27 Jul अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना: अवधि विस्तार 2026-27 तक, जानें पात्रता एवं लाभ
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास और रोजगार
- Prelims: अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), बेरोजगारी लाभ, सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), श्रम और रोजगार मंत्रालय
- Essay: भारत में सामाजिक सुरक्षा जाल का महत्व और चुनौतियाँ, आर्थिक अस्थिरता के दौर में श्रमिकों का कल्याण सुनिश्चित करना
त्वरित पुनरावृत्ति: अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) ESIC द्वारा संचालित एक सामाजिक सुरक्षा योजना है जो बीमित व्यक्तियों को बेरोजगारी की स्थिति में वित्तीय राहत प्रदान करती है, जिसका हाल ही में 30 जून, 2027 तक विस्तार किया गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) की अवधि को 1 जुलाई, 2026 से 30 जून, 2027 तक बढ़ा दिया है। यह विस्तार योजना के तहत बीमित व्यक्तियों को बेरोजगारी की स्थिति में वित्तीय सहायता प्रदान करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह जानकारी श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
पृष्ठभूमि
- भारत में असंगठित और संगठित दोनों क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है।
- कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 (Employees’ State Insurance Act, 1948) संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को बीमारी, मातृत्व, विकलांगता और मृत्यु जैसे विभिन्न आकस्मिकताओं के खिलाफ सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है।
- बेरोजगारी, विशेष रूप से आर्थिक मंदी या औद्योगिक पुनर्गठन के समय, श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाती है।
- ABVKY को बेरोजगारी के कारण आय के नुकसान को आंशिक रूप से प्रतिपूरित करने के लिए एक राहत उपाय के रूप में शुरू किया गया था।
- यह योजना ESIC के तहत कवर किए गए बीमित व्यक्तियों को वित्तीय सहायता प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाने का प्रयास करती है।
- योजना के तहत दावों के त्वरित निपटान के लिए ऑनलाइन आवेदन और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी प्रक्रियाएं अपनाई गई हैं।
अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) क्या है?
- अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) द्वारा कार्यान्वित की जाने वाली एक सामाजिक सुरक्षा योजना है।
- इसका उद्देश्य उन बीमित व्यक्तियों को नकद राहत प्रदान करना है जो अपनी नौकरी खो देते हैं और बेरोजगारी का सामना करते हैं।
- यह योजना ESIC अधिनियम, 1948 के तहत कवर किए गए श्रमिकों के लिए लागू है।
- पात्रता मानदंड के अनुसार, लाभार्थी को बेरोजगारी से ठीक पहले लगातार 12 महीने तक बीमायोग्य रोजगार में रहना चाहिए।
- बेरोजगारी से ठीक पहले के 12 महीनों में किसी एक पूर्ण योगदान अवधि में कम से कम 78 दिनों का योगदान किया हुआ होना चाहिए।
- बेरोजगारी कदाचार (misconduct), लॉकआउट, सेवानिवृत्ति (superannuation) या गलत बयान देने के कारण नहीं होनी चाहिए।
- दावों के निपटान में तेजी लाने के लिए ऑनलाइन आवेदन, प्रोसेसिंग और लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) की सुविधा प्रदान की जाती है।
- योजना का लक्ष्य आर्थिक झटकों के दौरान श्रमिकों को एक सुरक्षा जाल प्रदान करना है, जिससे उन्हें नई नौकरी खोजने के लिए समय मिल सके।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| योजना का नाम | अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) |
| अवधि विस्तार | 01 जुलाई 2026 से 30 जून 2027 तक |
| पात्रता मानदंड | बेरोज़गारी से ठीक पहले 12 महीने तक बीमायोग्य रोज़गार में होना और कम से कम 78 दिनों का योगदान |
| अपात्रता के कारण | कदाचार, लॉकआउट, सेवानिवृत्ति, या गलत बयानबाजी के कारण बेरोज़गारी |
| दावों का निपटान | ऑनलाइन सबमिशन, DBT, और नियमित निगरानी के माध्यम से त्वरित प्रक्रिया |
| कार्यान्वयन एजेंसी | कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) |
महत्व
सामाजिक सुरक्षा
