25 Jul हरियाणा की वायु प्रदूषण कार्य योजना की केंद्र सरकार ने की समीक्षा, जानिए क्या है रणनीति
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन | GS Paper II — केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ एवं इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय
- Prelims: वायु प्रदूषण, दिल्ली-NCR, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, पराली जलाना, इलेक्ट्रिक वाहन, निर्माण और विध्वंस कचरा प्रबंधन
- Essay: पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन, शहरीकरण और पर्यावरणीय चुनौतियाँ: समाधान की दिशा में एक समग्र दृष्टिकोण
त्वरित पुनरावृत्ति: दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सड़क की धूल नियंत्रण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, पुराने वाहनों का स्क्रैप, औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण, C&D कचरा प्रबंधन जैसे बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाए जा रहे हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने हरियाणा के मुख्यमंत्री और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए चल रहे उपायों की प्रगति की समीक्षा की। इस बैठक में सर्दियों के मौसम से पहले प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए त्वरित कार्रवाई, विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और नियमों के कड़ाई से पालन पर जोर दिया गया।
पृष्ठभूमि
- दिल्ली-NCR क्षेत्र में वायु प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है, विशेषकर सर्दियों के महीनों में जब वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ या ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच जाती है।
- वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में वाहनों का उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण और विध्वंस (C&D) गतिविधियाँ, पराली जलाना, नगरपालिका ठोस कचरा जलाना और सड़क की धूल शामिल हैं।
- भारत सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए विभिन्न पहलें की हैं, जिनमें राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme – NCAP) और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management – CAQM) का गठन शामिल है।
- CAQM दिल्ली-NCR और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए एक वैधानिक निकाय है, जो विभिन्न राज्यों और एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करता है।
- हरियाणा, दिल्ली-NCR का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होने के नाते, वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- समीक्षा बैठक का उद्देश्य मौजूदा कार्य योजनाओं की प्रभावशीलता का आकलन करना और आगामी सर्दियों के मौसम से पहले आवश्यक सुधारों को लागू करना था।
- बैठक में ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ (No PUC, No Fuel) पहल और ‘परिवर्तन योजना’ जैसे कदमों पर भी चर्चा हुई, जो पुराने प्रदूषणकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने पर केंद्रित हैं।
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण नियंत्रण के प्रमुख उपाय
- सड़क की धूल नियंत्रण: सड़कों की मरम्मत, हरियाली बढ़ाना, गड्ढों की पहचान और मरम्मत, फुटपाथ व पैदल चलने के रास्ते बनाना, और सड़कों की नियमित यांत्रिक सफाई (mechanical sweeping) सुनिश्चित करना।
- इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा: NCR के नगर निगमों में इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती में तेजी लाना और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाना।
- पुराने वाहनों का स्क्रैप और प्रतिस्थापन: उपयोग के बाद बेकार हो चुके (End-of-Life – EOL) वाहनों के लिए NOC जारी करने में तेजी लाना और ‘परिवर्तन योजना’ के तहत पुराने प्रदूषणकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलना।
- औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण: औद्योगिक इकाइयों में ऑनलाइन निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (Online Continuous Emission Monitoring Systems – OCEMS) और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों (Air Pollution Control Devices – APCD) की स्थापना में तेजी लाना।
- निर्माण और विध्वंस (C&D) कचरा प्रबंधन: C&D कचरे के लिए सेकेंडरी कलेक्शन सेंटर स्थापित करने के काम में तेजी।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| समयबद्ध कार्य योजना | सर्दियों से पहले प्रदूषण स्तर को कम करने के लिए मिशन मोड में उपायों का कार्यान्वयन। |
| एजेंसियों के बीच तालमेल | दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता सुधार हेतु विभिन्न सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय। |
