23 Jul अग्नि-4 मिशन: इसरो का अंतरिक्ष अनुसंधान में नया अध्याय, जानिए 7 प्रयोग क्या हैं?
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science and Technology) | GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध (International Relations)
- Prelims: सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान (Microgravity Research), एक्सिओम-4 मिशन (Axiom-4 Mission), अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station – ISS), गगनयान कार्यक्रम (Gaganyaan Programme), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation – ISRO), मानव अंतरिक्ष उड़ान (Human Spaceflight)
- Essay: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और भारत का भविष्य (Space Technology and India’s Future), अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में नए आयाम (International Cooperation: New Dimensions in Science and Technology)
त्वरित पुनरावृत्ति: एक्सिओम-4 मिशन में भारतीय ‘गगनयात्री’ द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर किए जाने वाले सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान प्रयोग भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम और वैज्ञानिक क्षमताओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आगामी एक्सिओम-4 मिशन के लिए सात सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण (Microgravity) अनुसंधान प्रयोगों को शॉर्टलिस्ट किया है, जिसमें एक भारतीय ‘गगनयात्री’ अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station – ISS) पर इन प्रयोगों को अंजाम देगा। यह मिशन भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण के क्षेत्र में भारत की अनुसंधान क्षमताओं को प्रदर्शित करेगा।
पृष्ठभूमि
- ISRO अपनी स्थापना से ही भारत और मानवता के लाभ के लिए अंतरिक्ष विज्ञान, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी में संलग्न है।
- भारत के ‘अमृत काल’ के लिए अंतरिक्ष दृष्टिकोण में 2035 तक एक परिचालन ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (Bharatiya Antariksh Station) और 2040 तक एक भारतीय मानव चंद्र मिशन (Indian Crewed Lunar Mission) की परिकल्पना की गई है।
- मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए एक मजबूत अवसर प्रदान करते हैं; विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) राकेश शर्मा ने 1984 में ऐसे ही एक सहयोगात्मक प्रयास के माध्यम से अंतरिक्ष में यात्रा की थी।
- जून 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक यात्रा के परिणामस्वरूप भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ा, जिसमें ISRO के गगनयात्री के साथ एक सहयोगात्मक अंतर्राष्ट्रीय मानव अंतरिक्ष मिशन शामिल है।
- यह मिशन किसी भारतीय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की पहली यात्रा को चिह्नित करेगा, जहाँ गगनयात्री भारतीय सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान प्रयोगों को अंजाम देगा।
- सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान के संभावित अनुप्रयोग मानव स्वास्थ्य, भौतिक/जीवन विज्ञान, सामग्री अनुसंधान, नवीन दवा विकास और जैव प्रौद्योगिकी जैसे विविध क्षेत्रों में हैं।
सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान (Microgravity Research) क्या है?
- सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान कम गुरुत्वाकर्षण वाले वातावरण, जैसे कि अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में वैज्ञानिक प्रयोगों का संचालन है।
- इस वातावरण में, गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव बहुत कम हो जाते हैं, जिससे वैज्ञानिकों को उन प्रक्रियाओं और घटनाओं का अध्ययन करने का अवसर मिलता है जो पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण की उपस्थिति के कारण भिन्न होती हैं।
- इसके अनुप्रयोगों में मानव शरीर विज्ञान पर अंतरिक्ष यात्रा के प्रभावों का अध्ययन, नई सामग्रियों का विकास, दवा खोज और पौधों तथा सूक्ष्मजीवों का अध्ययन शामिल है।
- यह अनुसंधान अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, साथ ही पृथ्वी पर चिकित्सा और औद्योगिक नवाचारों के लिए भी प्रासंगिक है।
- ISRO ने विभिन्न राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं/शैक्षणिक संस्थानों के भारतीय प्रधान अन्वेषकों (Principal Investigators – PIs) द्वारा प्रस्तावित सात सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान प्रयोगों को शॉर्टलिस्ट किया है।
- इन प्रयोगों में खाद्य सूक्ष्मशैवाल पर सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण विकिरण का प्रभाव, अंतरिक्ष में सलाद के बीजों का अंकुरण, यूटार्डिग्रेड का अस्तित्व और प्रजनन, सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण में मांसपेशियों के पुनर्जनन पर चयापचय पूरकों का प्रभाव, इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले के साथ मानव संपर्क का विश्लेषण, साइनोबैक्टीरिया की वृद्धि और खाद्य फसल के बीजों पर सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण का प्रभाव शामिल हैं।
