सरकार संसद में पारित करेगी एफसीआरए और जन्म-मृत्यु पंजीकरण विधेयक, विपक्ष से टकराव की आशंका

सरकार संसद में पारित करेगी एफसीआरए और जन्म-मृत्यु पंजीकरण विधेयक, विपक्ष से टकराव की आशंका — Key bills and parliamentary disruptions timeline

सरकार संसद में पारित करेगी एफसीआरए और जन्म-मृत्यु पंजीकरण विधेयक, विपक्ष से टकराव की आशंका

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान, संसद और राज्य विधायिका — संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय  |  GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय
  • Prelims: FCRA अधिनियम, 2010, विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, संसदीय गतिरोध, लोकसभा, राज्यसभा
  • Essay: भारतीय लोकतंत्र में विधायी प्रक्रिया की चुनौतियाँ और समाधान, संसदीय वाद-विवाद और राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) भारत में विदेशी चंदे के प्रवाह को नियंत्रित करने वाला एक महत्वपूर्ण कानून है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखना है, और इसमें प्रस्तावित संशोधन इसके प्रावधानों को और अधिक सख्त बना सकते हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

सरकार का लक्ष्य संसद के वर्तमान सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करना है, जिनमें जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक तथा विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक प्रमुख हैं। यह प्रयास ऐसे समय में हो रहा है जब विपक्षी दलों द्वारा विभिन्न मुद्दों पर विरोध प्रदर्शनों के कारण संसदीय कार्यवाही में लगातार व्यवधान आ रहा है, जिससे विधायी कार्यों में गतिरोध की आशंका बढ़ गई है। सरकार इन विधेयकों को पारित करने के लिए प्रयासरत है, जबकि विपक्ष छात्रों पर बल प्रयोग जैसे मुद्दों पर गृह मंत्री के बयान और माफी की मांग कर रहा है।

पृष्ठभूमि

  • विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस, छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान बल प्रयोग के मुद्दे पर सरकार से स्पष्टीकरण और माफी की मांग कर रहे हैं, जिससे संसद के दोनों सदनों में गतिरोध बना हुआ है।
  • सरकार का तर्क है कि विपक्ष सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहा है और महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने में रचनात्मक भूमिका नहीं निभा रहा है।
  • विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) भारत में विदेशी चंदे के प्रवाह को नियंत्रित करने वाला एक महत्वपूर्ण कानून है, और इसमें प्रस्तावित संशोधन इसके प्रावधानों को और अधिक सख्त बना सकते हैं।
  • जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक का उद्देश्य विलंबित पंजीकरण के लिए सख्त अनुपालन और ढाँचे स्थापित करना है, जिससे डेटा संग्रह और नागरिक सेवाओं में सुधार हो सके।
  • संसदीय गतिरोध भारतीय लोकतंत्र के लिए एक आवर्ती चुनौती रही है, जो विधायी उत्पादकता और शासन को प्रभावित करती है।

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) क्या है?

  • विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) भारत में विदेशी चंदे की प्राप्ति और उपयोग को विनियमित करने के लिए बनाया गया एक कानून है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन का उपयोग भारत की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली गतिविधियों के लिए न हो।
  • यह अधिनियम गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) द्वारा प्रशासित किया जाता है।
  • FCRA के तहत, किसी भी संघ, समूह या गैर-सरकारी संगठन (NGO) को विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
  • पंजीकृत संगठनों को विदेशी चंदे के उपयोग और प्राप्ति के संबंध में वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है।
  • अधिनियम में ऐसे व्यक्तियों और संगठनों की पहचान की गई है जो विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए पात्र नहीं हैं, जैसे कि चुनाव के उम्मीदवार, न्यायाधीश, सरकारी कर्मचारी और राजनीतिक दल।
  • FCRA में संशोधन समय-समय पर किए जाते रहे हैं ताकि विदेशी चंदे के प्रवाह को और अधिक प्रभावी ढंग से विनियमित किया जा सके और पारदर्शिता बढ़ाई जा सके।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण के लिए कड़े अनुपालन और ढाँचे स्थापित करना।
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA) विदेशी अंशदान के विनियमन से संबंधित प्रावधानों को अद्यतन करना और स्पष्ट करना।
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेपर लीक जैसे अनुचित साधनों के लिए कठोर दंड का प्रावधान करना।
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक राष्ट्रीय प्रतीकों और सम्मान के अपमान को रोकने के लिए मौजूदा कानून में संशोधन।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 MSME क्षेत्र के विकास और विनियमन को बढ़ावा देना।

