हमारा संविधान – हमारा स्वाभिमान अभियान : संवैधानिक जागरूकता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम

हमारा संविधान – हमारा स्वाभिमान अभियान : संवैधानिक जागरूकता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम

पाठ्यक्रम : जीएस -2 भारतीय राजनीति और शासन

हमारा संविधान – हमारा स्वाभिमान अभियान: संवैधानिक जागरूकता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम

  • भारतीय संविधान, जो 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, देश की लोकतांत्रिक यात्रा का आधार स्तंभ है। यह न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर आधारित है, जो डॉ. बी.आर. अंबेडकर जैसे दूरदर्शी नेताओं की देन है।
  • संविधान के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, भारत सरकार के न्याय विभाग ने ‘हमारा संविधान – हमारा सम्मान’ अभियान की शुरुआत की, जो बाद में ‘हमारा संविधान – हमारा स्वाभिमान’ में विकसित हुआ। यह अभियान संवैधानिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का एक राष्ट्रव्यापी प्रयास है, जो कानूनी साक्षरता, नागरिक भागीदारी और गर्व की भावना को बढ़ावा देता है से सीधे जुड़ा है।
  • यह संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 39A: निःशुल्क कानूनी सहायता) और सरकारी योजनाओं (जैसे दिशा योजना) के व्यावहारिक कार्यान्वयन को दर्शाता है, जो प्रीलिम्स और मेन्स दोनों में प्रासंगिक हो सकता है।

प्रमुख बिंदु 

  • 1.सबसे बड़ा संविधान जन जागरण अभियान: ‘हमारा संविधान हमारा सम्मान’ अभियान ने भारत के संविधान के 75 वर्ष पूरा होने के मौके पर देश भर में 13,700 से ज़्यादा कार्यक्रमों के ज़रिए एक करोड़ से ज़्यादा नागरिकों को संगठित किया और अभूतपूर्व जनभागीदारी प्रदर्शित की।
    2.ज़मीनी स्तर से डिजिटल कनेक्टिविटी: देश में 2.5 लाख से ज़्यादा ग्राम पंचायतों, आकांक्षी ज़िलों और दूरदराज के समुदायों तक पहुंच बनाई, साथ ही MyGov शपथ, प्रश्नोत्तरी और रचनात्मक प्रतियोगिताओं के ज़रिए लाखों लोगों को जोड़ा।
    3.जागरूकता से गौरव तक: इस पहल में कानूनी साक्षरता, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और नागरिक-नेतृत्व वाली पहलों को शामिल किया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संवैधानिक मूल्यों को न केवल समझा जाए,बल्कि उनका पूरी तरह आनंद लिया जाए।

 

पृष्ठभूमि और संदर्भ

  • संविधान दिवस (26 नवंबर) और गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के माध्यम से भारत संवैधानिक मूल्यों का उत्सव मनाता रहा है। वर्ष 2021 में शुरू हुई ‘दिशा’ योजना (न्याय तक समग्र पहुंच के लिए अभिनव समाधान तैयार करना) ने इस दिशा में आधार तैयार किया। दिशा योजना का उद्देश्य टेली-लॉ, न्याय बंधु (प्रो-बोनो कानूनी सेवाएं) और कानूनी जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से सुलभ न्याय सुनिश्चित करना है।
  • 24 जनवरी 2024 को उपराष्ट्रपति द्वारा नई दिल्ली में लॉन्च किया गया ‘हमारा संविधान – हमारा सम्मान’ अभियान, दिशा योजना से जुड़ा हुआ है। एक वर्ष बाद, 24 जनवरी 2025 को यह ‘स्वाभिमान’ चरण में परिवर्तित हुआ, जो संवैधानिक चेतना को गहरा करने पर केंद्रित है। अभियान का उद्देश्य न केवल जागरूकता फैलाना है, बल्कि नागरिकों में संविधान के प्रति गर्व पैदा करना है, जो ‘विकसित भारत @2047’ के विजन से जुड़ा है।

अभियान के प्रमुख उद्देश्य : 

अभियान के मुख्य लक्ष्य निम्नलिखित हैं:

  • संविधान को एक विजुअल मार्कर के रूप में जन चेतना में स्थापित करना।
    संविधान के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उसके निर्माण में किए गए प्रयासों को उजागर करना।
    नागरिकों में संविधान के प्रति गर्व की भावना जगाना।
    कानूनी साक्षरता को व्यावहारिक सहायता से जोड़ना, जैसे टेली-लॉ और न्याय बंधु के माध्यम से
  • यह अभियान तीन उप-अभियानों पर आधारित है:

पंच प्राण प्रतिज्ञा निम्नलिखित का प्रतीक है:

  1. एक विकासोन्मुख देश
  2. दासता की मानसिकता का उन्मूलन
  3. अपनी परंपराओं पर गर्व
  4. एकता और अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता
  5. सभी नागरिकों में कर्तव्य बोध जगाना

सबको न्याय – हर घर न्याय: सभी के लिए सुलभ न्याय सुनिश्चित करना, सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना।
नव भारत नव संकल्प: पंच प्राण (विकासोन्मुख देश, दासता मानसिकता का उन्मूलन, परंपराओं पर गर्व, एकता और कर्तव्य बोध) के माध्यम से नए भारत का निर्माण।
विधि जागृति अभियान: ग्रामीण और हाशिए वाले क्षेत्रों में कानूनी अधिकारों की जागरूकता बढ़ाना

