17 Oct सीएक्यूएम ने पंजाब के मोगा में पराली प्रबंधन की समीक्षा की, जानिए क्या हुआ
✎ CAQM एक सांविधिक निकाय है (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021), जो दिल्ली-एनसीआर और निकटवर्ती राज्यों में पराली जलाने सहित वायु प्रदूषण के स्रोतों पर समन्वित निर्देश और प्रवर्तन सुनिश्चित करता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (कृषि-जलवायु क्षेत्र और मौसमी वायु-परिसंचरण का प्रभाव) | GS Paper II — शासन एवं सार्वजनिक नीति (सांविधिक निकाय, केंद्र-राज्य समन्वय, न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में पर्यावरण शासन) | GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (वायु प्रदूषण, वायु गुणवत्ता प्रबंधन, जैव-अपघटन और फसल अवशेष का उपयोग) | GS Paper III — कृषि (फसल अवशेष प्रबंधन, कृषि यंत्रीकरण और सब्सिडी आधारित प्रोत्साहन)
- Prelims: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और उसका कानूनी आधार, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021, पूर्ववर्ती निकाय: पर्यावरण प्रदूषण (निवारण एवं नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA), राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI), हैप्पी सीडर (Happy Seeder) और सुपर सीडर (Super Seeder) जैसी फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें, इन-सिटू (यथा-स्थान) और एक्स-सिटू (अन्यत्र) अवशेष प्रबंधन में अंतर, पराली से जैव-ऊर्जा और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) उत्पादन
- Essay: आर्थिक हित और पर्यावरणीय न्याय: कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था में वायु प्रदूषण का समाधान, सांविधिक निकाय और राज्यों का सहयोग: अंतर-राज्यीय पर्यावरण समस्याओं में सहकारी संघवाद की परीक्षा
त्वरित पुनरावृत्ति: CAQM एक सांविधिक निकाय है (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021), जो दिल्ली-एनसीआर और निकटवर्ती राज्यों में पराली जलाने सहित वायु प्रदूषण के स्रोतों पर समन्वित निर्देश और प्रवर्तन सुनिश्चित करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के सदस्य (तकनीकी) डॉ. टी. एस. पंवार के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने धान कटाई सीज़न 2026 के दौरान पंजाब के मोगा जिले का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने जिला अधिकारियों के साथ बैठक की, चिह्नित हॉटस्पॉट गांवों का क्षेत्रीय निरीक्षण किया और फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनों की उपलब्धता, तैनाती, जमीनी स्तर की निगरानी और विभागों के बीच समन्वय की समीक्षा की। यह दौरा पंजाब के हॉटस्पॉट जिलों में धान कटाई सीज़न के प्रबंधन हेतु CAQM द्वारा की जा रही निरंतर निगरानी का हिस्सा है। इससे स्पष्ट है कि पराली जलाने की समस्या का समाधान केवल प्रतिबंध से नहीं, बल्कि मशीनों की समय पर उपलब्धता, स्थानीय प्रशासन की तैयारी और राज्यों के बीच तालमेल से ही संभव है।
पृष्ठभूमि
- धान-गेहूँ फसल चक्र में मानसून के बाद धान की कटाई और रबी की बुवाई के बीच कम समय होने के कारण किसान खेत साफ करने के लिए पराली जलाते हैं। इसी कारण अक्टूबर-नवंबर में उत्तर-पश्चिम भारत में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता है।
- शीत ऋतु में तापमान प्रतिलोमन (Temperature Inversion) और कम हवा की गति से प्रदूषक नीचे जमा हो जाते हैं, जिससे दिल्ली-एनसीआर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) गंभीर श्रेणी तक पहुँच जाता है।
- पूर्ववर्ती निकाय EPCA की सीमित शक्तियों और बहु-राज्यीय समन्वय की कमी को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के माध्यम से CAQM की स्थापना की गई, जिसे दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के समन्वित प्रबंधन का दायित्व सौंपा गया।
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत गैर-प्राप्ति शहरों में प्रदूषण कम करने के लक्ष्य निर्धारित हैं, जबकि CAQM का कार्यक्षेत्र एनसीआर और निकटवर्ती राज्यों तक सीमित है।
- फसल अवशेष प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं के अंतर्गत कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) के माध्यम से मशीनें किसानों को उपलब्ध कराई जाती हैं, परंतु मशीनों की समय पर उपलब्धता और उपयोग अब भी चुनौती बनी हुई है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) क्या है?
