04 Aug स्तनपान सपोर्ट की कमी: UN की चेतावनी, UPSC परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
✎ स्तनपान शिशु एवं मातृ स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश है, जिसके लिए स्वास्थ्य प्रणालियों, कार्यस्थलों और समुदायों से व्यापक समर्थन की आवश्यकता है ताकि वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय | GS Paper I — जनसंख्या एवं संबंधित मुद्दे, महिलाएँ एवं संबंधित संगठन
- Prelims: विश्व स्तनपान सप्ताह, अनन्य स्तनपान, WHO, UNICEF, शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, गैर-संचारी रोग
- Essay: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में निवेश: एक स्थायी भविष्य की नींव, महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा: अंतर्संबंध
त्वरित पुनरावृत्ति: स्तनपान शिशु एवं मातृ स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश है, जिसके लिए स्वास्थ्य प्रणालियों, कार्यस्थलों और समुदायों से व्यापक समर्थन की आवश्यकता है ताकि वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने हाल ही में चेतावनी दी है कि विश्व स्तर पर स्तनपान की दरों में वृद्धि के बावजूद, लाखों माताओं और परिवारों को अभी भी अपने शिशुओं को सुरक्षित रूप से स्तनपान कराने के लिए आवश्यक सहायता और सुरक्षा का अभाव है। UNICEF और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्वास्थ्य प्रणालियों, कार्यस्थलों और समुदायों से माताओं और नवजात शिशुओं का अधिक समर्थन करने का आह्वान किया है। यह अपील 1 से 7 अगस्त तक मनाए जा रहे विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर की गई है, जिसका विषय ‘जीवन में एक स्थायी शुरुआत के लिए स्तनपान: जो काम करता है उसे मजबूत करें’ है।
पृष्ठभूमि
- स्तनपान शिशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा करने के सबसे सरल और शक्तिशाली तरीकों में से एक है, जो उन्हें आवश्यक पोषण प्रदान करता है, प्रतिरक्षा बढ़ाता है और गंभीर बीमारियों से बचाता है।
- स्तनपान माताओं को भी लाभ पहुँचाता है, क्योंकि यह स्तन और डिम्बग्रंथि के कैंसर तथा टाइप 2 मधुमेह जैसे गैर-संचारी रोगों (Non-communicable diseases) के जोखिम को कम करने में मदद करता है।
- WHO और UNICEF लंबे समय से यह सलाह देते रहे हैं कि जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू हो, शिशुओं को पहले छह महीनों तक अनन्य स्तनपान (Exclusive Breastfeeding) कराया जाए, और छह महीने के बाद सुरक्षित व उपयुक्त पूरक आहार (Complementary Foods) के साथ दो साल या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखा जाए।
- एजेंसी प्रमुखों के अनुसार, स्तनपान को बढ़ावा देने से प्रति वर्ष लगभग 4 लाख शिशु मृत्यु और लगभग 1.4 लाख मातृ मृत्यु को रोका जा सकता है।
- वैश्विक स्तर पर पहले छह महीनों में अनन्य स्तनपान 2012 में लगभग 37 प्रतिशत से बढ़कर आज 47 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जबकि दो साल की उम्र तक स्तनपान का प्रचलन भी हाल के वर्षों में 38 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया है।
- हालांकि, प्रगति पर्याप्त तेज़ नहीं है, और कई देश वैश्विक लक्ष्यों से पीछे चल रहे हैं, विशेष रूप से कम आय वाले, नाजुक और मानवीय संकट वाले क्षेत्रों में।
स्तनपान और इसके समर्थन से संबंधित प्रमुख पहलू
- स्तनपान शिशु के लिए एक स्वच्छ, सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध भोजन व हाइड्रेशन का स्रोत है, साथ ही यह शिशुओं के लिए एक प्रतिरक्षण प्रणाली (Immunisation System) भी प्रदान करता है।
- UNICEF और WHO ने स्वास्थ्य प्रणालियों में कुशल स्तनपान सहायता, समुदाय-आधारित परामर्श, मातृत्व संरक्षण नीतियों (Maternity Protection Policies) और वाणिज्यिक दूध फ़ार्मूलों के शोषणकारी विपणन से सुरक्षा जैसे लागत-प्रभावी हस्तक्षेपों पर जोर दिया है।
- मातृत्व संरक्षण नीतियों में मातृत्व अवकाश, कार्यस्थल पर स्तनपान के लिए अनुकूल वातावरण और भेदभाव से सुरक्षा शामिल है, जो माताओं को काम पर लौटने के बाद भी स्तनपान जारी रखने में सक्षम बनाती हैं।
