24 Jul निजी FM रेडियो नीति: 20% स्थानीय भाषा अनिवार्य, जानिए पूरा नियम
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय संस्कृति | GS Paper II — शासन, नीतियाँ और हस्तक्षेप | GS Paper III — संचार नेटवर्क
- Prelims: निजी एफएम रेडियो, स्थानीय सामग्री नीति, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, प्रसार भारती, ई-नीलामी, आकांक्षी जिले
- Essay: भारत में सांस्कृतिक विविधता का संरक्षण और संवर्धन, लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका और उत्तरदायित्व
त्वरित पुनरावृत्ति: निजी एफएम रेडियो नीति के तहत, प्रसारकों को अपनी कुल सामग्री का कम से कम 20 प्रतिशत स्थानीय भाषा और संस्कृति पर आधारित कार्यक्रम प्रसारित करना अनिवार्य है, जिससे क्षेत्रीय पहचान को बढ़ावा मिल सके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने हाल ही में राज्यसभा में बताया कि वर्तमान में 386 निजी एफएम रेडियो चैनल कार्यरत हैं। सरकार की नीति के अनुसार, इन चैनलों को अपने दैनिक प्रसारण सामग्री का कम से कम 20 प्रतिशत स्थानीय भाषा में प्रसारित करना अनिवार्य है, जिसमें क्षेत्रीय संस्कृति, परंपराओं और लोक संगीत से संबंधित कार्यक्रम शामिल हों। यह जानकारी सरकार द्वारा 234 नए शहरों में 730 एफएम चैनलों के लिए आयोजित ई-नीलामी और निजी एफएम रेडियो के तीसरे चरण की नीति के संदर्भ में दी गई थी, जिसका उद्देश्य देश में रेडियो सेवाओं का विस्तार करना और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देना है।
पृष्ठभूमि
- भारत में रेडियो प्रसारण का इतिहास काफी पुराना है, जिसकी शुरुआत ब्रिटिश काल में हुई थी। स्वतंत्रता के बाद, ऑल इंडिया रेडियो (AIR) ने सार्वजनिक प्रसारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण के बाद, निजी एफएम रेडियो चैनलों की शुरुआत हुई, जिससे प्रसारण क्षेत्र में विविधता आई।
- सरकार ने एफएम रेडियो सेवाओं के विस्तार के लिए विभिन्न चरणों में नीतियां लागू की हैं, जिनमें चैनलों की नीलामी और संचालन के नियम शामिल हैं।
- निजी एफएम रेडियो नीति के तीसरे चरण (Phase III) का उद्देश्य एफएम रेडियो की पहुंच को बढ़ाना और प्रसारकों को प्रसार भारती के बुनियादी ढांचे का उपयोग करने की अनुमति देना है।
- स्थानीय सामग्री को बढ़ावा देने की नीति का उद्देश्य क्षेत्रीय भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं को संरक्षित करना और उन्हें मुख्यधारा में लाना है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां स्थानीय संस्कृति को विशेष प्रोत्साहन की आवश्यकता है।
- सरकार सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और सरकारी योजनाओं के प्रसार के लिए निजी एफएम चैनलों का उपयोग करती है, जिससे आपात स्थितियों और महत्वपूर्ण अभियानों के दौरान सत्यापित जानकारी का समय पर प्रसार सुनिश्चित होता है।
निजी एफएम रेडियो नीति क्या है?
