12 Mar भारत की पर्यावरणीय स्थिति रिपोर्ट 2026
स्रोत: Centre for Science and Environment द्वारा जारी रिपोर्ट | प्रकाशित: The Hindu

भारत की पर्यावरणीय स्थिति (State of India’s Environment Report 2026) : बढ़ते चरम मौसम, बाढ़ जोखिम और पर्यावरणीय असमानता
पाठ्यक्रम प्रासंगिकता (UPSC Syllabus Mapping)
GS–3 पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, आपदा प्रबंधन
GS–1 भौगोलिक घटनाएँ, जलवायु परिवर्तन और मानव–पर्यावरण संबंध
Prelims जलवायु परिवर्तन, चरम मौसम घटनाएँ, प्रकृति आधारित समाधान, वन्यजीव संरक्षण
चर्चा में क्यों ?
हाल ही में Centre for Science and Environment ने ‘State of India’s Environment 2026’ रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट 1982 से प्रतिवर्ष प्रकाशित की जा रही है और भारत में पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, प्राकृतिक आपदाओं, वन्यजीव व्यवहार में बदलाव और वायु प्रदूषण की स्थिति का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। रिपोर्ट के अनुसार विश्व का औसत तापमान 1.5°C वृद्धि की सीमा के करीब पहुँच रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि पृथ्वी एक गंभीर जलवायु tipping point के निकट पहुँच रही है। इसका प्रभाव भारत सहित पूरे विश्व में अधिक तीव्र प्राकृतिक आपदाओं के रूप में दिखाई दे रहा है।
भारत में चरम मौसम घटनाओं में वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 भारत के लिए पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक चरम मौसम घटनाओं वाला वर्ष रहा। इन घटनाओं में मुख्यतः शामिल हैं: हीटवेव (Heatwaves),कोल्ड वेव (Cold Waves), अत्यधिक वर्षा (Heavy Rainfall), बाढ़ (Floods)
जनवरी से नवंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार: भारत में 99% दिनों में चरम मौसम घटनाएँ दर्ज की गईं, 4,419 लोगों की मृत्यु हुई, लगभग 17.41 मिलियन हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ । यह स्थिति दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल भविष्य का खतरा नहीं बल्कि वर्तमान वास्तविकता बन चुका है।
पिछले वर्षों से तुलना
वर्ष चरम मौसम घटनाए मृत्यु प्रभावित फसल क्षेत्र
2025 99% दिनों में 4,419 17.41 मिलियन हेक्टेयर
2024 88% दिनों में 3,393 3.61 मिलियन हेक्टेयर
2023 89% दिनों में 3,208 2.09 मिलियन हेक्टेयर
यह आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि जलवायु संकट का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और इसके कारण कृषि, अर्थव्यवस्था तथा मानव जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। सबसे अधिक प्रभावित राज्य : रिपोर्ट के अनुसार कुछ राज्यों में चरम मौसम घटनाओं की आवृत्ति बहुत अधिक रही।
राज्य चरम मौसम के दिन
हिमाचल प्रदेश 267 दिन
केरल 173 दिन
मध्य प्रदेश 162 दिन
कारण
1. भौगोलिक स्थिति
2. पर्वतीय क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन का तीव्र प्रभाव
3. मानसून पैटर्न में बदलाव
4. वनों की कटाई और भूमि उपयोग परिवर्तन
5. जलवायु परिवर्तन और बढ़ता बाढ़ जोखिम
रिपोर्ट बताती है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण भारत में बाढ़ की तीव्रता और आवृत्ति दोनों बढ़ रही हैं।
मुख्य कारण
1. अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में वृद्धि
2. नदी तंत्र में बदलाव
3. शहरीकरण और खराब जल निकासी
4. बाढ़ मैदानों में अतिक्रमण : भारत के कई शहरों में बाढ़ अब एक आवर्ती आपदा बन चुकी है।
आपदा प्रबंधन की नई दिशा
रिपोर्ट का प्रमुख सुझाव है कि भारत को आपदा के बाद राहत (Post-Disaster Relief) से आगे बढ़कर आपदा से पहले लचीलापन (Pre-Disaster Resilience) पर ध्यान देना चाहिए-
1. जलवायु विज्ञान को शहरी नियोजन में शामिल करना
2. नदी किनारे भूमि उपयोग का नियमन
3. पुल और कल्वर्ट डिजाइन में जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखना
4. जल निकासी प्रणालियों को मजबूत करना
प्रकृति आधारित समाधान (Nature-Based Solutions)
रिपोर्ट में बाढ़ और जल संकट से निपटने के लिए Nature-Based Solutions को महत्वपूर्ण बताया गया है।
1. आर्द्रभूमियों (Wetlands) का पुनर्स्थापन
2. नदियों को उनके प्राकृतिक बाढ़ मैदानों से पुनः जोड़ना
3. भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge)
4. वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting)
5. झीलों और तालाबों का पुनर्निर्माण
ये उपाय प्राकृतिक जल प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करते हैं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद करते हैं।
भारत में बाघों के व्यवहार में परिवर्तन
रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय संकेतक के रूप में बाघों के व्यवहार में बदलाव का उल्लेख किया गया है। 2025 के पहले छह महीनों में:
