मिशन मौसम: भारत की मौसम पूर्वानुमान क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव

मिशन मौसम: भारत की मौसम पूर्वानुमान क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव — मिशन मौसम का कार्यान्वयन प्रक्रिया

मिशन मौसम: भारत की मौसम पूर्वानुमान क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (महत्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, जलवायु परिवर्तन)  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन (आपदाओं की रोकथाम और शमन), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ, प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण)
  • Prelims: मिशन मौसम, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), डॉप्लर मौसम रडार (DWR), संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (NWP), उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML), आपदा पूर्व-चेतावनी प्रणाली
  • Essay: भारत में आपदा प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकी का महत्व, जलवायु परिवर्तन और मौसम पूर्वानुमान में नवाचार की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: मिशन मौसम भारत को ‘मौसम के लिए तैयार और जलवायु के प्रति जागरूक’ राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई एक व्यापक पहल है, जो अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, उन्नत मॉडलिंग और क्षमता निर्माण के माध्यम से मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को सुदृढ़ करती है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में संसद में ‘मिशन मौसम’ के कार्यान्वयन पर एक प्रश्न के उत्तर में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने इस मिशन की प्रगति और उद्देश्यों के बारे में जानकारी प्रदान की। यह मिशन भारत को ‘मौसम के लिए तैयार और जलवायु के प्रति जागरूक’ राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ 14 जनवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य पृथ्वी प्रणाली अवलोकन के विभिन्न घटकों को सुदृढ़ करना और सभी को निर्बाध मौसम तथा जलवायु अनुकूल सेवाएँ प्रदान करने के लिए एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली उपलब्ध कराना है।

पृष्ठभूमि

  • भारत एक विशाल भौगोलिक विविधता वाला देश है जो विभिन्न प्रकार की मौसमी घटनाओं जैसे बाढ़, सूखा, चक्रवात और लू के प्रति संवेदनशील है।
  • इन मौसमी घटनाओं के कारण जान-माल का भारी नुकसान होता है और कृषि तथा अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • बेहतर मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियाँ आपदा जोखिम को कम करने और तैयारियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • पिछले कुछ दशकों में, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मौसम विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन अभी भी उच्च-रिजॉल्यूशन और अधिक सटीक पूर्वानुमानों की आवश्यकता है।
  • प्रौद्योगिकी, विशेषकर उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में प्रगति ने मौसम मॉडलिंग और पूर्वानुमान क्षमताओं को बढ़ाने के नए अवसर प्रदान किए हैं।
  • ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत स्वदेशी प्रौद्योगिकियों और समाधानों के विकास पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें मौसम विज्ञान भी शामिल है।

मिशन मौसम क्या है?

  • मिशन मौसम का लक्ष्य भारत को ‘मौसम के लिए तैयार और जलवायु के प्रति जागरूक’ राष्ट्र बनाना है, जिसका शुभारंभ 14 जनवरी 2025 को प्रधानमंत्री द्वारा किया गया।
  • इसका मुख्य उद्देश्य देश के मौसम और जलवायु अवलोकन, समझ, मॉडलिंग और पूर्वानुमान को तेजी से बढ़ाना है, ताकि बेहतर, अधिक उपयोगी, सटीक और समय पर सेवाएँ प्रदान की जा सकें।
  • मिशन के तहत अत्याधुनिक मौसम निगरानी प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों का विकास किया जा रहा है, जिसमें उच्च-रिजॉल्यूशन वायुमंडलीय अवलोकन शामिल हैं।
  • इसमें अगली पीढ़ी के डॉप्लर मौसम रडार (DWR), पवन प्रोफाइलर और उपग्रहों की तैनाती के साथ-साथ उन्नत उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) प्रणालियों का कार्यान्वयन शामिल है।
  • मिशन का एक प्रमुख घटक मौसम और जलवायु प्रक्रियाओं की समझ को बढ़ाना तथा पूर्वानुमान क्षमताओं में सुधार करना है, जिसमें उन्नत पृथ्वी प्रणाली मॉडल और AI/ML का उपयोग शामिल है।
  • यह प्रभावी मौसम प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकियों और प्रोटोकॉल के विकास पर भी केंद्रित है, साथ ही अंतिम-दूरी तक कनेक्टिविटी के लिए निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) और प्रसार प्रणाली की स्थापना करता है।
  • क्षमता निर्माण और अनुसंधान सहयोग को मजबूत करना भी इस मिशन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है, ताकि मौसम विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके।
  • वर्तमान में, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की कुल कंप्यूटिंग क्षमता 28 पेटा एफएलओपी तक बढ़ गई है, और तीन कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वैश्विक मॉडल गंभीर मौसम की भविष्यवाणी में मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए कार्यरत हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अत्याधुनिक मौसम निगरानी प्रौद्योगिकियां बेहतर और सटीक मौसम पूर्वानुमान के लिए महत्वपूर्ण।
हाई-रिज़ॉल्यूशन वायुमंडलीय अवलोकन स्थानिक और सामयिक कवरेज में सुधार, स्थानीय स्तर पर सटीक जानकारी।
अगली पीढ़ी के रडार और उपग्रहों की तैनाती मौसम संबंधी घटनाओं की व्यापक निगरानी और डेटा संग्रह में वृद्धि।
उन्नत उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) प्रणालियाँ जटिल मौसम मॉडल को तेजी से चलाने और भारी डेटा को संसाधित करने की क्षमता।
AI/ML आधारित मॉडल का उपयोग पूर्वानुमान क्षमताओं में सुधार और गंभीर मौसम की भविष्यवाणी में सहायता।
निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) और प्रसार प्रणाली अंतिम-मील तक मौसम संबंधी जानकारी का प्रभावी प्रसार और आपदा प्रबंधन में सहायता।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • कृषि क्षेत्र को लाभ: सटीक मौसम पूर्वानुमान किसानों को बुवाई, कटाई और फसल प्रबंधन के बारे में सूचित निर्णय लेने में मदद करेगा, जिससे कृषि उत्पादकता बढ़ेगी और फसल के नुकसान में कमी आएगी।
  • आपदा न्यूनीकरण: बेहतर प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) चक्रवात, बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में सहायक होगी।

