21 Jul 2026-27 में ग्रामीण विकास मंत्रालय को 2.28 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटन
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, विकास और लोक कल्याण से संबंधित सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय
- Prelims: ग्रामीण विकास मंत्रालय, बजट अनुमान (BE), राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP), डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP), केंद्रीय क्षेत्रक योजनाएँ, केंद्र प्रायोजित योजनाएँ
- Essay: भारत में ग्रामीण विकास: चुनौतियाँ और अवसर, समावेशी विकास के लिए सरकारी योजनाओं की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: ग्रामीण विकास मंत्रालय को बजट अनुमान 2026-27 के तहत 2.31 लाख करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए गए हैं, जो राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) और डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) जैसी प्रमुख योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन और बुनियादी ढाँचे के विकास पर केंद्रित हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने हाल ही में लोकसभा में एक लिखित उत्तर में ग्रामीण विकास मंत्रालय को बजट अनुमान (BE) 2026-27 के तहत आवंटित धनराशि और विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं के कार्यान्वयन तंत्र के बारे में जानकारी दी। मंत्रालय को कुल 2,31,423.14 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें से ग्रामीण विकास विभाग के लिए 2,28,768.81 करोड़ रुपये निर्धारित हैं। यह जानकारी ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और कल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
- भारत की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, और ग्रामीण विकास देश के समग्र आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन, बुनियादी ढाँचे के विकास और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित विभिन्न योजनाओं को लागू करता है।
- बजट अनुमान (Budget Estimate) किसी वित्तीय वर्ष के लिए सरकार द्वारा अनुमानित आय और व्यय का विवरण होता है, जो आगामी वर्ष के लिए वित्तीय नियोजन का आधार बनता है।
- केंद्र सरकार की योजनाएँ मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं: केंद्रीय क्षेत्रक योजनाएँ (Central Sector Schemes), जिनका वित्तपोषण और कार्यान्वयन पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है, और केंद्र प्रायोजित योजनाएँ (Centrally Sponsored Schemes), जिनका वित्तपोषण केंद्र और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच एक निश्चित अनुपात में साझा किया जाता है।
- निधियों का उचित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilisation Certificates) और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं।
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (National Social Assistance Programme – NSAP) और डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (Digital India Land Records Modernization Programme – DILRMP) ग्रामीण विकास मंत्रालय की महत्वपूर्ण पहलें हैं।
- ग्रामीण विकास योजनाओं का सफल कार्यान्वयन जमीनी स्तर पर वास्तविक आवश्यकताओं के आकलन और राज्यों के पास उपलब्ध शेष निधि को ध्यान में रखने पर निर्भर करता है।
- ग्रामीण विकास के तहत प्रमुख क्षेत्रों में आजीविका, आवास, सड़कें, पेयजल, स्वच्छता और सामाजिक सुरक्षा शामिल हैं।
ग्रामीण विकास मंत्रालय की प्रमुख पहलें और उनका कार्यान्वयन
- ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण मंत्रालय है जो ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास और गरीबी उन्मूलन के लिए नीतियाँ और कार्यक्रम बनाता है।
- मंत्रालय को बजट अनुमान 2026-27 के तहत 2,31,423.14 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है, जिसमें से ग्रामीण विकास विभाग के लिए 2,28,768.81 करोड़ रुपये हैं।
- निधियों का आवंटन राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार नहीं, बल्कि संबंधित विभागों के विभिन्न कार्यक्रमों/योजनाओं के लिए किया जाता है।
- राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को निधियाँ योजनाओं के संबंधित कार्यान्वयन तंत्र के माध्यम से जारी की जाती हैं, जिसमें योजनाबद्ध आवश्यकताओं और दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाता है।
- निधियों के उचित उपयोग के लिए आवश्यक दस्तावेज, जैसे उपयोगिता प्रमाण पत्र, जमा करना अनिवार्य है।
- DILRMP का उद्देश्य भूमि विवादों को कम करना, भूमि प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाना और नागरिकों को भूमि संबंधी सेवाएँ आसानी से उपलब्ध कराना है।
- दिल्ली जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी NSAP और DILRMP जैसी योजनाएँ लागू की जा रही हैं, जो इन कार्यक्रमों की व्यापक पहुँच को दर्शाती हैं।
- योजनाओं के सफल कार्यान्वयन के लिए जमीनी स्तर पर वास्तविक आवश्यकताओं का आकलन और राज्यों के पास उपलब्ध निधि की शेष राशि को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है, ताकि संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| बजट आवंटन 2026-27 | ग्रामीण विकास मंत्रालय को 2,31,423.14 करोड़ रुपये आवंटित, जिसमें से 2,28,768.81 करोड़ रुपये ग्रामीण विकास विभाग के लिए हैं। यह ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यक्रमों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| विभाग-वार आवंटन | निधि का आवंटन राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार नहीं, बल्कि संबंधित विभागों के विभिन्न कार्यक्रमों/योजनाओं के लिए किया गया है। यह केंद्र सरकार को योजनाओं के कार्यान्वयन में अधिक लचीलापन और नियंत्रण प्रदान करता है। |
