2030 तक अंतरिक्ष में कचरा मुक्त मिशन: ISRO की महत्वाकांक्षी पहल

2030 तक अंतरिक्ष में कचरा मुक्त मिशन: ISRO की महत्वाकांक्षी पहल

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी  |  GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध
  • Prelims: मलबा-मुक्त अंतरिक्ष मिशन (DFSM), अंतर-एजेंसी अंतरिक्ष मलबा समन्वय समिति (IADC), ISRO, अंतरिक्ष मलबा, बाह्य अंतरिक्ष की दीर्घकालिक स्थिरता, पोस्ट-मिशन डिस्पोजल (PMD), IS4OM
  • Essay: अंतरिक्ष अन्वेषण और मानव जाति का साझा भविष्य, सतत विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत का ‘मलबा-मुक्त अंतरिक्ष मिशन’ संकल्प 2030 तक सभी भारतीय अंतरिक्ष अभिकर्ताओं द्वारा शून्य-मलबा मिशन प्राप्त करने और बाह्य अंतरिक्ष की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष ने बेंगलुरु में अंतर-एजेंसी अंतरिक्ष मलबा समन्वय समिति (IADC) की 42वीं वार्षिक बैठक के उद्घाटन सत्र के दौरान ‘मलबा-मुक्त अंतरिक्ष मिशन’ (Debris-Free Space Missions – DFSM) पहल की घोषणा की है। इस पहल का लक्ष्य 2030 तक सभी भारतीय अंतरिक्ष अभिकर्ताओं, चाहे वे सरकारी हों या गैर-सरकारी, द्वारा मलबा-मुक्त अंतरिक्ष मिशन प्राप्त करना है। यह वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय को बाह्य अंतरिक्ष की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए भारत के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • अंतरिक्ष मलबा (Space Debris) पृथ्वी की निचली कक्षा में घूम रहे निष्क्रिय मानव निर्मित वस्तुओं को संदर्भित करता है, जिसमें पुराने उपग्रह, रॉकेट के चरण और टकराव या विस्फोट से उत्पन्न टुकड़े शामिल हैं।
  • यह मलबा सक्रिय उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करता है, जिससे टकराव का जोखिम बढ़ता है और अंतरिक्ष मिशनों की सुरक्षा और स्थिरता प्रभावित होती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन और कमी के लिए विभिन्न दिशानिर्देश और संहिताएँ मौजूद हैं, जैसे कि IADC दिशानिर्देश।
  • भारत, अपनी बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं के साथ, बाह्य अंतरिक्ष के दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए अपनी जिम्मेदारी को पहचानता है।
  • ISRO ने पहले ही अंतरिक्ष वस्तुओं की ट्रैकिंग और निगरानी के लिए ISRO सिस्टम फॉर सेफ एंड सस्टेनेबल स्पेस ऑपरेशंस मैनेजमेंट (IS4OM) जैसी प्रणालियाँ स्थापित की हैं।
  • यह पहल वैश्विक प्रयासों का समर्थन करती है और भारत को उन अंतरिक्ष एजेंसियों में से एक के रूप में स्थापित करती है जो बाह्य अंतरिक्ष गतिविधियों की सुरक्षा और स्थिरता को सर्वोच्च महत्व देती है।

मलबा-मुक्त अंतरिक्ष मिशन (DFSM) पहल क्या है?

  • यह पहल 2030 तक सभी भारतीय अंतरिक्ष अभिकर्ताओं (सरकारी और गैर-सरकारी) द्वारा मलबा-मुक्त अंतरिक्ष मिशन प्राप्त करने का लक्ष्य रखती है।
  • इसमें उपग्रहों और प्रक्षेपण यानों के परिचालन जीवन के दौरान और मिशन के बाद निपटान चरण में मलबे के निर्माण से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाना शामिल है।
  • कक्षा में टकराव और उपग्रहों व प्रक्षेपण यानों के विखंडन से बचने के लिए आवश्यक विफलता मोड अध्ययन, अतिरेक प्रणालियों और उच्च विश्वसनीयता के साथ मिशन डिजाइन पर जोर दिया जाएगा।
  • दीर्घकालिक मलबे वाले जानबूझकर किए गए विखंडन से बचना भी इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
  • व्यय किए गए कक्षीय चरणों और उपग्रहों के पोस्ट-मिशन डिस्पोजल (PMD) का 99% से अधिक सफलता की संभावना के साथ अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
  • रॉकेट निकायों और अंतरिक्ष यानों के परिचालन जीवन के अंत में नियंत्रित पुन: प्रवेश या 5 वर्ष से कम शेष कक्षीय जीवन के साथ निचली कक्षा में डी-ऑर्बिटिंग सुनिश्चित की जाएगी।
  • मानव अंतरिक्ष उड़ान सुरक्षा के लिए विशेष विचार किए जाएंगे, जिसमें 400 किमी +/- 30 किमी बैंड को मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए कक्षीय बैंड के रूप में मानना शामिल है।
  • यह पहल अंतरिक्ष वस्तु ट्रैकिंग और निगरानी के लिए आवश्यक क्षमता निर्माण सुनिश्चित करेगी और बाह्य अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अभिनव तकनीकों पर अंतरिक्ष मलबा अनुसंधान में प्रगति करेगी।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
मलबा-मुक्त अंतरिक्ष मिशन (DFSM) लक्ष्य सभी भारतीय अंतरिक्ष अभिकर्ताओं (सरकारी और गैर-सरकारी) द्वारा 2030 तक मलबा-मुक्त मिशन प्राप्त करना।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग भारत अन्य देशों को भी इस पहल में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करेगा ताकि बाह्य अंतरिक्ष की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
मलबे के उत्पादन से बचाव उपग्रहों और प्रक्षेपण यानों के परिचालन जीवन तथा मिशन-पश्चात निपटान चरण के दौरान मलबे के उत्पादन से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाना।
कक्षा में टक्कर से बचाव उच्च विश्वसनीयता के साथ मिशन डिजाइन, अनावश्यक प्रणालियों और विफलता मोड अध्ययनों के माध्यम से उपग्रहों की कक्षा में टक्कर और टूटने से बचना।
मिशन-पश्चात निपटान (PMD) खर्च किए गए कक्षीय चरणों और उपग्रहों के मिशन-पश्चात निपटान का 99% से अधिक सफलता की संभावना के साथ अनुपालन सुनिश्चित करना।
मानव अंतरिक्ष उड़ान सुरक्षा मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए 400 किमी +/- 30 किमी बैंड को कक्षीय बैंड के रूप में मानना और इस बैंड में न्यूनतम कक्षीय स्थानांतरण से बचना।