- ये प्रयोग ISS पर उपलब्ध अनुसंधान सुविधाओं का उपयोग करेंगे और प्रक्षेपण से पहले कठोर मूल्यांकन और समीक्षा से गुजर रहे हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| एक्सिओम-4 मिशन में भारतीय सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान | अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर भारतीय ‘गगनयात्री’ द्वारा सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण (Microgravity) प्रयोगों का संचालन। |
| सहयोगात्मक अंतर्राष्ट्रीय मानव अंतरिक्ष मिशन | जून 2023 में प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा के दौरान हुए समझौते का परिणाम; भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग में एक नया अध्याय। |
| सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान के क्षेत्र | मानव स्वास्थ्य, भौतिक/जीवन विज्ञान, सामग्री अनुसंधान, फार्मास्युटिकल विकास और जैव प्रौद्योगिकी जैसे विविध क्षेत्रों में संभावित अनुप्रयोग। |
| चयनित प्रयोग | सात सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान प्रयोगों का चयन, जो विभिन्न राष्ट्रीय R&D प्रयोगशालाओं और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा प्रस्तावित किए गए हैं। |
| भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station) का लक्ष्य | 2035 तक एक परिचालन भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 तक भारतीय मानव चंद्र मिशन की परिकल्पना। |
महत्व
वैज्ञानिक एवं तकनीकी महत्व
- सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण के तहत विभिन्न जैविक और भौतिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करने का अवसर, जिससे मानव स्वास्थ्य, कृषि और सामग्री विज्ञान में नई खोजें हो सकती हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर प्रयोगों के माध्यम से भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान क्षमताओं का प्रदर्शन और संवर्धन।
- मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकियों और प्रक्रियाओं में अनुभव प्राप्त करना, जो भविष्य के भारतीय मानव अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण है।
रणनीतिक एवं भू-राजनीतिक महत्व
- अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग को मजबूत करना, विशेष रूप से अमेरिका के साथ, जिससे वैश्विक अंतरिक्ष मंच पर भारत की स्थिति मजबूत होगी।
- अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार को बढ़ावा देना, जिससे भारत एक प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति के रूप में उभरेगा।
- राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों का विकास, जैसे रिमोट सेंसिंग, संचार और नेविगेशन।
सामाजिक एवं आर्थिक महत्व
- सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान के माध्यम से नए फार्मास्युटिकल उत्पादों, उन्नत सामग्रियों और जैव प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों का विकास, जिससे आर्थिक लाभ हो सकता है।
- युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को अंतरिक्ष विज्ञान में करियर बनाने के लिए प्रेरित करना, जिससे देश में वैज्ञानिक प्रतिभा का विकास होगा।
- आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन निगरानी जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके सामाजिक चुनौतियों का समाधान करना।
चुनौतियाँ
1. अंतरिक्ष मिशनों की उच्च लागत
- मानव अंतरिक्ष मिशन और सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण प्रयोगों के लिए भारी वित्तीय निवेश की आवश्यकता होती है।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से लागत साझा करने में मदद मिल सकती है, लेकिन फिर भी राष्ट्रीय बजट पर दबाव बना रहता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
2. तकनीकी जटिलताएँ और सुरक्षा जोखिम
- सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण वातावरण में प्रयोगों का संचालन और मानव अंतरिक्ष उड़ान में उच्च स्तर की तकनीकी विशेषज्ञता और सुरक्षा प्रोटोकॉल की आवश्यकता होती है।
- मिशन के दौरान किसी भी विफलता या दुर्घटना का जोखिम हमेशा बना रहता है, जिससे जान-माल का नुकसान हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
3. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में चुनौतियाँ
- अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ समन्वय, बौद्धिक संपदा अधिकारों का प्रबंधन और तकनीकी हस्तांतरण से संबंधित मुद्दे उत्पन्न हो सकते हैं।
- भू-राजनीतिक तनाव या नीतिगत बदलाव अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग को प्रभावित कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग
4. मानव स्वास्थ्य पर सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण के प्रभाव
- लंबे समय तक सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण में रहने से अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जैसे हड्डियों का घनत्व कम होना और मांसपेशियों का क्षय।
- इन प्रभावों को कम करने और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गहन अनुसंधान और निवारक उपायों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष चिकित्सा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान के लिए विशेषज्ञता | देश में सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान के लिए विशिष्ट विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचे का विकास करना। |
| अंतरिक्ष मलबे का खतरा | बढ़ते अंतरिक्ष मिशनों के साथ अंतरिक्ष मलबे का खतरा बढ़ता है, जिससे ISS और अन्य उपग्रहों को नुकसान हो सकता है। |
