2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका: जानें कैसे बनें मशाल वाहक

2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका: जानें कैसे बनें मशाल वाहक

2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका: जानें कैसे बनें मशाल वाहक

✎ विकसित भारत 2047 (अमृत काल 2022–2047) का लक्ष्य स्वतंत्रता की शताब्दी से जुड़ा है, और पंच प्रण के नागरिक कर्तव्य, मौलिक कर्तव्यों (अनुच्छेद 51A) के माध्यम से संवैधानिक आधार प्राप्त करते हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय समाज (जनसांख्यिकीय लाभांश, युवा और सामाजिक मुद्दे, नशा-मुक्ति)  |  GS Paper II — शासन (युवा कल्याण से संबंधित सरकारी पहलें, मौलिक कर्तव्य, डिजिटल युग में सूचना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता)  |  GS Paper IV — नैतिकता (नागरिक मूल्य, चरित्र, अनुशासन, सेवा और राष्ट्र प्रथम की अवधारणा)
  • Prelims: विकसित भारत 2047 और अमृत काल (2022–2047), पंच प्रण (Panch Pran): प्रधानमंत्री द्वारा 15 अगस्त 2022 को लाल किले से घोषित, मेरा युवा भारत (MY Bharat) पोर्टल और इसका संचालन मंत्रालय, अनुच्छेद 51A: मौलिक कर्तव्य (42वाँ संविधान संशोधन, 1976 द्वारा जोड़ा गया), अनुच्छेद 19(1)(क) और अनुच्छेद 19(2): वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उस पर युक्तियुक्त निर्बंधन, नशा-मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan) और इसका नोडल मंत्रालय, राष्ट्रीय युवा दिवस (12 जनवरी, स्वामी विवेकानंद की जयंती), राष्ट्रीय युवा नीति, 2014
  • Essay: युवा शक्ति: विकसित भारत के संकल्प में युवाओं की निर्णायक भूमिका, जनसांख्यिकीय लाभांश को कौशल, चरित्र और नागरिक चेतना में बदलने की चुनौती

त्वरित पुनरावृत्ति: विकसित भारत 2047 (अमृत काल 2022–2047) का लक्ष्य स्वतंत्रता की शताब्दी से जुड़ा है, और पंच प्रण के नागरिक कर्तव्य, मौलिक कर्तव्यों (अनुच्छेद 51A) के माध्यम से संवैधानिक आधार प्राप्त करते हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के मंत्री ने गुजरात के पोरबंदर जिले में आयोजित ‘विकसित भारत युवा संवाद’ कार्यक्रम में युवाओं से वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। इस अवसर पर पंच प्रण को अपनाने, राष्ट्र प्रथम की भावना बनाए रखने और नशा-मुक्त समाज के निर्माण पर बल दिया गया। सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में देश भर में एक लाख युवा नेताओं को तैयार करने के प्रयास जारी हैं, जिनमें मेरा युवा भारत (MY Bharat) पोर्टल की भूमिका उल्लेखनीय बताई गई। साथ ही डिजिटल माध्यमों पर सूचना के सत्यापन, अफवाहों से बचाव और जिम्मेदार सोशल मीडिया उपयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया। यह संवाद इस दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है कि इसमें युवा नेतृत्व, नागरिक कर्तव्य और राष्ट्र-निर्माण को एक साथ जोड़कर देखा गया है।

