सागरमाला परियोजना: बंदरगाह आधुनिकीकरण से रसद लागत में कमी

सागरमाला परियोजना: बंदरगाह आधुनिकीकरण से रसद लागत में कमी — सागरमाला परियोजना: बंदरगाह आधुनिकीकरण की प्रक्रिया

सागरमाला परियोजना: बंदरगाह आधुनिकीकरण से रसद लागत में कमी

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय  |  GS Paper III — आधारभूत संरचना: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़कें, विमानपत्तन, रेलवे आदि
  • Prelims: सागरमाला परियोजना, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, बंदरगाह आधुनिकीकरण, तटीय समुदाय का विकास, तटीय पोत परिवहन, अंतर्देशीय जल परिवहन, वन नेशन वन पोर्ट प्रोसेस (ONOP), समग्र बंदरगाह संपर्क योजना (CPCP), भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI)
  • Essay: भारत के आर्थिक विकास में अवसंरचना की भूमिका, तटीय क्षेत्रों का सतत विकास और नीली अर्थव्यवस्था

त्वरित पुनरावृत्ति: सागरमाला परियोजना भारत में बंदरगाह-आधारित विकास को बढ़ावा देने, रसद लागत को कम करने और तटीय समुदायों के समग्र विकास के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जो समुद्री अवसंरचना के आधुनिकीकरण और संपर्क पर केंद्रित है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) ने हाल ही में सागरमाला परियोजना के तहत बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और संपर्क में हुई प्रगति पर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इस विज्ञप्ति में परियोजना के विभिन्न स्तंभों के तहत पूरी हो चुकी और कार्यान्वयन के अधीन परियोजनाओं का विवरण दिया गया है, जिसमें बंदरगाह आधुनिकीकरण, संपर्क सुविधा, तटीय समुदाय विकास और अंतर्देशीय जल परिवहन शामिल हैं। यह भारत के समुद्री क्षेत्र में हो रहे व्यापक विकास को रेखांकित करता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत की 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा और विशाल अंतर्देशीय जलमार्गों की क्षमता का पूर्ण उपयोग करने के लिए बंदरगाह-आधारित विकास को बढ़ावा देना आवश्यक है।
  • ऐतिहासिक रूप से, भारत में बंदरगाहों की क्षमता और दक्षता वैश्विक मानकों से कम रही है, जिससे व्यापार और रसद लागत में वृद्धि हुई है।
  • वैश्विक व्यापार में समुद्री मार्ग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और कुशल बंदरगाह अवसंरचना निर्यात-आयात को बढ़ावा देने तथा ‘मेक इन इंडिया’ पहल को समर्थन देने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • सागरमाला परियोजना का लक्ष्य देश की रसद लागत को कम करना, आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और तटीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है।
  • सरकार ने प्रमुख बंदरगाहों पर क्षमता बढ़ाने, कामकाज की दक्षता में सुधार करने और जहाजों के आने-जाने में लगने वाले समय को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें नए बर्थ और टर्मिनल बनाना, मौजूदा बर्थ का यंत्रीकरण और आधुनिकीकरण शामिल है।

सागरमाला परियोजना क्या है?

