18 Sep स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान
पाठ्यक्रम :
जीएस 1 और जीएस 3 और सरकारी योजना : स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान
चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका शुभारंभ करेंगे ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान पर 17 सितंबर, 2025, के साथ पोषण माह का आठवां संस्करण, अंकन भारत का अब तक का सबसे बड़ा महिला एवं बाल स्वास्थ्य अभियान है .
इस अभियान का नेतृत्व संयुक्त रूप से किया गया स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) और यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MoWCD), से चलेगा (17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक)
यह आयोजित करेगादेश भर में एक लाख से अधिक स्वास्थ्य शिविर, प्रदान करनानिवारक, प्रोत्साहनकारी और उपचारात्मक स्वास्थ्य सेवाएंमहिलाओं, किशोरियों और बच्चों के लिए।
फोकस क्षेत्रों में शामिल हैंकैंसर, एनीमिया, तपेदिक, सिकल सेल रोग, मातृ स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों की जांच, साथ ही पोषण परामर्श, मासिक धर्म स्वच्छता संवर्धन, जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता है .
परिवार में महिलाओं की भूमिका
| आयाम | भूमिका | उदाहरण |
|---|---|---|
| आर्थिक | 1. औपचारिक और अनौपचारिक कार्यों के माध्यम से घरेलू आय में योगदान | केरल में कुदुम्बश्री एसएचजी महिलाएं चला रही हैं सूक्ष्म उद्यम |
| 2. संसाधनों, बचत और पारिवारिक वित्त का प्रबंधन | घरेलू लचीलेपन के लिए सूक्ष्म वित्त का उपयोग करने वाली महिला सहकारी समितियाँ | |
| सामाजिक | 1. बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य और पोषण को सुनिश्चित करना | पोषण अभियान से माताएं कुपोषण से निपट रही हैं |
| 2. बच्चों को शिक्षा, मूल्य और अनुशासन प्रदान करना | केरल में उच्च विद्यालय नामांकन का संबंध साक्षर माताओं से | |
| सांस्कृतिक | 1. परंपराओं, त्योहारों और अनुष्ठानों को संरक्षित करना | राजस्थानी महिलाएं लोकगीतों और रीति-रिवाजों को कायम रखती हैं |
| 2. भाषा, शिल्प और कला को बढ़ावा देना | असमिया महिलाएं बुनाई की परंपरा को कायम रख रही हैं | |
| राजनीतिक | 1. पंचायती राज के माध्यम से निर्णय लेने में भागीदारी | महिला सरपंच स्वच्छता और जल सुविधाओं में सुधार ला रही हैं |
| 2. परिवार कल्याण नीतियों का समर्थन करना | महिला सांसद मातृ स्वास्थ्य और घरेलू हिंसा कानूनों का समर्थन कर रही हैं | |
| सुरक्षा | 1. संकट के समय भावनात्मक और सामाजिक स्थिरता प्रदान करना | COVID-19 महामारी के दौरान परिवारों का समर्थन करती महिलाएं |
| 2. घरेलू और सामुदायिक सुरक्षा सुनिश्चित करना | ओडिशा में महिला आपदा समूह चक्रवातों के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं |
सरकारी नीति और पहल
| कार्यक्षेत्र | पहल / तंत्र | उदाहरण / डेटा / नीतिगत उपाय |
|---|---|---|
| स्वास्थ्य | 1. पोषण अभियान (2018) – महिलाओं व बच्चों में बौनापन, कुपोषण, एनीमिया को कम करने हेतु राष्ट्रीय पोषण मिशन | लक्ष्य: 2022 तक बौनेपन को 25% तक कम करना; संस्थागत तंत्र: WCD मंत्रालय, स्वास्थ्य, स्वच्छता, महिला समूहों का अभिसरण |