सामाजिक महत्व

  • जन सुरक्षा में सुधार: सटीक और समय पर मौसम की जानकारी नागरिकों को गंभीर मौसम की घटनाओं से बचने के लिए आवश्यक सावधानी बरतने में सक्षम बनाएगी, जिससे जान-माल की हानि कम होगी।
  • स्वास्थ्य क्षेत्र को लाभ: मौसम संबंधी बीमारियों (जैसे हीटवेव, शीत लहर) के प्रबंधन और रोकथाम में मदद मिलेगी।

रणनीतिक महत्व

  • आत्मनिर्भरता: स्वदेशी प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों का विकास ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अनुरूप है, जिससे भारत मौसम पूर्वानुमान में बाहरी निर्भरता कम करेगा।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: उन्नत मौसम विज्ञान क्षमताएं भारत को वैश्विक मौसम विज्ञान समुदाय में एक प्रमुख भूमिका निभाने और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में सक्षम बनाएंगी।

पर्यावरण महत्व

  • जलवायु परिवर्तन अनुकूलन: बेहतर जलवायु मॉडलिंग और पूर्वानुमान क्षमताएं भारत को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूलन (Adaptation) के लिए रणनीतियाँ विकसित करने में मदद करेंगी।
  • संसाधन प्रबंधन: जल संसाधनों और ऊर्जा खपत के कुशल प्रबंधन में मौसम संबंधी डेटा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

चुनौतियाँ

1. डेटा एकीकरण और गुणवत्ता

  • विभिन्न स्रोतों से प्राप्त भारी मात्रा में मौसम संबंधी डेटा को एकीकृत करना और उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना एक जटिल कार्य है।
  • डेटा की असंगति या अपर्याप्तता पूर्वानुमानों की सटीकता को प्रभावित कर सकती है।

2. प्रौद्योगिकी तक पहुंच और रखरखाव

  • अत्याधुनिक रडार, उपग्रहों और HPC प्रणालियों की खरीद, तैनाती और रखरखाव के लिए पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी संसाधनों की आवश्यकता होती है।
  • दूरदराज के क्षेत्रों में इन प्रौद्योगिकियों तक पहुंच सुनिश्चित करना और उनका नियमित रखरखाव चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

3. मानव संसाधन और क्षमता निर्माण

  • उन्नत मौसम पूर्वानुमान मॉडल और AI/ML तकनीकों को संचालित करने और उनका विश्लेषण करने के लिए उच्च कुशल मौसम वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की आवश्यकता है।
  • इस क्षेत्र में निरंतर क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

4. अंतिम-मील तक प्रसार

  • सटीक पूर्वानुमानों को ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में अंतिम उपयोगकर्ताओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां डिजिटल कनेक्टिविटी सीमित है।
  • स्थानीय भाषाओं और आसानी से समझ में आने वाले प्रारूपों में जानकारी का प्रसार सुनिश्चित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा की आवश्यकता पंचायत स्तर तक सटीक पूर्वानुमान के लिए अत्यधिक कम्प्यूटेशनल शक्ति और डेटा प्रोसेसिंग क्षमता की मांग।
AI/ML मॉडल का विकास और सत्यापन मौसम विज्ञान में AI/ML तकनीकों का प्रभावी एकीकरण और उनके परिणामों की विश्वसनीयता का सत्यापन।
अवलोकन नेटवर्क का विस्तार देश भर में डॉप्लर मौसम रडार (DWR) नेटवर्क का व्यापक विस्तार और उनके डेटा का निर्बाध एकीकरण।
जलवायु परिवर्तन के अनिश्चित प्रभाव जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न में बढ़ती अनिश्चितता, जिससे पूर्वानुमान मॉडल को लगातार अनुकूलित करने की आवश्यकता।
अंतर-एजेंसी समन्वय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, ISRO और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मिशन मौसम

