विश्व जैवमंडल रिज़र्व नेटवर्क और भारत का 13वां शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिज़र्व

विश्व जैवमंडल रिज़र्व नेटवर्क और भारत का 13वां शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिज़र्व

पाठ्यक्रम – सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र – 3 – पर्यावरण और पारिस्थितिकी के अंतर्गत – भारत में दुर्लभ पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण की दशा और दिशा खण्ड से संबंधित    

प्रारंभिक परीक्षा के लिए – यूनेस्को, विश्व जैवमंडल रिज़र्व नेटवर्क (WNBR), राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, केंद्रीय जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र समिति, शुष्क पारिस्थितिक तंत्र, समुद्री पारिस्थितिक तंत्र

 

खबरों में क्यों ? 

 

 

  • हाल ही में यूनेस्को (UNESCO) ने भारत के हिमाचल प्रदेश स्थित शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिज़र्व (Cold Desert Biosphere Reserve – CDBR) को विश्व जैवमंडल रिज़र्व नेटवर्क (World Network of Biosphere Reserves – WNBR) में सम्मिलित किया है। 
  • यह निर्णय उस समय और भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है जब साओ टोमे और प्रिंसिपे (मध्य अफ्रीका का द्वीपीय राष्ट्र) विश्व का पहला ऐसा देश बन गया है, जिसका सम्पूर्ण भूभाग बायोस्फीयर रिज़र्व घोषित किया गया है। 
  • भारत के लिए यह उपलब्धि न केवल वैश्विक मंच पर उसकी पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं को रेखांकित करती है, बल्कि उच्च-ऊँचाई वाले दुर्लभ पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिज़र्व क्या होता है ?

 

  1. भौगोलिक स्थिति : यह रिज़र्व हिमाचल प्रदेश के ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र में अवस्थित है और पूरे स्पीति वन्यजीव प्रभाग के साथ-साथ लाहौल वन प्रभाग के निकटवर्ती क्षेत्रों को समेटे हुए है। इसमें बारालाचा दर्रा, भरतपुर तथा सरचू जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जो समुद्र तल से 3,300 मीटर से लेकर 6,600 मीटर तक की ऊँचाई पर स्थित हैं।
  2. स्थापना और मान्यता : वर्ष 2009 में इसे भारत के 16वें बायोस्फीयर रिज़र्व के रूप में मान्यता दी गई। विशेष बात यह रही कि यह भारत का पहला ऐसा बायोस्फीयर रिज़र्व था, जो अत्यंत ऊँचाई वाले ठंडे मरुस्थलीय परिदृश्य में स्थापित हुआ। इस विशेषता ने इसे विशिष्ट और दुर्लभ बना दिया।
  3. प्राकृतिक स्वरूप और भूदृश्य : यहाँ का परिदृश्य अत्यंत विविध और आकर्षक है। इसमें पिन घाटी राष्ट्रीय उद्यान, किब्बर वन्यजीव अभयारण्य, चंद्रताल आर्द्रभूमि, पवन-प्रवाहित पठार, हिमनदी घाटियाँ, अल्पाइन झीलें तथा ऊँचाई वाले रेगिस्तानी क्षेत्र सम्मिलित हैं। इन भौगोलिक इकाइयों के कारण इसे WNBR में शामिल सबसे ठंडे एवं शुष्क पारिस्थितिक तंत्रों में से एक माना जाता है।
  4. पुष्पीय विविधता : यह क्षेत्र समृद्ध पौध विविधता का घर है। यहाँ 14 स्थानिक प्रजातियाँ, 68 देशी प्रजातियाँ तथा 62 संकटग्रस्त पौध प्रजातियाँ पाई जाती हैं। सैलिक्स (Willow), Betula utilis (हिमालयन बर्च) जैसे औषधीय पौधे विशेष महत्त्व रखते हैं। इसके अलावा विलो-लीव्ड सी-बक्थॉर्न, फारसी जुनिपर तथा कठोर अल्पाइन घास और औषधीय जड़ी-बूटियाँ यहाँ की वनस्पति को विशिष्ट बनाती हैं।
  5. दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों का आश्रय स्थल होना : शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिज़र्व दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों के लिये भी आश्रय स्थल है। यहाँ हिम तेंदुआ, हिमालयी भेड़िया, तिब्बती मृग, हिमालयी भूरा भालू, तिब्बती हिरन, रेड फॉक्स, हिमालयी आइबेक्स और बियर्डेड गिद्ध जैसी महत्त्वपूर्ण प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यही नहीं, हिमालयी ग्रिफॉन तथा अन्य कई पक्षी प्रजातियाँ इस क्षेत्र की जैव विविधता को अद्वितीय स्वरूप देती हैं।

 

विश्व जैवमंडल रिज़र्व नेटवर्क (WNBR) क्या है ? 