महत्व

पर्यावरण और दीर्घकालिक स्थिरता

  • अंतरिक्ष मलबे की बढ़ती समस्या का समाधान करके बाह्य अंतरिक्ष के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना।
  • भविष्य की पीढ़ियों के लिए अंतरिक्ष संसाधनों की उपलब्धता और उपयोग सुनिश्चित करना।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और नेतृत्व

  • अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन में भारत को एक जिम्मेदार और अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष समुदाय के साथ सहयोग को बढ़ावा देना और साझा चुनौतियों का समाधान करना।

आर्थिक और रणनीतिक

  • अंतरिक्ष परिसंपत्तियों (उपग्रहों) को मलबे से होने वाले नुकसान से बचाना, जिससे आर्थिक नुकसान और मिशन विफलता से बचा जा सके।
  • अंतरिक्ष में सुरक्षित और विश्वसनीय संचालन सुनिश्चित करके भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करना।

तकनीकी नवाचार

  • मलबा-मुक्त मिशनों को प्राप्त करने के लिए नई प्रौद्योगिकियों और प्रक्रियाओं के विकास को बढ़ावा देना।
  • अंतरिक्ष वस्तु ट्रैकिंग, निगरानी और मलबे को हटाने के लिए अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करना।

चुनौतियाँ

1. तकनीकी जटिलताएँ

  • उच्च विश्वसनीयता वाले मिशन डिजाइन और निष्पादन के लिए उन्नत इंजीनियरिंग और परीक्षण की आवश्यकता।
  • मिशन-पश्चात निपटान के लिए सटीक कक्षीय नियंत्रण और ईंधन प्रबंधन सुनिश्चित करना।

2. लागत संबंधी बाधाएँ

  • मलबा-मुक्त प्रौद्योगिकियों और प्रक्रियाओं को अपनाने से मिशन की लागत में वृद्धि हो सकती है।
  • छोटे और निजी अंतरिक्ष अभिकर्ताओं के लिए इन मानकों का पालन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

3. अंतर्राष्ट्रीय समन्वय

  • अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस पहल में शामिल होने के लिए राजी करना और समान मानकों को अपनाना।
  • अंतरिक्ष मलबे के लिए एक व्यापक अंतर्राष्ट्रीय कानूनी ढांचा विकसित करना।

4. क्षमता निर्माण

  • अंतरिक्ष वस्तु ट्रैकिंग और निगरानी के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे और विशेषज्ञता का विकास।
  • अंतरिक्ष मलबे अनुसंधान में प्रगति के लिए निवेश और मानव संसाधन विकास।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अंतरिक्ष मलबे का संचय सक्रिय उपग्रहों और भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए टकराव का बढ़ता जोखिम।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का अभाव अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन के लिए वैश्विक स्तर पर एकसमान नियमों और मानकों की कमी।
तकनीकी और वित्तीय बाधाएँ मलबा-मुक्त प्रौद्योगिकियों को विकसित करने और लागू करने की उच्च लागत और जटिलता।
निजी क्षेत्र की भागीदारी निजी अंतरिक्ष अभिकर्ताओं द्वारा मलबा-मुक्त प्रथाओं का अनुपालन सुनिश्चित करना।
मानव अंतरिक्ष उड़ान सुरक्षा मानव मिशनों के लिए विशेष सुरक्षा उपायों और कक्षीय बैंड प्रबंधन की आवश्यकता।