आगे की राह

  • अवलोकन नेटवर्क का निरंतर विस्तार और आधुनिकीकरण, विशेषकर दूरदराज के और डेटा-कम क्षेत्रों में।
  • उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) अवसंरचना को और मजबूत करना ताकि अधिक जटिल और उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले मॉडल चलाए जा सकें।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) तकनीकों का मौसम पूर्वानुमान और जलवायु मॉडलिंग में गहन एकीकरण।
  • मौसम वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए नियमित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन।
  • निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) और प्रसार प्रणालियों को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना तथा अंतिम-मील तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना।
  • कृषि, जल संसाधन और आपदा प्रबंधन जैसे विभिन्न क्षेत्रों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करना ताकि मौसम संबंधी जानकारी का अधिकतम उपयोग हो सके।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना ताकि वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

मिशन मौसम का शुभारंभ  →  पृथ्वी प्रणाली अवलोकन का सुदृढ़ीकरण  →  उन्नत निगरानी और मॉडलिंग प्रौद्योगिकियां  →  बेहतर और सटीक मौसम पूर्वानुमान  →  प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली का विकास  →  आपदा प्रबंधन और जन सुरक्षा में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. मिशन मौसम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इसका शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा 14 जनवरी 2025 को किया गया था।
2. इसका मुख्य उद्देश्य देश को ‘मौसम के लिए तैयार और जलवायु के प्रति जागरूक’ राष्ट्र बनाना है।
3. यह केवल अल्पकालिक मौसम पूर्वानुमानों पर केंद्रित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। मिशन मौसम का शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा 14 जनवरी 2025 को किया गया था और इसका लक्ष्य देश को ‘मौसम के लिए तैयार और जलवायु के प्रति जागरूक’ राष्ट्र बनाना है। कथन 3 गलत है क्योंकि मिशन का उद्देश्य अल्पकालिक, मध्यमावधि और दीर्घावधि पूर्वानुमानों को निर्बाध रूप से उत्पन्न करना है।

Q2. भारत में मौसम पूर्वानुमान क्षमताओं को बढ़ाने के लिए हाल ही में की गई पहलों के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) वर्तमान में 50 डॉप्लर मौसम रडारों (DWR) के नेटवर्क से डेटा प्राप्त करता है।
2. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 2025 में अपनी कुल कंप्यूटिंग क्षमता को 28 पेटाFLOP तक बढ़ा दिया है।
3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित वैश्विक मॉडल का उपयोग केवल शहरी पूर्वानुमानों के लिए किया जा रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। IMD 50 DWR के नेटवर्क से डेटा प्राप्त करता है, और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 2025 में कंप्यूटिंग क्षमता को 28 पेटाFLOP तक बढ़ाया है। कथन 3 गलत है क्योंकि AI आधारित वैश्विक मॉडल नियमित रूप से मौसम पूर्वानुमानकर्ताओं को गंभीर मौसम की भविष्यवाणी करने में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, न कि केवल शहरी पूर्वानुमानों के लिए।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ मिशन मौसम के प्रमुख उद्देश्यों पर चर्चा कीजिए और भारत में मौसम तथा जलवायु अनुकूल सेवाओं को बेहतर बनाने में इसकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, आपदा प्रबंधन में प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के महत्व को भी स्पष्ट कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, मिशन मौसम के प्रमुख उद्देश्यों को विस्तार से बताएं, जैसे अत्याधुनिक निगरानी, उच्च-रिजॉल्यूशन अवलोकन, उन्नत कंप्यूटिंग और AI/ML का उपयोग। दूसरे भाग में, इन उद्देश्यों के माध्यम से मौसम और जलवायु अनुकूल सेवाओं में सुधार कैसे होगा, इसका विश्लेषण करें, जिसमें बेहतर पूर्वानुमान और अंतिम-दूरी तक कनेक्टिविटी शामिल हो। अंत में, आपदा प्रबंधन में प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के महत्व को रेखांकित करें, यह बताते हुए कि कैसे ये प्रणालियाँ जन सुरक्षा और तैयारियों को मजबूत करती हैं।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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