- यह योजना संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को बेरोज़गारी की स्थिति में वित्तीय सहायता प्रदान करके सामाजिक सुरक्षा (Social Security) सुनिश्चित करती है।
- यह श्रमिकों को अनिश्चित आर्थिक परिस्थितियों से उत्पन्न होने वाले तनाव से बचाती है और उन्हें नए रोज़गार की तलाश के लिए समय देती है।
आर्थिक स्थिरता
- बेरोज़गारी लाभ प्रदान करके, यह योजना उपभोक्ता मांग को बनाए रखने में मदद करती है, जिससे अर्थव्यवस्था में मंदी के प्रभावों को कम किया जा सकता है।
- यह श्रमिकों के परिवारों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) को बनाए रखने में सहायक है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को समर्थन मिलता है।
श्रम बाजार में लचीलापन
- यह योजना श्रमिकों को नौकरी बदलने या कौशल उन्नयन (Skill Upgradation) के लिए प्रोत्साहित कर सकती है, क्योंकि उन्हें संक्रमण काल में वित्तीय सुरक्षा का आश्वासन होता है।
- यह श्रम बाजार में श्रमिकों की गतिशीलता (Mobility) को बढ़ा सकती है, जिससे वे बेहतर अवसरों की तलाश कर सकें।
शासन और पारदर्शिता
- दावों के ऑनलाइन सबमिशन, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और नियमित निगरानी से योजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता आती है।
- यह सुनिश्चित करता है कि पात्र लाभार्थियों को समय पर और सीधे लाभ मिलें, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है।
चुनौतियाँ
1. पात्रता मानदंड की जटिलता
- योजना के पात्रता मानदंड, जैसे कि 12 महीने का निरंतर बीमायोग्य रोज़गार और 78 दिनों का योगदान, कुछ श्रमिकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, विशेषकर उन लोगों के लिए जिनकी रोज़गार प्रकृति अस्थिर है।
- कदाचार या गलत बयानबाजी जैसे अपात्रता के कारण श्रमिकों के लिए भ्रम पैदा कर सकते हैं और उन्हें लाभ से वंचित कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कल्याणकारी योजनाएं
2. जागरूकता और पहुंच का अभाव
- संगठित क्षेत्र के कई श्रमिक, विशेषकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में, इस योजना और इसके लाभों के बारे में पूरी तरह से अवगत नहीं हो सकते हैं।
- ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया तक पहुंच और डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) की कमी भी कुछ संभावित लाभार्थियों के लिए बाधा बन सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: ई-गवर्नेंस, पारदर्शिता
3. वित्तीय स्थिरता और कवरेज
- योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या और भुगतान की गई राशि में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जो इसकी दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और व्यापक कवरेज पर सवाल उठाता है।
- ESIC के संसाधनों पर बढ़ती बेरोज़गारी के दबाव से योजना की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: संसाधन जुटाना
4. अनौपचारिक क्षेत्र का बहिष्करण
- यह योजना केवल संगठित क्षेत्र के बीमायोग्य कर्मचारियों को कवर करती है, जबकि भारत में एक बड़ा कार्यबल अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत है, जो इस तरह की सुरक्षा से वंचित रहता है।
- अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के लिए समान सामाजिक सुरक्षा जाल का अभाव एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कमजोर वर्ग
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| सीमित कवरेज | योजना केवल संगठित क्षेत्र के श्रमिकों तक सीमित है, जिससे अनौपचारिक क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा बाहर रह जाता है। |
| जटिल पात्रता | निरंतर रोज़गार और योगदान के मानदंड कुछ श्रमिकों के लिए लाभ प्राप्त करना मुश्किल बनाते हैं। |
| जागरूकता की कमी | संभावित लाभार्थियों के बीच योजना के बारे में जानकारी का अभाव इसकी पहुंच को सीमित करता है। |
| डिजिटल डिवाइड | ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया डिजिटल रूप से निरक्षर या कम पहुंच वाले श्रमिकों के लिए बाधा बन सकती है। |
| वित्तीय स्थिरता | लाभार्थियों की बढ़ती संख्या के साथ ESIC पर वित्तीय बोझ बढ़ने की संभावना है। |
| दुरुपयोग की संभावना | गलत बयानबाजी या कदाचार के माध्यम से लाभ प्राप्त करने के प्रयासों को रोकना एक चुनौती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY)