पृष्ठभूमि

  • स्वतंत्रता की शताब्दी (वर्ष 2047) को लक्ष्य मानते हुए ‘विकसित भारत’ की संकल्पना प्रस्तुत की गई है। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2021 में ‘अमृत काल’ (2022–2047) का उल्लेख किया था, जिसे आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में 25 वर्षों की यात्रा के रूप में देखा जाता है।
  • पंच प्रण, प्रधानमंत्री द्वारा 15 अगस्त 2022 को लाल किले से घोषित किए गए थे: (1) विकसित भारत का संकल्प, (2) गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, (3) अपनी विरासत पर गर्व, (4) एकता और एकजुटता, (5) नागरिक कर्तव्यों का पालन।
  • मेरा युवा भारत (MY Bharat) युवा कार्य विभाग के अंतर्गत युवाओं के लिए एक स्वायत्त संस्था और डिजिटल मंच के रूप में कार्य करता है, जो स्वयंसेवा, कौशल विकास, करियर मार्गदर्शन और नेतृत्व प्रशिक्षण से जुड़ा है।
  • भारत की जनसंख्या में युवाओं का बड़ा अनुपात है, जिसे जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) के अवसर के रूप में देखा जाता है। इसका लाभ तभी मिलता है जब शिक्षा, कौशल और रोजगार के साथ-साथ मूल्य-आधारित नागरिकता भी विकसित हो।
  • डिजिटल युग में सूचना-प्रसार की गति के साथ गलत सूचना और अफवाहों की चुनौती बढ़ी है। इस संदर्भ में नागरिकों से जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा और सूचना-साक्षरता का महत्त्व बढ़ा है।

विकसित भारत 2047 और युवा नेतृत्व की अवधारणा क्या है?

  • विकसित भारत 2047 एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य है, जिसमें आर्थिक संवृद्धि, सामाजिक न्याय, सुशासन, आत्मनिर्भरता और नागरिक चेतना को एक साथ विकसित करने पर बल है। इसे स्वतंत्रता की शताब्दी से जोड़ा गया है।
  • अमृत काल (2022–2047) इस लक्ष्य की समय-सीमा है। इसमें नीति-निर्माण के साथ नागरिकों की सामूहिक भागीदारी को निर्णायक माना गया है।
  • पंच प्रण नागरिक मूल्यों का संक्षिप्त ढाँचा है। इसमें विकास के संकल्प के साथ औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति, विरासत पर गर्व, एकता और मौलिक कर्तव्यों के पालन को समान महत्त्व दिया गया है।
  • मौलिक कर्तव्य संविधान के भाग IV-A में अनुच्छेद 51A के अंतर्गत वर्णित हैं। इनमें संविधान का पालन, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान, राष्ट्रीय एकता और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा जैसे कर्तव्य शामिल हैं। ये कर्तव्य नागरिक को राष्ट्र-निर्माण से जोड़ते हैं।
  • युवा नेतृत्व का अर्थ केवल औपचारिक पद नहीं है। सामाजिक सेवा, शैक्षिक उत्कृष्टता, स्वयंसेवा और ईमानदार कार्य-संस्कृति भी नेतृत्व के रूप हैं, जैसा कि संवाद में प्रत्येक विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी की भूमिका के संदर्भ में कहा गया।
  • मेरा युवा भारत (MY Bharat) पोर्टल युवाओं को अवसरों, प्रशिक्षण और स्वयंसेवा से जोड़ने का मंच है। इसके माध्यम से सामुदायिक सेवा और नेतृत्व विकास की गतिविधियाँ संचालित होती हैं।
  • नशा-मुक्त भारत अभियान व्यसन-मुक्ति के लिए बहु-क्षेत्रीय प्रयास है। इसका नोडल मंत्रालय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय है, जबकि युवा सहभागिता को युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भी बढ़ावा देता है।
  • डिजिटल सूचना के संदर्भ में अनुच्छेद 19(1)(क) वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, किंतु अनुच्छेद 19(2) के अंतर्गत भारत की संप्रभुता, राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था और शिष्टाचार जैसे आधारों पर युक्तियुक्त निर्बंधन लगाए जा सकते हैं। इसलिए जिम्मेदार अभिव्यक्ति को नागरिक कर्तव्य के रूप में भी देखा जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
आयोजन एवं पृष्ठभूमि पोरबंदर (गुजरात) के एस. एम. जडेजा आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज में ‘विकसित भारत युवा संवाद’ का आयोजन हुआ। यह युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (Ministry of Youth Affairs and Sports) की युवा-सहभागिता पहल है।
लक्ष्य-वर्ष एवं समय-सीमा वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा गया है। भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी तक के 25 वर्षों को अमृत काल (Amrit Kaal) कहा गया है, जो इस लक्ष्य की समय-सीमा का संदर्भ है।
पंच प्रण (Panch Pran) विकसित भारत का संकल्प, औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति, अपनी विरासत पर गर्व, एकता और एकजुटता तथा नागरिक कर्तव्यों का पालन, जिन्हें प्रधानमंत्री ने लाल किले से घोषित किया था।
एक लाख युवा नेता देश भर में एक लाख युवा नेताओं को तैयार करने का प्रयास जारी है। इसका केंद्र नेतृत्व विकास, नागरिक दायित्व और राष्ट्र-निर्माण में युवाओं की भागीदारी है।
मेरा युवा भारत (My Bharat) पोर्टल युवाओं की भागीदारी, करियर मार्गदर्शन और नेतृत्व-विकास के अवसर उपलब्ध कराने वाला डिजिटल मंच। इसके माध्यम से युवा संगठित होकर सामुदायिक कार्यों में भाग ले सकते हैं।
नशा मुक्त भारत नशा-मुक्त युवा वर्ग को विकसित भारत के लक्ष्य की पूर्व-शर्त माना गया है। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक दायित्व के बीच संबंध स्पष्ट होता है।