- स्तनपान के समर्थन में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण, माताओं को सही तकनीकों और लाभों के बारे में शिक्षित करना, और स्तनपान के मिथकों व गलत सूचनाओं को दूर करना महत्वपूर्ण है।
- स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए ‘स्तनपान विकल्प के विपणन पर अंतर्राष्ट्रीय संहिता’ (International Code of Marketing of Breast-milk Substitutes) का सख्त कार्यान्वयन आवश्यक है, ताकि शिशु फ़ार्मूला कंपनियों द्वारा अनुचित प्रचार पर अंकुश लगाया जा सके।
- भारत में, ‘माँ’ (Mother’s Absolute Affection) कार्यक्रम जैसे पहल स्तनपान को बढ़ावा देने और माताओं को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए शुरू किए गए हैं।
- स्तनपान शिशु के संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) में भी सहायता करता है, जिससे बच्चों में बेहतर शैक्षणिक परिणाम और दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| शिशु स्वास्थ्य | शिशुओं को आवश्यक पोषण प्रदान करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, गंभीर बीमारियों से बचाता है और संज्ञानात्मक विकास (cognitive development) में सहायता करता है। |
| मातृ स्वास्थ्य | स्तन और डिम्बग्रंथि के कैंसर (ovarian cancers) तथा टाइप 2 मधुमेह (type 2 diabetes) जैसी गैर-संचारी बीमारियों (noncommunicable diseases) के जोखिम को कम करता है। |
| तत्काल उपलब्धता और सुरक्षा | शिशुओं के लिए भोजन और जलयोजन (hydration) का एक आसानी से उपलब्ध, स्वच्छ और सुरक्षित स्रोत है, जो उन्हें प्रतिरक्षण प्रणाली (immunisation system) भी प्रदान करता है। |
| जीवन रक्षक क्षमता | स्तनपान को बढ़ावा देने से प्रति वर्ष लगभग 4 लाख शिशु मृत्यु और लगभग 1.4 लाख मातृ मृत्यु को रोका जा सकता है। |
| सतत विकास | यह बच्चों को जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत देने और माताओं को आवश्यक देखभाल व सेवाएँ सुनिश्चित करने में सहायक है, जिससे सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) की प्राप्ति में मदद मिलती है। |
महत्व
सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व
- स्तनपान शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए एक सरल, शक्तिशाली और महत्वपूर्ण तरीका है जो उनके स्वास्थ्य की रक्षा करता है। यह उन्हें आवश्यक पोषण प्रदान करता है, प्रतिरक्षा बढ़ाता है और गंभीर बीमारियों से बचाता है।
- माताओं के लिए भी स्तनपान के कई लाभ हैं, जैसे स्तन और डिम्बग्रंथि के कैंसर तथा टाइप 2 मधुमेह जैसी गैर-संचारी बीमारियों के जोखिम में कमी।
- WHO और UNICEF के अनुसार, जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना, पहले छह महीने तक विशेष स्तनपान (exclusive breastfeeding) कराना और छह महीने के बाद सुरक्षित व उपयुक्त पूरक आहार (complementary foods) के साथ दो साल या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखना महत्वपूर्ण है।
सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
- स्तनपान को बढ़ावा देने से प्रति वर्ष लगभग 4 लाख शिशु मृत्यु और लगभग 1.4 लाख मातृ मृत्यु को रोका जा सकता है, जिससे स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ कम होता है और मानव पूंजी (human capital) का विकास होता है।
- यह परिवारों और समुदायों के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद है क्योंकि यह शिशु आहार के वैकल्पिक महंगे स्रोतों की आवश्यकता को कम करता है।
विकास लक्ष्यों से जुड़ाव
- स्तनपान को बढ़ावा देना संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों, विशेष रूप से अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण (SDG 3) तथा गरीबी उन्मूलन (SDG 1) से सीधा जुड़ा हुआ है।
- यह बच्चों को जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत देने और माताओं को आवश्यक देखभाल व सेवाएँ सुनिश्चित करने के लिए एक लागत प्रभावी हस्तक्षेप (cost-effective intervention) है।
चुनौतियाँ
1. सहायता प्रणालियों का अभाव
- लाखों माताओं और परिवारों को अपने शिशुओं को सुरक्षित रूप से स्तनपान कराने के लिए आवश्यक सेवाओं और सुरक्षा की कमी का सामना करना पड़ता है।
- स्वास्थ्य प्रणालियों, कार्यस्थलों और समुदायों को माताओं व नवजात शिशुओं का समर्थन करने के लिए और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य