आगे की राह
- योजना के पात्रता मानदंडों को सरल बनाना और उन्हें अधिक समावेशी बनाना, विशेषकर अस्थिर रोज़गार वाले श्रमिकों के लिए।
- योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाना, जिसमें क्षेत्रीय भाषाओं और विभिन्न मीडिया माध्यमों का उपयोग हो।
- डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में सहायता के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) जैसे माध्यमों का उपयोग करना।
- अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के लिए भी समान सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की व्यवहार्यता का अध्ययन करना और उन्हें लागू करने पर विचार करना।
- ESIC की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए योगदान दरों की समीक्षा करना और वैकल्पिक वित्तपोषण तंत्रों का पता लगाना।
- दावों के निपटान की प्रक्रिया को और अधिक सुव्यवस्थित और समयबद्ध बनाना, ताकि लाभार्थियों को त्वरित सहायता मिल सके।
- योजना के प्रभावों का नियमित मूल्यांकन करना और आवश्यकतानुसार नीतिगत समायोजन करना ताकि यह अपने उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से पूरा कर सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना · कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) · सामाजिक सुरक्षा · बेरोज़गारी भत्ता · प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) · श्रम और रोजगार मंत्रालय · बीमायोग्य रोजगार · कल्याणकारी योजनाएँ · श्रमिक कल्याण · आर्थिक सुरक्षा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39 (क)’, ‘note’: ‘नागरिकों को आजीविका के पर्याप्त साधन का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘बेरोज़गारी की दशा में सहायता पाने का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘श्रमिकों के लिए निर्वाह मज़दूरी आदि’}
अवधारणा प्रवाह
बीमायोग्य रोज़गार में योगदान → अचानक बेरोज़गारी का सामना → अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना के लिए आवेदन → पात्रता मानदंडों की ESIC द्वारा जांच → डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से वित्तीय सहायता → बेरोज़गारी के दौरान वित्तीय सुरक्षा प्रदान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल उन व्यक्तियों के लिए है जो स्वेच्छा से अपना रोजगार छोड़ देते हैं।
2. लाभार्थी को बेरोजगारी से ठीक पहले निरंतर 12 महीने तक बीमायोग्य रोजगार में रहना चाहिए।
3. इस योजना के तहत लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से हस्तांतरित किए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि यह योजना कदाचार, लॉकआउट या सेवानिवृत्ति के कारण हुई बेरोजगारी पर लागू नहीं होती। कथन 2 और 3 सही हैं, क्योंकि योजना के लिए 12 महीने का बीमायोग्य रोजगार और DBT के माध्यम से लाभ का भुगतान आवश्यक है।
Q2. कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) निम्नलिखित में से किस मंत्रालय के अधीन कार्य करता है?
- वित्त मंत्रालय
- गृह मंत्रालय
- श्रम और रोजगार मंत्रालय
- स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
उत्तर: श्रम और रोजगार मंत्रालय — कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है, जो भारतीय श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य बीमा प्रदान करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) का विस्तार भारत में सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत करने में किस प्रकार सहायक है? इस योजना के प्रमुख उद्देश्यों और पात्रता मानदंडों पर चर्चा करते हुए, इसके क्रियान्वयन में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, ABVKY के विस्तार को सामाजिक सुरक्षा जाल से जोड़ते हुए इसके महत्व को रेखांकित करें। दूसरे भाग में, योजना के उद्देश्यों और पात्रता मानदंडों को विस्तार से समझाएँ। अंत में, DBT के माध्यम से योजना के क्रियान्वयन में दक्षता और पारदर्शिता पर प्रकाश डालते हुए इसकी भूमिका का विश्लेषण करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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