27 Jul ज्ञान भारतम मिशन: पांडुलिपि डिजिटलीकरण से ज्ञान परंपरा को मिलेगा नया आयाम
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय संस्कृति, प्राचीन से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू | GS Paper II — सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके डिजाइन तथा कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास और उनके अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन पर इनके प्रभाव
- Prelims: ज्ञान भारतम मिशन, राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण, पांडुलिपि डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ज्ञान मित्रम, भारतीयजीपीटी, पांडुलिपि दर्पण, संस्कृति मंत्रालय
- Essay: डिजिटल युग में सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: चुनौतियाँ और अवसर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारत की ज्ञान परंपराओं का पुनरुत्थान
त्वरित पुनरावृत्ति: ज्ञान भारतम मिशन भारत की समृद्ध पांडुलिपि विरासत को AI-सक्षम तकनीकों का उपयोग करके संरक्षित करने, डिजिटलीकरण करने और व्यापक रूप से सुलभ बनाने की एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने हाल ही में लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में ज्ञान भारतम मिशन और पांडुलिपि डिजिटलीकरण से संबंधित जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आरंभ किया गया था, जिसका उद्देश्य विभिन्न भाषाओं और लिपियों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांडुलिपि संग्रहों की पहचान और दस्तावेजीकरण करना है। इस पहल के माध्यम से 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई है, और ज्ञान भारतम वेब पोर्टल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम तकनीकों का उपयोग करके इन पांडुलिपियों तक पहुंच को सुगम बना रहा है।
पृष्ठभूमि
- भारत एक समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत वाला देश है, जिसमें लाखों की संख्या में प्राचीन पांडुलिपियाँ विभिन्न भाषाओं और लिपियों में विद्यमान हैं।
- ये पांडुलिपियाँ भारतीय इतिहास, दर्शन, विज्ञान, कला, साहित्य और धर्म के अमूल्य स्रोत हैं।
- समय के साथ, इन पांडुलिपियों के संरक्षण और पहुंच को लेकर चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं, जिनमें भौतिक क्षरण, अपर्याप्त भंडारण और सीमित पहुंच शामिल है।
- डिजिटलीकरण (Digitization) इन चुनौतियों का समाधान करने और इन मूल्यवान संसाधनों को भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) जैसी आधुनिक तकनीकें पांडुलिपियों के विश्लेषण, प्रतिलेखन, अनुवाद और व्यापक पहुंच को संभव बनाती हैं, जिससे विद्वानों और आम जनता दोनों को लाभ होता है।
- भारत सरकार ने अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए विभिन्न पहलें की हैं, जिनमें राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (National Mission for Manuscripts) जैसी योजनाएँ शामिल हैं, जो पांडुलिपियों के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और प्रचार पर केंद्रित हैं।
ज्ञान भारतम मिशन क्या है?
