18 Dec विकसित भारत–जी राम जी विधेयक 2025 : ग्रामीण रोजगार गारंटी का नया अध्याय
विकसित भारत–जी राम जी विधेयक 2025 : ग्रामीण रोजगार गारंटी का नया अध्याय
पाठ्यक्रम : जीएस – 3 : भारतीय अर्थव्यवस्था और रोज़गार
परिचय :

17 दिसंबर 2025 को लोकसभा में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा “विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB–G RAM G)” विधेयक, 2025 प्रस्तुत किया गया। यह विधेयक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 को निरस्त कर उसके स्थान पर एक नया कानूनी ढांचा स्थापित करने का प्रस्ताव करता है। विधेयक का उद्देश्य ग्रामीण भारत को ‘विकसित भारत @2047’ के विजन के अनुरूप बनाना है, जिसमें रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है तथा स्थायी संपत्ति निर्माण, डिजिटलीकरण और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने पर जोर दिया गया है। यह विधेयक ग्रामीण विकास को सशक्तिकरण, अभिसरण और संतृप्ति की दिशा में ले जाने का प्रयास है।
पृष्ठभूमि
MGNREGA, 2005 UPA सरकार की प्रमुख योजना थी, जिसने ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों की रोजगार गारंटी प्रदान की और गरीबी उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पिछले दो दशकों में ग्रामीण भारत में व्यापक परिवर्तन आए हैं—जैसे पीएम आवास योजना, जल जीवन मिशन, उज्ज्वला, डिजिटल इंडिया और गरीबी में कमी। इन बदलावों के कारण पुरानी योजना की सीमाएं उजागर हुईं, जैसे कम उपयोगी संपत्तियां, भ्रष्टाचार के आरोप और कृषि मौसम में श्रमिकों की कमी। VB–G RAM G विधेयक इन कमियों को दूर कर एक आधुनिक, उत्पादक और जलवायु-सहिष्णु ढांचा प्रस्तावित करता है।
विधेयक की प्रमुख विशेषताएं
विधेयक MGNREGA की मूल भावना को बनाए रखते हुए कई नवोन्मेषी प्रावधान जोड़ता है:
रोजगार गारंटी में वृद्धि: प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को अकुशल श्रम के लिए प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों की वैधानिक गारंटी। यह MGNREGA के 100 दिनों से अधिक है।
मौसमी निलंबन: राज्य सरकारें कृषि बुवाई और कटाई के मौसम में योजना को अधिकतम 60 दिनों तक निलंबित कर सकती हैं, ताकि कृषि श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो।
स्थायी संपत्ति निर्माण पर फोकस: कार्यों को चार प्राथमिकता क्षेत्रों में सीमित किया गया—जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण अवसंरचना (सड़कें, कनेक्टिविटी), आजीविका संबंधी अवसंरचना (भंडारण, बाजार सुविधाएं) और चरम मौसम घटनाओं से निपटने के विशेष कार्य।
नियोजन और एकीकरण:
ग्राम पंचायतें ‘विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं (VGPPs)’ तैयार करेंगी, जिन्हें पीएम गति शक्ति के साथ एकीकृत किया जाएगा।
सभी VGPPs को ‘विकसित भारत–राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक (VB-NRIS)’ में संकलित कर राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित योजना बनेगी।
पंचायतों की ग्रेडिंग उनके विकास स्तर के आधार पर होगी; कम विकसित पंचायतों को अधिक आवंटन मिलेगा।
संस्थागत व्यवस्था:
केंद्रीय और राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषदें निगरानी और परामर्श देंगी।
राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर की संचालन समितियां वित्तीय आवंटन और समन्वय पर सिफारिशें करेंगी।
