05 Nov एनएलएमसी द्वारा आरआईएनएल भूमि ई-नीलामी: एक सफल मौद्रीकरण पहल
✎ सार्वजनिक परिसंपत्ति मौद्रीकरण अधिशेष सरकारी परिसंपत्तियों से पारदर्शी ई-नीलामी के माध्यम से आर्थिक मूल्य प्राप्त करने का साधन है, जो बजट से बाहर संसाधन जुटाने में सहायक है, पर यह एकमुश्त प्राप्ति होने के कारण राजकोषीय अनुशासन का…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था (सार्वजनिक वित्त, संसाधन जुटाना, सार्वजनिक उद्यम और परिसंपत्ति मौद्रीकरण) | GS Paper II — शासन (केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का प्रबंधन, सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, पारदर्शिता)
- Prelims: राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम (NLMC) — वित्त मंत्रालय के लोक उद्यम विभाग (DPE) के अधीन कंपनी, राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) और विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र, आरक्षित मूल्य (Reserve Price) और सफल बोली (Successful Bid) के बीच अंतर, ई-नीलामी (e-Auction) के माध्यम से परिसंपत्ति बिक्री, राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline), केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम (CPSE) और अधिशेष भूमि, निवेश और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM)
- Essay: सार्वजनिक परिसंपत्तियों का मौद्रीकरण: राजकोषीय आवश्यकता और परिसंपत्ति के मूल्य का दोहन, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी आधारित बिक्री से शासन में विश्वास: सरकारी संपत्ति प्रबंधन की चुनौतियां
त्वरित पुनरावृत्ति: सार्वजनिक परिसंपत्ति मौद्रीकरण अधिशेष सरकारी परिसंपत्तियों से पारदर्शी ई-नीलामी के माध्यम से आर्थिक मूल्य प्राप्त करने का साधन है, जो बजट से बाहर संसाधन जुटाने में सहायक है, पर यह एकमुश्त प्राप्ति होने के कारण राजकोषीय अनुशासन का विकल्प नहीं है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम (NLMC) ने 3 नवंबर, 2026 को विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) के भूखंडों की ई-नीलामी का दूसरा चरण सफलतापूर्वक पूरा किया। इस चरण में 114 भूखंड बिके और 218 करोड़ रुपये की सफल बोली राशि प्राप्त हुई। इन भूखंडों का कुल आरक्षित मूल्य लगभग 184.8 करोड़ रुपये था और सफल बोलियां आरक्षित मूल्य से 17.96 प्रतिशत अधिक रहीं। पहले चरण (12 अक्टूबर 2026) के साथ जोड़ने पर कुल 264 भूखंडों से 584.33 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जबकि संयुक्त आरक्षित मूल्य 497.29 करोड़ रुपये था, यानी समेकित प्रीमियम 17.50 प्रतिशत रहा। यह एनएलएमसी की पहली ऐसी पहल है जिसमें परिसंपत्तियों की तैयारी से लेकर लेन-देन की संरचना, निवेशकों तक पहुंच और ऑनलाइन नीलामी तक की पूरी प्रक्रिया निगम ने स्वयं संचालित की। दोनों चरणों की सफलता के आधार पर निगम शेष बिना बिके भूखंडों के लिए तीसरे चरण की ई-नीलामी की योजना बना रहा है, जो संबंधित अनुमोदनों और निर्धारित शर्तों के अधीन होगी।
पृष्ठभूमि
- भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और सरकारी संस्थाओं के पास बड़ी मात्रा में अधिशेष भूमि और अन्य अचल परिसंपत्तियां होती हैं, जिनका उपयोग पूरी क्षमता से नहीं हो पाता। मौद्रीकरण का उद्देश्य इन्हीं परिसंपत्तियों से पूंजी जुटाना है, ताकि सरकार पर अतिरिक्त ऋण का भार कम हो।
- राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline) वित्त मंत्रालय की एक रूपरेखा है, जिसके अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों की परिसंपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से मौद्रीकरण के लिए चिह्नित किया गया। इसमें सार्वजनिक परिसंपत्तियों के मूल्य-दोहन को संरचित रूप देने पर बल दिया गया है।
- राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम की स्थापना सरकारी भूमि और परिसंपत्तियों के व्यवस्थित मौद्रीकरण के लिए की गई, और यह लोक उद्यम विभाग के अधीन कार्य करता है। इसका कार्य परिसंपत्तियों की पहचान, मूल्यांकन, बिक्री संरचना और नीलामी के संचालन से जुड़ा है।
- सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात उद्यमों की भूमि का उपयोग बदलने या बेचने से जुड़े निर्णय अक्सर परिसंपत्ति प्रबंधन और उद्यम की परिचालन आवश्यकताओं के बीच संतुलन की मांग करते हैं। अतः बिक्री से पहले भूखंडों का स्पष्ट सीमांकन और मूल्यांकन आवश्यक होता है।
- सरकारी परिसंपत्तियों की बिक्री में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऑनलाइन और प्रतिस्पर्धी बोली प्रणाली को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि मूल्य-निर्धारण बाजार-आधारित हो और मनमानी की गुंजाइश कम रहे।
सार्वजनिक परिसंपत्ति मौद्रीकरण क्या है?
