केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेमीकॉन 2.0 को दी मंजूरी: भारत बनेगा सेमीकंडक्टर हब

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेमीकॉन 2.0 को दी मंजूरी: भारत बनेगा सेमीकंडक्टर हब — Semicon 2.0: Building Semiconductor Ecosystem

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेमीकॉन 2.0 को दी मंजूरी: भारत बनेगा सेमीकंडक्टर हब

प्रासंगिकता — UPSC & State PCS: Polity & Governance

मंत्रिमंडल ने सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दे दी है, जिसके लिए 1,27,500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। यह निर्णय देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण प्रणाली विकसित करने की सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो सेमीकॉन 1.0 के तहत मिली गति को आगे बढ़ाएगा। इसका मुख्य लक्ष्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान दिलाना है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी नेतृत्व स्थापित करने में सहायक होगा।

सेमीकॉन 2.0 छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित है, जिनमें डिजाइन, मशीनें और सामग्रियां, अधिक फैब स्थापित करना, एटीएमपी/ओएसएटी उद्योग को मजबूत बनाना, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा विकास शामिल हैं। डिजाइन के क्षेत्र में, 105 स्टार्टअप पहले ही चिप्स विकसित करना शुरू कर चुके हैं, और अब आईपी, चिप्स के डिजाइन और प्रणाली को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिससे भारत सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन आईपी के क्षेत्र में एक प्रमुख देश बन सके। इसके अतिरिक्त, सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए आवश्यक मशीनों और सामग्रियों के अनुसंधान एवं विकास में शामिल कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे उद्योग के सतत विकास की नींव रखी जाएगी।

भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति में वैश्विक विश्वास बढ़ रहा है, और 2028 में पहले फैब के चालू होने की उम्मीद है। सेमीकॉन 2.0 का उद्देश्य अधिक निर्माताओं को आकर्षित करके सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्क्रीट कंपोनेंट फैब और डिस्प्ले फैब जैसे विभिन्न फैब स्थापित करना है। एटीएमपी इकाइयों की सफलता के साथ, भारत अब एटीएमपी/ओएसएटी इकाइयां स्थापित करने के लिए एक वैकल्पिक स्थान के रूप में देखा जा रहा है, और उन्नत एटीएमपी प्रौद्योगिकियों को देश में लाने पर जोर दिया जाएगा। अनुसंधान एवं विकास के तहत, उन्नत नोड्स और प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के लिए देश और विदेश के प्रमुख अनुसंधान केंद्रों के साथ सहयोग किया जाएगा, जबकि प्रतिभा विकास के लिए 315 विश्वविद्यालय छात्रों को जटिल चिप डिजाइन में प्रशिक्षण दे रहे हैं, जिसे और गहन किया जाएगा।

यूपीएससी और राज्य पीसीएस उम्मीदवारों के लिए, यह पहल ‘राजव्यवस्था एवं शासन’ खंड के तहत महत्वपूर्ण है। यह सरकार की औद्योगिक नीति, आत्मनिर्भर भारत अभियान, और तकनीकी संप्रभुता के प्रयासों को दर्शाता है। सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि भू-राजनीतिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह नोट उम्मीदवारों को भारत के तकनीकी विकास, निवेश प्रोत्साहन, कौशल विकास और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका पर प्रश्न तैयार करने में मदद करेगा।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

अभ्यास प्रश्न

Q1. हाल ही में मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

  1. भारत में कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देना।
  2. भारत को सेमीकंडक्टर विनिर्माण और डिजाइन का वैश्विक केंद्र बनाना।
  3. पर्यटन उद्योग का विस्तार करना।
  4. पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योगों का आधुनिकीकरण करना।
उत्तर

भारत को सेमीकंडक्टर विनिर्माण और डिजाइन का वैश्विक केंद्र बनाना। — मंत्रिमंडल ने सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम को मंजूरी दी है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को सेमीकंडक्टर विनिर्माण और डिजाइन में एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जैसा कि शीर्षक में ‘सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर उद्योगों को दीर्घकालिक नीतिगत समर्थन देने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी की’ से स्पष्ट है।

Q2. सेमीकंडक्टर उद्योगों को सरकार द्वारा दिए जा रहे समर्थन की प्रकृति क्या है?

  1. केवल अल्पकालिक वित्तीय सहायता।
  2. दीर्घकालिक नीतिगत समर्थन।
  3. केवल तकनीकी विशेषज्ञता का हस्तांतरण।
  4. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौतों का निलंबन।
उत्तर

दीर्घकालिक नीतिगत समर्थन। — शीर्षक स्पष्ट रूप से बताता है कि ‘सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर उद्योगों को दीर्घकालिक नीतिगत समर्थन देने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी की’, जिससे पता चलता है कि समर्थन की प्रकृति दीर्घकालिक नीतिगत है।


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