पारदर्शिता और डिजिटलीकरण: बॉयोमीट्रिक प्रमाणीकरण, AI-सक्षम एनालिटिक्स, जीपीएस-आधारित निगरानी, ग्राम सभा द्वारा सामाजिक लेखा परीक्षा और ब्लॉक/जिला स्तर पर शिकायत निवारण।
महत्व और लाभ
यह विधेयक ग्रामीण भारत के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध हो सकता है:
रोजगार और आय सुरक्षा: 125 दिनों की गारंटी से ग्रामीण परिवारों को अधिक स्थिरता मिलेगी, विशेषकर कमजोर वर्गों को।
उत्पादक संपत्ति सृजन: फोकस जल सुरक्षा और अवसंरचना पर होने से दीर्घकालिक विकास होगा, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।
क्षेत्रीय समानता: कम विकसित पंचायतों को प्राथमिकता से असमानताएं कम होंगी।
कृषि संतुलन: मौसमी निलंबन से कृषि श्रमिक उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी।
विकसित भारत 2047 से संरेखण: योजना अन्य सरकारी योजनाओं से अभिसरण कर संतृप्ति सुनिश्चित करेगी।
चुनौतियां और आलोचना
विधेयक पर विपक्ष ने तीखी आलोचना की है:
महात्मा गांधी का नाम हटाना: विपक्ष इसे गांधीजी का अपमान मानता है और MGNREGA की अधिकार-आधारित संरचना को कमजोर करने का आरोप लगाता है।
वित्तीय बोझ राज्यों पर: फंडिंग पैटर्न में बदलाव (60:40 केंद्र-राज्य) से राज्यों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा।
मौसमी निलंबन: इससे गरीब परिवारों की आय प्रभावित हो सकती है।
कार्यान्वयन चुनौतियां: डिजिटलीकरण से डिजिटल डिवाइड बढ़ सकता है; ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी आधारभूत संरचना की कमी।
राजनीतिक विवाद: विपक्ष ने इसे स्टैंडिंग कमिटी को भेजने की मांग की, जबकि सत्ता पक्ष इसे आवश्यक सुधार बताता है।
आगे की राह
विधेयक को सफल बनाने के लिए निम्न सुझाव उपयोगी हैं:
राज्यों से परामर्श: फंडिंग और निलंबन प्रावधानों पर सहमति बनाना।
डिजिटल सशक्तिकरण: ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और प्रशिक्षण बढ़ाना।
निगरानी मजबूत करना: सामाजिक लेखा परीक्षा और AI का प्रभावी उपयोग।
पायलट आधार पर परीक्षण: कुछ राज्यों में पहले लागू कर कमियां दूर करना।
जन जागरूकता: योजना के लाभों पर अभियान चलाना।
निष्कर्ष :
VB–G RAM G विधेयक 2025 ग्रामीण रोजगार और विकास को आधुनिक बनाने का महत्वाकांक्षी प्रयास है। यह MGNREGA की विरासत को आगे बढ़ाते हुए विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में कदम है। हालांकि, राजनीतिक विवाद और कार्यान्वयन चुनौतियों का समाधान आवश्यक है। यह विधेयक ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय, संघवाद और आर्थिक नीतियों से जुड़े महत्वपूर्ण विषय है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.निम्नलिखित में से कौन-सा विधेयक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 को निरस्त कर उसके स्थान पर 125 दिनों की ग्रामीण रोजगार गारंटी प्रस्तावित करता है?
(a) विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025
(b) विकसित भारत–जी राम जी (VB–G RAM G) विधेयक, 2025
(c) परमाणु ऊर्जा (शांति) विधेयक, 2025
(d) राष्ट्रीय ऊर्जा नीति विधेयक, 2024
उत्तर: (b)
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.विकसित भारत–जी राम जी विधेयक 2025 के संदर्भ में MGNREGA की तुलना में इसके प्रमुख प्रावधानों, लाभों तथा चुनौतियों की चर्चा कीजिए। क्या यह ग्रामीण भारत को विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप बनाने में सफल होगा? तर्क सहित उत्तर दीजिए। (250 शब्द)
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