- ज्ञान भारतम मिशन संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture) द्वारा शुरू की गई एक पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की पांडुलिपि विरासत को संरक्षित करना और उसे व्यापक रूप से सुलभ बनाना है।
- इस मिशन के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण (National Manuscript Survey) आरंभ किया गया है, जिसके माध्यम से देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विभिन्न भाषाओं और लिपियों में मौजूद पांडुलिपि संग्रहों, भंडारों और संरक्षकों की पहचान और दस्तावेजीकरण किया जा रहा है।
- सर्वेक्षण के दौरान 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई है, जो भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा का प्रमाण है।
- ज्ञान भारतम वेब पोर्टल इस मिशन का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो भारत की पांडुलिपि विरासत तक बुद्धिमत्तापूर्ण पहुंच प्रदान करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम तकनीकों का उपयोग करता है।
- पोर्टल में लार्ज लैंग्वेज स्क्रिप्ट मॉडल (LLSM), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR), हैंडरिटेन टेक्स्ट रिकग्निशन (HTR), स्क्रिप्ट रिकग्निशन, सिमेंटिक सर्च और मशीन-सहायता प्राप्त अनुवाद जैसी तकनीकें शामिल हैं।
- ज्ञान भारतम वेब पोर्टल का AI-संचालित ज्ञान इंटरफेस ‘ज्ञान मित्रम’ पांडुलिपि छवियों, प्रतिलेखों और अनुवादों को एकीकृत करके पांडुलिपियों की बुद्धिमतापूर्ण व्याख्या, प्रासंगिककरण और अन्वेषण में सक्षम बनाता है।
- ‘भारतीयजीपीटी’ ने पोर्टल पर ‘पांडुलिपि से संवादात्मक AI’ की सुविधा उपलब्ध कराई है, जो पांडुलिपि विरासत को AI-तैयार, मशीन-पठनीय ज्ञान में परिवर्तित करती है और ‘टॉक टू मैन्युस्क्रिप्ट’ सुविधा के माध्यम से टेक्स्ट, ऑडियो और आवाज-आधारित बातचीत सहित बहुभाषी और बहुआयामी पहुंच प्रदान करती है।
- ‘पांडुलिपि दर्पण’ पोर्टल पर एक AI-संचालित उपकरण है जो उपयोगकर्ताओं को एक डिजिटाइज्ड पांडुलिपि छवि अपलोड करने या चुनने और AI-सहायता प्राप्त लिपि पहचान, लिप्यंतरण और अनुवाद तक पहुंचने में सक्षम बनाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण | देश भर में पांडुलिपि संग्रहों, भंडारों और संरक्षकों की पहचान तथा दस्तावेजीकरण। |
| 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की जानकारी | भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और ज्ञान विरासत की विशालता का प्रमाण। |
| कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम तकनीकें | पांडुलिपि विरासत तक बुद्धिमत्तापूर्ण पहुंच, व्याख्या और अन्वेषण को सुगम बनाना। |
| ज्ञान मित्रम (AI-संचालित ज्ञान इंटरफेस) | पांडुलिपि छवियों, प्रतिलेखों और अनुवादों को एकीकृत कर गहन विश्लेषण में सहायता। |
| भारतीयजीपीटी द्वारा ‘पांडुलिपि से संवादात्मक AI’ | पांडुलिपियों को मशीन-पठनीय ज्ञान में परिवर्तित करना और बहुभाषी, बहुआयामी पहुंच प्रदान करना। |
| पांडुलिपि दर्पण (AI-संचालित उपकरण) | उपयोगकर्ताओं को डिजिटाइज्ड पांडुलिपि छवियों के लिए लिपि पहचान, लिप्यंतरण और अनुवाद तक पहुंच प्रदान करना। |
महत्व
सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व
- ज्ञान भारतम मिशन भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने तथा उसे सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- यह मिशन विभिन्न भाषाओं और लिपियों में निहित ज्ञान को उजागर कर भारत की बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है।
- पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण भावी पीढ़ियों के लिए इन अमूल्य धरोहरों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जिससे वे समय के साथ नष्ट होने से बचती हैं।
शैक्षणिक एवं अनुसंधान महत्व
- AI-सक्षम उपकरण विद्वानों, छात्रों और शोधकर्ताओं को पांडुलिपियों तक आसान पहुंच प्रदान करते हैं, जिससे गहन अनुसंधान और नए ज्ञान की खोज को बढ़ावा मिलता है।
- ‘टॉक टू मैन्युस्क्रिप्ट’ जैसी सुविधाएं पांडुलिपियों के साथ संवादात्मक जुड़ाव को सक्षम बनाती हैं, जिससे सीखने और समझने की प्रक्रिया अधिक आकर्षक बनती है।
