22 Mar विश्व जल दिवस 2025 : जल प्रबंधन और संवर्धन हमारी जिम्मेदारी-हमारा भविष्य
( यह लेख यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र – 3 के अंतर्गत ‘ पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, भारतीय भूगोल,पर्यावरण संरक्षण, गहन वनीकरण, जलवायु परिवर्तन, वर्षा का बदलता प्रारूप और मौसम से जुड़ी घटनाएं, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण ’ खण्ड से और यूपीएससी के प्रारंभिक परीक्षा के अंतर्गत ‘ विश्व जल दिवस 2025, वर्षा जल संरक्षण, संयुक्त राष्ट्र (UN), सयुंक्त राष्ट्र महासभा (UNGA), जल प्रबधन एवं संवर्धन, सतत विकास लक्ष्य 6 (SDG 6), कैच द रेन अभियान ’ खण्ड से संबंधित है। )
खबरों में क्यों ?

- हाल ही में 22 मार्च 2025 को पूरी दुनिया में ‘विश्व जल दिवस 2025’ मनाया गया।
- प्रतिवर्ष 22 मार्च को आयोजित होने वाला यह दिवस संयुक्त राष्ट्र का एक वार्षिक आयोजन है, जो सन 1993 से हर साल आयोजित होता है।
- इसका दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर मीठे पानी के महत्व पर ध्यान केंद्रित करना और सभी लोगों को जल संकट की गंभीरता को समझाना है।
- विश्व जल दिवस 2025 का मुख्य विषय / थीम – “ग्लेशियर संरक्षण” है, जो जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों से ग्लेशियरों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देती है। ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना जल चक्र को बाधित कर रहा है और यह वैश्विक स्तर अरबों लोगों के लिए जल सुरक्षा के लिए संकट पैदा कर रहा है।
- इस उपलक्ष्य में भारत के जल शक्ति मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और हरियाणा सरकार के सहयोग से 22 मार्च 2025 को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ‘ जल शक्ति अभियान : कैच द रेन – 2025 ‘ का शुभारंभ किया गया।
- यह कार्यक्रम हरियाणा के पंचकूला स्थित ताऊ देवी लाल स्टेडियम के मल्टीपर्पज हॉल में आयोजित हुआ। इसका उद्देश्य सामुदायिक भागीदारी और नवोन्मेषी रणनीतियों के माध्यम से जल संरक्षण और प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
- इस अभियान का मुख्य थीम ” जल संचय जन भागीदारी: जन जागरूकता की ओर ” (जल संरक्षण के लिए लोगों की कार्रवाई – तीव्र सामुदायिक संपर्क की ओर) है, जो जलवायु परिवर्तन और जल संकट की बढ़ती चुनौतियों के मद्देनजर जल सुरक्षा, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के महत्व को रेखांकित करती है।
- ‘ जल शक्ति अभियान : कैच द रेन – 2025 ‘ का उद्देश्य देशभर में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को इस दिशा में कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करना है, ताकि ‘ हर बूंद अनमोल ‘ (हर बूंद मायने रखती है) का सपना साकार हो सके।
- यह अभियान सभी नागरिकों से जमीनी स्तर पर भागीदारी और अभिनव समाधानों के माध्यम से भारत के जल भविष्य को सुरक्षित करने का आह्वान करता है।
- यह अभियान देश भर के 148 जिलों में केंद्रित रहेगी, जिससे जल संसाधनों के स्थायी प्रबंधन के लिए सरकारी एजेंसियों, समुदायों और अन्य हितधारकों के बीच तालमेल बढ़ाया जा सके।
विश्व जल दिवस का इतिहास :

- सन 1992 में ब्राजील में हुए पर्यावरण और विकास सम्मेलन में ‘विश्व जल दिवस’ को मनाए जाने एवं स्वच्छ जल की उपलब्धता विषय का प्रस्ताव पारित किया गया।
- सयुंक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 1992 में इस प्रस्ताव को अपनाते हुए यूएनजीए ने वैश्विक स्तर पर प्रति वर्ष 22 मार्च को ‘विश्व जल दिवस’ मनाए जाने की घोषणा की।
- अतः पहली बार वर्ष 1993 में ‘विश्व जल दिवस’ मनाया गया।
