संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान: पंचायत क्षमता निर्माण की नई दिशा

संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान: पंचायत क्षमता निर्माण की नई दिशा

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान, पंचायती राज, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध  |  GS Paper III — आर्थिक विकास, समावेशी विकास
  • Prelims: राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA), पंचायती राज संस्थाएँ (PRI), 73वां संविधान संशोधन अधिनियम, ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP), स्थानीय स्वशासन, केंद्र प्रायोजित योजना, सतत विकास लक्ष्य (SDGs), पंचायती राज मंत्रालय
  • Essay: भारत में स्थानीय स्वशासन का महत्व और चुनौतियाँ, ग्रामीण विकास में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) पंचायती राज मंत्रालय की एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका लक्ष्य पंचायती राज संस्थाओं की शासन क्षमताओं का निर्माण करना और उन्हें सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के स्थानीयकरण में सक्षम बनाना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

पंचायती राज मंत्रालय ने संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के तहत राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को मजबूत करने के प्रयासों पर नवीनतम जानकारी जारी की है। यह जानकारी योजना के तहत प्रशिक्षित प्रतिभागियों की संख्या, जारी की गई धनराशि और ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) के निर्माण में हुई प्रगति पर केंद्रित है। इस योजना का बाह्य मूल्यांकन भी किया गया है, जिसने इसकी प्रभावशीलता और स्थानीय शासन में सुधार को उजागर किया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में पंचायती राज संस्थाएँ (PRIs) स्थानीय स्वशासन की रीढ़ हैं, जिन्हें 73वें संविधान संशोधन अधिनियम (1992) के माध्यम से संवैधानिक दर्जा दिया गया था।
  • संविधान के अनुच्छेद 243-G के तहत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाओं को तैयार करने और लागू करने की शक्ति दी गई है।
  • पंचायती राज ‘राज्य का विषय’ है, जिसका अर्थ है कि राज्यों को पंचायतों से संबंधित कानून बनाने और उन्हें लागू करने का अधिकार है।
  • केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राज्यों को पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने में सहायता करती है, जिसमें राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान भी शामिल है।
  • RGSA का उद्देश्य पंचायतों की क्षमता निर्माण और उन्हें सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के स्थानीयकरण में सक्षम बनाना है।
  • हाल ही में, ग्रामीण प्रबंधन संस्थान, आनंद (IRMA) द्वारा संशोधित RGSA का बाह्य मूल्यांकन किया गया, जिसने योजना की सफलता पर प्रकाश डाला है।

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) क्या है?

  • राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) पंचायती राज मंत्रालय की एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे वित्तीय वर्ष 2022-23 से लागू किया जा रहा है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) की शासन क्षमताओं को विकसित करना है ताकि वे ग्रामीण स्थानीय स्वशासन के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त कर सकें।
  • यह योजना निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत पदाधिकारियों सहित विभिन्न हितधारकों के क्षमता निर्माण पर केंद्रित है, जिसमें प्रशिक्षण, एक्सपोजर दौरे और डिजिटल शिक्षण शामिल हैं।
  • RGSA पंचायतों को ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ (GPDP) तैयार करने में सहायता करता है, जो स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं पर आधारित होती हैं।
  • यह योजना डिजिटल शासन को बढ़ावा देती है और पंचायतों में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के उपयोग को प्रोत्साहित करती है।
  • RGSA का लक्ष्य पंचायतों की वित्तीय प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ाना और नागरिकों की भागीदारी को सुनिश्चित करना है।
  • यह योजना पंचायतों को ‘सबका साथ, सबका गाँव, सबका विकास’ के दृष्टिकोण के साथ सशक्त बनाने का प्रयास करती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
केंद्र प्रायोजित योजना पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार का वित्तीय और नीतिगत समर्थन सुनिश्चित करता है।
क्षमता निर्माण पर ध्यान निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत पदाधिकारियों के कौशल और ज्ञान को बढ़ाता है, जिससे स्थानीय शासन में सुधार होता है।
बहु-स्तरीय प्रशिक्षण कक्षा-आधारित मॉड्यूल, एक्सपोज़र दौरे और डिजिटल शिक्षण के माध्यम से व्यापक कौशल विकास सुनिश्चित करता है।
ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) तैयारी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सहभागी और समावेशी विकास योजनाओं को बढ़ावा देता है।
डिजिटल शासन और वित्तीय प्रबंधन पंचायतों में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ाता है।
सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का स्थानीयकरण वैश्विक विकास लक्ष्यों को स्थानीय स्तर पर प्राप्त करने में पंचायतों की भूमिका को सशक्त बनाता है।