| दीर्घकालिक वित्तपोषण | मानव अंतरिक्ष अन्वेषण और अनुसंधान के लिए दीर्घकालिक और स्थिर वित्तपोषण सुनिश्चित करना। |
| अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन | बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानूनों का पालन करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- गगनयान कार्यक्रम (Gaganyaan Programme)
आगे की राह
- सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना, जिसमें अकादमिक संस्थान, R&D प्रयोगशालाएँ और उद्योग शामिल हों।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को और गहरा करना, विशेष रूप से प्रमुख अंतरिक्ष शक्तियों के साथ, ताकि ज्ञान और संसाधनों का आदान-प्रदान हो सके।
- मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकियों, जैसे जीवन समर्थन प्रणाली और विकिरण सुरक्षा, में अनुसंधान और विकास को प्राथमिकता देना।
- अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण और स्वास्थ्य निगरानी के लिए उन्नत सुविधाओं और प्रोटोकॉल का विकास करना।
- अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना ताकि नवाचार को बढ़ावा मिले और मिशनों की लागत कम हो सके।
- अंतरिक्ष शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना ताकि युवाओं को विज्ञान और अंतरिक्ष अन्वेषण में रुचि लेने के लिए प्रेरित किया जा सके।
- 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 तक भारतीय मानव चंद्र मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप और समय-सीमा निर्धारित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) · मानव अंतरिक्ष उड़ान · निम्न भू-कक्षा (LEO) · गगनयान कार्यक्रम · अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) · सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान · एक्जिओम-4 मिशन · भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन · भारतीय मानव चंद्र मिशन · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
अवधारणा प्रवाह
प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा (जून 2023) → भारत-अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय मानव अंतरिक्ष मिशन समझौता → ISRO के ‘गगनयात्री’ का ISS पर जाना → भारतीय सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान प्रयोगों का संचालन → मानव स्वास्थ्य, कृषि, सामग्री विज्ञान में नए अनुप्रयोग
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गगनयान कार्यक्रम का उद्देश्य केवल निम्न भू-कक्षा (LEO) में मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन संचालित करना है।
2. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने वर्ष 2035 तक एक परिचालन भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की परिकल्पना की है।
3. विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) राकेश शर्मा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) का दौरा करने वाले पहले भारतीय थे।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि गगनयान कार्यक्रम का उद्देश्य LEO के साथ-साथ दीर्घकालिक भारतीय मानव अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकियों की नींव भी रखना है। कथन 2 सही है क्योंकि अमृत काल के लिए अंतरिक्ष के दृष्टिकोण में 2035 तक एक परिचालन भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण शामिल है। कथन 3 गलत है क्योंकि राकेश शर्मा 1984 में एक सहयोगी मिशन के माध्यम से अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय थे, लेकिन वह ISS पर नहीं गए थे। आगामी एक्जिओम-4 मिशन में ISRO का गगनयात्री ISS का दौरा करने वाला पहला भारतीय होगा।
Q2. सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान के संभावित अनुप्रयोगों के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-से क्षेत्र महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं?
1. मानव स्वास्थ्य
2. भौतिक/जीवन विज्ञान
3. सामग्री अनुसंधान
4. उपन्यास दवा विकास
5. जैव प्रौद्योगिकी
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 4 और 5
- 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर: 1, 2, 3, 4 और 5 — सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान के संभावित अनुप्रयोगों में मानव स्वास्थ्य, भौतिक/जीवन विज्ञान, सामग्री अनुसंधान, उपन्यास दवा विकास और जैव प्रौद्योगिकी जैसे विविध क्षेत्र शामिल हैं। इसलिए, सभी पाँचों क्षेत्र महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान के महत्व पर चर्चा कीजिए और बताइए कि आगामी एक्जिओम-4 मिशन इस क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को कैसे आगे बढ़ाएगा।
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान के महत्व को समझाना होगा, जिसमें मानव स्वास्थ्य, सामग्री विज्ञान और दवा विकास जैसे क्षेत्रों में इसके अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला जाएगा। दूसरे भाग में, एक्जिओम-4 मिशन की भूमिका पर चर्चा करनी होगी, जिसमें ISRO के गगनयात्री द्वारा ISS पर किए जाने वाले प्रयोगों और इससे देश में सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में कैसे मदद मिलेगी, इसका उल्लेख करना होगा।
स्रोत: ISRO
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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