विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 (World Inequality Report 2026)

विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 (World Inequality Report 2026)

विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 (World Inequality Report 2026) 

  पाठ्यक्रम :    GS-1 :  भारतीय सामाजिक मुद्दे,

यह रिपोर्ट ‘विश्व असमानता रिपोर्ट’ का तीसरा संस्करण है। इससे पहले यह रिपोर्ट 2018 और 2022 में जारी की गई थी। यह रिपोर्ट वर्ल्ड इनइक्वलिटी लैब तैयार करता है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर 

वैश्विक संपत्ति (Wealth) का संकेंद्रण: विश्व के सबसे धनी 1% लोगों के पास विश्व की 37% संपत्ति है। वहीं, विश्व के सबसे धनी 10% लोगों के पास विश्व की 75% संपत्ति है। भारत के सबसे धनी 1% लोगों के पास देश की लगभग 40% संपत्ति है। वहीं, भारत के सबसे धनी 10% लोगों के पास देश की लगभग 65% संपत्ति है।
वैश्विक आय (Income) का संकेंद्रण: विश्व के सबसे धनी 10% लोग विश्व की 53% आय अर्जित करते हैं।
भारत के सबसे धनी 1% लोग देश की लगभग 23% आय अर्जित करते हैं। वहीं भारत के सबसे धनी 10% लोग राष्ट्रीय आय का 58% अर्जित करते हैं।
संपत्ति संवृद्धि : 1990 के दशक से विश्व में अरबपतियों की संपत्ति 8% वार्षिक की दर से बढ़ी है। यह विश्व की सबसे कम आय वाली आधी आबादी की आय-वृद्धि की तुलना में लगभग दोगुनी दर है।
जलवायु परिवर्तन में योगदान के स्तर पर असमानता: विश्व के सबसे धनी 10% लोग विश्व में 77% कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। वहीं, सबसे निर्धन 50% लोग केवल 3% उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं।
संरचनात्मक असंतुलन: प्रत्येक वर्ष ग्लोबल साउथ के देशों से ग्लोबल नॉर्थ के देशों में वैश्विक GDP के 1% से अधिक राशि स्थानांतरित होती है। यह राशि विकास सहायता के रूप में मिलने वाली राशि से 3 गुनी अधिक है।
ग्लोबल साउथ के देश कर्ज के ब्याज और मूलधन के भुगतान, लाभ के भुगतान और वित्तीय निवेश के रूप में राशि भेजते हैं।

रिपोर्ट में किए गए नीतिगत सुझाव

प्रगतिशील कर प्रणाली और कर-न्याय लागू करना: अरबपतियों पर वैश्विक न्यूनतम कर (Global minimum tax) लागू किया जाए। टैक्स चोरी रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाया जाए। इससे जन-सेवाओं के लिए संसाधन उपलब्ध हो सकेगा और असमानता कम होगी।
लोक सेवाओं में निवेश बढ़ाना: उच्च गुणवत्ता वाली निःशुल्क शिक्षा, स्वास्थ्य-देखभाल सेवाएँ, पोषण और बाल-देखभाल सेवाओं में निवेश बढ़ाया जाए। इससे प्रारंभ में ही असमानताओं को कम किया जा सकेगा और अवसर सृजित होंगे।
धन पुनर्वितरण कार्यक्रम: नकद अंतरण (कैश ट्रांसफर), पेंशन, और बेरोजगारी भत्तों के माध्यम से संसाधनों को सबसे निर्धन आबादी तक पहुंचाया जाए।
लैंगिक समानता सुनिश्चित करने हेतु उपाय करना: वहनीय बाल-देखभाल सेवाएं, मातृत्व-पितृत्व अवकाश (Parental leave), महिलाओं को पुरुषों के समान वेतन और भेदभाव-रोधी कानूनों को लागू किया जाए। इससे महिलाओं पर पड़ने वाले अवैतनिक देखभाल कार्य (Unpaid care work) के बोझ को कम किया जा सकेगा।
स्वामित्व या जिम्मेदारी आधारित जलवायु नीति: सबसे अधिक धनी लोग सबसे अधिक जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए जलवायु परिवर्तन से निपटने हेतु दी जाने वाली सब्सिडी के साथ अधिक उत्सर्जन पर प्रगतिशील कर लगाया जाए। निजी क्षेत्र की बजाय सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा हरित (ग्रीन) निवेश को प्राथमिकता दी जाए ताकि नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य प्राप्त हो सके और संपत्ति का संकेंद्रण न बढ़े।
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय-प्रणाली में सुधार करना: एक वैश्विक मुद्रा और केंद्रीकृत क्रेडिट प्रणाली लागू की जाए। साथ ही, आधिक्य कर (सरप्लस टैक्स) का उपयोग विकासशील देशों में सामाजिक क्षेत्र में निवेश में किया जाए।