- CAQM एक सांविधिक निकाय है, जिसकी स्थापना वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत की गई है। यह दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए समन्वय और निर्देश देने वाली शीर्ष संस्था है।
- इसका कार्यक्षेत्र दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के चिह्नित क्षेत्रों तक फैला है, जिससे यह अंतर-राज्यीय पर्यावरण समस्या के लिए एकल समन्वय मंच के रूप में कार्य करता है।
- आयोग को पराली जलाने सहित वायु प्रदूषण के स्रोतों पर निर्देश जारी करने, नियमों का पालन सुनिश्चित करने और उल्लंघन पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) लगाने की शक्ति प्राप्त है।
- CAQM में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त अध्यक्ष के साथ तकनीकी सदस्य और संबंधित राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं, जिससे विशेषज्ञता और राज्यों की भागीदारी दोनों सुनिश्चित होती हैं।
- इन-सिटू प्रबंधन का अर्थ है खेत में ही अवशेष को मिट्टी में मिलाना या उसका प्रबंधन करना, जैसे हैप्पी सीडर से सीधी बुवाई; जबकि एक्स-सिटू प्रबंधन में अवशेष को खेत से बाहर बायोमास ऊर्जा संयंत्रों या अन्य उपयोगों में भेजा जाता है।
- फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रीकरण, कस्टम हायरिंग सेंटर और जैव-अपघटक (Bio-decomposer) जैसे उपाय अपनाए जाते हैं, परंतु इनकी सफलता स्थानीय निगरानी, समय पर उपलब्धता और किसानों की आर्थिक व्यवहार्यता पर निर्भर करती है।
- CAQM के लिए यह समझना आवश्यक है कि प्रदूषण का स्रोत एक राज्य में और प्रभाव दूसरे राज्य में दिखाई देता है, इसलिए समन्वित नीति और सतत निगरानी ही प्रभावी हल है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| संस्थागत स्वरूप: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) | राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के लिए समन्वय और बाध्यकारी निर्देश देने वाली वैधानिक संस्था है। इसका गठन वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत हुआ है। |
| दौरे का स्वरूप: समीक्षा और निगरानी | प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य जिला स्तर पर नीति के क्रियान्वयन का आकलन करना था। इससे कागज़ी योजना और जमीनी स्थिति के बीच का अंतर पहचानने में मदद मिलती है। |
| हॉटस्पॉट आधारित रणनीति | पराली जलाने की घटनाएँ कुछ चिह्नित गांवों में केंद्रित रहती हैं। इसलिए संसाधन और निगरानी इन्हीं क्षेत्रों पर केंद्रित की जाती है। |
| इन-सिटू और एक्स-सिटू प्रबंधन | इन-सिटू प्रबंधन में अवशेष खेत में ही मिट्टी में मिलाए जाते हैं, जबकि एक्स-सिटू प्रबंधन में उन्हें खेत से बाहर ले जाकर उपयोग किया जाता है। दोनों विकल्पों की समीक्षा इस दौरे का मुख्य बिंदु थी। |
| फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनें | मशीनों की उपलब्धता और तैनाती को जांचना यह सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी है कि किसानों के पास समय पर व्यावहारिक विकल्प हों। |
| धान कटाई सीज़न की समय-सीमा | पराली जलाने का दबाव अक्टूबर-नवंबर के सीमित अवधि में सबसे अधिक होता है। इसलिए प्रवर्तन की तैयारी समय से पहले करनी होती है। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- पराली जलाने से निकलने वाले कण पदार्थ (PM2.5 और PM10) और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे प्रदूषक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता को शीतकाल में गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
- मिट्टी में जैविक कार्बन और सूक्ष्मजीवों की संख्या घटती है, जिससे मृदा की उर्वरता पर दीर्घकालिक असर पड़ता है।
- फसल अवशेष को मिट्टी में मिलाने से जैविक पदार्थ बढ़ता है और मृदा स्वास्थ्य सुधरता है।
सामाजिक और स्वास्थ्य महत्व
- वायु प्रदूषण से श्वसन और हृदय संबंधी रोगों का जोखिम बढ़ता है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव बच्चों, बुज़ुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर पड़ता है।
- संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत स्वच्छ वायु में जीने के अधिकार की व्याख्या न्यायालयों ने की है, इसलिए यह नीति का मानवीय आधार भी है।
प्रशासनिक और संघीय महत्व
- यह दौरा राष्ट्रीय स्तर के आयोग और राज्य प्रशासन के बीच समन्वय का उदाहरण है। कृषि, राजस्व, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण विभागों की भूमिकाएँ एक साथ जुड़ी होती हैं।
- कृषि भूमि और कृषि पद्धति राज्य के विषय हैं, जबकि वायु गुणवत्ता में अंतर्राज्यीय प्रभाव होता है। इसलिए ऐसे मामलों में केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगी प्रशासन आवश्यक है।
आर्थिक महत्व
- धान अवशेषों का एक्स-सिटू उपयोग, जैसे जैव-ऊर्जा और बायोगैस उत्पादन, कृषि आधारित आय के नए स्रोत बना सकता है।
- मशीनों के लिए सब्सिडी और सहकारी समितियों तथा कस्टम हायरिंग केंद्रों का विकास ग्रामीण रोज़गार और कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देता है।
चुनौतियाँ
1. किसानों के लिए लागत और समय का दबाव
- धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई के लिए सीमित समय होता है। अवशेष प्रबंधन में अधिक समय और श्रम लगने से किसान पराली जलाने का विकल्प चुन सकते हैं।
- छोटे और सीमांत किसानों के लिए महंगी मशीनें खरीदना कठिन होता है, इसलिए किराये की मशीनों की उपलब्धता निर्णायक हो जाती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: कृषि, खाद्य सुरक्षा और कृषि यंत्रीकरण से संबंधित योजनाएँ
2. मशीनों की उपलब्धता और तैनाती
- सीआरएम मशीनों की संख्या और वितरण सभी गांवों की आवश्यकता के अनुरूप न होने पर इन-सिटू प्रबंधन प्रभावित होता है।
- मशीनों के रखरखाव, ईंधन और चालकों की उपलब्धता जैसे व्यावहारिक पहलू भी समय पर प्रयोग में बाधा डालते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-3: कृषि विपणन, कृषि अवसंरचना और प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण
3. प्रवर्तन और निगरानी की सीमाएँ
- हॉटस्पॉट गांवों की निगरानी के लिए उपग्रह आधारित अग्नि-संकेतों के साथ जमीनी सत्यापन आवश्यक है। केवल सूचना पर आधारित कार्रवाई देर से होती है।
- दंड और प्रोत्साहन के बीच संतुलन बनाए रखना कठिन है। केवल दंडात्मक उपाय किसानों के बीच विरोध पैदा कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-3: पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण
4. बहु-विभागीय समन्वय का अभाव
- कृषि, राजस्व, पुलिस, पर्यावरण और स्थानीय निकाय विभागों के बीच स्पष्ट उत्तरदायित्व न होने पर कार्रवाई में देरी होती है।
- जिला स्तर पर समन्वय तंत्र प्रभावी न हो तो राज्य और केंद्रीय निर्देशों का क्रियान्वयन असमान रह जाता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: केंद्र-राज्य संबंध और प्रशासनिक सुधार
5. अंतर्राज्यीय प्रदूषण का स्वरूप
- वायु प्रदूषक हवा के साथ राज्यों की सीमाएँ पार करते हैं, इसलिए किसी एक राज्य में किए गए उपाय पूरे क्षेत्र की गुणवत्ता तय नहीं कर सकते।
- एनसीआर क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बीच समन्वित कार्य योजना की आवश्यकता बनी रहती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: अंतर्राज्यीय समन्वय और राष्ट्रीय पर्यावरण नीति
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| किसानों की आर्थिक मजबूरी | समय, श्रम और मशीन की लागत अधिक होने से पराली जलाना सस्ता विकल्प बन जाता है। |
| मशीनों की कमी और असमान वितरण | सभी हॉटस्पॉट गांवों में समय पर पर्याप्त मशीनें न पहुँचने से इन-सिटू प्रबंधन सीमित रहता है। |
| निगरानी में देरी | सैटेलाइट संकेत मिलने और जमीनी कार्रवाई के बीच अंतर से घटनाएँ रोकना कठिन होता है। |
| विभागीय समन्वय की कमी | कृषि, राजस्व और पुलिस विभागों के अलग-अलग दायित्व से निर्णय प्रक्रिया धीमी होती है। |
