एनजीटी ने फोर्ट कोच्चि प्रदूषण पर एलएसजीडी की रिपोर्ट पर असंतोष व्यक्त किया, जानिए पूरा मामला

एनजीटी ने फोर्ट कोच्चि प्रदूषण पर एलएसजीडी की रिपोर्ट पर असंतोष व्यक्त किया, जानिए पूरा मामला

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू  |  GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी, प्रदूषण तथा अवक्रमण
  • Prelims: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, जल प्रदूषण, तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ), स्थानीय स्वशासन, सतत पर्यटन
  • Essay: पर्यावरण संरक्षण और विकास: संतुलन की चुनौती, भारत में न्यायिक सक्रियता और शासन में उसकी भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) पर्यावरण संरक्षण से संबंधित मामलों के त्वरित और प्रभावी निपटान के लिए स्थापित एक विशेष न्यायिक निकाय है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर कार्य करता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने केरल के फोर्ट कोच्चि के तटीय क्षेत्रों में प्रदूषण के संबंध में स्थानीय स्वशासन विभाग (LSGD) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर असंतोष व्यक्त किया है। अधिकरण ने विभाग को एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, जिसमें प्रत्येक संबंधित प्राधिकरण की कार्ययोजना, उठाए गए कदम और भविष्य की रणनीतियों का स्पष्ट उल्लेख हो। यह मामला तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर करता है।

पृष्ठभूमि

  • फोर्ट कोच्चि, केरल का एक ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल है, जो अपनी बैकवाटर और तटीय सुंदरता के लिए जाना जाता है।
  • इस क्षेत्र में बढ़ता प्रदूषण, विशेषकर समुद्री कचरा, शैवाल जमाव और मिश्रित मलबा, पर्यटन क्षमता और स्थानीय पारिस्थितिकी को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।
  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने पहले स्थानीय स्वशासन विभाग, केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एर्नाकुलम जिला कलेक्टर को प्रदूषण नियंत्रण के लिए आधुनिक उपकरणों के उपयोग पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
  • विभाग द्वारा प्रस्तुत पिछली रिपोर्ट में प्रत्येक प्राधिकरण के लिए विशिष्ट कार्य योजना और कार्यान्वित किए जा रहे उपायों का विवरण नहीं था, जिससे NGT असंतुष्ट था।
  • सरकार फोर्ट कोच्चि समुद्र तट के कायाकल्प और सौंदर्यीकरण के लिए एक दीर्घकालिक योजना पर विचार कर रही है, जिसमें सतत पर्यटन सिद्धांतों को शामिल किया जाएगा।
  • प्रदूषण नियंत्रण के लिए मशीनीकृत और हस्त-चालित रेत सफाई मशीनों, स्टील डिब्बे और बोतल बूथों की स्थापना जैसे उपाय प्रस्तावित किए गए हैं।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) क्या है?

  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत की गई थी।
  • यह पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटान के लिए स्थापित एक विशेष निकाय है।
  • NGT पर्यावरण संबंधी कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन और व्यक्तियों तथा संपत्ति को हुए नुकसान के लिए राहत एवं मुआवजा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • यह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 द्वारा निर्धारित प्रक्रिया से बाध्य नहीं है, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होता है।
  • NGT के पास अपील सुनने और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974, वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 सहित विभिन्न पर्यावरण कानूनों के तहत आदेश पारित करने की शक्ति है।
  • इसके निर्णय उच्च न्यायालय के निर्णयों के समान होते हैं और इसके निर्णयों के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है।
  • NGT का मुख्यालय नई दिल्ली में है और इसके चार क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल, पुणे, कोलकाता और चेन्नई में स्थित हैं।
  • यह भारत में पर्यावरण न्याय के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संस्था है, जो प्रदूषण नियंत्रण और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
तटीय प्रदूषण फोर्ट कोच्चि के बैकवाटर और तटीय क्षेत्रों में अपशिष्ट पदार्थों का जमाव पर्यटन और पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है।
NGT का हस्तक्षेप राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने और संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
स्थानीय स्वशासन विभाग की रिपोर्ट विभाग द्वारा प्रस्तुत कार्य-योजना रिपोर्ट को NGT ने अपूर्ण पाया, जिसमें प्रत्येक प्राधिकरण के लिए विशिष्ट कार्य-योजना और कार्यान्वित उपायों का अभाव था।
दीर्घकालिक योजनाएँ फोर्ट कोच्चि समुद्र तट के कायाकल्प और सौंदर्यीकरण के लिए सतत पर्यटन सिद्धांतों को शामिल करते हुए दीर्घकालिक योजनाएँ विचाराधीन हैं।
आधुनिक उपकरण समुद्र-जनित कचरे और तैरते हुए मलबे को हटाने के लिए मशीनीकृत रेत सफाई मशीनों, सी-बिन और उभयचर अपशिष्ट हटाने प्रणालियों की तैनाती पर विचार किया जा रहा है।

महत्व

पर्यावरण संरक्षण

  • यह मामला तटीय पारिस्थितिकी तंत्र (Coastal Ecosystem) और समुद्री जीवन की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है।
  • NGT का हस्तक्षेप यह सुनिश्चित करता है कि पर्यावरण नियमों का पालन किया जाए और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपाय किए जाएं।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था