- मौद्रीकरण (Monetisation) का अर्थ है ऐसी अप्रयुक्त या कम उपयोग वाली सार्वजनिक परिसंपत्तियों से आर्थिक मूल्य प्राप्त करना, जिनका स्वामित्व सरकार या सार्वजनिक उद्यम के पास रहता है।
- मौद्रीकरण का स्वरूप विभिन्न हो सकता है, जैसे भूमि की बिक्री, पट्टे पर देना, या संरचना-आधारित लेन-देन। इसमें सरकारी स्वामित्व के बने रहने या हस्तांतरण की स्थिति परिसंपत्ति और नीति पर निर्भर करती है।
- आरक्षित मूल्य (Reserve Price) वह न्यूनतम मूल्य है जिससे नीचे बोली स्वीकार नहीं की जाती। सफल बोली इससे अधिक होने पर प्रीमियम मिलता है, जो बाजार की रुचि और स्थान के आकर्षण का संकेतक होता है।
- ई-नीलामी (e-Auction) ऑनलाइन मंच पर होने वाली प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया है, जिसमें भागीदारी का दायरा बढ़ता है और भौतिक उपस्थिति की बाध्यता कम होती है। इससे पारदर्शिता और मूल्य-खोज की क्षमता में सुधार की अपेक्षा रहती है।
- राजकोषीय दृष्टि से मौद्रीकरण ऐसा साधन है जो बजट के बाहर से संसाधन जुटाने में सहायक हो सकता है, किंतु इसकी सीमा यह है कि यह एक बार की प्राप्ति है और परिसंपत्तियां सीमित होती हैं। इसलिए इसे राजकोषीय अनुशासन के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाता।
- केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (CPSE) अपनी अधिशेष भूमि और परिसंपत्तियों का मौद्रीकरण कर सकते हैं, और इस प्रक्रिया में उनके स्वामित्व, कानूनी स्थिति और उद्देश्यों के अनुसार उचित अनुमोदन आवश्यक होते हैं।
- पारदर्शी मौद्रीकरण के लिए मूल्यांकन, प्रकटीकरण, प्रतिस्पर्धी बोली और लेन-देन का दस्तावेजीकरण मुख्य स्तंभ माने जाते हैं, क्योंकि इससे सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण और शासन में विश्वास दोनों सुनिश्चित होते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| संस्था और मंत्रालय | एनएलएमसी (राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम) वित्त मंत्रालय के लोक उद्यम विभाग (DPE) के अधीन कार्यरत है और सार्वजनिक क्षेत्र की अधिशेष परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण का कार्य करता है। |
| परिसंपत्ति का स्रोत | आरआईएनएल (राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड) विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र का संचालन करती है। उसकी अधिशेष भूमि के भूखंड इस ई-नीलामी के माध्यम से बेचे गए। |
| दूसरा चरण (3 नवंबर 2026) | 114 भूखंड नीलाम हुए, कुल सफल बोली 218 करोड़ रुपये रही और कुल आरक्षित मूल्य लगभग 184.8 करोड़ रुपये था। सफल बोलियां आरक्षित मूल्य से 17.96 प्रतिशत अधिक रहीं। |
| संयुक्त प्रदर्शन (दोनों चरण) | कुल 264 भूखंड बेचे गए, कुल सफल बोली 584.33 करोड़ रुपये और संयुक्त आरक्षित मूल्य 497.29 करोड़ रुपये रहा। संयुक्त प्रीमियम 17.50 प्रतिशत है। |
| मूल्य-निर्धारण का स्तर | दूसरे चरण में सर्वाधिक सफल बोली 1,82,650 रुपये प्रति वर्ग गज रही। किसी एक भूखंड पर अधिकतम प्रीमियम 67.65 प्रतिशत दर्ज हुआ। यह स्थान-विशेष की मांग में अंतर को दर्शाता है। |
| प्रक्रिया की प्रकृति | परिसंपत्ति की तैयारी, लेन-देन की संरचना, निवेशकों तक पहुंच और ऑनलाइन नीलामी, इन सभी चरणों का संचालन एनएलएमसी ने स्वयं किया। यह उसकी पहली संपूर्ण ई-नीलामी पहल थी। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- सार्वजनिक क्षेत्र की निष्क्रिय अधिशेष भूमि को नकदी में बदलने से सरकारी उपक्रमों के पास संसाधन उपलब्ध होते हैं, जिससे परिसंपत्ति उपयोग में सुधार होता है।
- संयुक्त रूप से 584.33 करोड़ रुपये की सफल बोली राशि प्राप्त होना यह दर्शाता है कि अनुपयोगी परिसंपत्तियों से भी पर्याप्त मूल्य निकाला जा सकता है।
- आरक्षित मूल्य से लगातार लगभग 17 से 18 प्रतिशत के प्रीमियम पर बिक्री से यह संकेत मिलता है कि आरक्षित मूल्य अपेक्षाकृत यथार्थपरक रखा गया था।
प्रशासनिक और शासन-संबंधी महत्व
- पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और प्रौद्योगिकी आधारित ई-नीलामी से खुली बोली प्रक्रिया सुनिश्चित होती है और मनमाने आवंटन की गुंजाइश घटती है।
- एक महीने के भीतर दोनों चरणों का सफल संचालन एनएलएमसी के लिए परिचालन मानक स्थापित करता है और भविष्य में इसी प्रकार के लेन-देन की क्षमता को सुदृढ़ करता है।
- केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSE) और सरकारी संस्थाओं की अन्य अचल परिसंपत्तियों के लिए यह मॉडल उदाहरण बन सकता है।
राजकोषीय संदर्भ
- परिसंपत्ति मौद्रीकरण से प्राप्त राशि सरकार की पूंजीगत या गैर-कर प्राप्तियों का स्रोत बन सकती है, जिससे राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) प्रबंधन में सहायता मिलती है।
- यह उधारी पर निर्भरता घटाने का एक विकल्प है, क्योंकि इससे बिना नए ऋण लिए संसाधन जुटाए जाते हैं।
चुनौतियाँ
1. मूल्य-निर्धारण और आरक्षित मूल्य की यथार्थता
- आरक्षित मूल्य का निर्धारण बाजार-आधारित होना चाहिए, अन्यथा अत्यधिक कम मूल्य पर बिक्री से सार्वजनिक संपत्ति के हित को हानि पहुंच सकती है।
- एक ही नीलामी में भूखंडों के बीच प्रीमियम में बड़ा अंतर (अधिकतम 67.65 प्रतिशत) यह दर्शाता है कि स्थान, पहुंच और उपयोग की संभावना का मूल्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक वित्त और सार्वजनिक उद्यम प्रबंधन (GS-3)
2. बिना बिके भूखंडों की समस्या
- नीलामी में 150 और 114 भूखंड बिके, किंतु कुल भूखंड-संख्या के हिसाब से कुछ भूखंड बिक नहीं पाते। शेष भूखंडों के लिए तीसरे चरण की योजना बनाई जा रही है।
- बिना बिके भूखंडों के कारणों, जैसे स्थान, कानूनी स्थिति या उपयोग-सीमा, का विश्लेषण आवश्यक है ताकि अगली नीलामी की संरचना बेहतर बनाई जा सके।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक उद्यम प्रबंधन और आर्थिक नीति (GS-3)
3. भूमि-उपयोग और परिसंपत्ति की वैधानिक स्थिति
- सार्वजनिक क्षेत्र की भूमि पर स्वामित्व, हस्तांतरण की शर्तें और उपयोग-परिवर्तन की अनुमति का स्पष्ट ढांचा होना आवश्यक है।
- भूमि-संबंधी अनुमोदनों के अधीन ही तीसरा चरण संभव है, इसलिए नियामकीय प्रक्रियाओं में विलंब परियोजना की गति को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन में प्रशासनिक प्रक्रियाएं और भूमि-प्रशासन (GS-2)
4. मौद्रीकरण बनाम सार्वजनिक हित का संतुलन
- अधिशेष परिसंपत्तियों की बिक्री से राजस्व तो मिलता है, किंतु दीर्घकालिक सार्वजनिक उपयोग और रणनीतिक आवश्यकताओं का मूल्यांकन भी अनिवार्य है।
- औद्योगिक संयंत्र के आसपास की भूमि के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों पर भी विचार होना चाहिए।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक नीति, पर्यावरण और शासन (GS-2 और GS-3)
5. पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का सतत सुनिश्चितीकरण
- ई-नीलामी से पारदर्शिता बढ़ती है, किंतु बोलीदाताओं की पहुंच, सूचना की समानता और तकनीकी व्यवधानों से मुक्त प्रणाली आवश्यक है।
- निवेशकों का विश्वास बनाए रखने के लिए नीलामी के परिणाम और प्रक्रिया का समय पर प्रकाशन महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: शासन में ई-गवर्नेंस और पारदर्शिता (GS-2)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| आरक्षित मूल्य | बहुत कम मूल्य पर बिक्री से सार्वजनिक संपत्ति के हित को नुकसान हो सकता है, जबकि बहुत अधिक मूल्य से बोली लगाने वाले हतोत्साहित होते हैं। |
| बिना बिके भूखंड | शेष भूखंडों की बिक्री के लिए तीसरे चरण की योजना है, किंतु इसकी समय-सारणी अभी घोषित नहीं हुई है। |
| वैधानिक और नियामकीय अनुमोदन | तीसरे चरण का आयोजन संबंधित अनुमोदनों और निर्धारित शर्तों के अधीन है, जिससे विलंब की संभावना रहती है। |
| स्थान-आधारित मूल्य अंतर | एक ही नीलामी में प्रीमियम का बड़ा अंतर भूखंडों के स्थान और उपयोग-संभावना पर निर्भरता दर्शाता है। |
| दीर्घकालिक उपयोग | अधिशेष भूमि की बिक्री के बाद उसके सार्वजनिक या रणनीतिक उपयोग का मूल्यांकन सीमित हो सकता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline)
आगे की राह
- आरक्षित मूल्य के निर्धारण में स्वतंत्र और बाजार-आधारित मूल्यांकन की पद्धति अपनाई जाए, ताकि सार्वजनिक हित और बाजार की वास्तविकता में संतुलन बना रहे।
- बिना बिके भूखंडों के कारणों का व्यवस्थित विश्लेषण किया जाए और तीसरे चरण से पहले उनके स्थान, कानूनी स्थिति और उपयोग-सीमा के आधार पर नीलामी की संरचना सुधारी जाए।
- भूमि-संबंधी अनुमोदनों की प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो।
- अधिशेष परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण से पूर्व उनके सार्वजनिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक उपयोग का मूल्यांकन अनिवार्य किया जाए।
- ई-नीलामी प्रणाली में तकनीकी सुरक्षा, सूचना की समान उपलब्धता और बोलीदाताओं की व्यापक पहुंच सुनिश्चित की जाए।
- नीलामी परिणामों, भूखंड-वार विवरण और समय-सारणी का समय पर सार्वजनिक प्रकाशन किया जाए, जिससे निवेशकों का विश्वास बना रहे।
- मौद्रीकरण से प्राप्त राशि के उपयोग की स्पष्ट नीति हो, ताकि राजकोषीय लाभ सार्वजनिक निवेश और परिसंपत्ति प्रबंधन में प्रभावी रूप से लगाया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम (NLMC) · ई-नीलामी · आरक्षित मूल्य · सफल बोली · प्रीमियम · परिसंपत्ति मौद्रीकरण · विनिवेश · सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) · अनुच्छेद 300A · अनुच्छेद 298 · राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline) · सार्वजनिक न्यास सिद्धांत (Public Trust Doctrine)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 298: संघ और राज्य की व्यापार, संपत्ति-अर्जन और निपटान की कार्यकारी शक्ति
अवधारणा प्रवाह
सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (आरआईएनएल) की अधिशेष भूमि की पहचान और परिसंपत्ति की तैयारी → वित्त मंत्रालय के लोक उद्यम विभाग के अधीन एनएलएमसी द्वारा लेन-देन की संरचना और आरक्षित मूल्य का निर्धारण → ऑनलाइन ई-नीलामी के माध्यम से खुली और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया (12 अक्टूबर 2026 और 3 नवंबर 2026) → आरक्षित मूल्य से औसतन लगभग 17.5 प्रतिशत अधिक सफल बोलियों के रूप में मूल्य की प्राप्ति → कुल 584.33 करोड़ रुपये की प्राप्ति से सार्वजनिक परिसंपत्ति का मौद्रीकरण और राजकोषीय संसाधनों में वृद्धि → बिना बिके भूखंडों के लिए अनुमोदनों के अधीन तीसरे चरण की योजना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम (NLMC) वित्त मंत्रालय के लोक उद्यम विभाग (DPE) के अधीन कार्यरत है।
2. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की अधिशेष भूमि का मौद्रीकरण और सरकारी इक्विटी का विनिवेश एक ही प्रक्रिया है।
3. संविधान का अनुच्छेद 298 संघ सरकार को संपत्ति अर्जित करने, धारण करने और उसका व्ययन करने की कार्यकारी शक्ति देता है।
4. ई-नीलामी में ‘प्रीमियम’ से आशय सफल बोली और आरक्षित मूल्य के बीच के अंतर से है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी चार
उत्तर: केवल तीन — कथन 1 सही है: NLMC वित्त मंत्रालय के लोक उद्यम विभाग (DPE) के अधीन है। कथन 2 गलत है: मौद्रीकरण में अधिशेष भूमि/परिसंपत्ति का उपयोग या हस्तांतरण होता है, जबकि विनिवेश का अर्थ सरकारी इक्विटी (शेयर) की बिक्री है; दोनों अलग अवधारणाएँ हैं। कथन 3 और 4 सही हैं, क्योंकि अनुच्छेद 298 कार्यकारी शक्ति का विस्तार संपत्ति के अधिग्रहण, धारण और व्ययन तक करता है, और प्रीमियम सफल बोली का आरक्षित मूल्य से अधिक हिस्सा होता है।
Q2. निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): सार्वजनिक क्षेत्र की अधिशेष भूमि के भूखंडों की ऑनलाइन प्रतिस्पर्धी ई-नीलामी से मौद्रीकरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी मानी जाती है।
कारण (R): ई-नीलामी में खुली और प्रतिस्पर्धी बोली से विवेकाधीन आवंटन की गुंजाइश घटती है और बाजार आधारित मूल्य निर्धारण संभव होता है।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, किंतु R गलत है।
- A गलत है, किंतु R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन और कारण दोनों सही हैं। खुली और प्रतिस्पर्धी ई-नीलामी में बोली की शर्तें सार्वजनिक रहती हैं और परिणाम प्रणाली में दर्ज होते हैं, जिससे विवेकाधीन आवंटन की गुंजाइश घटती है। यही कारण अभिकथन की व्याख्या करता है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद मूल रूप से संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में प्रदान करता था, किंतु 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा उसे मौलिक अधिकारों से हटाकर एक संवैधानिक अधिकार बनाया गया, और जो कहता है कि किसी व्यक्ति को विधि के प्राधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा?
- अनुच्छेद 19
- अनुच्छेद 300A
- अनुच्छेद 31
- अनुच्छेद 368
उत्तर: अनुच्छेद 300A — 44वें संशोधन (1978) ने संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकारों की सूची (पूर्ववर्ती अनुच्छेद 19(1)(च) और 31) से हटाकर अनुच्छेद 300A में संवैधानिक अधिकार के रूप में रखा। अनुच्छेद 19 में संपत्ति अधिकार अब नहीं है और अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन की प्रक्रिया से संबंधित है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सार्वजनिक क्षेत्र की अधिशेष परिसंपत्तियों का ई-नीलामी के माध्यम से मौद्रीकरण राजकोषीय संसाधन जुटाने का पारदर्शी उपाय माना जा सकता है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि क्या ऐसी बिक्री में आरक्षित मूल्य से अधिक प्रीमियम मिलना ही सार्वजनिक हित की पूर्ति का पर्याप्त प्रमाण है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल उत्तर संरचना: (1) भूमिका: हाल की RINL भूमि ई-नीलामी के तथ्य: 12 अक्टूबर 2026 को पहला चरण (150 भूखंड, 366.33 करोड़ रुपये, आरक्षित मूल्य 312.48 करोड़ रुपये, औसत प्रीमियम 17.23%) और 3 नवंबर 2026 को दूसरा चरण (114 भूखंड, 218 करोड़ रुपये, आरक्षित मूल्य लगभग 184.8 करोड़ रुपये, प्रीमियम 17.96%); दोनों चरणों का संयुक्त परिणाम: 264 भूखंड, 584.33 करोड़ रुपये, संयुक्त प्रीमियम 17.50%। NLMC का वित्त मंत्रालय के लोक उद्यम विभाग (DPE) के अधीन होना। (2) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 298 (संघ की कार्यकारी शक्ति: संपत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन) तथा अनुच्छेद 300A (संपत्ति का अधिकार, विधि के प्राधिकार के बिना वंचित करना निषिद्ध); मौद्रीकरण और भूमि अधिग्रहण (भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिनियम, 2013) का अंतर। (3) नीतिगत संदर्भ: राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline) और मौद्रीकरण बनाम विनिवेश का अंतर (मौद्रीकरण में परिसंपत्ति का उपयोग/हस्तांतरण, विनिवेश में सरकारी इक्विटी की बिक्री); राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 तथा एन.के. सिंह समिति (2017) की राजकोषीय सुदृढ़ीकरण सिफारिशें। (4) पक्ष: पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धी मूल्य खोज, बाजार आधारित मूल्य, राजकोषीय संसाधन, अधिशेष भूमि का उत्पादक उपयोग, नगर नियोजन के साथ समन्वय। (5) विपक्ष/चिंताएँ: प्रीमियम केवल आरक्षित मूल्य के सापेक्ष मापा जाता है, जो स्वयं निर्धारित होता है; इसलिए आरक्षित मूल्य के निर्धारण की पारदर्शिता, मूल्यांकन की स्वतंत्रता और भूमि के सामाजिक-पर्यावरणीय मूल्य पर प्रश्न। सार्वजनिक न्यास सिद्धांत (M.C. Mehta बनाम कमल नाथ, 1997) के अनुसार राज्य सार्वजनिक संसाधनों का न्यासी है, इसलिए अधिशेष भूमि की बिक्री में सार्वजनिक हित का व्यापक मूल्यांकन आवश्यक है। (6) संतुलित निष्कर्ष: ई-नीलामी पारदर्शिता बढ़ाती है, पर सार्वजनिक हित केवल प्रीमियम से सिद्ध नहीं होता; आरक्षित मूल्य की वैज्ञानिक पद्धति, सार्वजनिक प्रकटीकरण, पर्यावरणीय व नगरीय शर्तों और संसदीय/लेखापरीक्षा निगरानी (CAG) की आवश्यकता है। स्वतंत्र विचारधारा के आधार पर सुझाव देते हुए संतुलित निष्कर्ष लिखें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Andhra Pradesh PCS (APPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: एनएलएमसी (नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कॉर्पोरेशन) द्वारा 3 नवंबर, 2026 को विशाखापत्तनम में आरआईएनएल (राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड) भूमि की ई-नीलामी के दूसरे चरण से कितनी राशि प्राप्त हुई?
- ₹118 करोड़
- ₹218 करोड़
- ₹318 करोड़
- ₹418 करोड़
उत्तर: ₹218 करोड़ — एनएलएमसी ने 3 नवंबर, 2026 को विशाखापत्तनम में आरआईएनएल भूमि ई-नीलामी के दूसरे चरण से ₹218 करोड़ प्राप्त किए।
Mains: एनएलएमसी द्वारा विशाखापत्तनम में आरआईएनएल भूमि की ई-नीलामी के दूसरे चरण के सफल समापन का आंध्र प्रदेश राज्य के आर्थिक विकास और शहरी नियोजन पर क्या संभावित प्रभाव हो सकता है? विस्तार से चर्चा करें।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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