12 Aug 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा: सरकार का आत्मनिर्भर रोडमैप
✎ भारत अपने तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम, लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के विकास और निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य के साथ एक आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी परमाणु ऊर्जा…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | GS Paper III — आधारभूत संरचना: ऊर्जा
- Prelims: परमाणु ऊर्जा मिशन, तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम, लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR), थोरियम आधारित रिएक्टर, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR), शांति अधिनियम, 2025, प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR)
- Essay: भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास में परमाणु ऊर्जा की भूमिका, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत अपने तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम, लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के विकास और निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य के साथ एक आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में भारत के परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र को आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार के रोडमैप को प्रस्तुत किया। उन्होंने उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकियों, लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR), घरेलू विनिर्माण क्षमताओं, निजी क्षेत्र की भागीदारी और देश के प्रचुर थोरियम संसाधनों के दीर्घकालिक उपयोग पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। इस रोडमैप में 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य और 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी SMRs के विकास का लक्ष्य शामिल है।
पृष्ठभूमि
- भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अपने विशाल थोरियम भंडार का सतत उपयोग करने के उद्देश्य से तीन चरणों वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम द्वारा निर्देशित है।
- केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित ‘परमाणु ऊर्जा मिशन’ इस रणनीति को और गति प्रदान कर रहा है, जिसका लक्ष्य 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक बढ़ाना है।
- सरकार ने परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के लिए दोहरी रणनीति अपनाई है, जिसमें 700 मेगावाट क्षमता वाले प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR) जैसे बड़े स्वदेशी रिएक्टरों और उन्नत रिएक्टर डिजाइनों को नवीन (ग्रीनफील्ड) स्थलों पर स्थापित करना शामिल है।
- इसके साथ ही, मौजूदा विकसित (ब्राउनफील्ड) स्थलों पर छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) का विकास और स्थापना भी की जा रही है, जिनमें जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली संयंत्रों और दूरस्थ क्षेत्रों में ऑफ-ग्रिड अनुप्रयोगों के लिए कैप्टिव संयंत्र शामिल हैं।
- परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) की एक घटक इकाई, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), बिजली उत्पादन के लिए 220 मेगावाट क्षमता वाले भारत लघु-मॉड्यूलर रिएक्टर (BSMR-200) और 55 मेगावाट क्षमता वाले SMR-55 सहित स्वदेशी SMR प्रौद्योगिकियों के डिजाइन और विकास का कार्य कर रहा है।
भारत का तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम
- भारत का तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम डॉ. होमी भाभा द्वारा तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य देश के सीमित यूरेनियम संसाधनों और प्रचुर थोरियम भंडारों का अधिकतम उपयोग करना है।
- पहला चरण प्राकृतिक यूरेनियम से चलने वाले दबावयुक्त भारी पानी रिएक्टरों (PHWR) पर केंद्रित है, जो बिजली का उत्पादन करते हैं और प्लूटोनियम-239 भी बनाते हैं।
- दूसरा चरण फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों (FBR) का उपयोग करता है, जो प्लूटोनियम-239 और यूरेनियम-238 के मिश्रण से ईंधन लेते हैं, जिससे अधिक प्लूटोनियम-239 का उत्पादन होता है और थोरियम-232 को यूरेनियम-233 में बदला जाता है। इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) इस चरण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
- तीसरा चरण थोरियम आधारित रिएक्टरों पर केंद्रित है, जो यूरेनियम-233 को ईंधन के रूप में उपयोग करते हैं, जिसे दूसरे चरण में थोरियम-232 से उत्पादित किया जाता है। यह चरण भारत के विशाल थोरियम भंडारों का उपयोग करके दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
- लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) छोटे, मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर होते हैं जिनकी क्षमता 300 मेगावाट से कम होती है। इन्हें कारखाने में निर्मित किया जा सकता है और साइट पर असेंबल किया जा सकता है, जिससे निर्माण समय और लागत कम होती है।
- SMRs को विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिनमें बिजली उत्पादन, औद्योगिक ताप और विलवणीकरण शामिल हैं, और ये दूरस्थ क्षेत्रों या मौजूदा जीवाश्म ईंधन संयंत्रों के प्रतिस्थापन के लिए उपयुक्त हैं।
- भारत में BARC द्वारा BSMR-200 और SMR-55 जैसे स्वदेशी SMRs का विकास किया जा रहा है, जो देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 100 गीगावाट का लक्ष्य | 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक बढ़ाना, देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा। |
| तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम | भारत के विशाल थोरियम भंडार का सतत उपयोग करके दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की रणनीति। |
| लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) | कम क्षमता वाले रिएक्टरों का विकास और स्थापना, विशेषकर ब्राउनफील्ड साइटों और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए, ऊर्जा पहुंच बढ़ाएगा। |
| घरेलू विनिर्माण और निजी क्षेत्र की भागीदारी | परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और नवाचार को प्रोत्साहित करना। |
| उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकियां | सोडियम शीतित द्रुत प्रजनक रिएक्टर (SFRs) और उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर (HTGCR) जैसी प्रौद्योगिकियों का विकास भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करेगा। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- परमाणु ऊर्जा क्षमता में वृद्धि से देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी, जिससे आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- घरेलू विनिर्माण और निजी क्षेत्र की भागीदारी से रोजगार सृजन होगा और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- स्थिर और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति से औद्योगिक उत्पादन और आर्थिक संवृद्धि को समर्थन मिलेगा।
सामरिक महत्व
- परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ाएगी और वैश्विक ऊर्जा भू-राजनीति में इसकी स्थिति को मजबूत करेगी।
- उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकियों का विकास भारत को परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करेगा।
पर्यावरणीय महत्व
- परमाणु ऊर्जा एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद करती है, जिससे जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
- जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने से वायु प्रदूषण में कमी आएगी और पर्यावरणीय गुणवत्ता में सुधार होगा।
सामाजिक महत्व
- दूरस्थ क्षेत्रों में SMRs की स्थापना से ऊर्जा पहुंच बढ़ेगी, जिससे ग्रामीण विद्युतीकरण और जीवन स्तर में सुधार होगा।
- स्थिर बिजली आपूर्ति से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अन्य आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता में सुधार होगा।
चुनौतियाँ
1. सुरक्षा और अपशिष्ट प्रबंधन
- परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और रेडियोधर्मी अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान एक बड़ी चुनौती है।
- सार्वजनिक स्वीकृति और सुरक्षा चिंताओं को दूर करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण
2. उच्च पूंजी लागत और लंबी निर्माण अवधि
- परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना में भारी पूंजी निवेश और लंबी निर्माण अवधि लगती है, जिससे परियोजना की लागत और जोखिम बढ़ जाते हैं।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को आकर्षित करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और नियामक ढांचे की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, अवसंरचना
3. तकनीकी विशेषज्ञता और मानव संसाधन
- उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों के विकास और संचालन के लिए उच्च स्तर की तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता होती है।
- इस क्षेत्र में अनुसंधान और विकास तथा कौशल विकास को बढ़ावा देना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, मानव संसाधन
4. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और अप्रसार
- परमाणु प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण और ईंधन आपूर्ति के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण है, लेकिन अप्रसार चिंताओं के कारण यह जटिल हो सकता है।
- भारत को अपनी अप्रसार प्रतिबद्धताओं को बनाए रखते हुए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना होगा।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, सुरक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| परमाणु सुरक्षा | परमाणु संयंत्रों के संचालन और रेडियोधर्मी सामग्री के प्रबंधन में उच्च सुरक्षा मानकों को बनाए रखना। |
| वित्तीय व्यवहार्यता | परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की उच्च प्रारंभिक लागत और लंबी वापसी अवधि। |
| सार्वजनिक धारणा | परमाणु ऊर्जा से जुड़े जोखिमों के बारे में सार्वजनिक भय और विरोध। |
| ईंधन चक्र प्रबंधन | परमाणु ईंधन की उपलब्धता, पुनर्संसाधन और अपशिष्ट निपटान की चुनौतियाँ। |
| नियामक ढाँचा | परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सक्षम करने के लिए एक मजबूत और स्पष्ट नियामक ढाँचे की आवश्यकता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- परमाणु ऊर्जा मिशन
आगे की राह
- परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण के नवीन मॉडल विकसित करना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान करना।
- परमाणु सुरक्षा मानकों को लगातार मजबूत करना और रेडियोधर्मी अपशिष्ट के सुरक्षित और स्थायी निपटान के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों का विकास करना।
- परमाणु ऊर्जा के लाभों और सुरक्षा उपायों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना और गलत धारणाओं को दूर करना।
- परमाणु प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना, विशेष रूप से SMRs, थोरियम-आधारित रिएक्टरों और उन्नत रिएक्टर डिजाइनों पर ध्यान केंद्रित करना।
- परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन विकसित करने के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निवेश करना।
- अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सुगम बनाना।
- परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास (शांति) अधिनियम, 2025 जैसे कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र · आत्मनिर्भर भारत · लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) · थोरियम आधारित परमाणु कार्यक्रम · तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम · निजी क्षेत्र की भागीदारी · परमाणु ऊर्जा मिशन · शांति अधिनियम, 2025 · घरेलू विनिर्माण · उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकियां
अवधारणा प्रवाह
सरकार का रोडमैप प्रस्तुत → स्वदेशी परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा → SMRs और तीन-चरणीय कार्यक्रम पर जोर → 2047 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य → ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत का तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम यूरेनियम के विशाल भंडार के सतत उपयोग पर केंद्रित है।
2. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक बढ़ाना है।
3. भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) भारत लघु-मॉड्यूलर रिएक्टर (BSMR-200) जैसी स्वदेशी SMR प्रौद्योगिकियों के डिजाइन और विकास में शामिल है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 गलत है। भारत का तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम थोरियम के विशाल भंडार के सतत उपयोग पर केंद्रित है, न कि यूरेनियम पर। कथन 2 गलत है। केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित परमाणु ऊर्जा मिशन का लक्ष्य 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक बढ़ाना है, न कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का। कथन 3 सही है। BARC स्वदेशी SMR प्रौद्योगिकियों के डिजाइन और विकास में सक्रिय रूप से शामिल है, जिसमें BSMR-200 भी शामिल है।
Q2. परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास (शांति) अधिनियम, 2025 का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- परमाणु हथियारों के अप्रसार को सुनिश्चित करना।
- परमाणु क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी दोनों संस्थाओं की व्यापक भागीदारी को सक्षम बनाना।
- परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए सुरक्षा मानकों को विनियमित करना।
- अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ सहयोग को बढ़ावा देना।
उत्तर: परमाणु क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी दोनों संस्थाओं की व्यापक भागीदारी को सक्षम बनाना। — शांति अधिनियम, 2025 को परमाणु क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी दोनों संस्थाओं की व्यापक भागीदारी को सक्षम बनाने के लिए अधिनियमित किया गया है, ताकि भारत के परिवर्तन के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और विकास किया जा सके।
Q3. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
सूची-I (संस्थान) सूची-II (प्रमुख कार्य)
A. भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) 1. सोडियम शीतित द्रुत प्रजनक रिएक्टरों का विकास
B. इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) 2. भारत लघु-मॉड्यूलर रिएक्टर (BSMR-200) का डिजाइन
C. परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) 3. परमाणु ऊर्जा मिशन का कार्यान्वयन
कूट:
A B C
- 2 1 3
- 1 2 3
- 3 2 1
- 2 3 1
उत्तर: 2 1 3 — BARC भारत लघु-मॉड्यूलर रिएक्टर (BSMR-200) जैसी स्वदेशी SMR प्रौद्योगिकियों के डिजाइन और विकास का कार्य कर रहा है। IGCAR सोडियम शीतित द्रुत प्रजनक रिएक्टरों और संबंधित बंद ईंधन-चक्र सुविधाओं के लिए बहुविषयक वैज्ञानिक अनुसंधान और उन्नत इंजीनियरिंग विकास कर रहा है। DAE परमाणु ऊर्जा मिशन के माध्यम से परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की रणनीति को गति दे रहा है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए सरकार के रोडमैप पर चर्चा कीजिए। इसके समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं और जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को पूरा करने में परमाणु ऊर्जा के महत्व का संक्षिप्त परिचय।
2. सरकार का रोडमैप/रणनीति (मुख्य बिंदु):
• लक्ष्य: 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य (परमाणु ऊर्जा मिशन)।
• तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम: थोरियम संसाधनों के सतत उपयोग पर जोर।
• लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs): 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी SMRs का लक्ष्य, ब्राउनफील्ड और ग्रीनफील्ड साइटों पर स्थापना। BARC द्वारा BSMR-200 और SMR-55 का विकास।
• उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकियां: HTGCR (हाइड्रोजन उत्पादन के लिए), सोडियम शीतित द्रुत प्रजनक रिएक्टर (IGCAR द्वारा)।
• निजी क्षेत्र की भागीदारी: परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास (शांति) अधिनियम, 2025 के माध्यम से सक्षम।
• घरेलू विनिर्माण: महत्वपूर्ण घटकों का स्वदेशी उत्पादन।
• अनुसंधान एवं विकास: निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास तंत्र को मजबूत करना।
3. चुनौतियाँ:
• उच्च पूंजी लागत और लंबी निर्माण अवधि।
• परमाणु कचरा निपटान और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ।
• सार्वजनिक स्वीकृति और धारणा।
• यूरेनियम की सीमित उपलब्धता (हालांकि थोरियम पर जोर दिया जा रहा है)।
• कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता।
• अंतर्राष्ट्रीय आपूर्तिकर्ता दायित्व और नियामक ढाँचा।
4. निष्कर्ष: भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में परमाणु ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए, चुनौतियों का समाधान करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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