- निजी एफएम रेडियो नीति भारत में निजी एफएम रेडियो चैनलों के संचालन, लाइसेंसिंग और विनियमन के लिए सरकार द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों का एक समूह है।
- इस नीति का मुख्य उद्देश्य देश में एफएम रेडियो सेवाओं का विस्तार करना, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और श्रोताओं को विविध सामग्री उपलब्ध कराना है।
- नीति के तहत, चैनलों के आवंटन के लिए एक पारदर्शी ई-नीलामी (e-auction) प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिससे निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।
- निजी एफएम रेडियो नीति के तीसरे चरण में प्रसारकों को प्रसार भारती (Prasar Bharati) के टावरों और साइटों तक पहुंच की अनुमति दी गई है, जिससे वे तेजी से अपने कार्यक्रम शुरू कर सकें।
- इस नीति का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि प्रत्येक प्रसारक को अपने दैनिक प्रसारण सामग्री का कम से कम 20 प्रतिशत स्थानीय भाषा में और स्थानीय संस्कृति, परंपराओं तथा लोक संगीत पर आधारित कार्यक्रम प्रसारित करना होगा।
- सरकार आशय पत्र (Letter of Intent – LOI) जारी करती है और अनुमति समझौते (Grant of Permission Agreement – GOPA) निष्पादित करती है, जिनमें विशेष रूप से वामपंथी उग्रवाद प्रभावित (LWE) क्षेत्रों और आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) में संचालन के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की जाती है।
- सरकार सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और सरकारी योजनाओं के प्रसारण पर भी नजर रखती है, और आपात स्थितियों के दौरान सत्यापित जानकारी के प्रसार के लिए प्रसारकों के साथ समन्वय स्थापित करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| निजी FM रेडियो चैनलों की संख्या | वर्तमान में 386 निजी FM रेडियो चैनल कार्यरत हैं, जो देश में रेडियो प्रसारण की व्यापक पहुंच को दर्शाता है। |
| स्थानीय भाषा में कंटेंट की अनिवार्यता | निजी FM रेडियो नीति के तहत, प्रत्येक प्रसारक को अपने दैनिक प्रसारण का कम से कम 20 प्रतिशत स्थानीय भाषा में प्रसारित करना होगा, जिसमें क्षेत्रीय संस्कृति, परंपराएं और लोक संगीत शामिल हों। यह क्षेत्रीय पहचान और भाषाई विविधता को बढ़ावा देता है। |
| ई-नीलामी प्रक्रिया | सरकार ने 234 नए शहरों में 730 FM चैनलों के लिए पारदर्शी ई-नीलामी की, जिससे नए प्रसारकों को इस क्षेत्र में प्रवेश करने का अवसर मिला और प्रतिस्पर्धा बढ़ी। |
| प्रसार भारती के टावरों तक पहुंच | निजी FM रेडियो के तीसरे चरण की नीति प्रसारकों को प्रसार भारती के टावरों और साइटों तक पहुंच की अनुमति देती है, जिससे कार्यक्रमों को तेजी से शुरू किया जा सके और बुनियादी ढांचे के उपयोग को अनुकूलित किया जा सके। |
| सार्वजनिक सेवा घोषणाएं | सरकार सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और सरकारी योजनाओं के प्रसारण पर नज़र रखती है, और आपात स्थितियों में सत्यापित जानकारी के समय पर प्रसार के लिए प्रसारकों के साथ समन्वय करती है। यह नागरिकों तक महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम है। |
महत्व
सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व
- स्थानीय भाषा और संस्कृति को बढ़ावा: 20 प्रतिशत स्थानीय कंटेंट की अनिवार्यता क्षेत्रीय भाषाओं, परंपराओं और लोक संगीत को संरक्षित और बढ़ावा देने में सहायक है, जिससे सांस्कृतिक विविधता बनी रहती है।
- सामुदायिक जुड़ाव: स्थानीय कंटेंट के माध्यम से FM रेडियो चैनल विशिष्ट समुदायों से बेहतर ढंग से जुड़ पाते हैं, जिससे स्थानीय मुद्दों और चिंताओं को आवाज़ मिलती है।
- सूचना का प्रसार: आपात स्थितियों और सरकारी योजनाओं के बारे में सत्यापित जानकारी का समय पर प्रसार दूरदराज के क्षेत्रों तक महत्वपूर्ण सूचनाएं पहुंचाने में मदद करता है, जिससे सार्वजनिक जागरूकता बढ़ती है।
आर्थिक महत्व
- रोजगार सृजन: FM रेडियो क्षेत्र का विस्तार, विशेषकर नए चैनलों की नीलामी और संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: स्थानीय कंटेंट के उत्पादन से स्थानीय कलाकारों, संगीतकारों और कंटेंट निर्माताओं को अवसर मिलते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
- विज्ञापन राजस्व: FM रेडियो स्थानीय व्यवसायों के लिए विज्ञापन का एक प्रभावी माध्यम है, जिससे उन्हें अपने उत्पादों और सेवाओं का प्रचार करने में मदद मिलती है, और यह रेडियो स्टेशनों के लिए राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
शासन और पारदर्शिता