  • सागरमाला परियोजना पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
  • इसका मुख्य लक्ष्य देश में बंदरगाह-आधारित विकास को बढ़ावा देना है, जिसमें बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, नए बंदरगाहों का विकास और बंदरगाहों के आसपास औद्योगिक विकास शामिल है।
  • यह योजना पाँच प्रमुख स्तंभों के अंतर्गत आने वाली परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है: बंदरगाह आधुनिकीकरण, बंदरगाह संपर्क, बंदरगाह-आधारित औद्योगिकीकरण, तटीय समुदाय का विकास और तटीय पोत परिवहन व अंतर्देशीय जल परिवहन।
  • परियोजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बेहतर बंदरगाह संपर्क सुविधा और बंदरगाहों व उनके आसपास के इलाकों के बीच सामान की कुशल आवाजाही के माध्यम से कुल रसद लागत (Logistics Cost) को कम करना है।
  • ‘वन नेशन वन पोर्ट प्रोसेस’ (ONOP) जैसी पहलें बंदरगाह प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करके कामकाज की दक्षता बढ़ाने और जहाजों के टर्नअराउंड समय (Turnaround Time) को कम करने पर केंद्रित हैं।
  • समग्र बंदरगाह संपर्क योजना (CPCP) के तहत, सड़क, रेल और आंतरिक जलमार्गों के माध्यम से बंदरगाहों की अंतिम छोर और आसपास के इलाकों से संपर्क पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • इस परियोजना के परिणामस्वरूप, प्रमुख और अन्य बंदरगाहों की कार्गो संभालने की क्षमता 2013-14 में लगभग 1,400 MTPA से बढ़कर मार्च 2026 तक 2,818 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) हो गई है।
  • भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) द्वारा राष्ट्रीय जलमार्गों (National Waterways) पर मल्टी-मॉडल टर्मिनल (MMT) और इंटरमॉडल टर्मिनल (IMT) विकसित किए जा रहे हैं, जो अंतर्देशीय जलमार्ग संपर्क को मजबूत करते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
बंदरगाह-आधारित विकास देश के समग्र आर्थिक विकास को गति देने के लिए बंदरगाहों को विकास के केंद्र के रूप में उपयोग करना।
पांच स्तंभ बंदरगाह आधुनिकीकरण, संपर्क, औद्योगिकीकरण, तटीय समुदाय विकास और तटीय व अंतर्देशीय जल परिवहन के माध्यम से व्यापक दृष्टिकोण।
क्षमता वृद्धि प्रमुख बंदरगाहों की कार्गो हैंडलिंग क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि, व्यापार और वाणिज्य को सुगम बनाना।
दक्षता में सुधार वन नेशन वन पोर्ट प्रोसेस (ONOP) जैसे उपायों के माध्यम से जहाजों के टर्नअराउंड समय को कम करना।
बहुआयामी संपर्क सड़क, रेल और आंतरिक जलमार्गों के माध्यम से बंदरगाहों की अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी पर ध्यान केंद्रित करना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • सागरमाला परियोजना भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में वृद्धि और वैश्विक व्यापार में देश की हिस्सेदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • बेहतर बंदरगाह संपर्क और दक्षता से कुल रसद लागत (Logistics Cost) में कमी आती है, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है।
  • बंदरगाह-आधारित औद्योगिकीकरण से नए उद्योगों की स्थापना होती है, जिससे रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलता है।

सामरिक महत्व

  • आधुनिक और कुशल बंदरगाह भारत की समुद्री सुरक्षा और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करते हैं, विशेषकर हिंद महासागर क्षेत्र में।
  • बेहतर बंदरगाह अवसंरचना भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Global Supply Chains) में एक महत्वपूर्ण नोड के रूप में स्थापित करती है।
  • तटीय समुदाय विकास के माध्यम से तटीय क्षेत्रों में स्थिरता और समावेशी विकास सुनिश्चित होता है, जो आंतरिक सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

सामाजिक महत्व

  • तटीय समुदाय विकास घटक के तहत कौशल विकास और आजीविका के अवसरों का सृजन होता है, जिससे तटीय आबादी का जीवन स्तर सुधरता है।
  • रो-पैक्स (Ro-Pax) और यात्री जेट्टी जैसी परियोजनाएं तटीय क्षेत्रों में परिवहन को सुगम बनाती हैं, जिससे लोगों की आवाजाही और पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।

पर्यावरण महत्व

  • आंतरिक जलमार्गों का विकास सड़क और रेल परिवहन पर निर्भरता कम करके कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करता है, जिससे पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

चुनौतियाँ

1. भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी

  • बंदरगाह विस्तार और संपर्क परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण अक्सर जटिल और समय लेने वाला होता है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) और विभिन्न नियामक निकायों से मंजूरी प्राप्त करने में देरी से परियोजनाओं की लागत और समय-सीमा प्रभावित होती है।

2. अंतर-मंत्रालयी समन्वय

  • बंदरगाह संपर्क परियोजनाओं में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, रेल मंत्रालय, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता होती है।
  • समन्वय की कमी से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बाधाएं आ सकती हैं।

3. तकनीकी और वित्तीय बाधाएं

  • बड़े जहाजों के लिए जलमार्गों को गहरा करने (कैपिटल ड्रेजिंग) जैसी परियोजनाओं के लिए उन्नत तकनीक और पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को आकर्षित करने और व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding) सुनिश्चित करने में चुनौतियां।

4. जलवायु परिवर्तन और तटीय भेद्यता

  • बढ़ते समुद्री स्तर और चरम मौसमी घटनाओं से तटीय बुनियादी ढांचे और बंदरगाहों को खतरा है।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति बंदरगाहों को लचीला बनाने के लिए अनुकूलन उपायों की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
परियोजना क्रियान्वयन में देरी भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और वित्तीय बाधाओं के कारण परियोजनाओं का समय पर पूरा न होना।
रसद लागत में कमी का लक्ष्य हालांकि प्रगति हुई है, फिर भी वैश्विक मानकों की तुलना में भारत की रसद लागत अधिक है, जिसे और कम करने की आवश्यकता है।
अंतिम छोर तक संपर्क बंदरगाहों से आंतरिक आर्थिक केंद्रों तक कुशल और निर्बाध अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना अभी भी एक चुनौती है।
तटीय समुदाय का समावेशी विकास बंदरगाह विकास के लाभों को तटीय समुदायों तक समान रूप से पहुंचाना और विस्थापन जैसी चिंताओं को दूर करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • सागरमाला योजना
  • समग्र बंदरगाह संपर्क योजना (CPCP)