- वर्ष 2010 में यूएन ने सुरक्षित, स्वच्छ पेयजल एवं स्वच्छता के अधिकार को मानव अधिकार के रूप में मान्यता दी।
- सुरक्षित, स्वच्छ पेयजल एवं स्वच्छता के अधिकार को मानव अधिकार के रूप में मान्यता देने का मुख्य उद्देश्य वैश्विक जल संकट पर लोगों का ध्यान केंद्रित करना है।
विश्व जल दिवस का महत्व :
- विश्व जल दिवस का प्रमुख ध्यान सतत विकास लक्ष्य 6 (SDG 6) की प्राप्ति की दिशा में काम करना है, जिसका लक्ष्य 2030 तक सभी के लिए स्वच्छ पानी और स्वच्छता सुनिश्चित करना है।
- संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा सन 1993 में विश्व जल दिवस मनाने की शुरुआत की गई थी, ताकि पानी के महत्व को लोगों तक पहुंचाया जा सके और वैश्विक जल संकट पर जागरूकता बढ़ाई जा सके। इस दिन का मुख्य उद्देश्य उन लोगों के बारे में जागरूकता फैलाना है जिनके पास सुरक्षित पानी तक पहुंच नहीं है।
वर्तमान समय में जल संरक्षण की जरूरत :

- संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, स्वच्छता, साफ-सफाई और साफ पानी की कमी से होने वाली बीमारियों से हर साल 14 लाख लोगों की मौत हो जाती है। विश्व के लगभग 25% आबादी के पास स्वच्छ जल तक पहुंच नहीं है, और लगभग आधी वैश्विक आबादी के पास स्वच्छ शौचालयों का अभाव है। वर्ष 2050 तक जल की वैश्विक स्थिति 55% तक बढ़ने का अनुमान है।
- मानव जीवन में जल रोजमर्रा की गतिविधियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। जल का उचित उपयोग मीठे जल के भंडारों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। औसतन एक व्यक्ति एक दिन में 45 लीटर तक पानी अपने दैनिक गतिविधियों के माध्यम से बर्बाद कर देता है। इसलिए, दैनिक जल उपयोग में कुछ बदलाव करने से भविष्य में उपयोग के लिए काफी मात्रा में जल बचाया जा सकता है।
- दुनिया भर में लगभग 3 अरब से अधिक लोग जल की निर्भरता के कारण दूसरे देशों में पलायन करते हैं।
- विश्व भर में केवल 24 देशों के पास साझा जल उपयोग के लिए सहयोग समझौते हस्ताक्षर हुए हैं।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य और समृद्धि, खाद्य और ऊर्जा प्रणालियां,आर्थिक उत्पादकता और पर्यावरणीय अखंडता सभी प्रबंधित जल चक्र पर निर्भर करते हैं।
भारत में जल संरक्षण के लिए प्रबंधन और संवर्धन की वर्तमान स्थिति :

- वर्तमान में सभी क्षेत्रों में जल की बढ़ती मांग तथा वर्षा के बदलते पैटर्न में के कारण भूजल पर निर्भरता बढ़ गई है। इसके उचित प्रबंधन और स्थायी रूप से उपयोग हेतु उचित कार्रवाई के साथ ठोस प्रयास किये जाने की महती आवश्यकता है।
- संयुक्त राष्ट्र विश्व जल विकास रिपोर्ट 2022 के अनुसार, भूजल पृथ्वी के सभी तरल मीठे पानी का लगभग 99 प्रतिशत है जिसमें समाज को सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ प्रदान करने की क्षमता है।
- भूजल पीने के पानी सहित घरेलू उद्देश्यों के लिये उपयोग किये जाने वाले कुल जल का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है।
- भारत की जनसंख्या लगभग 1.4 अरब है जो विश्व में सर्वाधिक है। 2050 तक जनसंख्या बढ़कर 1.7 अरब होने का अनुमान है।
- विश्व बैंक के अनुसार, भारत में दुनिया की 18 प्रतिशत आबादी रहती है, लेकिन लगभग 4 प्रतिशत लोगों के लिए पर्याप्त जल संसाधन हैं।
- भारत में लगभग 90 मिलियन को सुरक्षित पानी तक पहुंच नहीं है। भारत की सामान्य वार्षिक वर्षा 1100 मिमी है जो विश्व की औसत वर्षा 700 मिमी से अधिक है।
- भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जून-अगस्त 2023 के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून 42 प्रतिशत जिलों में सामान्य से नीचे रहा है। अगस्त 2023 में देश में बारिश सामान्य से 32 प्रतिशत कम और दक्षिणी राज्यों में 62 प्रतिशत कम थी।
- 1901 के पश्चात अर्थात पिछले 122 वर्षों में भारत में पिछले वर्ष अगस्त में सबसे कम वर्षा हुई।
- भारत में हुई कम वर्षा से न केवल भारतीय कृषि पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा, बल्कि इससे देश के विभिन्न क्षेत्रों में पानी की भारी कमी होने की प्रबल संभावना भी हो सकती है।
- भारत में एक वर्ष में उपयोग की जा सकने वाली पानी की शुद्ध मात्रा 1,121 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) अनुमानित है। हालाँकि, जल संसाधन मंत्रालय द्वारा प्रकाशित आंकड़ों से पता चलता है कि 2025 में कुल पानी की माँग 1,093 बीसीएम और 2050 में 1,447 बीसीएम होगी। परिणामस्वरूप अगले 10 वर्षों में पानी की उपलब्धता में भारी कमी की संभावना है।
- भारत विश्व में भूजल का सबसे अधिक दोहन करता है। यह मात्रा विश्व के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े भूजल दोहन-कर्ता (चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका) के संयुक्त दोहन से भी अधिक है।
- फाल्कनमार्क वॉटर इंडेक्स अनुसार, भारत में लगभग 76 प्रतिशत लोग पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहे हैं। यद्यपि भारत में निष्कर्षित भूजल का केवल 8 प्रतिशत ही पेयजल के रूप में उपयोग किया जाता है। इसका 80 प्रतिशत भाग सिंचाई में उपयोग किया जाता है शेष 12 प्रतिशत भाग उद्योगों द्वारा उपयोग किया जाता है।
- नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 तक देश की जल मांग उपलब्ध आपूर्ति की तुलना में दोगुनी हो जाएगी।
भारत में जल संकट और जल संवर्धन के लिए समाधानात्मक उपाय :

भारत में जल संकट की समस्या और जल के अत्यधिक दोहन को कम करने के लिए कई समाधानात्मक उपाय किए जा सकते हैं। कुछ प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं –
- आधुनिक तकनीकों का उपयोग : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके पानी की खपत को मापा और नियंत्रित किया जा सकता है। इन तकनीकों के माध्यम से जल के उपयोग को सटीक रूप से मॉनिटर किया जा सकता है और इसे अधिक प्रभावी तरीके से प्रबंधित किया जा सकता है।
- जल स्रोतों का विस्तार और जल दक्षता में सुधार के उपायों को लागू करना : भारत में जल स्रोतों का संरक्षण और विस्तार, जल दक्षता में सुधार, तथा जल संसाधनों की रक्षा के उपायों को लागू करके पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
- तकनीकी उपायों का कार्यान्वयन सुनिश्चित करना : जल संकट से निपटने के लिए बरीड क्ले पॉट प्लांटेशन सिंचाई जैसी तकनीकी उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे पानी की बचत होती है और फसल की उत्पादकता में भी सुधार संभव है।
- जल संवर्धन के नीतियों में सुधार और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों का विस्तार करना : जल संकट से उबरने और जल संवर्धन के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि जल संसाधनों की संरक्षा हेतु सरकारी नीतियों में सुधार किया जाए और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों का अधिक उपयोग बढ़ाया जाए, जिससे पानी की सटीक खपत सुनिश्चित हो सके।
- वाटरशेड मैनेजमेंट का उपयोग करना : जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज के लिए वाटरशेड मैनेजमेंट एक प्रभावी उपाय हो सकता है। इससे जल संचयन और भूजल पुनर्भरण की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा, जिससे जल संकट से राहत मिल सकती है।
- वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना : वर्षा जल संग्रहण का मुख्य उद्देश्य वर्षा की हर बूंद का संरक्षण करना, मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करना, मिट्टी की नमी को बनाए रखना और पुनर्भरण (रिचार्ज) को बढ़ाना है। इस प्रक्रिया से जल की उत्पादकता को बढ़ाने में मदद मिलती है।
- परंपरागत जल संरक्षण प्रणालियों को बढ़ावा देना : भारत में जल संरक्षण की परंपरागत प्रणालियों को फिर से सक्रिय करने और इन्हें और अधिक प्रभावी बनाने के लिए जोर दिया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर जल की बचत और संवर्धन सुनिश्चित किया जा सके।
- नदियों के संरक्षण के लिए सरकारी स्तर पर नीति निर्माण करना : भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बहने वाली नदियों को बारहमासी बनाए रखने के लिए सरकारी स्तर पर नीति निर्माण और जल संरक्षण के लिए प्रयास करना अत्यंत आवश्यक है।
- जल बजटिंग और जल ऑडिटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करना : भारत के ग्रामीण इलाकों में जल बजटिंग और जल ऑडिटिंग की स्पष्ट रूपरेखा तैयार करना, साथ ही प्रत्येक क्षेत्र में जल बैंक की स्थापना, जल संकट से निपटने के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।
- समाज में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने के लिए भूजल वैज्ञानिकों की भूमिका सुनिश्चित करना : जल संरक्षण में भूजल वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। साथ ही, समाज में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने के लिए समय-समय पर संगोष्ठियों और सेमिनारों का आयोजन करना चाहिए। इन सभी उपायों को मिलाकर हम जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठा सकते हैं।
भारत में जल प्रबंधन के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ :
भारत में जल प्रबंधन के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं –
- जल की मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन : जल की बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना एक गंभीर चुनौती है। विशेष रूप से कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए पानी की प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है।
- खाद्य उत्पादन के लिए पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना : खाद्य उत्पादन के लिए पर्याप्त जल सुनिश्चित करना और साथ ही विभिन्न क्षेत्रों की मांगों के बीच जल उपयोग को संतुलित करना एक कठिन कार्य है।
- महानगरों और बड़े शहरों की बढ़ती जल मांग : शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि के कारण महानगरों और अन्य बड़े शहरों में जल की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे जल प्रबंधन की समस्याएँ और अधिक गंभीर हो गई हैं।
- अपशिष्ट जल को उपचारित करना और इसे पुनः उपयोग योग्य बनाना : भारत में विशेष रूप से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में अपशिष्ट जल को उचित तरीके से उपचारित करना और इसे पुनः उपयोग योग्य बनाना एक बड़ी चुनौती है।
- पड़ोसी देशों और सह-बेसिन राज्यों के साथ जल बंटवारे पर विवाद : भारत के पड़ोसी देशों और सह-बेसिन राज्यों के साथ जल बंटवारे पर विवाद और सहयोग की स्थिति, जल प्रबंधन के लिए एक संवेदनशील मुद्दा है।
निष्कर्ष / समाधान की राह :

- जल प्रशासन संस्थाओं के कामकाज करने के तरीकों में सुधार करने की जरूरत : भारत में जल प्रशासन संस्थाओं का कामकाज अक्सर नौकरशाही, गैर-पारदर्शी और गैर-भागीदार दृष्टिकोण से प्रभावित होता है। जल प्रशासन में सुधार की आवश्यकता है ताकि जल प्रबंधन और संसाधन संरक्षण में अधिक पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके।