महत्व

शासन और प्रशासन

  • पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को सशक्त कर जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करता है।
  • स्थानीय स्वशासन को प्रभावी बनाकर नागरिकों की भागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
  • प्रशिक्षण के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों की निर्णय लेने की क्षमता और कार्यान्वयन कौशल में वृद्धि करता है।

सामाजिक-आर्थिक विकास

  • ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) के माध्यम से स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास को बढ़ावा देता है।
  • सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के स्थानीयकरण में सहायता करता है, जिससे समावेशी और न्यायसंगत विकास संभव होता है।
  • डिजिटल शासन और वित्तीय प्रबंधन में सुधार कर विकास परियोजनाओं के कुशल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करता है।

संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध

  • स्थानीय स्वशासन राज्य का विषय होने के बावजूद, केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में केंद्र सरकार का समर्थन राज्यों को पंचायती राज प्रणाली को मजबूत करने में मदद करता है।
  • राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को धनराशि जारी करने से स्थानीय स्तर पर विकास पहलों के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता मिलती है।

चुनौतियाँ

1. क्षमता निर्माण की गुणवत्ता और पहुंच

  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता और सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना एक चुनौती है, विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों में।
  • प्रशिक्षण के बाद ज्ञान और कौशल को वास्तविक कार्य में बदलने की क्षमता भिन्न हो सकती है।

2. वित्तीय स्वायत्तता का अभाव

  • पंचायतों की वित्तीय निर्भरता अभी भी केंद्र और राज्य सरकारों पर अधिक है, जिससे उनकी स्वायत्तता प्रभावित होती है।
  • राज्यों द्वारा पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन और कार्यों का हस्तांतरण एक सतत चुनौती है।

3. मानव संसाधन की कमी

  • पंचायतों में तकनीकी और प्रशासनिक कर्मचारियों की कमी प्रभावी योजना और कार्यान्वयन में बाधा डालती है।
  • प्रशिक्षित प्रतिनिधियों के कार्यकाल के बाद नए प्रतिनिधियों के लिए निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।

4. योजना और कार्यान्वयन में भागीदारी

  • ग्राम सभाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना और ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) को वास्तव में सहभागी बनाना एक चुनौती है।
  • योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
प्रशिक्षण की निरंतरता नए निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए नियमित और अद्यतन प्रशिक्षण सुनिश्चित करना।
वित्तीय हस्तांतरण राज्यों द्वारा पंचायतों को पर्याप्त और समय पर धनराशि का हस्तांतरण सुनिश्चित करना।
तकनीकी सहायता डिजिटल शासन और ई-ग्राम स्वराज प्लेटफॉर्म के उपयोग के लिए तकनीकी सहायता और बुनियादी ढांचे की उपलब्धता।
क्षमता मूल्यांकन प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता का निरंतर मूल्यांकन और सुधारात्मक उपायों को लागू करना।
जनभागीदारी ग्राम सभाओं और स्थानीय समुदायों की विकास योजनाओं में सक्रिय और सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करना।
समन्वय का अभाव विभिन्न सरकारी विभागों और पंचायती राज संस्थाओं के बीच समन्वय की कमी।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA)
  • जन योजना अभियान