 

  • उत्कृष्ट जैवमंडल स्थलों का एक वैश्विक मंच : यूनेस्को द्वारा स्थापित यह नेटवर्क उत्कृष्ट जैवमंडल स्थलों का एक वैश्विक मंच है। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों के बीच अनुभवों, प्रौद्योगिकी तथा ज्ञान का आदान-प्रदान करना है ताकि संरक्षण और सतत विकास को एक साथ आगे बढ़ाया जा सके।
  • विश्व जैवमंडल रिज़र्व नेटवर्क (WNBR) का मुख्य उद्देश्य : विश्व जैवमंडल रिज़र्व नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य उत्तर-दक्षिण, दक्षिण-दक्षिण तथा दक्षिण-उत्तर-दक्षिण सहयोग को प्रोत्साहित करना, अनुभवों और नवाचारों के आदान-प्रदान के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और जैव विविधता और सांस्कृतिक विविधता की सुरक्षा करते हुए सतत विकास की दिशा में वैश्विक साझेदारी को मजबूत करना है।
  • यूनेस्को का मानव और जैवमंडल कार्यक्रम के अंतर्गत संचालन : विश्व जैवमंडल रिज़र्व नेटवर्क (WNBR) मानव और जैवमंडल कार्यक्रम (Man and Biosphere Programme – MAB) के अंतर्गत संचालित होता है। यह कार्यक्रम संरक्षण, विकास और ज्ञान-विनिमय के त्रिस्तरीय मॉडल पर आधारित है।
  • विश्व जैवमंडल रिज़र्व नेटवर्क (WNBR) का वैश्विक परिदृश्य में स्थिति : वर्तमान में WNBR में 142 देशों के 785 स्थल शामिल हैं। वर्ष 2018 के बाद से ही लगभग एक मिलियन वर्ग किमी. अतिरिक्त क्षेत्र संरक्षण दायरे में जोड़ा गया है, जो आकार में लगभग बोलीविया के बराबर है।

 

बायोस्फीयर रिज़र्व की अवधारणा और संरचनात्मक स्वरुप : 

 

बायोस्फीयर रिज़र्व की परिभाषा : 

 

  • बायोस्फीयर रिज़र्व, यूनेस्को का एक अंतर्राष्ट्रीय पदनाम है, जो उन प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिदृश्यों को प्रदान किया जाता है जहाँ संरक्षण और विकास का संतुलन स्थापित किया जा सके। यह व्यापक स्थलीय, तटीय अथवा समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों को भी समाहित करता है।

 

बायोस्फीयर रिज़र्व का प्रमुख कार्य : 

 

  1. संरक्षण – जैव विविधता और सांस्कृतिक विविधता की रक्षा करना।
  2. सतत विकास – सामाजिक और पर्यावरणीय रूप से संतुलित आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना।
  3. संचालन सहायता – अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण और निगरानी की सुविधा प्रदान करना।

 

बायोस्फीयर रिज़र्व का संरचनात्मक स्वरुप : 

 

बायोस्फीयर रिज़र्व तीन प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित होता है –

  1. कोर क्षेत्र : पूर्णतः संरक्षित हिस्सा, जहाँ जैव विविधता को सुरक्षित रखा जाता है (जैसे राष्ट्रीय उद्यान या अभयारण्य)।
  2. बफर क्षेत्र : कोर क्षेत्र के चारों ओर, जहाँ अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण जैसी गतिविधियाँ चलती हैं।
  3. संक्रमण क्षेत्र : बाहरी हिस्सा, जहाँ स्थानीय समुदाय सतत जीवन शैली अपनाकर पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था दोनों को सहारा देते हैं। 

बायोस्फीयर रिज़र्व के रूप में नामांकन के लिए प्रमुख मानदंड : 

 

  1. बायोस्फीयर रिज़र्व स्थल में एक विशिष्ट संरक्षण क्षेत्र होना चाहिए।
  2. इसके तहत रिज़र्व स्थल का आकार पर्याप्त और विविधतापूर्ण  होनी चाहिए ताकि पारिस्थितिक संतुलन बना रहे।
  3. बायोस्फीयर रिज़र्व स्थल में स्थानीय समुदाय की भागीदारी निश्चित रूप से सुनिश्चित होनी चाहिए।
  4. पारंपरिक जीवनशैली और ज्ञान को संरक्षण प्रक्रिया में बायोस्फीयर रिज़र्व स्थल को शामिल किया जाए।

 

भारत में बायोस्फीयर रिज़र्व : 

 

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि : भारत ने 1986 में यूनेस्को के मार्गदर्शन में बायोस्फीयर रिज़र्व योजना शुरू की थी। भारत मानव और जैवमंडल कार्यक्रम (Man and Biosphere Programme – MAB) के हस्ताक्षरकर्ता देशों में से एक है और भूदृश्य दृष्टिकोण को अपनाने में एक अग्रणी देश रहा है।
  • वित्तीय प्रावधान : पूर्वोत्तर राज्यों और हिमालयी राज्यों में केंद्र और राज्य का योगदान 90:10 अनुपात में होता है। जबकि भारत के अन्य राज्यों में यह अनुपात 60:40 है। प्रत्येक स्थल के लिये राज्य सरकार प्रबंधन योजना तैयार करती है, जिसे केंद्रीय समिति अनुमोदित करती है।
  • भारत में बायोस्फीयर रिज़र्व की वर्तमान स्थिति : भारत में कुल 18 बायोस्फीयर रिज़र्व हैं, जिनमें से अब 13 WNBR का हिस्सा बन चुके हैं। यह भारत के संरक्षण प्रयासों की सफलता का द्योतक है।