| निधि जारी करने की प्रक्रिया | राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को निधियां योजनाओं के कार्यान्वयन तंत्र के माध्यम से जारी की जाती हैं, जिसमें उपयोगिता प्रमाण पत्र, दिशानिर्देशों का पालन और वास्तविक आवश्यकता का आकलन शामिल है। यह वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। |
| राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) | यह कार्यक्रम केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में भी लागू किया गया है। यह कमजोर वर्गों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। |
| डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) | यह कार्यक्रम केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में लागू किया गया है। यह भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- ग्रामीण विकास योजनाओं में भारी निवेश ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है, जिससे रोजगार सृजन होता है और ग्रामीण आय में वृद्धि होती है।
- बुनियादी ढांचे के विकास (सड़कें, आवास) और सामाजिक सुरक्षा (पेंशन) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार होता है।
सामाजिक महत्व
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) जैसे कार्यक्रम वृद्धों, विधवाओं और विकलांग व्यक्तियों को वित्तीय सहायता प्रदान करके सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत करते हैं।
- ग्रामीण विकास से शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसी बुनियादी सेवाओं तक पहुंच में सुधार होता है, जिससे ग्रामीण आबादी का समग्र कल्याण होता है।
प्रशासनिक महत्व
- डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) भूमि विवादों को कम करने, भूमि संबंधी धोखाधड़ी को रोकने और भूमि प्रशासन में पारदर्शिता लाने में मदद करता है।
- निधि जारी करने की सख्त प्रक्रिया वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करती है और योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देती है।
राजनीतिक महत्व
- ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित करना समावेशी विकास के सरकार के एजेंडे को दर्शाता है, जो ग्रामीण मतदाताओं के बीच विश्वास और समर्थन बनाने में मदद करता है।
- क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और संतुलित विकास को बढ़ावा देने में मदद करता है, जिससे सामाजिक सद्भाव बना रहता है।
चुनौतियाँ
1. निधि का कुप्रबंधन और दुरुपयोग
- योजनाओं के लिए आवंटित निधि का प्रभावी ढंग से उपयोग न होना या उसका दुरुपयोग होना एक बड़ी चुनौती है।
- उपयोगिता प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजीकरण प्रक्रियाओं में देरी या अनियमितताएं निधि के प्रवाह को बाधित कर सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. कार्यान्वयन में अक्षमता
- जमीनी स्तर पर योजनाओं के कार्यान्वयन में नौकरशाही की बाधाएं, भ्रष्टाचार और मानव संसाधन की कमी एक बड़ी चुनौती है।
- राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पास उपलब्ध निधि की शेष राशि का सही आकलन न होना या उसका समय पर उपयोग न होना।
यूपीएससी लिंक: विकास प्रक्रियाएं और विकास उद्योग
3. लक्ष्य समूह तक पहुंच का अभाव
- कई बार, योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पाता है, जिससे उनके उद्देश्य पूरे नहीं होते हैं।
- जागरूकता की कमी और जटिल आवेदन प्रक्रियाएं लाभार्थियों को योजनाओं से दूर रख सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: कल्याणकारी योजनाएं
4. समन्वय की कमी
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच, और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा डालती है।
- योजनाओं के दोहराव या ओवरलैप से संसाधनों का अपव्यय हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: केंद्र एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| निधि का उपयोग | आवंटित निधि का समय पर और प्रभावी ढंग से उपयोग सुनिश्चित करना, विशेष रूप से जब राज्यों के पास पहले से ही शेष निधि उपलब्ध हो। |
| जवाबदेही | योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना, ताकि भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन को रोका जा सके। |
| निगरानी तंत्र | योजनाओं की प्रगति और परिणामों की प्रभावी निगरानी के लिए एक मजबूत तंत्र का अभाव। |
| क्षमता निर्माण | स्थानीय स्तर पर योजना कार्यान्वयनकर्ताओं की क्षमता का अभाव, जिससे योजनाओं का प्रभावी वितरण बाधित होता है। |
| डेटा सटीकता | लाभार्थियों की पहचान और वास्तविक आवश्यकताओं के आकलन के लिए सटीक और अद्यतन डेटा की उपलब्धता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (National Social Assistance Programme – NSAP)
- डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (Digital India Land Records Modernization Programme – DILRMP)
आगे की राह
- निधि के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मजबूत समन्वय स्थापित करना और नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करना।
- योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का अधिक उपयोग करना, जैसे कि जियो-टैगिंग और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT)।
- जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन एजेंसियों की क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना, जिसमें प्रशिक्षण और पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराना शामिल है।
- योजनाओं के लाभों के बारे में ग्रामीण आबादी के बीच जागरूकता बढ़ाना, ताकि वास्तविक लाभार्थी उन तक पहुंच सकें।
- एक मजबूत निगरानी और मूल्यांकन तंत्र स्थापित करना, जो योजनाओं की प्रगति और परिणामों का नियमित रूप से आकलन कर सके।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सूचना साझाकरण और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
- योजनाओं के दिशानिर्देशों को सरल बनाना और आवेदन प्रक्रियाओं को आसान बनाना, ताकि लाभार्थियों को सुविधा हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ग्रामीण विकास मंत्रालय · बजट अनुमान · निधि आवंटन · राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) · डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) · केंद्र प्रायोजित योजनाएं · राज्यों को निधि जारी करना · उपयोगिता प्रमाण पत्र · ग्रामीण अर्थव्यवस्था · सामाजिक सुरक्षा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 40’, ‘note’: ‘ग्राम पंचायतों का संगठन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘काम, शिक्षा और लोक सहायता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के शैक्षिक, आर्थिक हितों का संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
अवधारणा प्रवाह
ग्रामीण विकास मंत्रालय को बजट आवंटन प्राप्त होता है। → निधि को विभिन्न ग्रामीण विकास कार्यक्रमों/योजनाओं के लिए आवंटित किया जाता है। → राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों को योजनाओं के कार्यान्वयन तंत्र के माध्यम से निधियां जारी की जाती हैं। → निधि के उपयोग के लिए आवश्यक दस्तावेज और उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा किए जाते हैं। → योजनाबद्ध दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाता है। → जमीनी स्तर पर वास्तविक आवश्यकता का आकलन किया जाता है और शेष निधि का ध्यान रखा जाता है। → ग्रामीण विकास योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन होता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. ग्रामीण विकास मंत्रालय से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बजट अनुमान (BE) के तहत आवंटन राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार किया जाता है।
2. राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक पहल है।
3. डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) केवल केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में लागू किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2
- केवल 1 और 3
- केवल 2 और 3
उत्तर: केवल 2 — कथन 1 गलत है क्योंकि बजट अनुमान के तहत आवंटन राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार नहीं, बल्कि संबंधित विभागों के विभिन्न कार्यक्रमों/योजनाओं के लिए किया जाता है। कथन 2 सही है क्योंकि NSAP ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। कथन 3 गलत है क्योंकि DILRMP एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम है, हालांकि यह दिल्ली में भी लागू किया गया है, इसका कार्यान्वयन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है।
Q2. राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय योजनाओं के तहत निधियां जारी करते समय किन कारकों पर विचार किया जाता है?
1. योजनाओं के तहत पहले से आवंटित निधि का उचित उपयोग सुनिश्चित करना।
2. योजनाबद्ध आवश्यकताओं के अनुसार आवश्यक दस्तावेज/उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करना।
3. योजनाबद्ध दिशानिर्देशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करना।
4. जमीनी स्तर पर वास्तविक आवश्यकता का आकलन करना।
5. राज्यों के पास उपलब्ध निधि की शेष राशि को ध्यान में रखना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3, 4 और 5
- 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर: 1, 2, 3, 4 और 5 — सभी पांचों कारक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय योजनाओं के तहत निधियां जारी करते समय महत्वपूर्ण होते हैं। इनमें निधि के उचित उपयोग, दस्तावेजीकरण, दिशानिर्देशों का पालन, जमीनी आवश्यकता का आकलन और शेष निधि का विचार शामिल है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण भारत में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन लाने में बजट आवंटन की भूमिका का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, इन निधियों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की जवाबदेही के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में ग्रामीण विकास मंत्रालय के बजट आवंटन और उसके कार्यक्रमों (जैसे NSAP, DILRMP) का ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन में योगदान समझाना है। दूसरे भाग में, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा निधि के प्रभावी उपयोग के लिए आवश्यक शर्तें (उपयोगिता प्रमाण पत्र, दिशानिर्देशों का पालन, जमीनी आवश्यकता का आकलन) और उनकी जवाबदेही के महत्व पर चर्चा करनी है। निष्कर्ष में ग्रामीण विकास के लिए समन्वित प्रयासों के महत्व पर जोर दिया जा सकता है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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