आगे की राह

  • क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को और अधिक लक्षित, मॉड्यूलर और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना चाहिए।
  • डिजिटल शिक्षण प्लेटफॉर्म का विस्तार किया जाना चाहिए ताकि दूरस्थ क्षेत्रों तक प्रशिक्षण की पहुंच सुनिश्चित हो सके।
  • पंचायतों की वित्तीय स्वायत्तता बढ़ाने के लिए 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।
  • ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) प्रक्रिया में ग्राम सभाओं की सक्रिय और सार्थक भागीदारी को बढ़ावा देना चाहिए।
  • पंचायतों में तकनीकी और प्रशासनिक कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए राज्यों को सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
  • प्रशिक्षण के बाद के मूल्यांकन तंत्र को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके और आवश्यक सुधार किए जा सकें।
  • पंचायती राज संस्थाओं को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के स्थानीयकरण के लिए आवश्यक उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान · पंचायती राज संस्थाएँ · स्थानीय स्वशासन · क्षमता निर्माण · सतत विकास लक्ष्य · ग्राम पंचायत विकास योजना · जन योजना अभियान · वित्तीय प्रबंधन · डिजिटल शासन · विकेंद्रीकरण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 40’, ‘note’: ‘ग्राम पंचायतों का संगठन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243’, ‘note’: ‘पंचायतों की परिभाषा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243H’, ‘note’: ‘पंचायतों द्वारा कर अधिरोपित करने की शक्ति’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243I’, ‘note’: ‘राज्य वित्त आयोग का गठन’}
  • {‘article’: ‘ग्यारहवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘पंचायतों के 29 कार्यात्मक विषय’}

अवधारणा प्रवाह

संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) का कार्यान्वयन  →  निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत पदाधिकारियों का क्षमता निर्माण  →  पंचायत संचालन, योजना और कार्यान्वयन में सुधार  →  ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) का प्रभावी निर्माण  →  स्थानीय शासन में सुधार और नागरिकों की भागीदारी में वृद्धि  →  सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का स्थानीयकरण और उपलब्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह पंचायती राज मंत्रालय की एक केंद्र प्रायोजित योजना है।
2. यह योजना केवल ग्राम पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के क्षमता निर्माण पर केंद्रित है।
3. स्थानीय स्वशासन होने के कारण पंचायतें राज्य सूची का विषय हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि RGSA पंचायती राज मंत्रालय की केंद्र प्रायोजित योजना है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह योजना निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत पदाधिकारियों दोनों के क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। कथन 3 सही है क्योंकि ‘स्थानीय स्वशासन’ राज्य सूची का विषय है।

Q2. संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के उद्देश्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) की शासन क्षमता को बढ़ाना।
2. ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) तैयार करने में पंचायतों की सहायता करना।
3. सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के स्थानीयकरण में योगदान देना।
4. पंचायतों में डिजिटल शासन को बढ़ावा देना।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी चार

उत्तर: सभी चार — संशोधित RGSA का उद्देश्य पंचायत संचालन, योजना और कार्यान्वयन (GPDP सहित), डिजिटल शासन, नागरिकों की भागीदारी और वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्रों में PRIs की क्षमताओं को बढ़ाना है, जो SDGs के स्थानीयकरण में सहायक है। अतः सभी चार कथन सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को सशक्त बनाने और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के स्थानीयकरण में किस प्रकार सहायक है? चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, RGSA के उद्देश्यों और क्षमता निर्माण के विभिन्न आयामों (जैसे संरचित योजना, बहु-स्तरीय प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षण) पर प्रकाश डालें, जो PRIs के संचालन, योजना और कार्यान्वयन क्षमताओं को बढ़ाते हैं। दूसरे भाग में, GPDP तैयार करने में RGSA की भूमिका और इसके माध्यम से नागरिकों की भागीदारी तथा वित्तीय प्रबंधन में सुधार पर चर्चा करें, जो अंततः SDGs के स्थानीयकरण में योगदान देता है। निष्कर्ष में, स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने में RGSA के महत्व को संक्षेप में प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment