25 Jul नंदीयाल में ‘कैच द रेन’ अभियान: जल संरक्षण अवसंरचना में बड़ा सुधार
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (भौतिक भूगोल, जल संसाधन) | GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप) | GS Paper III — पर्यावरण (संरक्षण, पर्यावरणीय प्रदूषण और गिरावट, पर्यावरण प्रभाव आकलन), आपदा प्रबंधन
- Prelims: कैच द रेन अभियान, जल शक्ति मंत्रालय, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पारंपरिक जल निकाय, सामुदायिक भागीदारी, नंदीयाल जिला, लघु सिंचाई टैंक
- Essay: जल सुरक्षा: भारत के विकास की आधारशिला, सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सतत विकास
त्वरित पुनरावृत्ति: ‘कैच द रेन’ अभियान जल शक्ति मंत्रालय की एक पहल है जो “बारिश को वहीं इकट्ठा करें जहां वह गिरती है, जब वह गिरती है” के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका उद्देश्य वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के माध्यम से जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
आंध्र प्रदेश के नंदीयाल जिले में ‘कैच द रेन अभियान’ (4 जुलाई से 4 अगस्त 2026) चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत, जिले में जल संरक्षण अवसंरचना (Infrastructure) और भंडारण क्षमता को मजबूत किया गया है, जिसमें पारंपरिक जल निकायों का जीर्णोद्धार, सहायक नहरों की गाद सफाई और अतिरिक्त जल भंडारण का निर्माण शामिल है। यह पहल वैज्ञानिक योजना, सामुदायिक भागीदारी और समन्वित कार्यान्वयन के माध्यम से वर्षा जल की हर बूंद का संरक्षण करने पर केंद्रित है।
पृष्ठभूमि
- भारत में जल संकट एक गंभीर चुनौती है, जिसमें कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में गिरावट और पेयजल की कमी शामिल है।
- जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा पैटर्न में अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे सूखे और बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाएं अधिक बार हो रही हैं।
- पारंपरिक जल निकायों, जैसे तालाबों और कुओं, का अतिक्रमण और उपेक्षा हुई है, जिससे उनकी भंडारण क्षमता कम हो गई है।
- जल संरक्षण के लिए सरकारी प्रयासों में विभिन्न योजनाएं और अभियान शामिल हैं, जिनका उद्देश्य जल संसाधनों का स्थायी प्रबंधन करना है।
- स्थानीय समुदायों और ग्राम पंचायतों की भागीदारी जल संरक्षण पहलों की सफलता के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
- ‘कैच द रेन’ अभियान जल शक्ति मंत्रालय द्वारा ‘जल शक्ति अभियान’ के एक घटक के रूप में शुरू किया गया था।
‘कैच द रेन’ अभियान क्या है?
- ‘कैच द रेन’ अभियान भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी अभियान है।
- इसका मुख्य सिद्धांत है “बारिश को वहीं इकट्ठा करें जहां वह गिरती है, जब वह गिरती है”।
- अभियान का उद्देश्य वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) संरचनाओं के निर्माण और रखरखाव के माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण करना है।
- इसमें पारंपरिक जल निकायों का जीर्णोद्धार, जल निकायों से गाद निकालना, चेक डैम (Check Dam) का निर्माण और परकोलेशन टैंक (Percolation Tank) जैसे उपाय शामिल हैं।
- यह अभियान शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लागू होता है, जिसमें व्यक्तिगत घरों से लेकर बड़े सामुदायिक स्तर तक के प्रयास शामिल हैं।
- वैज्ञानिक योजना, तकनीकी मूल्यांकन और सक्रिय सामुदायिक भागीदारी इस अभियान के प्रमुख स्तंभ हैं।
- इसका लक्ष्य भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) में सुधार करना, जल उपलब्धता बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलेपन को मजबूत करना है।
- यह विभिन्न सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय पर जोर देता है ताकि एकीकृत जल प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| वैज्ञानिक योजना और सहभागी कार्यान्वयन | स्थानीय आवश्यकताओं और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर जल संरक्षण उपायों की पहचान, पारदर्शिता और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करना। |
