गगनयान मिशन: इसरो ने सेवा मॉड्यूल प्रणोदन प्रणाली का सफल परीक्षण पूरा किया

गगनयान मिशन: इसरो ने सेवा मॉड्यूल प्रणोदन प्रणाली का सफल परीक्षण पूरा किया

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science and Technology)
  • Prelims: गगनयान मिशन, सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम (SMPS), लिक्विड एपोजी मोटर (LAM), रिएक्शन कंट्रोल सिस्टम (RCS), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC), ISRO प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC)
  • Essay: भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाएँ और आत्मनिर्भरता, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: राष्ट्र निर्माण का आधार

त्वरित पुनरावृत्ति: गगनयान मिशन के सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम का सफल विकास भारत की मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो ऑर्बिट सर्कुलराइजेशन, ऑन-ऑर्बिट नियंत्रण और डी-बूस्ट युद्धाभ्यास जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों को सक्षम करेगा।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गगनयान मिशन के लिए सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम (SMPS) के विकास को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह उपलब्धि योग्यता परीक्षण कार्यक्रम के समापन के साथ हासिल की गई है। 11 जुलाई, 2025 को SMPS का 350 सेकंड की पूर्ण अवधि का हॉट टेस्ट सफलतापूर्वक आयोजित किया गया, जिसने उड़ान के गैर-सामान्य मिशन प्रोफाइल के लिए SMPS के एकीकृत प्रदर्शन को मान्य किया। यह परीक्षण सर्विस मॉड्यूल-आधारित मिशन एबॉर्ट परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण था।

पृष्ठभूमि

  • गगनयान मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है, जिसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और उन्हें सुरक्षित वापस लाना है।
  • इस मिशन के तहत तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर की कक्षा में तीन दिनों के मिशन के लिए भेजा जाएगा।
  • गगनयान मिशन में एक ऑर्बिटल मॉड्यूल (Orbital Module) शामिल होगा, जिसमें एक क्रू मॉड्यूल (Crew Module) और एक सर्विस मॉड्यूल (Service Module) होगा।
  • यह मिशन भारत को अमेरिका, रूस और चीन के बाद मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान क्षमता वाले देशों के विशिष्ट क्लब में शामिल कर देगा।
  • मिशन का लक्ष्य भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को प्रदर्शित करना और अंतरिक्ष अन्वेषण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
  • गगनयान कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों का विकास किया जा रहा है, जिनमें क्रू एस्केप सिस्टम, पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली तथा अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण शामिल हैं।

सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम (SMPS) क्या है?

  • सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम (SMPS) गगनयान के सर्विस मॉड्यूल का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो ऑर्बिटल मॉड्यूल की प्रणोदन (Propulsion) आवश्यकताओं को पूरा करता है।
  • यह एक विनियमित द्वि-प्रणोदक (Bi-propellant) आधारित प्रणोदन प्रणाली है, जो ऑर्बिट सर्कुलराइजेशन (Orbit Circularization), ऑन-ऑर्बिट नियंत्रण, डी-बूस्ट युद्धाभ्यास और आरोहण चरण के दौरान सर्विस मॉड्यूल-आधारित एबॉर्ट जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों को संचालित करती है।
  • SMPS में मुख्य प्रणोदक बल लिक्विड एपोजी मोटर (LAM) इंजनों द्वारा प्रदान किया जाता है, विशेषकर ऑर्बिट सर्कुलराइजेशन और डी-बूस्ट चरणों के दौरान।
  • रिएक्शन कंट्रोल सिस्टम (RCS) थ्रस्टर्स सटीक एटीट्यूड कंट्रोल (Attitude Control) सुनिश्चित करते हैं, जो अंतरिक्ष यान की स्थिति और अभिविन्यास को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है।
  • इस प्रणाली को लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC) द्वारा डिजाइन, विकसित और साकार किया गया है, और परीक्षण ISRO प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC), महेंद्रगिरि में किए गए हैं।
  • सिस्टम डेमोंस्ट्रेशन मॉडल (SDM) टेस्ट बेड का उपयोग करके SMPS के द्रव परिपथ (Fluid Circuit) का अनुकरण किया गया, जिसमें प्रणोदक टैंक फीड सिस्टम, हीलियम प्रेशराइजेशन सिस्टम, उड़ान-योग्य थ्रस्टर्स और नियंत्रण घटक शामिल थे।
  • SDM ने विभिन्न गगनयान मिशन परिदृश्यों और मानव रेटिंग (Human Rating) आवश्यकताओं के लिए सामान्य और गैर-सामान्य परिस्थितियों में 25 परीक्षणों से गुजरते हुए कुल 14,331 सेकंड की अवधि पूरी की है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम (SMPS) का सफल विकास गगनयान मिशन की सुरक्षा और विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण। यह अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से अंतरिक्ष में ले जाने और वापस लाने में सहायक होगा।
350 सेकंड का पूर्ण अवधि हॉट टेस्ट उड़ान के दौरान असामान्य मिशन प्रोफाइल (जैसे सर्विस मॉड्यूल आधारित अबॉर्ट) के लिए SMPS के एकीकृत प्रदर्शन को मान्य किया। यह आपातकालीन स्थितियों में सिस्टम की कार्यक्षमता सुनिश्चित करता है।
विनियमित द्वि-प्रणोदक आधारित प्रणोदन प्रणाली कक्षा वृत्ताकारकरण (orbit circularization), ऑन-ऑर्बिट नियंत्रण, डी-बूस्ट युद्धाभ्यास और आरोहण चरण के दौरान सर्विस मॉड्यूल आधारित अबॉर्ट जैसी आवश्यकताओं को पूरा करता है। यह मिशन के विभिन्न चरणों में सटीक नियंत्रण प्रदान करता है।
लिक्विड अपोजी मोटर (LAM) इंजन कक्षा वृत्ताकारकरण और डी-बूस्ट चरणों के दौरान मुख्य प्रणोदक बल प्रदान करते हैं, जो अंतरिक्ष यान को वांछित कक्षा में स्थापित करने और पृथ्वी पर लौटने के लिए आवश्यक है।
रिएक्शन कंट्रोल सिस्टम (RCS) थ्रस्टर्स सटीक रवैया नियंत्रण (attitude control) सुनिश्चित करते हैं, जिससे अंतरिक्ष यान की स्थिति और अभिविन्यास को नियंत्रित किया जा सके। यह मिशन की सटीकता के लिए महत्वपूर्ण है।
सिस्टम डेमोंस्ट्रेशन मॉडल (SDM) टेस्ट बेड सर्विस मॉड्यूल प्रणोदन प्रणाली के द्रव सर्किट का अनुकरण करता है, जिसमें प्रणोदक टैंक फीड सिस्टम, हीलियम प्रेशराइजेशन सिस्टम, उड़ान-योग्य थ्रस्टर्स और नियंत्रण घटक शामिल हैं। यह विभिन्न मिशन परिदृश्यों के तहत व्यापक परीक्षण की अनुमति देता है।

महत्व

वैज्ञानिक और तकनीकी महत्व

  • यह उपलब्धि भारत को मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं वाले चुनिंदा देशों के समूह में शामिल करती है, जिससे अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में देश की आत्मनिर्भरता और वैश्विक स्थिति मजबूत होती है।
  • SMPS का सफल विकास जटिल प्रणोदन प्रणालियों के डिजाइन, विकास और परीक्षण में ISRO की विशेषज्ञता को दर्शाता है, जो भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए आधार तैयार करता है।

रणनीतिक महत्व

  • गगनयान मिशन भारत की भू-राजनीतिक आकांक्षाओं को दर्शाता है और अंतरिक्ष क्षेत्र में इसकी बढ़ती शक्ति का प्रतीक है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और प्रभाव में वृद्धि हो सकती है।
  • मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत को स्वतंत्र रूप से अपनी अंतरिक्ष संपत्तियों का उपयोग करने की क्षमता प्रदान करता है।

सामाजिक और आर्थिक महत्व

  • यह मिशन युवा पीढ़ी को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे देश में नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश से नई प्रौद्योगिकियों का विकास होता है, जो अंततः विभिन्न उद्योगों में स्पिन-ऑफ लाभ प्रदान कर सकते हैं, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

चुनौतियाँ

1. मानव-रेटिंग और सुरक्षा

  • मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए प्रणोदन प्रणालियों को अत्यंत उच्च सुरक्षा मानकों को पूरा करना होता है, जिसमें शून्य-दोष प्रदर्शन और आपातकालीन स्थितियों में विश्वसनीय कार्यक्षमता सुनिश्चित करना शामिल है।
  • अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रणालियों का कठोर परीक्षण और सत्यापन आवश्यक है, जिसमें कई विफलता-सुरक्षित तंत्रों को शामिल करना शामिल है।

2. जटिल प्रणोदन प्रणाली का एकीकरण

  • सर्विस मॉड्यूल प्रणोदन प्रणाली में कई उप-प्रणालियाँ (जैसे प्रणोदक फीड, हीलियम प्रेशराइजेशन, थ्रस्टर्स) शामिल हैं, जिनका एकीकरण और समन्वय एक बड़ी तकनीकी चुनौती है।
  • विभिन्न घटकों के बीच इंटरफेस और संगतता सुनिश्चित करना, साथ ही पूरे सिस्टम के प्रदर्शन को अनुकूलित करना, जटिल इंजीनियरिंग की मांग करता है।

3. अत्यधिक वातावरण में प्रदर्शन

  • प्रणोदन प्रणाली को अंतरिक्ष के कठोर वातावरण (शून्य गुरुत्वाकर्षण, अत्यधिक तापमान भिन्नता, विकिरण) में विश्वसनीय रूप से कार्य करना होता है।
  • इन चरम स्थितियों में सामग्री की स्थिरता, घटक की कार्यक्षमता और प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

4. लागत और समय-सीमा प्रबंधन

  • मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों में भारी निवेश की आवश्यकता होती है, और परियोजना को निर्धारित बजट और समय-सीमा के भीतर पूरा करना एक सतत चुनौती है।
  • तकनीकी जटिलताओं और अप्रत्याशित समस्याओं के कारण अक्सर लागत और समय-सीमा में वृद्धि हो सकती है, जिससे प्रभावी परियोजना प्रबंधन आवश्यक हो जाता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
प्रणोदन प्रणाली की विश्वसनीयता मानव जीवन को खतरे में डाले बिना अंतरिक्ष में सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करना।
आपातकालीन अबॉर्ट क्षमता मिशन के किसी भी चरण में, विशेष रूप से आरोहण के दौरान, आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने की क्षमता।
सिस्टम का वजन और दक्षता अधिकतम पेलोड क्षमता और मिशन अवधि के लिए प्रणोदन प्रणाली को कुशल और हल्का बनाए रखना।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कुछ विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर निर्भरता और संबंधित भू-राजनीतिक चुनौतियाँ।
दीर्घकालिक स्थिरता भविष्य के मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए प्रणोदन प्रणालियों की दीर्घकालिक स्थिरता और रखरखाव सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • गगनयान मिशन

आगे की राह

  • मानव-रेटिंग प्रक्रियाओं को और मजबूत करना और सभी उप-प्रणालियों के लिए कठोर सुरक्षा प्रोटोकॉल और परीक्षण सुनिश्चित करना।
  • भविष्य के मिशनों के लिए प्रणोदन प्रणालियों की दक्षता और प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए उन्नत प्रणोदक प्रौद्योगिकियों और हल्के सामग्री अनुसंधान में निवेश करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ सहयोग को बढ़ावा देना ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया जा सके और मानव अंतरिक्ष उड़ान में वैश्विक विशेषज्ञता का लाभ उठाया जा सके।
  • अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण और मिशन नियंत्रण कर्मियों की क्षमता निर्माण पर निरंतर ध्यान केंद्रित करना ताकि मिशन की सफलता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
  • स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना और महत्वपूर्ण घटकों और प्रौद्योगिकियों के लिए घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को विकसित करना ताकि विदेशी निर्भरता कम हो सके।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना ताकि नवाचार को बढ़ावा मिले और मिशनों के लिए लागत प्रभावी समाधान विकसित किए जा सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