महत्व

सामाजिक एवं शासन-संबंधी महत्व

  • युवाओं को नीति-निर्माण और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भागीदार बनाकर लोकतांत्रिक सहभागिता का विस्तार होता है।
  • राष्ट्र-निर्माण में पद की बाध्यता नहीं है। विद्यार्थी, शिक्षक, कर्मचारी और नागरिक, सभी ईमानदार आचरण से योगदान दे सकते हैं, यह संदेश नागरिक-चेतना को मज़बूत करता है।
  • चरित्र, अनुशासन, सेवा और बड़ों के प्रति सम्मान जैसे मूल्यों पर बल देने से सामाजिक पूंजी का निर्माण होता है।

आर्थिक एवं मानव-संसाधन संबंधी महत्व

  • भारत की युवा जनसंख्या जनांकिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का आधार है। इस लाभांश का लाभ तभी मिलता है जब युवा स्वस्थ, कुशल और दायित्वपूर्ण हों।
  • करियर मार्गदर्शन और नेतृत्व-कौशल का विकास रोज़गार-योग्यता बढ़ाकर दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि में सहायक होता है।
  • आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में कड़ी मेहनत और आत्मनिर्भरता के गुणों को मानव पूंजी के रूप में देखा गया है।

सुरक्षा एवं राष्ट्रीय एकता संबंधी महत्व

  • सीमावर्ती गांवों के दौरे और सियाचिन ग्लेशियर जैसे दुर्गम क्षेत्रों में जवानों से संवाद से युवाओं में राष्ट्र-सेवा और देशभक्ति की भावना जगाने का प्रयास है।
  • गलत सूचना और अफवाहों के प्रति सतर्कता राष्ट्रीय एकता और स्थिरता की रक्षा से जुड़ी है। इससे आंतरिक सुरक्षा के सूचना-आयाम को भी संबोधित किया जाता है।

स्वास्थ्य एवं सामाजिक कल्याण संबंधी महत्व

  • नशा मुक्त भारत का संदेश युवाओं के स्वास्थ्य और उत्पादक जीवन की रक्षा से जुड़ा है, जो सामाजिक कल्याण का मूल आधार है।
  • नशा-मुक्त समाज का निर्माण परिवार, शिक्षण संस्थान और समुदाय की सामूहिक भूमिका से संभव होता है।

चुनौतियाँ

1. डिजिटल युग में गलत सूचना का प्रसार

  • सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के साझा की गई सूचनाएं अफवाह और सामाजिक तनाव का कारण बन सकती हैं।
  • विश्वसनीय समाचार स्रोतों की पहचान और सूचना-साक्षरता का अभाव युवाओं को गलत सूचना के प्रति संवेदनशील बनाता है।

2. नशे की समस्या और युवा स्वास्थ्य

  • नशे की लत युवाओं की उत्पादकता, शिक्षा और परिवार पर सीधा असर डालती है।
  • रोकथाम, उपचार और पुनर्वास, तीनों स्तरों पर समन्वित व्यवस्था की आवश्यकता बनी रहती है।

3. आह्वान से ठोस परिणाम तक का अंतर

  • पंच प्रण और नागरिक कर्तव्यों जैसे आह्वान तभी प्रभावी होते हैं जब उन्हें संस्थागत कार्यक्रमों और मापने-योग्य लक्ष्यों से जोड़ा जाए।
  • एक लाख युवा नेताओं के लक्ष्य के लिए चयन, प्रशिक्षण और निगरानी की स्पष्ट प्रक्रिया आवश्यक है।

4. नेतृत्व-अवसरों में समावेशिता

  • ग्रामीण, दूरस्थ और वंचित पृष्ठभूमि के युवाओं तक डिजिटल मंचों की पहुंच सीमित हो सकती है।
  • महिलाओं और अनुसूचित वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करना नेतृत्व-विकास को समावेशी बनाने की शर्त है।

5. केंद्र-राज्य एवं विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय

  • युवा कार्यक्रम, नशा-निवारण और शिक्षा से जुड़े विषय केंद्र और राज्य सरकारों तथा स्थानीय निकायों के साझा क्षेत्र हैं।
  • एक ही लक्ष्य के लिए कई मंत्रालयों और संस्थाओं के बीच तालमेल न होने पर संसाधनों का दोहराव हो सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
गलत सूचना सोशल मीडिया पर अफवाह और झूठी सामग्री से सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता प्रभावित हो सकती है।
नशे का प्रसार युवाओं की शारीरिक-मानसिक सेहत और शैक्षणिक प्रगति पर दीर्घकालिक दुष्प्रभाव पड़ता है।
लक्ष्य-मापन का अभाव एक लाख नेताओं जैसे लक्ष्य के लिए प्रगति-सूचकों और निगरानी तंत्र की स्पष्टता आवश्यक है।
डिजिटल विभाजन ग्रामीण और वंचित युवाओं तक मेरा युवा भारत जैसे मंचों की पहुंच असमान रह सकती है।
समन्वय की कमी कई विभागों और राज्य सरकारों के बीच तालमेल न होने से योजनाओं का प्रभाव कम हो सकता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मेरा युवा भारत (My Bharat)
  • नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan)

आगे की राह

  • युवा नेतृत्व कार्यक्रमों के लिए चयन, प्रशिक्षण और प्रगति-मापन के स्पष्ट सूचक तय किए जाएं, ताकि एक लाख नेताओं का लक्ष्य मापने योग्य बने।
  • मेरा युवा भारत पोर्टल की पहुंच ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक बढ़ाई जाए तथा डिजिटल साक्षरता के कार्यक्रम साथ चलाए जाएं।
  • स्कूलों और महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम में सूचना-साक्षरता और तथ्य-जांच (Fact-checking) के अभ्यास को शामिल किया जाए।
  • नशा मुक्त भारत अभियान को स्कूल, परिवार और स्थानीय समुदाय की भागीदारी से जोड़कर रोकथाम, परामर्श और पुनर्वास की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए।
  • केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच युवा-केंद्रित कार्यक्रमों के लिए साझा योजना और समन्वय तंत्र विकसित किया जाए।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों और सैन्य संस्थानों के साथ युवा-संवाद को नियमित और संरचित रूप दिया जाए, ताकि राष्ट्र-सेवा की भावना व्यवहार में उतरे।
  • नेतृत्व-विकास में महिलाओं, अनुसूचित वर्गों और दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं के लिए विशेष कोटा-रहित प्रोत्साहन और सहायता उपाय सुनिश्चित किए जाएं।
  • पंच प्रण जैसे नैतिक संकल्पों को नागरिक शिक्षा और सामुदायिक सेवा के व्यावहारिक कार्यक्रमों से जोड़ा जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