2. नीतियों का असंगत प्रवर्तन
- स्तनपान का समर्थन करने वाली सेवाओं की कवरेज कम बनी हुई है, नीतियाँ असंगत रूप से लागू की जाती हैं, और सेवा की गुणवत्ता अक्सर अपर्याप्त होती है, खासकर कम आय वाले, नाजुक और मानवीय संकट वाले क्षेत्रों में।
यूपीएससी लिंक: शासन: नीतियों का क्रियान्वयन
3. स्तनपान विकल्प उत्पादों का विपणन
- स्तनपान विकल्प (breastmilk substitutes) के शोषणकारी विपणन (exploitative marketing) के खिलाफ मजबूत सुरक्षा उपायों की कमी एक बड़ी चुनौती है, जो माताओं को स्तनपान के बजाय इन उत्पादों को चुनने के लिए प्रभावित कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: उपभोक्ता संरक्षण
4. जागरूकता और परामर्श की कमी
- माताओं को स्तनपान के सही तरीकों और इसके लाभों के बारे में पर्याप्त परामर्श और जानकारी नहीं मिल पाती है, जिससे सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने में बाधा आती है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन: स्वास्थ्य शिक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| स्वास्थ्य प्रणालियों में अपर्याप्त समर्थन | स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा कुशल स्तनपान सहायता और परामर्श की कमी। |
| कार्यस्थल पर मातृत्व सुरक्षा का अभाव | माताओं को काम पर लौटने के बाद स्तनपान जारी रखने के लिए पर्याप्त अवकाश, लचीलेपन और सुविधाओं की कमी। |
| समुदाय-आधारित समर्थन की कमी | समुदायों में स्तनपान के लिए सामाजिक समर्थन और जागरूकता कार्यक्रमों का अभाव। |
| स्तनपान विकल्प उत्पादों का आक्रामक विपणन | वाणिज्यिक दूध फार्मूला (commercial milk formulas) के भ्रामक विज्ञापन और प्रचार जो स्तनपान को हतोत्साहित करते हैं। |
| संकटग्रस्त क्षेत्रों में चुनौतियाँ | युद्ध या मानवीय संकट वाले क्षेत्रों में माताओं और शिशुओं के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन तक पहुँच सुनिश्चित करना मुश्किल। |
आगे की राह
- स्वास्थ्य प्रणालियों में कुशल स्तनपान सहायता को मजबूत करना, जिसमें प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और परामर्श सेवाएँ शामिल हों।
- मातृत्व सुरक्षा नीतियों को लागू करना और उनका प्रवर्तन सुनिश्चित करना, ताकि कार्यस्थलों पर माताओं को स्तनपान जारी रखने के लिए आवश्यक सहायता मिल सके।
- समुदाय-आधारित परामर्श कार्यक्रमों को बढ़ावा देना, जो माताओं को स्तनपान के लाभों और सही तरीकों के बारे में जानकारी प्रदान करें।
- स्तनपान विकल्प उत्पादों के शोषणकारी विपणन के खिलाफ कड़े सुरक्षा उपाय लागू करना और उनका प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करना।
- स्तनपान के महत्व के बारे में सार्वजनिक जागरूकता अभियानों को बढ़ाना, विशेषकर विश्व स्तनपान सप्ताह जैसे आयोजनों के माध्यम से।
- कम आय वाले, नाजुक और मानवीय संकट वाले क्षेत्रों में स्तनपान सहायता सेवाओं की कवरेज और गुणवत्ता में सुधार करना।
- सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और नागरिक समाज के बीच सहयोग को बढ़ावा देना ताकि स्तनपान के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्तनपान · शिशु पोषण · मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य · सार्वजनिक स्वास्थ्य · UNICEF · WHO · सतत विकास लक्ष्य · खाद्य सुरक्षा · पोषण सुरक्षा · कार्यस्थल पर सहायता · मातृत्व संरक्षण · स्तनपान विकल्प
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(e)’, ‘note’: ‘श्रमिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(f)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 42’, ‘note’: ‘काम की न्यायसंगत और मानवीय परिस्थितियाँ तथा मातृत्व राहत’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाना’}
अवधारणा प्रवाह
स्तनपान के लिए अपर्याप्त समर्थन → शिशु और मातृ मृत्यु दर में वृद्धि → बच्चों के स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक विकास पर नकारात्मक प्रभाव → गैर-संचारी रोगों का बढ़ता जोखिम → मानव पूंजी और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा → स्वास्थ्य प्रणालियों पर बढ़ता बोझ