| 2. प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA, 2016) – हर महीने की 9 तारीख को निःशुल्क प्रसवपूर्व देखभाल | 2023 तक 3.6 करोड़ महिलाएं लाभान्वित; तंत्र: MoHFW और नीति आयोग | |
| शिक्षा | 1. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (2015) – जागरूकता + शिक्षा अभियान | उच्च शिक्षा में महिला GER बढ़कर 28.5% (2021); तंत्र: WCD, शिक्षा, स्वास्थ्य मंत्रालयों का अभिसरण |
| 2. समग्र शिक्षा अभियान (2018) – स्कूली शिक्षा के लिए एकीकृत योजना | लड़कियों को निःशुल्क यूनिफॉर्म, साइकिल; तंत्र: स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग | |
| सुरक्षा | 1. निर्भया फंड (2013) – सुरक्षित परिवहन, CCTV, आपातकालीन प्रतिक्रिया हेतु | उदाहरण: 112 आपातकालीन हेल्पलाइन; तंत्र: गृह मंत्रालय, WCD मंत्रालय |
| 2. वन स्टॉप सेंटर (2015) – संकटग्रस्त महिलाओं के लिए एकीकृत सहायता | 2024 तक 1100+ केंद्र चालू; “मिशन शक्ति” के अंतर्गत नीतिगत उपाय | |
| प्रतिनिधित्व | 1. पंचायती राज में 33% आरक्षण (73वां व 74वां संशोधन, 1992) | 14 लाख महिला प्रतिनिधि पंचायतों में (43% सीटें) – विश्व में सबसे बड़ा आरक्षण |
| 2. महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023) – लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण | तंत्र: संवैधानिक संशोधन; 2026 के परिसीमन के बाद लागू होगा | |
| रोजगार | 1. स्टैंड-अप इंडिया योजना (2016) – महिला उद्यमियों के लिए ऋण | 2023 तक 1.5 लाख महिला उद्यमी लाभान्वित; तंत्र: SIDBI और बैंक |
| 2. महिला ई-हाट व कौशल भारत पहल – ऑनलाइन बाज़ार व व्यावसायिक प्रशिक्षण | 20 लाख महिलाएं जुड़ीं; तंत्र: WCD मंत्रालय व कौशल विकास मंत्रालय |
अतिरिक्त संस्थागत तंत्र:
1.राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू, 1992)– शिकायत निवारण और नीति वकालत के लिए वैधानिक निकाय।
2.मिशन शक्ति (2022)– महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा, सशक्तिकरण (सामर्थ्य और संबल घटक) के लिए छत्र योजना।
3.महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MoWCD)– महिला-केंद्रित नीतियों के लिए नोडल मंत्रालय।
4.जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई, 2005) – संस्थागत प्रसव के लिए सशर्त नकद हस्तांतरण।
5. श्रम संहिता 2020 – मातृत्व अवकाश, शिशुगृह सुविधाएं और समान वेतन के प्रावधान।
महिलाओं के सामने आने वाले मुद्दे और बाधाएँ:
| कार्यक्षेत्र | मुद्दे और बाधाएँ | उदाहरण / डेटा |
|---|---|---|
| स्वास्थ्य | – ग्रामीण/आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवा तक सीमित पहुंच। – एनीमिया और कुपोषण का उच्च स्तर। |
– NFHS-5 (2019-21): 15–49 वर्ष की 57% महिलाएं एनीमिया से पीड़ित। – बिहार, यूपी, एमपी में PMSMA के बावजूद संस्थागत प्रसव में अंतराल। |
| शिक्षा | – कम उम्र में विवाह और पढ़ाई छोड़ने से उच्च शिक्षा की संभावनाएं कम। – लैंगिक डिजिटल विभाजन से ऑनलाइन शिक्षा तक पहुंच प्रभावित। |
– AISHE 2022-23: उच्च शिक्षा में महिला GER = 27.9% (पुरुषों से कम)। – ग्रामीण लड़कियों में सुरक्षा व घरेलू जिम्मेदारियों के कारण माध्यमिक स्तर पर उच्च ड्रॉपआउट। |
| रोजगार / अर्थव्यवस्था | – अनौपचारिक/अवैतनिक श्रम में वेतन अंतर और संकेन्द्रण। – देखभाल का बोझ औपचारिक क्षेत्र में भागीदारी सीमित करता है। |