- सूखा और बाढ़ के उपलब्ध आंकड़ों से संभावित क्षति को कम करने की जरूरत : भारत में सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए विश्वसनीय जानकारी और आंकड़े शीघ्र उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि समय रहते इनसे निपटने के उपाय किए जा सकें और संभावित क्षति को कम किया जा सके।
- भूजल स्तर की सुरक्षा और उपयोग को विनियमित करने के लिए तत्काल निर्णय लेने की आवश्यकता : भूजल स्तर को बढ़ाने और भूजल के उपयोग को विनियमित करने के लिए तत्काल निर्णय लेने की आवश्यकता है। यदि इन निर्णयों में विलंब हुआ तो यह समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है।
- नदियों को पुनः जीवित करने के लिए ठोस नीतियों का निर्माण करने की जरूरत : देश की नदियाँ अब संकट में हैं, और सरकार द्वारा गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के प्रयास अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं कर पाए हैं। इसलिए, नदियों के प्रदूषण को समाप्त करने और उन्हें पुनः जीवित करने के लिए ठोस नीतियों का निर्माण किया जाना चाहिए।
- जल के महत्व की समझ और भविष्य के लिए संरक्षण करने की आवश्यकता : जल पृथ्वी का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है। हमें न केवल अपने वर्तमान उपयोग के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी इसे बचाकर रखना होगा। जल प्रबंधन की नीतियाँ जरूर मौजूद हैं, लेकिन इन नीतियों के कार्यान्वयन में कमी है, जिसे तुरंत सुधारने की आवश्यकता है।
- जल संकट के समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता : जल संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में सभी स्तरों पर सक्रिय भागीदारी से ही हम जल संकट का स्थायी समाधान ढूंढ सकते हैं और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का सुरक्षित और सशक्त उपयोग सुनिश्चित कर सकते हैं। अतः जल संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस नीतियों का निर्माण और उनका प्रभावी कार्यान्वयन ही भारत में जल संकट के समाधान का मुख्य मार्ग होगा।
Download Plutus IAS Current Affairs (Hindi) 22nd March 2025
स्त्रोत – पी.आई.बी एवं द हिन्दू।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. विश्व जल दिवस 2025 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- विश्व जल दिवस 2025 का मुख्य उद्देश्य – सुरक्षित पानी तक पहुंच के बिना रहने वाले लोगों के बारे में जागरूकता को फैलाना या बढ़ाना है।
- भारत में ‘ जल शक्ति अभियान : कैच द रेन – 2025′ मानव संसाधन और विकास मंत्रालय और नेहरु युवा केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से प्रारंभ किया गया है।
- विश्व जल दिवस 2025 का मुख्य विषय/ थीम “ग्लेशियर संरक्षण” है।
- भारत में विश्व जल दिवस 2025 का मुख्य थीम ‘ नारी शक्ति से जल शक्ति ‘ है।
उपरोक्त कथन / कथनों में से कौन सा कथन सही है ?
A. केवल 1 और 3
B. केवल 2 और 4
C. इनमें से कोई नहीं।
D. उपरोक्त सभी।
उत्तर – A
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. विश्व जल दिवस के मुख्य उद्देश्यों और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न विभिन्न खतरों को रेखांकित करते हुए भारत में जल संरक्षण, प्रबंधन एवं संवर्धन की राह में आने वाली प्रमुख चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तारपूर्वक चर्चा कीजिए। ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )
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