| बड़े पैमाने पर जल संरक्षण के उपाय | सहायक नहरों की गाद सफाई, लघु सिंचाई टैंकों का जीर्णोद्धार, खेत तालाबों, चेक डैम और परकोलेशन टैंकों का सुदृढ़ीकरण। |
| अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता का निर्माण | टैंकों और अन्य जल निकायों की क्षमता बढ़ाकर मानसून अपवाह को संग्रहित करना और भूजल पुनर्भरण में सुधार करना। |
| समन्वित कार्यान्वयन | विभिन्न विभागों के समन्वय से ‘बारिश को वहीं इकट्ठा करें जहां वह गिरती है, जब वह गिरती है’ के सिद्धांत का पालन। |
| दीर्घकालिक जल सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन | जल संरक्षण प्रयासों से कृषि, आजीविका और स्थानीय समुदायों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) को बढ़ावा देना, जिससे जल स्तर में सुधार होता है।
- पारंपरिक जल निकायों का जीर्णोद्धार और सहायक नहरों की गाद सफाई से पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, जैसे सूखे और पानी की कमी, से निपटने के लिए लचीलापन बढ़ाना।
सामाजिक-आर्थिक महत्व
- कृषि उत्पादकता में वृद्धि के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना, जिससे किसानों की आय में सुधार होता है।
- स्थानीय समुदायों और ग्राम बुजुर्गों की भागीदारी से स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करना।
- जल सुरक्षा सुनिश्चित करके ग्रामीण आजीविका को सहारा देना और पलायन को कम करना।
शासन और नीतिगत महत्व
- विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से प्रभावी जल प्रबंधन को बढ़ावा देना।
- ग्राम सभाओं के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी और पारदर्शिता सुनिश्चित करना, जिससे योजनाओं का सफल कार्यान्वयन होता है।
- केंद्र सरकार के ‘कैच द रेन अभियान’ के उद्देश्यों को जमीनी स्तर पर साकार करना।
चुनौतियाँ
1. वित्तपोषण और संसाधनों की कमी
- बड़े पैमाने पर जल संरक्षण परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है।
- तकनीकी विशेषज्ञता और कुशल श्रम की उपलब्धता भी एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास और उद्योग
2. सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता
- स्थायी जल संरक्षण के लिए सामुदायिक भागीदारी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- जल संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता की कमी भी एक बाधा हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, मानव संसाधन
3. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
- वर्षा पैटर्न में अनिश्चितता और अत्यधिक मौसम की घटनाएं जल संरक्षण प्रयासों को प्रभावित कर सकती हैं।
- बढ़ते तापमान से वाष्पीकरण में वृद्धि हो सकती है, जिससे जल निकायों में पानी का नुकसान होता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण, आपदा प्रबंधन
4. रखरखाव और दीर्घकालिक स्थिरता
- निर्मित जल संरक्षण संरचनाओं का नियमित रखरखाव सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- दीर्घकालिक स्थिरता के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा और निगरानी प्रणाली की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, अवसंरचना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जल संसाधनों का अत्यधिक दोहन | बढ़ती जनसंख्या और कृषि आवश्यकताओं के कारण भूजल का अत्यधिक उपयोग। |
| जल निकायों का अतिक्रमण और प्रदूषण | शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के कारण पारंपरिक जल स्रोतों का सिकुड़ना और दूषित होना। |
| अपर्याप्त जल प्रबंधन नीतियां | जल संसाधनों के एकीकृत और कुशल प्रबंधन के लिए प्रभावी नीतियों का अभाव। |
| मॉनसून पर अत्यधिक निर्भरता | भारत की कृषि और जल सुरक्षा का मॉनसून की अनियमितता के प्रति संवेदनशील होना। |
| अंतर-राज्यीय जल विवाद | नदी जल बंटवारे को लेकर राज्यों के बीच विवाद, जो समग्र जल प्रबंधन को प्रभावित करता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- कैच द रेन अभियान
आगे की राह
- जल संरक्षण के लिए एक राष्ट्रीय जल नीति (National Water Policy) विकसित करना जो एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन पर केंद्रित हो।