गगनयान मिशन · सेवा मॉड्यूल प्रणोदन प्रणाली · तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र (LPSC) · भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) · मानव अंतरिक्ष उड़ान · कक्षीय मॉड्यूल · प्रणोदन प्रणाली · अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी · आत्मनिर्भर भारत · राष्ट्रीय सुरक्षा

अवधारणा प्रवाह

सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम (SMPS) का विकास  →  SMPS का योग्यता परीक्षण कार्यक्रम पूरा  →  350 सेकंड का पूर्ण अवधि हॉट टेस्ट  →  SMPS का एकीकृत प्रदर्शन और अबॉर्ट क्षमता का सत्यापन  →  गगनयान मिशन के लिए SMPS का सफल एकीकरण  →  मानव अंतरिक्ष उड़ान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. गगनयान मिशन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सेवा मॉड्यूल प्रणोदन प्रणाली (SMPS) का विकास ISRO द्वारा सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
2. यह प्रणाली कक्षीय मॉड्यूल को कक्षा में स्थापित करने, कक्षा नियंत्रण और डी-बूस्ट युद्धाभ्यास में सहायता करती है।
3. लिक्विड अपोजी मोटर (LAM) इंजन मुख्य प्रणोदक बल प्रदान करते हैं, जबकि रिएक्शन कंट्रोल सिस्टम (RCS) थ्रस्टर सटीक अभिविन्यास नियंत्रण सुनिश्चित करते हैं।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि ISRO ने गगनयान मिशन के लिए सेवा मॉड्यूल प्रणोदन प्रणाली (SMPS) का विकास सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। कथन 2 भी सही है क्योंकि SMPS कक्षीय मॉड्यूल की कक्षा वृत्ताकार करने, कक्षा नियंत्रण और डी-बूस्ट युद्धाभ्यास जैसी आवश्यकताओं को पूरा करती है। कथन 3 भी सही है क्योंकि LAM इंजन मुख्य प्रणोदक बल प्रदान करते हैं और RCS थ्रस्टर सटीक अभिविन्यास नियंत्रण सुनिश्चित करते हैं।

Q2. सेवा मॉड्यूल प्रणोदन प्रणाली (SMPS) के विकास और परीक्षण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. SMPS का डिजाइन और विकास तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र (LPSC) द्वारा किया गया है।
2. परीक्षण ISRO प्रणोदन परिसर (IPRC), महेंद्रगिरि में किए गए हैं।
3. SMPS एक विनियमित द्वि-प्रणोदक आधारित प्रणोदन प्रणाली है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि SMPS का डिजाइन, विकास और निर्माण तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र (LPSC) द्वारा किया गया है। कथन 2 भी सही है क्योंकि परीक्षण ISRO प्रणोदन परिसर (IPRC), महेंद्रगिरि में किए गए थे। कथन 3 भी सही है क्योंकि सेवा मॉड्यूल (SM) एक विनियमित द्वि-प्रणोदक आधारित प्रणोदन प्रणाली है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ गगनयान मिशन के संदर्भ में सेवा मॉड्यूल प्रणोदन प्रणाली (SMPS) के महत्व का विश्लेषण कीजिए। भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम में इस उपलब्धि के निहितार्थों पर भी चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, गगनयान मिशन के लिए सेवा मॉड्यूल प्रणोदन प्रणाली (SMPS) की भूमिका और महत्व को विस्तार से समझाएँ। इसमें इसके कार्यों जैसे कक्षा वृत्ताकार करना, कक्षा नियंत्रण, डी-बूस्ट युद्धाभ्यास और मिशन निरस्तीकरण में इसकी भूमिका शामिल होनी चाहिए। दूसरे भाग में, इस उपलब्धि के व्यापक निहितार्थों पर चर्चा करें, जिसमें भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की प्रगति, आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता वृद्धि और वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होना शामिल है।

स्रोत: ISRO


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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