 

निष्कर्ष : 

 

 

  1. शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिज़र्व केवल एक संरक्षित क्षेत्र भर नहीं है, बल्कि यह मानव और प्रकृति के संतुलित सह-अस्तित्व का जीवंत उदाहरण है। इसकी ऊँचाई, शुष्क जलवायु, अद्वितीय जैव विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत इसे विशेष महत्व प्रदान करते हैं।
  2. यूनेस्को के विश्व जैवमंडल रिज़र्व नेटवर्क (WNBR) में इसका समावेश भारत की उस दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिसके अंतर्गत देश जैव विविधता संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान के सम्मान और सतत विकास को एकीकृत रूप से आगे बढ़ा रहा है। 
  3. मानव और जैवमंडल कार्यक्रम (Man and Biosphere Programme – MAB) के तहत यह उपलब्धि न केवल स्थानीय समुदायों को नए अवसर प्रदान करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की पर्यावरणीय नेतृत्वकारी भूमिका को भी सशक्त बनाएगी।
  4. भारत के हिमाचल प्रदेश स्थित शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिज़र्व कठोर उच्च-ऊँचाई वाले पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के साथ-साथ यह भी सिद्ध करता है कि सतत् मानव-पर्यावरण सह-अस्तित्व संभव है। हिम तेंदुओं जैसे प्रतिष्ठित जीवों और दुर्लभ वनस्पतियों से समृद्ध यह क्षेत्र अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान, अनुभव और संरक्षण की सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए तैयार है। 
  5. पर्यावरण और पारिस्थितिकी के बीच के संतुलन में निस्संदेह, यह एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी प्रकृति और मानव समुदाय एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं।

 

स्त्रोत – पी. आई. बी एवं द हिन्दू।

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिज़र्व (CDBR) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इसे वर्ष 2009 में भारत के 16वें बायोस्फीयर रिज़र्व के रूप में मान्यता दी गई थी, और यह अत्यंत ऊँचाई वाले ठंडे मरुस्थलीय परिदृश्य में स्थापित होने वाला देश का पहला रिज़र्व था।
  2. यह रिज़र्व पूरे किन्नौर वन्यजीव प्रभाग और उसके निकटवर्ती क्षेत्रों को समेटे हुए है।
  3. यहाँ पाए जाने वाले दुर्लभ और लुप्तप्राय जीवों में हिम तेंदुआ, तिब्बती मृग, हिमालयी आइबेक्स और बियर्डेड गिद्ध शामिल हैं।
  4. बायोस्फीयर रिज़र्व का कोर क्षेत्र, बफर क्षेत्र और संक्रमण क्षेत्र में विभाजन, यूनेस्को के मानव और जैवमंडल कार्यक्रम (MAB) के त्रिस्तरीय मॉडल का एक अंग है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा / से सही हैं? 

A. केवल 1 और 2 

B. केवल 1, 3 और 4 

C. केवल 2, 3 और 4

D. 1, 2, 3 और 4 सभी।

उत्तर – B केवल 1, 3 और 4

व्याख्या :

  • कथन 1 सही है। यह तथ्य दिए गए ‘स्थापना और मान्यता’ खंड में स्पष्ट रूप से उल्लिखित है।
  • कथन 2 गलत है। भौगोलिक स्थिति के अनुसार, रिज़र्व पूरे स्पीति वन्यजीव प्रभाग के साथ-साथ लाहौल वन प्रभाग के निकटवर्ती क्षेत्रों को समेटे हुए है, न कि किन्नौर वन्यजीव प्रभाग को।
  • कथन 3 सही है। ये सभी प्रजातियाँ ‘दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों का आश्रय स्थल होना’ खंड में वर्णित हैं।
  • कथन 4 सही है। बायोस्फीयर रिज़र्व की संरचना (कोर, बफर, संक्रमण) MAB कार्यक्रम के संरक्षण, विकास और ज्ञान-विनिमय के त्रिस्तरीय मॉडल पर आधारित है।

 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

 

Q.1. हिमाचल प्रदेश स्थित शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिज़र्व को यूनेस्को द्वारा विश्व जैवमंडल रिज़र्व नेटवर्क (WNBR) में सम्मिलित किया गया है। इस परिप्रेक्ष्य में शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिज़र्व के वैश्विक महत्व के साथ – साथ इसके भौगोलिक, पारिस्थितिक एवं संरक्षणात्मक महत्व की विवेचना कीजिए। ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

 

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
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