- जल बजटिंग (Water Budgeting) और जल लेखा परीक्षा (Water Audit) को अनिवार्य करना ताकि जल संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित हो सके।
- जल संरक्षण परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना और नवीन प्रौद्योगिकियों का उपयोग करना।
- जल साक्षरता (Water Literacy) कार्यक्रमों को बढ़ावा देना ताकि नागरिकों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
- जलवायु परिवर्तन के अनुकूल जल प्रबंधन रणनीतियों को अपनाना, जैसे कि सूखा-प्रतिरोधी फसलों को बढ़ावा देना।
- पारंपरिक जल निकायों के जीर्णोद्धार और रखरखाव के लिए स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना और उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कैच द रेन अभियान · जल संरक्षण · वर्षा जल संचयन · भूजल पुनर्भरण · सामुदायिक भागीदारी · वैज्ञानिक योजना · जल सुरक्षा · जलवायु परिवर्तन अनुकूलन · पारंपरिक जल निकाय · नंदीयाल जिला
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियों, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘नगरपालिकाओं की शक्तियों, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
- {‘article’: ‘राज्य सूची (सातवीं अनुसूची)’, ‘note’: ‘जल, सिंचाई, नहरें, जल निकासी’}
अवधारणा प्रवाह
वर्षा जल संचयन और भंडारण क्षमता में वृद्धि → भूजल पुनर्भरण में सुधार → कृषि और आजीविका के लिए जल उपलब्धता में वृद्धि → स्थानीय समुदायों की जल सुरक्षा सुनिश्चित → जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलेपन में वृद्धि → सतत जल प्रबंधन और विकास को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. कैच द रेन अभियान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अभियान केवल शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन पर केंद्रित है।
2. इसका मुख्य सिद्धांत ‘बारिश को वहीं इकट्ठा करें जहां वह गिरती है, जब वह गिरती है’ है।
3. इस अभियान में पारंपरिक जल निकायों के जीर्णोद्धार और सहायक नहरों की गाद सफाई जैसे कार्य शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि यह अभियान शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जल संरक्षण पर केंद्रित है। कथन 2 और 3 सही हैं, क्योंकि अभियान का सिद्धांत वर्षा जल को उसके गिरने के स्थान पर ही संग्रहित करना है और इसमें पारंपरिक जल निकायों का जीर्णोद्धार तथा नहरों की गाद सफाई जैसे कार्य शामिल हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा उपाय कैच द रेन अभियान के तहत नंदीयाल जिले में जल संरक्षण अवसंरचना को मजबूत करने के लिए नहीं किया गया है?
- खेत तालाबों का निर्माण
- चेक डैम का सुदृढीकरण
- लघु सिंचाई टैंकों का जीर्णोद्धार
- समुद्री जल का विलवणीकरण
उत्तर: समुद्री जल का विलवणीकरण — कैच द रेन अभियान मुख्य रूप से वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण पर केंद्रित है। खेत तालाबों का निर्माण, चेक डैम का सुदृढीकरण और लघु सिंचाई टैंकों का जीर्णोद्धार इसके अंतर्गत आते हैं। समुद्री जल का विलवणीकरण (Desalination) इस अभियान का हिस्सा नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ कैच द रेन अभियान, जल संरक्षण और प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी तथा वैज्ञानिक योजना के महत्व को कैसे रेखांकित करता है? भारत में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में ऐसे अभियानों की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में कैच द रेन अभियान के तहत सामुदायिक भागीदारी और वैज्ञानिक योजना के विभिन्न पहलुओं को उदाहरण सहित समझाएं, जैसे ग्राम सभाओं में कार्यों का अनुमोदन और स्थानीय ज्ञान का उपयोग। दूसरे भाग में, भारत की जल सुरक्षा के संदर्भ में ऐसे अभियानों की व्यापक भूमिका का विश्लेषण करें, जिसमें भूजल पुनर्भरण, कृषि उत्पादकता में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन जैसे सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ संभावित चुनौतियों और सीमाओं पर भी चर्चा करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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