– PLFS 2023-24: महिला LFPR = 31.7% (पुरुष ~77%)। – ILO 2023: औपचारिक नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों से ~30% कम। |
| प्रतिनिधित्व (राजनीतिक / निर्णय-निर्माण) | – विधानमंडलों में कम प्रतिनिधित्व, आरक्षण के बावजूद। – पितृसत्तात्मक मानदंड और प्रॉक्सी नियंत्रण। |
– 2024 लोकसभा चुनाव: महिला सांसद ~13.8%। – कई महिला सरपंचों पर पुरुष रिश्तेदारों का “प्रॉक्सी” नियंत्रण। |
| सुरक्षा | – साइबर अपराध, पीछा करना और उत्पीड़न में वृद्धि। – कलंक और प्रतिशोध के डर से कम रिपोर्टिंग। |
– NCRB 2023: महिलाओं के खिलाफ 4.45 लाख अपराध दर्ज (2022 से 4% वृद्धि)। – 2023 में महिलाओं के विरुद्ध साइबर अपराध 19% बढ़े। |
डोमेन में बाधाएं:
सामाजिक आदर्श (पितृसत्ता, पुत्र को प्राथमिकता, अवैतनिक देखभाल का बोझ)।
संस्थागत कमजोरियाँ (योजनाओं का खराब कार्यान्वयन, प्रवर्तन में महिलाओं की कमी)।
आर्थिक असमानताएँ (ऋण तक कम पहुंच, भूमि स्वामित्व)।
सुरक्षा संबंधी चिंताएं (भौतिक एवं डिजिटल दोनों)
महिला विकास के लिए आगे की राह:
| कार्यक्षेत्र | आगे की राह (समितियों/विशेषज्ञों के अनुसार) | उदाहरण / सहायक साक्ष्य |
|---|
| स्वास्थ्य | – नीति आयोग (रणनीति @75): निवारक देखभाल को मजबूत करना, एनसीडी के लिए सार्वभौमिक जांच, डिजिटल स्वास्थ्य का विस्तार। – डब्ल्यूएचओ विशेषज्ञ पत्र: मातृ स्वास्थ्य को मानसिक स्वास्थ्य और पोषण के साथ एकीकृत करना। |
– तमिलनाडु मॉडल: प्रसूति अस्पताल + पोषण परामर्श से एमएमआर में कमी। – आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABHA): ई-स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार। |
| शिक्षा | – एनईपी 2020: लिंग समावेशन निधि, STEM छात्रवृत्ति, डिजिटल साक्षरता। – कोठारी आयोग: सामाजिक समानता के लिए बालिकाओं की शिक्षा में निवेश। |
– कन्याश्री प्रकल्प (प. बंगाल): बाल विवाह में कमी व स्कूल उपस्थिति में वृद्धि। –बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ: महिला नामांकन में सुधार। |
| रोजगार / अर्थव्यवस्था | – ILO रिपोर्ट (2023): बाल देखभाल का विस्तार, समान वेतन, अनौपचारिक कार्य का औपचारिककरण। – आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22: ऋण, कौशल, बाजार संपर्क से महिला उद्यमिता को बढ़ावा। |
– DAY-NRLM के अंतर्गत 9 करोड़+ महिलाएं SHG से जुड़ीं। – केरल कुडुम्बश्री मॉडल: महिला सहकारी उद्यम सफल। |
| प्रतिनिधित्व (राजनीतिक / निर्णय-निर्माण) | – विधि आयोग (170वीं रिपोर्ट) व संसदीय समितियाँ: विधानमंडलों में 33% महिला आरक्षण। – NCW: महिला नेताओं के लिए क्षमता निर्माण व प्रशिक्षण। |
– पंचायती राज: स्थानीय निकायों में 43% महिलाएं (2024)। – नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023): संसद में महिला आरक्षण। |
| सुरक्षा | – न्यायमूर्ति वर्मा समिति (2013): पुलिस सुधार, फास्ट-ट्रैक अदालतें, लैंगिक संवेदनशील न्यायपालिका। – UN Women (2022): साइबर सुरक्षा, सुरक्षित गतिशीलता, कार्यस्थल सुरक्षा। |
– वन स्टॉप सेंटर: 1100+ केंद्र कानूनी व चिकित्सा सहायता दे रहे हैं। – सुरक्षित शहर परियोजना (दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद): निर्भया फंड से निगरानी व सुरक्षा में सुधार। |
क्रॉस-कटिंग अनुशंसाएँ:
लिंग बजट संस्थागत तंत्र को मजबूत करना (वित्त मंत्रालय का जेंडर बजट सेल)।