कार्यान्वयन और प्रमुख पहलें

अभियान की पहुंच ज़मीनी स्तर से डिजिटल तक फैली हुई है, जिसमें 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों, आकांक्षी जिलों और दूरदराज के समुदायों को शामिल किया गया। MyGov प्लेटफॉर्म के माध्यम से शपथ, प्रश्नोत्तरी और रचनात्मक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जो लाखों नागरिकों को जोड़ती हैं।

सबको न्याय – हर घर न्याय के अंतर्गत:

पंच प्राण प्रतिज्ञा: नागरिक MyGov पर शपथ लेकर ई-सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं। ग्राम स्तरीय उद्यमियों (VLE) ने इसे ग्रामीण स्तर तक पहुंचाया।
न्याय सेवा मेला: 25 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में राज्य स्तरीय मेले आयोजित, जहां ‘वॉयस ऑफ बेनिफिशरीज़’ का चौथा संस्करण और टेली-लॉ प्रोफाइल पुस्तिका जारी की गई। इन मेलों ने 84 लाख से अधिक नागरिकों तक पहुंच बनाई।
न्याय सहायक: समुदाय-आधारित कानूनी संदेशवाहक, जो घर-घर जाकर जागरूकता फैलाते हैं। इन्होंने 14,598 से अधिक मामले दर्ज किए और ‘विधि बैठक’ सत्र आयोजित किए।

नव भारत नव संकल्प के अंतर्गत:   युवाओं को संवादात्मक गतिविधियों से जोड़ना, जैसे पंच प्राण पर आधारित कार्यक्रम।

विधि जागृति अभियान के अंतर्गत:

ग्राम विधि चेतना: छात्रों द्वारा गांवों में जागरूकता गतिविधियां, 10,000 से अधिक लाभार्थियों तक पहुंच।
वंचित वर्ग सम्मान अभियान: IGNOU और दूरदर्शन के साथ वेबिनार, जिसमें बच्चे, दिव्यांग, महिलाएं, अनुसूचित जाति, ट्रांसजेंडर और वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों पर फोकस। सात प्रमुख विषयों पर चर्चा।
नारी भागीदारी: महिलाओं के विरुद्ध हिंसा पर ग्राम स्तर के कार्यक्रम, नेशनल लॉ स्कूल जैसी संस्थाओं द्वारा आयोजित।

उल्लेखनीय कार्यक्रम और उपलब्धियां

  • अभियान ने 13,700 से अधिक : कार्यक्रमों के माध्यम से 1 करोड़ से अधिक नागरिकों को संगठित किया। प्रमुख क्षेत्रीय कार्यक्रम:
  • बीकानेर (9 मार्च 2024): न्याय सहायक’ पहल लॉन्च, 900 प्रतिभागी।
  • प्रयागराज (16 जुलाई 2024): हमारा संविधान हमारा सम्मान’ पोर्टल लॉन्च, 800 प्रतिभागी।
  • गुवाहाटी (19 नवंबर 2024): पॉडकास्ट, कॉमिक बुक्स और ‘संविधान कट्टा’ लॉन्च, 1,400 प्रतिभागी।
  • कुंभ, प्रयागराज (24 जनवरी 2025): उपलब्धि पुस्तिका विमोचन, 2,000 प्रतिभागी, राष्ट्रीय प्रसारण।

ये कार्यक्रम कानूनी साक्षरता, सांस्कृतिक गतिविधियों और नागरिक-नेतृत्व वाली पहलों को जोड़ते हैं, जो संवैधानिक मूल्यों को जीवंत बनाते हैं।

चुनौतियां और सुझाव

हालांकि अभियान सफल रहा, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल विभाजन, भाषाई बाधाएं और संसाधनों की कमी चुनौतियां हैं। UPSC दृष्टि से, यह सामाजिक न्याय की असमानताओं (GS-2) को उजागर करता है।

सुझाव: अधिक स्थानीय भाषाओं में सामग्री, AI-आधारित टूल्स का उपयोग और निरंतर मॉनिटरिंग।

निष्कर्ष : 

‘हमारा संविधान – हमारा स्वाभिमान’ अभियान संवैधानिक जागरूकता को एक जन आंदोलन में बदल रहा है, जो ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में उत्प्रेरक है। यह न केवल अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि कर्तव्यों की याद दिलाता है, जो अनुच्छेद 51A (मौलिक कर्तव्य) से जुड़ा है। यह सरकारी योजनाओं के प्रभाव, नागरिक भागीदारी और संवैधानिक विकास के उदाहरण के रूप में महत्वपूर्ण है।  ऐसे अभियान लोकतंत्र को मजबूत करेंगे, जहां हर नागरिक संविधान का स्वाभिमानी रक्षक बने।

 प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: 

Q.निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान’ अभियान, पहले ‘हमारा संविधान-हमारा सम्मान’ अभियान का ही विकसित रूप है।
2. यह अभियान भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा चलाया जा रहा है।
3. अभियान का शुभारंभ उपराष्ट्रपति द्वारा 24 जनवरी 2024 को डॉ. बी.आर. अम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में किया गया था।
उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) सभी 1, 2 और 3
(d) केवल 1 और 3

उत्तर: (C)

 मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q.भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39A में निःशुल्क कानूनी सहायता की बात कही गई है। ‘हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान’ अभियान की न्याय सहायक, टेली-लॉ, न्याय सेवा मेला तथा विधि जागृति अभियान जैसी पहलों के माध्यम से अनुच्छेद 39A को जमीनी स्तर पर साकार करने के प्रयासों की समीक्षा कीजिए। क्या ये प्रयास ‘सबको न्याय – हर घर न्याय’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सक्षम हैं?   ( शब्द सीमा – 250, अंक – 15 )

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