| नियमों का कड़ाई से पालन | प्रदूषण नियंत्रण संबंधी मौजूदा कानूनों और दिशानिर्देशों का प्रभावी प्रवर्तन। |
| सड़क धूल प्रबंधन | मॉनसून के दौरान सड़कों की मरम्मत, हरियाली बढ़ाना, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों (MRSM) का उपयोग और जियो-टैगिंग। |
| इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा | NCR के नगर निगमों में इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती और EV चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना में तेजी। |
| पुराने वाहनों का स्क्रैपिंग | प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को हटाना और ‘परिवर्तन योजना’ के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलना। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- दिल्ली-NCR क्षेत्र में वायु प्रदूषण के गंभीर प्रभावों को कम करना, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य में सुधार होगा।
- सर्दियों के महीनों में होने वाले स्मॉग और खराब वायु गुणवत्ता की समस्या का समाधान करना।
सामाजिक महत्व
- स्वच्छ हवा तक पहुंच सुनिश्चित कर सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना।
- वायु प्रदूषण से संबंधित बीमारियों (जैसे श्वसन संबंधी समस्याएं) के कारण होने वाले सामाजिक-आर्थिक बोझ को कम करना।
प्रशासनिक महत्व
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूत करना, जिससे नीति निर्माण और कार्यान्वयन में दक्षता आती है।
- जवाबदेही बढ़ाना और प्रदूषण नियंत्रण उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करना।
चुनौतियाँ
1. अंतर-राज्यीय समन्वय का अभाव
- दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण एक क्षेत्रीय समस्या है, जिसके लिए दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता होती है।
- विभिन्न राज्यों की प्राथमिकताओं और कार्यान्वयन क्षमताओं में अंतर के कारण एकीकृत दृष्टिकोण में बाधा आती है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, अंतर-राज्यीय संबंध
2. वित्तीय और तकनीकी बाधाएँ
- प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थापना, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है।
- आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण तकनीकों और बुनियादी ढांचे को अपनाने में तकनीकी विशेषज्ञता और निवेश की कमी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक विकास
3. कार्यान्वयन और प्रवर्तन की कमी
- मौजूदा नियमों और नीतियों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है, खासकर औद्योगिक इकाइयों और निर्माण स्थलों पर।
- स्थानीय निकायों और प्रवर्तन एजेंसियों में मानव संसाधन और क्षमता की कमी प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा डालती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, लोक प्रशासन
4. जन जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन
- पराली जलाने, खुले में कचरा जलाने और पुराने वाहनों के उपयोग जैसी प्रथाओं को बदलने के लिए जन जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन आवश्यक है।
- नागरिकों की सक्रिय भागीदारी के बिना प्रदूषण नियंत्रण के उपाय पूरी तरह सफल नहीं हो सकते।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, पर्यावरण नीति
5. कृषि अपशिष्ट प्रबंधन
- पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान खोजना, जिसमें किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनरी उपलब्ध कराना और वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देना शामिल है।
- छोटे और सीमांत किसानों के लिए CRM मशीनों की खरीद और रखरखाव की लागत एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: कृषि, पर्यावरण प्रदूषण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सड़क की धूल | मॉनसून के बाद सड़कों की मरम्मत और हरियाली बढ़ाने में देरी, MRSM की तैनाती में कमी। |
| इलेक्ट्रिक मोबिलिटी | NCR के नगर निगमों में इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती की धीमी गति और चार्जिंग स्टेशनों की अपर्याप्त संख्या। |
| पुराने वाहन | अयोग्य वाहनों के हस्तांतरण के लिए NOC जारी करने में देरी और वैज्ञानिक स्क्रैपिंग की धीमी प्रक्रिया। |
| औद्योगिक प्रदूषण | ऑनलाइन निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों (APCD) की स्थापना में धीमी गति। |
| निर्माण और विध्वंस (C&D) कचरा | सेकेंडरी कलेक्शन सेंटर स्थापित करने और पुराने कचरे को हटाने में देरी। |
| नगरपालिका ठोस कचरा और बायोमास जलाना | कचरा इधर-उधर फेंकने और खुले में कचरा जलाने की समस्या को खत्म करने के लिए 100% संग्रह का अभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- परिवर्तन योजना
आगे की राह
- दिल्ली-NCR के सभी संबंधित राज्यों के बीच एक एकीकृत क्षेत्रीय कार्य योजना विकसित करना और उसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना।
- वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों के लिए पर्याप्त वित्तीय आवंटन सुनिश्चित करना और तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा देना।
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और स्थानीय निकायों की क्षमता निर्माण करना, जिसमें मानव संसाधन और निगरानी उपकरणों का प्रावधान शामिल है।
- पराली जलाने की समस्या के समाधान के लिए किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनरी पर सब्सिडी और वैकल्पिक उपयोग के लिए प्रोत्साहन देना।
- इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार करना और पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना।
- निर्माण और विध्वंस (C&D) कचरा तथा नगरपालिका ठोस कचरा प्रबंधन के लिए प्रभावी संग्रह, प्रसंस्करण और निपटान तंत्र स्थापित करना।
- नागरिकों में वायु प्रदूषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें प्रदूषण कम करने वाली प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वायु प्रदूषण · दिल्ली-NCR · पर्यावरण संरक्षण · सतत विकास · पराली जलाना · ई-मोबिलिटी · अपशिष्ट प्रबंधन · औद्योगिक प्रदूषण · शहरी यातायात प्रबंधन · राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 21’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
- {‘अनुच्छेद 48A’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
- {‘अनुच्छेद 51A(g)’: ‘पर्यावरण की रक्षा और सुधार का कर्तव्य’}
अवधारणा प्रवाह
वायु प्रदूषण कार्य योजना की समीक्षा → प्रदूषण नियंत्रण उपायों की पहचान → कार्यान्वयन में तेजी और समन्वय → वायु गुणवत्ता में सुधार → जन स्वास्थ्य और पर्यावरण लाभ → सतत विकास की दिशा में प्रगति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता सुधार हेतु किए जा रहे उपायों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. सड़कों की धूल कम करने के लिए मॉनसून के दौरान सड़कों को दुरुस्त करने और हरियाली बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
2. इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए NCR के नगर निगमों में इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती और EV चार्जिंग स्टेशन लगाने में तेजी लाने को कहा गया है।
3. ‘नो PUCC, नो फ्यूल’ पहल के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु सभी ईंधन स्टेशनों पर स्वचालित नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाने का सुझाव दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी कथन सही हैं। केंद्रीय मंत्री ने सड़कों की धूल कम करने, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और ‘नो PUCC, नो फ्यूल’ पहल के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए ANPR कैमरे लगाने पर जोर दिया है।
Q2. भारत में वायु प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) का उद्देश्य 2024 तक PM2.5 और PM10 सांद्रता को 20-30% तक कम करना है।
2. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 केंद्र सरकार को पर्यावरण गुणवत्ता की सुरक्षा और सुधार के लिए व्यापक शक्तियाँ प्रदान करता है।
3. वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 वायु प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और उपशमन के लिए एक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि NCAP का लक्ष्य 2024 तक PM2.5 और PM10 सांद्रता को 20-30% तक कम करना था, जिसे बाद में संशोधित कर 2026 तक 40% कमी का लक्ष्य रखा गया है। कथन 2 और 3 सही हैं, ये दोनों अधिनियम भारत में पर्यावरण और वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण कानूनी ढाँचा प्रदान करते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ दिल्ली-NCR क्षेत्र में वायु प्रदूषण एक गंभीर और बहुआयामी चुनौती है। इस संदर्भ में, वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों का विश्लेषण करते हुए, इसके समाधान हेतु सरकार द्वारा अपनाए जा रहे ‘पूरे समाज को साथ लेकर चलने के नजरिए’ (whole-of-society approach) और विभिन्न हितधारकों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों, जैसे पराली जलाना, वाहनों से निकलने वाला धुआँ, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण एवं विध्वंस (C&D) अपशिष्ट और ठोस अपशिष्ट को जलाना आदि का विश्लेषण करें। दूसरे भाग में, वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार द्वारा अपनाए जा रहे ‘पूरे समाज को साथ लेकर चलने के नजरिए’ पर विस्तार से चर्चा करें, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों, उद्योगों, किसानों और आम नागरिकों की भूमिका को शामिल किया जाए। समाधानों में तकनीकी हस्तक्षेप, नीतिगत सुधार, जागरूकता अभियान और अंतर-राज्यीय समन्वय जैसे पहलुओं को भी उजागर करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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