विकसित भारत 2047 (Viksit Bharat 2047) · जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) · माई भारत (MY Bharat) पोर्टल · राष्ट्रीय युवा नीति, 2014 (National Youth Policy, 2014) · नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan) · अनुच्छेद 47 (Article 47) · मूल कर्तव्य (Fundamental Duties) · अनुच्छेद 19(2) (Article 19(2)) · श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (Shreya Singhal v. Union of India) · सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 · संघवाद और नागरिक सहभागिता (Civic Participation) · पंच प्रण (Panch Pran)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 51क (मौलिक कर्तव्य): नागरिक कर्तव्यों के पालन का आह्वान
  • अनुच्छेद 51क(ङ): एकता और भ्रातृत्व की भावना का संवर्धन

अवधारणा प्रवाह

पंच प्रण और विकसित भारत 2047 जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों की घोषणा  →  लक्ष्य-प्राप्ति के लिए युवाओं को नागरिक दायित्व और नेतृत्व से जोड़ने का प्रयास  →  एक लाख युवा नेताओं को तैयार करने के लिए मेरा युवा भारत जैसे मंचों पर भागीदारी  →  करियर मार्गदर्शन, सामुदायिक सेवा और सीमावर्ती संवाद से राष्ट्र-सेवा की भावना का विकास  →  नशा-मुक्त और सूचना-साक्षर युवा वर्ग का निर्माण  →  दायित्वपूर्ण युवा शक्ति से जनांकिकीय लाभांश का उपयोग और आर्थिक संवृद्धि  →  वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 47 (Article 47) राज्य को पोषाहार का स्तर ऊँचा करने तथा मादक पेयों और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मादक औषधियों के सेवन पर रोक लगाने का निर्देश देता है।
2. मूल कर्तव्य संविधान के भाग IV-क में अनुच्छेद 51क के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं।
3. मूल कर्तव्य अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उसी प्रकार प्रवर्तनीय हैं जिस प्रकार मूल अधिकार प्रवर्तनीय हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 47 राज्य के नीति-निदेशक तत्वों (DPSP) में आता है। कथन 2 सही है: मूल कर्तव्य भाग IV-क में अनुच्छेद 51क के अंतर्गत हैं। कथन 3 गलत है, क्योंकि मूल कर्तव्य न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं; मूल अधिकार अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रवर्तनीय हैं।

Q2. निम्नलिखित सूचियों को सुमेलित कीजिए:
सूची I (संवैधानिक प्रावधान)
1. अनुच्छेद 47
2. अनुच्छेद 51क
3. अनुच्छेद 19(2)
4. अनुच्छेद 45

सूची II (विषय)
A. वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर युक्तियुक्त निर्बंधन
B. मूल कर्तव्य
C. पोषाहार स्तर में वृद्धि तथा मादक पेयों के निषेध का निर्देश
D. छह वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा

सही सुमेलन चुनिए:

  1. 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
  2. 1-B, 2-A, 3-D, 4-C
  3. 1-C, 2-B, 3-A, 4-D
  4. 1-D, 2-C, 3-B, 4-A

उत्तर: 1-C, 2-B, 3-A, 4-D — अनुच्छेद 47 का संबंध पोषाहार और मादक पेयों के निषेध से है (1-C)। अनुच्छेद 51क मूल कर्तव्यों से संबंधित है (2-B)। अनुच्छेद 19(2) वाक् स्वतंत्रता पर युक्तियुक्त निर्बंधनों से जुड़ा है (3-A)। अनुच्छेद 45 प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल से संबंधित है (4-D)।

Q3. राष्ट्रीय युवा नीति, 2014 (National Youth Policy, 2014) में ‘युवा’ की परिभाषा किस आयु-वर्ग के रूप में दी गई है?