1.अंतःक्रियाशीलता: विशेष रूप से ग्रामीण, आदिवासी, विकलांग और अल्पसंख्यक महिलाओं की आवश्यकताओं को संबोधित करना (एनसीडब्ल्यू, यूएनडीपी)।
2. डिजिटल सशक्तिकरण : महिलाओं के लिए स्मार्टफोन और इंटरनेट सब्सिडी के माध्यम से लैंगिक डिजिटल विभाजन को पाटना (नीति आयोग, 2022)।
3.सार्वजनिक-निजी भागीदारी:महिलाओं के कौशल विकास, स्वास्थ्य शिविरों और सुरक्षा पहलों में कॉर्पोरेट क्षेत्र (सीएसआर) को प्रोत्साहित करना।
निष्कर्ष:
जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ रहा है अमृत काल एक विकसित राष्ट्र बनने की दृष्टि से 2047 महिलाओं को सशक्त बनाना न केवल एक सामाजिक अनिवार्यता है, बल्कि एक सभ्यतागत आवश्यकता भी है। परिवारों के पालन-पोषण से लेकर पंचायतों का नेतृत्व करने तक, अर्थव्यवस्था में योगदान देने से लेकर रक्षा बलों में सेवा देने तक, भारतीय महिलाओं ने लगातार खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित किया है। लचीलापन, नवाचार और करुणा के पथ प्रदर्शक रूप में आगे बढ़ रहा है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रश्न:
Q.1. एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) योजना निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को पूरक पोषण, स्वास्थ्य जांच और स्कूल-पूर्व शिक्षा प्रदान करता है।
2.आंगनवाड़ी केंद्र आईसीडीएस सेवाओं के वितरण के लिए केन्द्र बिन्दु के रूप में कार्य करते हैं।
3. यह योजना स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाती है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) तीनों
(d) कोई नहीं
उत्तर: C
Q.2. ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह योजना गर्भावस्था के दूसरे और तीसरे तिमाही में महिलाओं को प्रसव पूर्व देखभाल सेवाओं के न्यूनतम पैकेज और किसी भी सरकारी स्वास्थ्य सुविधा में प्रसव के बाद छह महीने की स्वास्थ्य देखभाल सेवा की गारंटी देती है।
2. इस योजना के अंतर्गत, कुछ विशेषज्ञता वाले निजी क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवा प्रदाता, निकटवर्ती सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में सेवा प्रदान करने के लिए स्वेच्छा से आगे आ सकते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
A. केवल 1
B. केवल 2
C. 1 और 2 दोनों
D. न तो 1 और न ही 2
उत्तर: B
Q.3. ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: (UPSC 2024)
1. यह प्रावधान 18वीं लोकसभा से लागू होंगे।
2. यह अधिनियम बनने के बाद 15 वर्षों तक लागू रहेगा।
3. अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित कोटे के अंतर्गत अनुसूचित जातियों की महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण का प्रावधान है।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
A. 1, 2 और 3
B. केवल 1 और 2
C. केवल 2 और 3
D. केवल 1 और 3
उत्तर: C
मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न:
Q. “वैश्वीकरण के युग में, परिवारों को मजबूत बनाने में महिलाओं की भूमिका में महत्वपूर्ण परिवर्तन आया है।” परिवार में महिलाओं के विकसित होते आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक योगदान तथा समाज पर उनके प्रभाव पर चर्चा कीजिए। ( 250 w , 15 M)
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