- मशीन-सहायता प्राप्त अनुवाद और लिपि पहचान विभिन्न भाषाओं और लिपियों में लिखी गई पांडुलिपियों के अध्ययन को सरल बनाते हैं।
तकनीकी एवं नवाचार महत्व
- लार्ज लैंग्वेज स्क्रिप्ट मॉडल (LLSM), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) और हैंडरिटेन टेक्स्ट रिकग्निशन (HTR) जैसी अत्याधुनिक AI तकनीकों का उपयोग डिजिटल इंडिया पहल के अनुरूप है।
- यह परियोजना भारत में AI और मशीन लर्निंग के अनुप्रयोगों को प्रदर्शित करती है, जिससे तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहन मिलता है।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ज्ञान तक पहुंच भारत को वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करती है।
चुनौतियाँ
1. पांडुलिपियों का संरक्षण और जीर्णोद्धार
- बड़ी संख्या में पांडुलिपियां नाजुक स्थिति में हैं और उनके भौतिक संरक्षण के लिए विशेष विशेषज्ञता और संसाधनों की आवश्यकता है।
- जलवायु परिवर्तन, कीटों और मानवीय लापरवाही से पांडुलिपियों को होने वाले नुकसान को रोकना एक सतत चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: कला एवं संस्कृति, संरक्षण
2. डिजिटलीकरण और मेटाडेटा मानकीकरण
- विभिन्न भाषाओं और लिपियों में पांडुलिपियों के लिए एक समान डिजिटलीकरण प्रोटोकॉल और मेटाडेटा मानकों को लागू करना जटिल है।
- उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटल प्रतिरूप बनाने और उनकी सटीकता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ई-गवर्नेंस
3. पहुंच और अधिकार धारकों के मुद्दे
- संवेदनशील, प्रतिबंधित या अधिकार-संरक्षित सामग्री तक पहुंच को नियंत्रित करना और लागू कानूनों का पालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
- पांडुलिपियों के संरक्षकों और अधिकार धारकों के अधिकारों का सम्मान करते हुए सार्वजनिक पहुंच को संतुलित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: बौद्धिक संपदा अधिकार, शासन
4. तकनीकी विशेषज्ञता और क्षमता निर्माण
- AI-सक्षम उपकरणों के विकास, रखरखाव और उपयोग के लिए पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता है।
- विभिन्न हितधारकों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, को डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित करना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: कौशल विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पांडुलिपियों की भौतिक स्थिति | कई पांडुलिपियां जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं, जिनके संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए विशेष ध्यान और संसाधन चाहिए। |
| तकनीकी एकरूपता का अभाव | विभिन्न भाषाओं और लिपियों के लिए डिजिटलीकरण और मेटाडेटा मानकीकरण में एकरूपता बनाए रखना कठिन है। |
| पहुंच और कानूनी बाधाएं | संवेदनशील या अधिकार-संरक्षित पांडुलिपियों तक पहुंच को नियंत्रित करते हुए कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना। |
| डिजिटल डिवाइड | तकनीकी पहुंच और साक्षरता में असमानता के कारण सभी वर्गों तक ज्ञान भारतम मिशन का लाभ पहुंचाना एक चुनौती है। |
| AI मॉडल की सटीकता | लार्ज लैंग्वेज स्क्रिप्ट मॉडल (LLSM), OCR और HTR जैसे AI उपकरणों की विभिन्न लिपियों और भाषाओं में सटीकता सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- ज्ञान भारतम मिशन
आगे की राह
- पांडुलिपियों के भौतिक संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक रणनीति विकसित करना, जिसमें आधुनिक तकनीकों का उपयोग शामिल हो।
- डिजिटलीकरण प्रक्रिया के लिए मानकीकृत प्रोटोकॉल और मेटाडेटा मानकों को लागू करना, जिससे विभिन्न संग्रहों के बीच अंतर-संचालनीयता सुनिश्चित हो सके।
- AI-सक्षम उपकरणों की सटीकता और दक्षता में सुधार के लिए निरंतर अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना, विशेषकर कम प्रचलित भाषाओं और लिपियों के लिए।
- पांडुलिपियों के संरक्षकों, विद्वानों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच सहयोग को मजबूत करना ताकि ज्ञान और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान हो सके।
- डिजिटल साक्षरता और पहुंच को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम और प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित करना, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में।