आगे की राह

  • भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और पर्यावरणीय मंजूरी में तेजी लाना, एकल खिड़की मंजूरी प्रणाली को मजबूत करना।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ विभिन्न मंत्रालयों के बीच प्रभावी समन्वय के लिए एक मजबूत संस्थागत तंत्र स्थापित करना।
  • बंदरगाहों और उनके आसपास के क्षेत्रों के बीच सड़क, रेल और आंतरिक जलमार्गों के माध्यम से अंतिम छोर तक संपर्क को प्राथमिकता देना।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए अनुकूल नीतिगत माहौल बनाना और व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) जैसे तंत्रों का प्रभावी ढंग से उपयोग करना।
  • बंदरगाहों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति लचीला बनाने के लिए अनुकूलन और शमन उपायों में निवेश करना।
  • तटीय समुदायों के लिए कौशल विकास, आजीविका सृजन और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को मजबूत करना ताकि विकास समावेशी हो।
  • बंदरगाह प्रक्रियाओं को और अधिक डिजिटाइज़ करना और ‘वन नेशन वन पोर्ट प्रोसेस’ (ONOP) जैसे उपायों को व्यापक रूप से लागू करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘अनुच्छेद 246’: ‘संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची’}
  • {‘अनुच्छेद 262’: ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद’}
  • {‘सातवीं अनुसूची’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूची’}

अवधारणा प्रवाह

बंदरगाहों का आधुनिकीकरण और क्षमता वृद्धि  →  बेहतर बंदरगाह संपर्क (सड़क, रेल, जलमार्ग)  →  कुल रसद लागत में कमी  →  व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा  →  आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन  →  तटीय समुदाय का विकास और सशक्तिकरण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. सागरमाला परियोजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
2. इसका मुख्य लक्ष्य देश में बंदरगाह-आधारित विकास को बढ़ावा देना है।
3. यह केवल बंदरगाह आधुनिकीकरण और बंदरगाह संपर्क पर केंद्रित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 2
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। सागरमाला परियोजना पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जिसका उद्देश्य बंदरगाह-आधारित विकास को बढ़ावा देना है। कथन 3 गलत है क्योंकि यह योजना पांच स्तंभों पर आधारित है, जिनमें बंदरगाह आधुनिकीकरण, बंदरगाह संपर्क, बंदरगाह-आधारित औद्योगिकीकरण, तटीय समुदाय का विकास और तटीय पोत परिवहन व अंतर्देशीय जल परिवहन शामिल हैं।

Q2. ‘वन नेशन वन पोर्ट प्रोसेस (ONOP)’ का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

  1. देश के सभी बंदरगाहों को एक ही प्राधिकरण के अधीन लाना।
  2. बंदरगाहों के बीच कार्गो के कुशल हस्तांतरण को सुनिश्चित करना।
  3. बंदरगाह प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और जहाजों के टर्नअराउंड समय को कम करना।
  4. बंदरगाहों पर सुरक्षा मानकों को एकीकृत करना।

उत्तर: बंदरगाह प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और जहाजों के टर्नअराउंड समय को कम करना। — ‘वन नेशन वन पोर्ट प्रोसेस (ONOP)’ का उद्देश्य बंदरगाह प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना, कामकाज की दक्षता बढ़ाना और जहाजों के टर्नअराउंड समय (जहाज के आगमन से लेकर प्रस्थान तक का समय) को कम करना है। यह बंदरगाहों पर परिचालन क्षमता में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सागरमाला परियोजना भारत में बंदरगाह-आधारित विकास को बढ़ावा देने और रसद लागत को कम करने में किस प्रकार सहायक है? इसके प्रमुख स्तंभों और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत सागरमाला परियोजना के परिचय और उसके मुख्य उद्देश्यों से करें। इसके बाद, परियोजना के पांच प्रमुख स्तंभों (बंदरगाह आधुनिकीकरण, बंदरगाह संपर्क, बंदरगाह-आधारित औद्योगिकीकरण, तटीय समुदाय का विकास, तटीय पोत परिवहन व अंतर्देशीय जल परिवहन) का संक्षेप में वर्णन करें। परियोजना के तहत हुई प्रगति और प्रमुख उपलब्धियों, जैसे कार्गो संभालने की क्षमता में वृद्धि और संपर्क परियोजनाओं को रेखांकित करें। अंत में, परियोजना के महत्व और संभावित चुनौतियों पर एक आलोचनात्मक टिप्पणी के साथ निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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