महत्व

शासन और पारदर्शिता

  • जन्म और मृत्यु पंजीकरण में सुधार से नागरिक डेटा प्रबंधन में सटीकता और पारदर्शिता बढ़ेगी, जो विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
  • FCRA संशोधन विदेशी निधियों के प्रवाह को विनियमित करने और उनके उपयोग में जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद करेंगे, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता बनी रहेगी।

सामाजिक न्याय और शिक्षा

  • सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने और योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए पेपर लीक को रोकने में महत्वपूर्ण है।
  • यह विधेयक उन छात्रों के लिए न्याय सुनिश्चित करेगा जो अनुचित साधनों के कारण प्रभावित होते हैं, जिससे शिक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल होगा।

आर्थिक विकास

  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 MSME क्षेत्र को मजबूत करेगा, जो रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) के लिए महत्वपूर्ण है।
  • यह विधेयक MSME को व्यापार करने में आसानी प्रदान करके और उनके विकास को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकता है।

राष्ट्रीय सम्मान

  • राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक राष्ट्रीय प्रतीकों और सम्मान की रक्षा करेगा, जिससे नागरिकों में देशभक्ति और राष्ट्रीय पहचान की भावना मजबूत होगी।

चुनौतियाँ

1. संसदीय गतिरोध

  • विपक्ष और सरकार के बीच लगातार गतिरोध के कारण महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने में देरी हो सकती है।
  • संसदीय कार्यवाही में व्यवधान से विधायी कार्य प्रभावित होते हैं और सार्वजनिक धन का अपव्यय होता है।

2. छात्र विरोध प्रदर्शन और बल प्रयोग

  • पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के विरोध प्रदर्शनों पर बल प्रयोग से सरकार और युवाओं के बीच अविश्वास पैदा हो सकता है।
  • यह मुद्दा कानून और व्यवस्था तथा नागरिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर सवाल उठाता है।

3. विधेयकों पर आम सहमति का अभाव

  • विधेयकों के कुछ प्रावधानों पर विपक्ष की आपत्तियों के कारण उन्हें पारित करने में कठिनाई हो सकती है, खासकर FCRA जैसे संवेदनशील विधेयकों पर।
  • आम सहमति के अभाव में विधेयकों की गुणवत्ता और प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है।

4. कानूनी और संवैधानिक चुनौतियाँ

  • कुछ विधेयकों के प्रावधानों को कानूनी या संवैधानिक आधार पर चुनौती दी जा सकती है, जिससे उनके कार्यान्वयन में बाधा आ सकती है।
  • उदाहरण के लिए, FCRA संशोधन नागरिक समाज संगठनों की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
संसदीय व्यवधान महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने में देरी, विधायी कार्य में बाधा।
छात्रों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का हनन, सरकार और छात्रों के बीच अविश्वास।
विपक्षी दलों की आपत्तियाँ विधेयकों पर आम सहमति का अभाव, कानून की गुणवत्ता पर प्रभाव।
FCRA प्रावधानों पर गलत धारणाएँ नागरिक समाज संगठनों की स्वतंत्रता और विदेशी धन के उपयोग पर संभावित प्रभाव।
सरकार-विपक्ष गतिरोध संसदीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव, जनहित के मुद्दों पर ध्यान भटकाना।

आगे की राह

  • संसदीय कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकार और विपक्ष के बीच रचनात्मक संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
  • महत्वपूर्ण विधेयकों पर व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श के लिए संसदीय समितियों का अधिक उपयोग किया जाना चाहिए।
  • विरोध प्रदर्शनों के दौरान बल प्रयोग से बचना चाहिए और छात्रों की चिंताओं को शांतिपूर्ण ढंग से संबोधित करने के लिए संवाद के रास्ते खुले रखने चाहिए।
  • विधेयकों के प्रावधानों के बारे में गलत धारणाओं को दूर करने के लिए सरकार को हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना चाहिए और स्पष्टीकरण प्रदान करना चाहिए।
  • विधायी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
  • विधेयकों को पारित करते समय संवैधानिक मूल्यों और मौलिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

संसदीय गतिरोध · विधेयक पारित करना · FCRA संशोधन · लोकतांत्रिक प्रक्रिया · सरकार-विपक्ष संबंध · कानून निर्माण · जन्म और मृत्यु पंजीकरण · सार्वजनिक परीक्षा विधेयक · राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण · सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 107: विधेयकों को पुरःस्थापित और पारित किए जाने के संबंध में
  • अनुच्छेद 108: कुछ दशाओं में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक
  • अनुच्छेद 118: प्रक्रिया के नियम
  • अनुच्छेद 122: न्यायालयों द्वारा संसद की कार्यवाहियों की जाँच न किया जाना
  • अनुच्छेद 19: वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में)