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और UNICEF नवजात शिशुओं को जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान कराने की सलाह देते हैं।
2. WHO और UNICEF छह महीने तक केवल स्तनपान कराने और दो साल या उससे अधिक समय तक पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखने की सलाह देते हैं।
3. स्तनपान से माताओं में स्तन और डिम्बग्रंथि के कैंसर तथा टाइप 2 मधुमेह का खतरा कम होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं। WHO और UNICEF दोनों जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करने, पहले छह महीने तक विशेष स्तनपान और दो साल या उससे अधिक समय तक पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखने की सलाह देते हैं। कथन 3 भी सही है, स्तनपान माताओं में गैर-संचारी रोगों जैसे स्तन और डिम्बग्रंथि के कैंसर तथा टाइप 2 मधुमेह के जोखिम को कम करने में मदद करता है।
Q2. स्तनपान के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- वैश्विक स्तर पर, पहले छह महीनों में विशेष स्तनपान की दर में वृद्धि हुई है।
- स्तनपान शिशुओं को आवश्यक पोषण प्रदान करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
- कार्यस्थलों पर माताओं के लिए स्तनपान सहायता प्रदान करना आवश्यक नहीं है।
- स्तनपान शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर को कम करने में सहायक है।
उत्तर: कार्यस्थलों पर माताओं के लिए स्तनपान सहायता प्रदान करना आवश्यक नहीं है। — कथन (C) सही नहीं है। समाचार के अनुसार, स्वास्थ्य प्रणालियों, कार्यस्थलों और समुदायों को माताओं और नवजात शिशुओं का समर्थन करने के लिए और अधिक प्रयास करने चाहिए, जिसमें कार्यस्थलों पर सहायता भी शामिल है। अन्य सभी कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ संयुक्त राष्ट्र ने माताओं को स्तनपान के लिए पर्याप्त सहायता न मिलने की चेतावनी दी है। भारत में स्तनपान को बढ़ावा देने में आने वाली चुनौतियों का परीक्षण कीजिए और इस संबंध में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: एक पूर्ण उत्तर में निम्नलिखित आयामों को शामिल किया जाना चाहिए:
1. **परिचय:** स्तनपान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी का संक्षिप्त उल्लेख। (जैसे, UNICEF और WHO की सिफारिशें, शिशु एवं मातृ स्वास्थ्य पर प्रभाव)।
2. **भारत में स्तनपान को बढ़ावा देने में चुनौतियाँ:**
* **जागरूकता और शिक्षा का अभाव:** विशेषकर ग्रामीण और निम्न-आय वाले क्षेत्रों में।
* **स्वास्थ्य प्रणाली में कमियाँ:** स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा अपर्याप्त परामर्श और सहायता।
* **कार्यस्थल पर समर्थन का अभाव:** कामकाजी माताओं के लिए अपर्याप्त मातृत्व अवकाश और स्तनपान के अनुकूल कार्यस्थल नीतियों की कमी।
* **स्तनपान विकल्पों का आक्रामक विपणन:** शिशु फार्मूला कंपनियों द्वारा भ्रामक विज्ञापन।
* **सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएँ:** सार्वजनिक स्थानों पर स्तनपान को लेकर झिझक या कलंक।
* **पोषण संबंधी मिथक और गलत सूचनाएँ।**
3. **सरकार द्वारा उठाए गए कदम:**
* **राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM):** जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK), प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत स्तनपान को बढ़ावा देना।
* **मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017:** विस्तारित मातृत्व अवकाश और क्रेच सुविधाओं का प्रावधान।
* **माँ (Mothers’ Absolute Affection) कार्यक्रम:** स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम।
* **शिशु दूध विकल्प, फीडिंग बोतल और शिशु खाद्य अधिनियम, 1992 (संशोधित 2003):** स्तनपान विकल्पों के विपणन को विनियमित करना।
* **एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (ICDS):** आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से परामर्श और सहायता।
* **विश्व स्तनपान सप्ताह:** प्रतिवर्ष जागरूकता अभियान।
4. **निष्कर्ष:** चुनौतियों का समाधान करने और सरकारी प्रयासों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए, एक स्वस्थ पीढ़ी के निर्माण में स्तनपान के महत्व को रेखांकित करना।
स्रोत: news.un.org
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