए आवश्यक कुशल मानव संसाधन विकसित करने हेतु प्रशिक्षण और शिक्षा कार्यक्रमों में निवेश करना।
- लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) जैसी नई प्रौद्योगिकियों के विकास और तैनाती में तेजी लाना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना ताकि उन्नत प्रौद्योगिकियों और परमाणु ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
परमाणु ऊर्जा मिशन · विकसित भारत 2047 · शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन 2070 · लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) · शांति अधिनियम, 2025 · निजी क्षेत्र की भागीदारी · भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) · दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) · उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर (HTGCR) · ऊर्जा सुरक्षा · आत्मनिर्भरता · जलवायु परिवर्तन
अवधारणा प्रवाह
विकसित भारत का विजन और शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य → परमाणु ऊर्जा मिशन की घोषणा (केंद्रीय बजट 2025-26) → शांति अधिनियम, 2025 का अधिनियमन (निजी क्षेत्र की भागीदारी) → 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य (2047 तक) → लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) का विकास (BARC द्वारा) → विभिन्न व्यावसायिक मॉडलों के माध्यम से क्षमता विस्तार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. परमाणु ऊर्जा मिशन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका लक्ष्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता प्राप्त करना है।
2. यह मिशन वर्ष 2033 तक कम से कम पाँच स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के विकास और परिचालन का भी लक्ष्य रखता है।
3. शांति अधिनियम, 2025 निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के द्वार खोलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है: परमाणु ऊर्जा मिशन का मुख्य लक्ष्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है। कथन 2 सही है: मिशन में वर्ष 2033 तक कम से कम पाँच स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों के विकास और परिचालन का लक्ष्य भी शामिल है। कथन 3 सही है: शांति अधिनियम, 2025 विशेष रूप से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए अधिनियमित किया गया है।
Q2. भारत में लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के डिज़ाइन और विकास से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) बीएसएमआर-200, एसएमआर-55 और एचटीजीसीआर के डिज़ाइन और विकास के लिए जिम्मेदार है।
2. बीएसएमआर-200 और एसएमआर-55 दोनों दाबित जल रिएक्टर (PWR) डिज़ाइन पर आधारित हैं।
3. उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर (HTGCR) का प्राथमिक उद्देश्य हाइड्रोजन उत्पादन के लिए परमाणु ऊष्मा स्रोत प्रदान करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है: BARC इन तीनों SMRs के डिज़ाइन और विकास का कार्य कर रहा है। कथन 2 सही है: बीएसएमआर-200 एक स्वदेशी दाबित जल रिएक्टर (PWR) आधारित विद्युत रिएक्टर है, और एसएमआर-55 भी दाबित जल रिएक्टर (PWR) डिज़ाइन पर आधारित है। कथन 3 सही है: एचटीजीसीआर को हाइड्रोजन उत्पादन के लिए उपयुक्त ऊष्मा-रासायनिक चक्र हेतु परमाणु ऊष्मा स्रोत के रूप में डिज़ाइन किया जा रहा है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में परमाणु ऊर्जा मिशन की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। इस मिशन में निजी क्षेत्र की भागीदारी के महत्व और चुनौतियों पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत परमाणु ऊर्जा मिशन के लक्ष्यों और ‘विकसित भारत 2047’ तथा शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ इसके जुड़ाव को स्पष्ट करते हुए करें। मिशन के तहत लक्षित क्षमता वृद्धि और लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के विकास जैसे प्रमुख घटकों का उल्लेख करें। शांति अधिनियम, 2025 के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी के महत्व पर चर्चा करें, जिसमें निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और नवाचार को बढ़ावा देने जैसे लाभ शामिल हों। साथ ही, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी से जुड़ी चुनौतियों, जैसे सुरक्षा चिंताएँ, नियामक ढाँचा और उच्च पूंजीगत लागत, का भी विश्लेषण करें। निष्कर्ष में, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को प्राप्त करने में परमाणु ऊर्जा के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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