रिपोर्ट में नीतिगत सुझाव

रिपोर्ट असमानता कम करने के लिए व्यावहारिक और प्रगतिशील नीतियों की वकालत करती है। ये सुझाव वैश्विक सहयोग पर आधारित हैं:

1. प्रगतिशील कर प्रणाली और कर न्याय:

अरबपतियों पर वैश्विक न्यूनतम कर (Global Minimum Tax on Billionaires) लगाएं।
टैक्स चोरी रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाएं। इससे जनसेवाओं के लिए संसाधन जुटेंगे और असमानता घटीगी।

2. लोक सेवाओं में निवेश:

निःशुल्क उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और बाल देखभाल सेवाओं में निवेश बढ़ाएं। इससे प्रारंभिक असमानताओं को रोका जा सकेगा और समान अवसर सृजित होंगे।

3. धन पुनर्वितरण कार्यक्रम:

नकद अंतरण (कैश ट्रांसफर), पेंशन और बेरोजगारी भत्तों के माध्यम से संसाधन गरीबों तक पहुंचाएं।

4. लैंगिक समानता के उपाय:

सस्ती बाल देखभाल, मातृत्व-पितृत्व अवकाश, समान वेतन और भेदभाव-रोधी कानून लागू करें। इससे महिलाओं पर अवैतनिक देखभाल कार्य का बोझ कम होगा।

5. जलवायु नीति में जिम्मेदारी आधारित दृष्टिकोण:

अमीरों पर अधिक उत्सर्जन के लिए प्रगतिशील कर लगाएं। सब्सिडी को न्यायपूर्ण बनाएं।
निजी क्षेत्र के बजाय सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता दें ताकि नेट-जीरो लक्ष्य प्राप्त हो और संपत्ति संकेंद्रण न बढ़े।

6. अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में सुधार:

वैश्विक मुद्रा और केंद्रीकृत क्रेडिट प्रणाली लागू करें।
आधिक्य कर (Surplus Tax) का उपयोग विकासशील देशों के सामाजिक निवेश में करें।
ग्लोबल साउथ से नॉर्थ की ओर धन प्रवाह रोकने के लिए बहुपक्षीय सुधार।
ये सुझाव तत्काल लागू करने योग्य हैं और रिपोर्ट के अनुसार, इन्हें अपनाने से असमानता 10-15 वर्षों में आधी हो सकती है।

निष्कर्ष:

विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 एक चेतावनी है कि असमानता न केवल आर्थिक, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय संकट का कारण बन रही है। भारत जैसे उभरते देशों में यह विशेष रूप से चिंताजनक है, जहां विकास के लाभ ऊपरी स্তर तक सीमित हैं। रिपोर्ट बहुपक्षीय सहयोग की मांग करती है, खासकर G20 जैसे मंचों पर। यदि नीतियां लागू न हुईं, तो यह वैश्विक स्थिरता को खतरे में डाल सकती है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q.‘विश्व असमानता रिपोर्ट 2026’ (World Inequality Report 2026) निम्नलिखित में से किस संस्था/लैब द्वारा जारी की गई है?
(A) विश्व बैंक
(B) ऑक्सफैम इंटरनेशनल
(C) वर्ल्ड इनइक्वलिटी लैब (World Inequality Lab)
(D) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP)
उत्तर: (C) 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q.विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 के अनुसार वैश्विक और भारतीय स्तर पर धन एवं आय की असमानता में तेज वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए असमानता कम करने के लिए रिपोर्ट में दिए गए नीतिगत सुझावों की समीक्षा कीजिए। क्या आप मानते हैं कि अरबपतियों पर वैश्विक न्यूनतम कर  और ग्लोबल साउथ से ग्लोबल नॉर्थ की ओर होने वाला धन-स्थानांतरण रोकना सबसे प्रभावी उपाय हो सकते हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।                  (150 शब्द)

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