  1. 13 से 25 वर्ष
  2. 15 से 29 वर्ष
  3. 18 से 35 वर्ष
  4. 16 से 30 वर्ष

उत्तर: 15 से 29 वर्ष — राष्ट्रीय युवा नीति, 2014 में युवा की परिभाषा 15 से 29 वर्ष के आयु-वर्ग के रूप में की गई है। यह परिभाषा युवा कार्यक्रमों की योजना और लक्ष्यीकरण के लिए आधार मानी जाती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं को राष्ट्र-निर्माण का सक्रिय भागीदार बनाने के सरकारी प्रयासों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इसके साथ यह भी बताइए कि डिजिटल सूचना परिवेश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गलत सूचना के नियंत्रण के बीच संतुलन किस प्रकार साधा जा सकता है। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की रूपरेखा (मॉडल-उत्तर कंकाल):
1. भूमिका: विकसित भारत 2047 का संदर्भ (भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी, अमृत काल); जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) की अवधारणा और उसकी शर्तें (रोजगार, कौशल, स्वास्थ्य)।
2. नीतिगत ढाँचा: राष्ट्रीय युवा नीति, 2014 (15 से 29 वर्ष की परिभाषा); माई भारत (MY Bharat) पोर्टल का उद्देश्य (भागीदारी, करियर मार्गदर्शन, नेतृत्व विकास); नेहरू युवा केंद्र संगठन (NYKS), राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) और राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) जैसे संस्थागत माध्यम; राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में कौशल और बहुविषयक शिक्षा।
3. नशा-मुक्ति आयाम: अनुच्छेद 47 (नशीली वस्तुओं के निषेध का DPSP आधार); नशा मुक्त भारत अभियान (2020, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय) बनाम नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टांसेज (NDPS) अधिनियम, 1985 का दंडात्मक ढाँचा; मांग-न्यूनीकरण (demand reduction) बनाम आपूर्ति-नियंत्रण का अंतर।
4. नागरिक कर्तव्य: अनुच्छेद 51क (मूल कर्तव्य) की प्रकृति। मूल कर्तव्य गैर-प्रवर्तनीय हैं; इनका प्रभाव नैतिक और शैक्षिक है, न कि न्यायिक।
5. अभिव्यक्ति बनाम नियंत्रण: अनुच्छेद 19(1)(क) और अनुच्छेद 19(2) के युक्तियुक्त निर्बंधन (लोक व्यवस्था, राज्य की सुरक्षा आदि); श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (2015) में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66क का निरसन; धारा 69क के अंतर्गत अवरोधन की प्रक्रिया; सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 की बहस।
6. आलोचनात्मक पक्ष: कौशल-रोजगार के बीच अंतर; डिजिटल विभाजन; प्रतीकात्मक भागीदारी बनाम वास्तविक निर्णय-प्रक्रिया में सहभागिता; सरकारी संवाद कार्यक्रमों की पहुँच का मूल्यांकन।
7. संतुलित दृष्टिकोण: पारदर्शी तथ्य-जाँच तंत्र, मीडिया साक्षरता, न्यायिक समीक्षा द्वारा आनुपातिकता की जाँच; नागरिक-समाज और शिक्षण संस्थानों की भूमिका।
8. निष्कर्ष: युवा-केंद्रित नीति की सफलता अवसर, कौशल और स्वतंत्र विवेक के समन्वय पर निर्भर है; तर्कसंगत स्थिति के साथ समापन।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Gujarat PCS (GPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा गुजरात में आयोजित ‘विकसित भारत युवा संवाद’ का मुख्य उद्देश्य क्या था?

  1. A. वर्ष 2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए युवाओं को प्रेरित करना
  2. B. गुजरात में खेल सुविधाओं का उद्घाटन करना
  3. C. राष्ट्रीय खेल नीति 2024-25 का शुभारंभ करना
  4. D. अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजनों में गुजरात की भागीदारी बढ़ाना

उत्तर: A. वर्ष 2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए युवाओं को प्रेरित करना — ‘विकसित भारत युवा संवाद’ का मुख्य उद्देश्य युवाओं को वर्ष 2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए प्रेरित करना था।

Mains: ‘विकसित भारत युवा संवाद’ के माध्यम से गुजरात के युवाओं को राष्ट्रीय विकास में योगदान देने हेतु किस प्रकार प्रेरित किया जा सकता है? अपने उत्तर में गुजरात की विशिष्ट परिस्थितियों एवं युवाओं की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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