- पारदर्शी आवंटन: FM चैनलों के लिए ई-नीलामी प्रक्रिया स्पेक्ट्रम के आवंटन में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना कम होती है।
- सरकारी योजनाओं का प्रचार: FM रेडियो सरकारी योजनाओं और नीतियों के बारे में जानकारी प्रसारित करने का एक प्रभावी माध्यम है, जिससे नागरिकों को इन योजनाओं का लाभ उठाने में मदद मिलती है।
- आपदा प्रबंधन में भूमिका: आपात स्थितियों में सत्यापित जानकारी का समय पर प्रसार आपदा प्रबंधन प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे जीवन और संपत्ति की रक्षा में मदद मिलती है।
चुनौतियाँ
1. राजस्व मॉडल की स्थिरता
- छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञापन राजस्व सीमित हो सकता है, जिससे निजी FM चैनलों के लिए वित्तीय रूप से टिकाऊ बने रहना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण पारंपरिक रेडियो के विज्ञापन राजस्व पर दबाव बढ़ रहा है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाना, वृद्धि, विकास और रोजगार।
2. कंटेंट की गुणवत्ता और विविधता
- 20 प्रतिशत स्थानीय कंटेंट की अनिवार्यता को पूरा करते हुए उच्च गुणवत्ता और आकर्षक कार्यक्रम बनाना एक चुनौती हो सकती है, खासकर सीमित संसाधनों वाले छोटे प्रसारकों के लिए।
- स्थानीय कंटेंट के नाम पर केवल मनोरंजन पर ध्यान केंद्रित करने से सूचनात्मक और शैक्षिक कार्यक्रमों की कमी हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे: भारतीय समाज की मुख्य विशेषताएं, विविधता।
3. बुनियादी ढांचे और पहुंच
- दूरदराज के और वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित क्षेत्रों में FM रेडियो स्टेशनों की स्थापना और संचालन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
- प्रसार भारती के टावरों तक पहुंच के बावजूद, कुछ क्षेत्रों में तकनीकी और परिचालन संबंधी बाधाएं आ सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: विकास और उग्रवाद के बीच संबंध।
4. नियामक चुनौतियाँ
- स्थानीय कंटेंट की परिभाषा और उसके अनुपालन की निगरानी एक जटिल कार्य हो सकता है, जिसके लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और प्रभावी प्रवर्तन तंत्र की आवश्यकता होती है।
- सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और सरकारी योजनाओं के प्रसारण में संतुलन बनाए रखना ताकि यह प्रचार न लगे।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप।
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| राजस्व की कमी | छोटे शहरों में विज्ञापनदाताओं की सीमित संख्या और डिजिटल प्रतिस्पर्धा के कारण निजी FM चैनलों के लिए वित्तीय स्थिरता बनाए रखना कठिन। |
| स्थानीय कंटेंट का उत्पादन | उच्च गुणवत्ता वाले स्थानीय कंटेंट के उत्पादन के लिए पर्याप्त संसाधनों और प्रतिभा की कमी, विशेषकर छोटे प्रसारकों के लिए। |
| तकनीकी बुनियादी ढांचा | दूरदराज के और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों में प्रसारण बुनियादी ढांचे की स्थापना और रखरखाव की लागत और व्यवहार्यता। |
| नियामक अनुपालन | स्थानीय कंटेंट की अनिवार्यता और अन्य प्रसारण दिशानिर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करना और उनकी निगरानी करना। |
| सूचना का संतुलन | सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और सरकारी सूचनाओं के प्रसारण में निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता बनाए रखना। |
आगे की राह
- स्थानीय कंटेंट के उत्पादन के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और अनुदान प्रदान किए जाएं, विशेषकर छोटे प्रसारकों और स्थानीय कलाकारों को।
- स्थानीय कंटेंट की गुणवत्ता और विविधता बढ़ाने के लिए कंटेंट निर्माताओं को प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम उपलब्ध कराए जाएं।
- FM रेडियो चैनलों के लिए एक स्थिर और विविध राजस्व मॉडल विकसित करने हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण और नए विज्ञापन अवसरों का पता लगाया जाए।
- दूरदराज के और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में FM रेडियो स्टेशनों की स्थापना और संचालन के लिए सरकारी सहायता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- स्थानीय कंटेंट की परिभाषा और उसके अनुपालन की निगरानी के लिए स्पष्ट और पारदर्शी दिशानिर्देश स्थापित किए जाएं, साथ ही एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र भी हो।
- सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और सरकारी योजनाओं के प्रसारण में संतुलन बनाए रखने के लिए एक आचार संहिता विकसित की जाए, जो सूचना की निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता सुनिश्चित करे।
- सामुदायिक रेडियो स्टेशनों को बढ़ावा दिया जाए, क्योंकि वे स्थानीय संस्कृति और भाषा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और स्थानीय समुदायों के लिए एक मंच प्रदान कर सकते हैं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
निजी एफएम रेडियो · स्थानीय कंटेंट · क्षेत्रीय संस्कृति · प्रसार भारती · ई-नीलामी · सूचना और प्रसारण मंत्रालय · सार्वजनिक सेवा घोषणाएँ · आकांक्षी जिले · सामुदायिक रेडियो · डिजिटल डिवाइड
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(a)’, ‘note’: ‘वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार’}
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा FM चैनलों की ई-नीलामी → निजी FM चैनलों की संख्या में वृद्धि → 20% स्थानीय कंटेंट की अनिवार्यता → क्षेत्रीय संस्कृति, परंपराओं और लोक संगीत को बढ़ावा → स्थानीय समुदायों का सशक्तिकरण और सांस्कृतिक विविधता का संरक्षण → सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और सरकारी योजनाओं का प्रसार → नागरिकों तक महत्वपूर्ण जानकारी की पहुंच और जागरूकता में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निजी एफएम रेडियो चैनलों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. निजी एफएम रेडियो नीति के तहत, प्रत्येक प्रसारक को अपने दैनिक प्रसारण कंटेंट का कम से कम 20 प्रतिशत स्थानीय भाषा में प्रसारित करना अनिवार्य है।
2. निजी एफएम रेडियो के तीसरे चरण की नीति प्रसारकों को प्रसार भारती के टावरों और साइटों तक पहुँच की अनुमति देती है।
3. सरकार केवल मनोरंजन कार्यक्रमों के प्रसारण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए निजी एफएम रेडियो चैनलों को प्रोत्साहित करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 2
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। निजी एफएम रेडियो नीति में स्थानीय भाषा में 20 प्रतिशत कंटेंट का प्रावधान है और तीसरे चरण की नीति प्रसार भारती के टावरों तक पहुँच की अनुमति देती है। कथन 3 गलत है क्योंकि सरकार सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और सरकारी योजनाओं के प्रसारण पर भी नज़र रखती है।
Q2. भारत में एफएम रेडियो चैनलों की ई-नीलामी का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- केवल नए शहरों में रेडियो सेवाओं का विस्तार करना।
- प्रसारकों के बीच प्रतिस्पर्धा कम करना।
- एक पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से एफएम चैनलों का आवंटन सुनिश्चित करना।
- सरकारी राजस्व को अधिकतम करना, भले ही पहुँच सीमित हो।
उत्तर: एक पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से एफएम चैनलों का आवंटन सुनिश्चित करना। — ई-नीलामी का प्राथमिक उद्देश्य एक पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से एफएम चैनलों का आवंटन सुनिश्चित करना है, जैसा कि प्रेस विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है। यह नए शहरों में विस्तार और राजस्व सृजन के साथ-साथ पारदर्शिता को भी बढ़ावा देता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में निजी एफएम रेडियो चैनलों की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए, विशेष रूप से क्षेत्रीय संस्कृति को बढ़ावा देने और सार्वजनिक सेवा घोषणाओं के प्रसार में। सरकार की नीतियों ने इस क्षेत्र को कैसे आकार दिया है? (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, निजी एफएम रेडियो चैनलों की क्षेत्रीय संस्कृति को बढ़ावा देने (स्थानीय भाषा कंटेंट, लोक संगीत, परंपराएँ) और सार्वजनिक सेवा घोषणाओं (आपातकालीन जानकारी, सरकारी योजनाएँ) के प्रसार में भूमिका का मूल्यांकन करें। इसमें उनकी पहुँच और स्थानीय जुड़ाव की क्षमता पर प्रकाश डालें। दूसरे भाग में, सरकार की नीतियों, जैसे 20 प्रतिशत स्थानीय कंटेंट की अनिवार्यता, ई-नीलामी प्रक्रिया, प्रसार भारती के बुनियादी ढाँचे तक पहुँच, और LWE (Left Wing Extremism) तथा आकांक्षी जिलों में संचालन के लिए निर्धारित समय-सीमा पर चर्चा करें। इन नीतियों ने एफएम रेडियो क्षेत्र के विकास और उसके सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव को कैसे प्रभावित किया है, इसका विश्लेषण करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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