| एक्स-सिटू उपयोग का सीमित बाज़ार | अवशेष से बनी ऊर्जा या बायोगैस के लिए स्थिर खरीदार और परिवहन व्यवस्था न होने से यह विकल्प व्यावहारिक नहीं बन पाता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- कृषि यंत्रीकरण के माध्यम से फसल अवशेष के इन-सिटू प्रबंधन की योजना (Promotion of Agricultural Mechanization for In-situ Management of Crop Residue)
आगे की राह
- हॉटस्पॉट गांवों की पहचान पहले से कर उनमें मशीनों और निगरानी दल की तैनाती की समय-सारणी तय की जाए।
- सीआरएम मशीनों के लिए सहकारी समितियों और कस्टम हायरिंग केंद्रों का नेटवर्क मजबूत किया जाए, ताकि छोटे किसानों तक सुविधा पहुँचे।
- उपग्रह आधारित अग्नि-संकेतों और जमीनी सत्यापन को जोड़कर एक एकीकृत निगरानी प्रणाली विकसित की जाए।
- कृषि, राजस्व, पुलिस और पर्यावरण विभागों के लिए जिला स्तर पर स्पष्ट उत्तरदायित्व और नियमित समन्वय बैठकें तय की जाएँ।
- एक्स-सिटू उपयोग के लिए बायोमास आधारित ऊर्जा संयंत्रों और बायोगैस इकाइयों के साथ अवशेष आपूर्ति के दीर्घकालिक अनुबंध किए जाएँ।
- प्रोत्साहन और दंड के बीच संतुलन रखते हुए जागरूकता अभियान चलाए जाएँ और किसानों को व्यावहारिक विकल्पों की जानकारी दी जाए।
- फसल चक्र में बदलाव और कम अवशेष देने वाली किस्मों के प्रसार पर शोध और विस्तार सेवाएँ बढ़ाई जाएँ।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पराली जलाना · वायु प्रदूषण · राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) · वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) · फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) · यथा-स्थान प्रबंधन · अन्यत्र प्रबंधन · सतत कृषि · पर्यावरण संरक्षण · सरकारी पहल · अंतर-राज्यीय समन्वय · कृषि अपशिष्ट
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: स्वच्छ वायु में जीवन का अधिकार
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण और सुधार का राज्य दायित्व
- अनुच्छेद 51A(छ): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य
अवधारणा प्रवाह
धान की कटाई के बाद खेतों में अवशेष बचता है और गेहूं की बुवाई के लिए समय सीमित होता है। → किसान मशीनों के अभाव या लागत के कारण अवशेष जलाने का विकल्प चुनते हैं। → पराली जलने से PM2.5 जैसे प्रदूषक उत्पन्न होते हैं और हवा के साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तक पहुँचते हैं। → सैटेलाइट संकेतों से हॉटस्पॉट गांव चिह्नित होते हैं और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग समीक्षा और निर्देश जारी करता है। → राज्य प्रशासन मशीनों की तैनाती, निगरानी और विभागीय समन्वय के माध्यम से इन-सिटू और एक्स-सिटू उपायों को लागू करता है। → निगरानी के परिणामों के आधार पर अगले चरण की रणनीति तय होती है और वायु गुणवत्ता में सुधार का मूल्यांकन किया जाता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) एक सांविधिक निकाय है जो पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत कार्य करता है।
2. CAQM का मुख्य उद्देश्य केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
3. पराली जलाना वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है, विशेषकर उत्तर भारत में धान की कटाई के मौसम के दौरान।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। CAQM को ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021’ के तहत स्थापित किया गया था, जो इसे एक सांविधिक निकाय बनाता है। कथन 2 गलत है। CAQM का कार्यक्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और ‘आसपास के क्षेत्रों’ तक फैला हुआ है, जिसमें वे राज्य शामिल हैं जो NCR को प्रभावित करते हैं। कथन 3 सही है। पराली जलाना, विशेषकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, NCR में सर्दियों के दौरान गंभीर वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘फसल अवशेष प्रबंधन (CRM)’ के अंतर्गत आने वाले यथा-स्थान (In-situ) प्रबंधन उपायों का उदाहरण है/हैं?