आगे की राह

  • अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय नीति और नियामक ढांचा विकसित करना।
  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को बढ़ावा देना ताकि मलबा-मुक्त प्रौद्योगिकियों को अपनाया जा सके।
  • अंतरिक्ष वस्तु ट्रैकिंग और निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए निवेश करना, जिसमें IS4OM (ISRO System for Safe & Sustainable Space Operations Management) की भूमिका का विस्तार करना शामिल है।
  • अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की पहल को सक्रिय रूप से बढ़ावा देना और अन्य देशों को मलबा-मुक्त प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • मिशन डिजाइन, ईंधन बजट और मिशन-पश्चात निपटान के लिए कठोर दिशानिर्देशों को अनिवार्य करना।
  • अंतरिक्ष मलबे को हटाने और पुनर्चक्रण के लिए नवीन तकनीकों पर अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना।
  • अंतरिक्ष मलबे के खतरों और उसके प्रबंधन के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

अंतरिक्ष मलबे में वृद्धि  →  टकराव का बढ़ता जोखिम  →  भारत की मलबा-मुक्त अंतरिक्ष मिशन (DFSM) पहल  →  मिशन डिजाइन और परिचालन में बदलाव  →  अंतरिक्ष की दीर्घकालिक स्थिरता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. कचरा मुक्त अंतरिक्ष मिशन (DFSM) पहल के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस पहल का लक्ष्य 2030 तक सभी भारतीय अंतरिक्ष अभिकर्ताओं द्वारा कचरा मुक्त अंतरिक्ष मिशन प्राप्त करना है।
2. यह पहल केवल सरकारी अंतरिक्ष अभिकर्ताओं पर लागू होगी, गैर-सरकारी अभिकर्ताओं पर नहीं।
3. ISRO का IS4OM इस पहल के कार्यान्वयन के लिए नोडल बिंदु होगा।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि पहल का लक्ष्य 2030 तक सभी भारतीय अंतरिक्ष अभिकर्ताओं द्वारा कचरा मुक्त मिशन प्राप्त करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह पहल सरकारी और गैर-सरकारी दोनों भारतीय अंतरिक्ष अभिकर्ताओं पर लागू होगी। कथन 3 सही है क्योंकि ISRO का IS4OM (सुरक्षित और टिकाऊ अंतरिक्ष संचालन प्रबंधन के लिए ISRO प्रणाली) DFSM के कार्यान्वयन के लिए नोडल बिंदु होगा।

Q2. अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन से संबंधित निम्नलिखित में से कौन से उपाय कचरा मुक्त अंतरिक्ष मिशन (DFSM) पहल का हिस्सा हैं?
1. उपग्रहों और प्रक्षेपण यानों के परिचालन जीवन के दौरान मलबे के निर्माण से बचना।
2. मिशन के बाद व्यय किए गए कक्षीय चरणों और उपग्रहों का निपटान (Post-mission disposal – PMD) सुनिश्चित करना।
3. मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए 400 किमी +/- 30 किमी बैंड को कक्षीय बैंड के रूप में मानना।
4. सभी उपग्रहों की मिशन के सभी चरणों में ट्रैक करने की क्षमता, पहचान करने की क्षमता और युद्धाभ्यास करने की क्षमता सुनिश्चित करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनें:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — सभी चार कथन कचरा मुक्त अंतरिक्ष मिशन (DFSM) पहल के तहत उल्लिखित महत्वपूर्ण दिशानिर्देशों का हिस्सा हैं। इनमें मलबे के निर्माण से बचना, मिशन के बाद निपटान का अनुपालन, मानव अंतरिक्ष उड़ान सुरक्षा के लिए विशेष विचार और उपग्रहों की ट्रैक करने की क्षमता, पहचान करने की क्षमता और युद्धाभ्यास करने की क्षमता सुनिश्चित करना शामिल है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत द्वारा ‘कचरा मुक्त अंतरिक्ष मिशन’ (Debris-Free Space Missions – DFSM) पहल की घोषणा अंतरिक्ष मलबे के बढ़ते खतरे के बीच एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल के प्रमुख उद्देश्यों और कार्यान्वयन रणनीतियों पर चर्चा करें, और यह वैश्विक अंतरिक्ष स्थिरता प्रयासों में कैसे योगदान दे सकती है, इसका विश्लेषण करें। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, DFSM पहल के प्रमुख उद्देश्यों को स्पष्ट करें, जैसे 2030 तक सभी भारतीय अंतरिक्ष अभिकर्ताओं द्वारा कचरा मुक्त मिशन प्राप्त करना और बाहरी अंतरिक्ष की दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ावा देना। दूसरे भाग में, इसके कार्यान्वयन रणनीतियों पर प्रकाश डालें, जिसमें मलबे के निर्माण से बचना, मिशन के बाद निपटान, मानव अंतरिक्ष उड़ान सुरक्षा के लिए विचार और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय शामिल है। अंत में, चर्चा करें कि यह पहल वैश्विक प्रयासों में कैसे योगदान देती है, भारत को एक जिम्मेदार अंतरिक्ष अभिकर्ता के रूप में स्थापित करती है और बाहरी अंतरिक्ष के साझा विरासत के संरक्षण में मदद करती है।

स्रोत: ISRO


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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