अवधारणा प्रवाह

संसदीय सत्र में महत्वपूर्ण विधेयकों का परिचय  →  विपक्ष द्वारा विभिन्न मुद्दों पर विरोध और व्यवधान  →  संसदीय गतिरोध के कारण विधेयकों के पारित होने में देरी  →  सरकार द्वारा विधेयकों को पारित करने का प्रयास  →  विधायी प्रक्रिया और कानून निर्माण पर प्रभाव

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) का प्राथमिक उद्देश्य विदेशी अंशदानों के उपयोग को विनियमित करना है ताकि राष्ट्रीय हित पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
2. FCRA के तहत, कोई भी राजनीतिक दल विदेशी अंशदान प्राप्त नहीं कर सकता है।
3. FCRA गृह मंत्रालय के अधीन आता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। FCRA का मुख्य उद्देश्य विदेशी अंशदानों के उपयोग को विनियमित करना है, विशेषकर उन संगठनों द्वारा जो भारत के राष्ट्रीय हित पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। कथन 2 सही नहीं है। FCRA की धारा 3 के तहत, राजनीतिक दल, विधायक, न्यायाधीश और सरकारी कर्मचारी विदेशी अंशदान स्वीकार नहीं कर सकते, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में राजनीतिक दलों को छूट मिल सकती है। कथन 3 सही है। FCRA का प्रशासन गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) द्वारा किया जाता है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा विधेयक हाल ही में लोकसभा में ध्वनि मत से पारित किया गया है?

  1. विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026
  2. जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक
  3. सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026
  4. राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक

उत्तर: सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 — समाचार के अनुसार, सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को लोकसभा में ध्वनि मत से पारित किया गया था।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ संसदीय गतिरोध भारतीय लोकतंत्र के समक्ष एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करता है, जो कानून निर्माण प्रक्रिया और शासन को प्रभावित करता है। इस कथन के आलोक में, हालिया संसदीय सत्रों में गतिरोध के कारणों का विश्लेषण कीजिए और इसे कम करने के लिए संभावित उपायों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** संसदीय गतिरोध की संक्षिप्त परिभाषा और भारतीय लोकतंत्र पर इसके प्रभावों का उल्लेख।
2. **गतिरोध के कारण:**
* **राजनीतिक ध्रुवीकरण:** सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ती खाई।
* **विपक्ष की रणनीति:** सरकार पर दबाव बनाने के लिए व्यवधान को एक उपकरण के रूप में उपयोग करना।
* **सरकारी रवैया:** विपक्ष को पर्याप्त स्थान न देना या महत्वपूर्ण विधेयकों पर सर्वसम्मति बनाने में विफल रहना।
* **नियमों का उल्लंघन:** संसदीय प्रक्रियाओं और नियमों का पालन न करना।
* **महत्वपूर्ण मुद्दों पर असहमति:** जैसे कि हाल ही में पेपर लीक और छात्रों पर बल प्रयोग का मुद्दा।
* **मीडिया की भूमिका:** सनसनीखेज रिपोर्टिंग जो गतिरोध को बढ़ा सकती है।
3. **प्रभाव:**
* कानून निर्माण में देरी या बाधा (जैसे FCRA, जन्म और मृत्यु पंजीकरण विधेयक)।
* सार्वजनिक धन और समय की बर्बादी।
* संसद की गरिमा और प्रभावशीलता में कमी।
* जनता का लोकतांत्रिक संस्थानों में विश्वास कम होना।
4. **संभावित उपाय:**
* **संसदीय संवाद:** सरकार और विपक्ष के बीच नियमित और सार्थक बातचीत।
* **नियमों का सख्ती से पालन:** पीठासीन अधिकारियों द्वारा नियमों को लागू करना।
* **विपक्ष को शामिल करना:** महत्वपूर्ण विधेयकों पर समितियों में चर्चा और आम सहमति बनाने का प्रयास।
* **व्यवधान के लिए दंड:** व्यवधान डालने वाले सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई।
* **संसदीय समितियों का सशक्तिकरण:** विधेयकों की गहन जांच के लिए।
* **’ज़ीरो ऑवर’ और ‘प्रश्नकाल’ का प्रभावी उपयोग:** महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने के लिए।
5. **निष्कर्ष:** एक स्वस्थ और कार्यात्मक संसद के महत्व पर जोर देते हुए, गतिरोध को दूर करने के लिए सभी हितधारकों की सामूहिक जिम्मेदारी पर बल।

स्रोत: Hindustan Times


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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