1. कम से कम 43 लोग बाघ हमलों में मारे गए ।
2. कुछ मामलों में बाघों द्वारा मानव शरीर के अंगों को खाने की घटनाएँ भी सामने आईं।
3. 2024 के इसी अवधि में 44 लोगों की मृत्यु हुई थी ।
बाघ हमलों के पीछे कारण : विशेषज्ञों के अनुसार बाघ सामान्यतः आदतन नरभक्षी (Man-Eater) नहीं बनते।
1. बाघों की उम्र बढ़ना या घायल होना
2. प्राकृतिक शिकार की कमी
3. मानव-वन्यजीव संघर्ष
4. वन क्षेत्र में मानव अतिक्रमण
जब बाघ शिकार करने में सक्षम नहीं रहते तो वे आसान शिकार के रूप में मानवों को निशाना बना सकते हैं।
5. मानव-बाघ निकटता (Human-Tiger Interface) : भारत में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ मानव और वन्यजीव के बीच संघर्ष भी बढ़ रहा है।
प्रमुख तथ्य
1. भारत में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है
2. कई टाइगर रिजर्व क्षमता से अधिक भर चुके हैं
3. लगभग 40% बाघ क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ लगभग 60 मिलियन लोग रहते हैं
इसका परिणाम यह है कि बाघ अक्सर संरक्षित क्षेत्रों के बाहर निकलने लगे हैं।
वायु प्रदूषण निगरानी में बड़ी कमी
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि भारत में वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क बहुत सीमित है _
1. केवल 15% भारतीय आबादी लगभग 200 मिलियन लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहाँ से 10 किमी के भीतर वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन उपलब्ध है। इसके विपरीत: 85% आबादी (1.2 अरब लोग) ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहाँ वायु प्रदूषण का वास्तविक डेटा उपलब्ध नहीं है। अधिकांश निगरानी स्टेशन निम्न क्षेत्रों में केंद्रित हैं: महानगर, राज्य की राजधानियाँ, बड़े औद्योगिक शहर .. इसके कारण कई जिले, औद्योगिक बेल्ट और छोटे शहर निगरानी नेटवर्क से बाहर हैं।
2. पर्यावरणीय शासन में असमानता : रिपोर्ट के अनुसार यह केवल डेटा की कमी नहीं बल्कि पर्यावरणीय शासन में असमानता (Environmental Inequality) का संकेत है।
समस्या : छोटे शहरों में प्रदूषण अधिक हो सकता है परन्तु वहाँ रीयल-टाइम डेटा उपलब्ध नहीं होता इससे नीति निर्माण और प्रदूषण नियंत्रण में कठिनाई आती है।
भारत के लिए प्रमुख पर्यावरणीय चुनौतियाँ
1. जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम
2. बढ़ता बाढ़ जोखिम
3. मानव-वन्यजीव संघर्ष
4. वायु प्रदूषण निगरानी की कमी
5. पर्यावरणीय शासन में असमानता
समाधान की दिशा
1. जलवायु अनुकूल विकास
– जलवायु अनुकूल बुनियादी ढाँचा
– आपदा-सहिष्णु शहर
2. पारिस्थितिकी संरक्षण
– आर्द्रभूमि संरक्षण
– वन क्षेत्र विस्तार
3. तकनीकी निगरानी
– अधिक एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन
– सैटेलाइट आधारित पर्यावरण निगरानी
4. समुदाय आधारित संरक्षण
– स्थानीय समुदायों की भागीदारी
– वन्यजीव प्रबंधन
निष्कर्ष
‘State of India’s Environment 2026’ रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि भारत में पर्यावरणीय संकट तेजी से गहरा रहा है। जलवायु परिवर्तन, चरम मौसम, वन्यजीव संघर्ष और प्रदूषण जैसी समस्याएँ सतत विकास के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। इसलिए भारत को विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए दीर्घकालिक नीति और वैज्ञानिक योजना अपनानी होगी।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) प्रश्न
प्रश्न 1. ‘State of India’s Environment’ रिपोर्ट किस संस्था द्वारा प्रकाशित की जाती है?
A. NITI Aayog
B. Centre for Science and Environment
C. Ministry of Environment
D. UNEP
उत्तर: B
प्रश्न 2. निम्न में से कौन-सा उपाय ‘Nature-Based Solution’ का उदाहरण है?
1. आर्द्रभूमियों का पुनर्स्थापन
2. वर्षा जल संचयन
3.नदियों को बाढ़ मैदानों से जोड़ना
सही उत्तर चुनिए:
A. केवल 1
B. 1 और 2
C. 2 और 3
D. 1, 2 और 3
उत्तर: D
प्रश्न 3. भारत में लगभग कितने प्रतिशत लोग वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन के 10 किमी के भीतर रहते हैं ?
A. 15%
B. 30%
C. 45%
D. 60%
उत्तर: A
मुख्य परीक्षा (Mains) प्रश्न
प्रश्न 1. भारत में बढ़ती चरम मौसम घटनाएँ जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत हैं। ‘State of India’s Environment 2026’ रिपोर्ट के संदर्भ में भारत की पर्यावरणीय चुनौतियों और उनके समाधान का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
प्रश्न 2. मानव-वन्यजीव संघर्ष भारत में तेजी से बढ़ रहा है। बाघों के व्यवहार में परिवर्तन और उसके कारणों का विश्लेषण कीजिए तथा इसके समाधान सुझाइए। (150 शब्द)
प्रश्न 3. भारत में वायु प्रदूषण निगरानी नेटवर्क की सीमाएँ पर्यावरणीय शासन में असमानता को दर्शाती हैं। टिप्पणी कीजिए। (150 शब्द)

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