1. हैप्पी सीडर का उपयोग करके पराली को खेत में ही मिलाना।
2. पराली को एकत्र करके बायोमास आधारित ऊर्जा संयंत्रों में भेजना।
3. धान के अवशेषों को पशु चारे के रूप में उपयोग करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनें:
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है। हैप्पी सीडर (Happy Seeder) जैसी मशीनों का उपयोग करके पराली को खेत में ही मिट्टी में मिलाना यथा-स्थान प्रबंधन का एक उदाहरण है। कथन 2 और 3 अन्यत्र (Ex-situ) प्रबंधन के उदाहरण हैं, जहाँ फसल अवशेषों को खेत से बाहर ले जाकर उनका उपयोग या निपटान किया जाता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण करें। पराली जलाने की समस्या के समाधान में इसकी सफलता और चुनौतियों पर भी चर्चा करें। (15 अंक)
रूपरेखा: प्रस्तावना: CAQM की स्थापना और इसके जनादेश का संक्षिप्त परिचय।
CAQM की भूमिका: NCR में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए इसके सांविधिक अधिकार, विभिन्न स्रोतों से प्रदूषण को संबोधित करने के लिए इसकी रणनीतियाँ (जैसे औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन प्रदूषण, निर्माण गतिविधियाँ, पराली जलाना)।
पराली जलाने की समस्या के समाधान में CAQM की सफलताएँ: किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनों के वितरण में समन्वय, जागरूकता अभियान, हॉटस्पॉट निगरानी, राज्य सरकारों के साथ समन्वय। कुछ सकारात्मक परिणामों या डेटा का उल्लेख यदि उपलब्ध हो।
चुनौतियाँ: किसानों के बीच जागरूकता और मशीनों को अपनाने की कमी, छोटे और सीमांत किसानों के लिए वित्तीय बाधाएँ, प्रभावी प्रवर्तन में चुनौतियाँ, अंतर-राज्यीय समन्वय की जटिलताएँ, वैकल्पिक उपयोगों के लिए अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव।
आगे की राह/सुझाव: दीर्घकालिक समाधानों पर जोर, किसानों को प्रोत्साहन, वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देना, बायोमास आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन, सामुदायिक भागीदारी, प्रौद्योगिकी का उपयोग।
निष्कर्ष: CAQM के प्रयासों का समग्र मूल्यांकन और सतत समाधानों की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Punjab PCS (PPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: सीएक्यूएम (Commission for Air Quality Management) की टीम द्वारा धान कटाई सीज़न 2026 के दौरान प्रवर्तन उपायों की समीक्षा के लिए हाल ही में किस पंजाब जिले का दौरा किया गया?
- अमृतसर
- मोगा
- लुधियाना
- फरीदकोट
उत्तर: मोगा — सीएक्यूएम की टीम ने धान कटाई सीज़न 2026 के दौरान प्रवर्तन उपायों की समीक्षा के लिए पंजाब के मोगा जिले का दौरा किया।
Mains: धान कटाई सीज़न 2026 के दौरान पंजाब में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु सीएक्यूएम द्वारा अपनाए जाने वाले प्रमुख प्रवर्तन उपायों का वर्णन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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