- पांडुलिपियों तक पहुंच के संबंध में कानूनी और नैतिक दिशानिर्देशों को स्पष्ट करना, जिससे अधिकार धारकों के हितों की रक्षा हो सके और सार्वजनिक पहुंच भी सुनिश्चित हो।
- राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पांडुलिपि डिजिटलीकरण परियोजनाओं के साथ सहयोग करना ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं और प्रौद्योगिकियों को साझा किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (च)’, ‘note’: ‘समग्र संस्कृति की समृद्ध विरासत का महत्व’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (ज)’, ‘note’: ‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण और ज्ञानार्जन की भावना’}
अवधारणा प्रवाह
राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण का आरंभ → पांडुलिपि संग्रहों की पहचान और दस्तावेजीकरण → ज्ञान भारतम वेब पोर्टल का विकास → AI-सक्षम तकनीकों का एकीकरण (LLSM, OCR, HTR) → ज्ञान मित्रम और भारतीयजीपीटी द्वारा संवादात्मक AI → पांडुलिपि विरासत तक बुद्धिमत्तापूर्ण पहुंच और अन्वेषण → विद्वानों और आम जनता के लिए ज्ञान की सुलभता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. ज्ञान भारतम मिशन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इसका उद्देश्य देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पांडुलिपि संग्रहों की पहचान और दस्तावेजीकरण करना है।
2. मिशन के तहत पांडुलिपियों के सर्वेक्षण और वास्तविक पंजीकरण के लिए जिला-वार लक्ष्य निर्धारित किए गए थे।
3. ज्ञान भारतम वेब पोर्टल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम तकनीकों का उपयोग करता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि मिशन का उद्देश्य देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पांडुलिपि संग्रहों की पहचान और दस्तावेजीकरण करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि मिशन के तहत पांडुलिपियों के सर्वेक्षण और वास्तविक पंजीकरण के लिए कोई जिला-वार लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया था। कथन 3 सही है क्योंकि ज्ञान भारतम वेब पोर्टल भारत की पांडुलिपि विरासत तक बुद्धिमत्तापूर्ण पहुंच प्रदान करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम तकनीकों का उपयोग करता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी AI-सक्षम तकनीकें ज्ञान भारतम वेब पोर्टल द्वारा उपयोग की जाती हैं?
1. लार्ज लैंग्वेज स्क्रिप्ट मॉडल (LLSM)
2. ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR)
3. हैंडरिटेन टेक्स्ट रिकॉग्निशन (HTR)
4. मशीन-सहायता प्राप्त अनुवाद
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
उत्तर: केवल 1, 2, 3 और 4 — ज्ञान भारतम वेब पोर्टल लार्ज लैंग्वेज स्क्रिप्ट मॉडल (LLSM), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR), हैंडरिटेन टेक्स्ट रिकॉग्निशन (HTR), स्क्रिप्ट रिकॉग्निशन, सिमेंटिक सर्च और मशीन-सहायता प्राप्त अनुवाद सहित कई AI-सक्षम तकनीकों का उपयोग करता है। अतः सभी विकल्प सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ज्ञान भारतम मिशन भारत की समृद्ध पांडुलिपि विरासत के संरक्षण और पहुंच को कैसे सुगम बना रहा है? कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) इस मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, विस्तार से चर्चा करें। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में ज्ञान भारतम मिशन के उद्देश्यों और यह भारत की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण तथा पहुंच में कैसे योगदान दे रहा है, इसका उल्लेख करें। दूसरे भाग में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की विभिन्न तकनीकों जैसे LLSM, OCR, HTR, ज्ञान मित्रम, भारतीयजीपीटी और पांडुलिपि दर्पण का वर्णन करें और बताएं कि ये कैसे पांडुलिपियों की व्याख्या, प्रासंगिककरण, अन्वेषण और आम जनता तक पहुंच को बेहतर बना रही हैं। निष्कर्ष में, मिशन के व्यापक सांस्कृतिक और शैक्षिक महत्व पर प्रकाश डालें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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