  • स्वच्छ तटीय क्षेत्र पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होता है और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
  • प्रदूषण का सीधा नकारात्मक प्रभाव पर्यटन क्षमता और क्षेत्र की आर्थिक संवृद्धि पर पड़ता है।

शासन और जवाबदेही

  • NGT का निर्देश स्थानीय स्वशासन (Local Self-Government) निकायों और अन्य संबंधित प्राधिकरणों की जवाबदेही को बढ़ाता है।
  • यह अंतर-विभागीय समन्वय और ठोस कार्य-योजनाओं के महत्व पर प्रकाश डालता है।

सतत विकास

  • यह घटना सतत विकास (Sustainable Development) लक्ष्यों, विशेषकर स्वच्छ जल और स्वच्छता, तथा सतत शहरों और समुदायों से संबंधित लक्ष्यों को प्राप्त करने की आवश्यकता पर बल देती है।
  • दीर्घकालिक योजनाएँ सतत पर्यटन सिद्धांतों को एकीकृत करने का प्रयास करती हैं, जो पर्यावरण और आर्थिक लाभों के बीच संतुलन स्थापित करता है।

चुनौतियाँ

1. अंतर-विभागीय समन्वय का अभाव

  • विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय की कमी से कार्य-योजनाओं के कार्यान्वयन में देरी होती है।
  • प्रत्येक प्राधिकरण की भूमिका और जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण न होना समस्या को और जटिल बनाता है।

2. अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियाँ

  • समुद्र-जनित कचरे, शैवाल जमाव और मिश्रित मलबे का प्रभावी ढंग से निपटान करना एक बड़ी चुनौती है, खासकर मानसून के मौसम में।
  • आधुनिक उपकरणों की तैनाती और उनके रखरखाव के लिए पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञता की आवश्यकता है।

3. योजना और कार्यान्वयन का अंतर

  • दीर्घकालिक योजनाओं का मसौदा तैयार करना एक बात है, लेकिन उन्हें समयबद्ध तरीके से और प्रभावी ढंग से लागू करना दूसरी बात है।
  • योजनाओं में विशिष्ट कार्य-योजनाओं, समय-सीमाओं और प्रगति की निगरानी के तंत्र का अभाव कार्यान्वयन में बाधा डालता है।

4. वित्तीय और तकनीकी संसाधन

  • समुद्र तट के कायाकल्प, सौंदर्यीकरण और आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों की स्थापना के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है।
  • IIT/NIT जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों की तकनीकी सहायता और व्यवहार्यता अध्ययन के लिए भी संसाधनों की आवश्यकता होती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अपूर्ण रिपोर्ट स्थानीय स्वशासन विभाग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में प्रत्येक प्राधिकरण के लिए विशिष्ट कार्य-योजना और कार्यान्वित उपायों का विवरण नहीं था।
प्रदूषण का प्रभाव फोर्ट कोच्चि के बैकवाटर और तटीय क्षेत्रों में कचरे का जमाव पर्यटन क्षमता और समुद्री पारिस्थितिकी को नुकसान पहुँचा रहा है।
दीर्घकालिक योजना का कार्यान्वयन फोर्ट कोच्चि समुद्र तट के कायाकल्प और सौंदर्यीकरण की दीर्घकालिक योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने में चुनौतियाँ।
आधुनिक उपकरणों की तैनाती समुद्र-जनित कचरे को हटाने के लिए सी-बिन और उभयचर अपशिष्ट हटाने प्रणालियों जैसे आधुनिक उपकरणों की खरीद और संचालन।
अंतर-विभागीय समन्वय विभिन्न हितधारकों जैसे कोचीन पोर्ट ट्रस्ट, केरल पर्यटन विकास निगम और जिला पर्यटन संवर्धन परिषद के बीच समन्वय।

आगे की राह

  • प्रत्येक संबंधित प्राधिकरण के लिए स्पष्ट और समय-सीमा-आधारित कार्य-योजनाएँ तैयार की जानी चाहिए, जिसमें विशिष्ट लक्ष्य और जवाबदेही निर्धारित हो।
  • अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों जैसे मशीनीकृत रेत सफाई मशीनों, सी-बिन और उभयचर अपशिष्ट हटाने प्रणालियों की तत्काल तैनाती सुनिश्चित की जाए।
  • IIT/NIT जैसे विशेषज्ञ संस्थानों के साथ तकनीकी समन्वय बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए ताकि व्यवहार्यता अध्ययन और विस्तृत योजना में सहायता मिल सके।
  • फोर्ट कोच्चि समुद्र तट के कायाकल्प और सौंदर्यीकरण के लिए एक व्यापक दीर्घकालिक योजना विकसित की जाए, जिसमें सतत पर्यटन सिद्धांतों को एकीकृत किया जाए।
  • अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं, स्वच्छता बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
  • अंतर-विभागीय और हितधारक समन्वय के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए ताकि सभी संबंधित पक्ष एक साथ मिलकर काम कर सकें।
  • जन जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए ताकि स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को तटीय क्षेत्रों को स्वच्छ रखने के महत्व के बारे में शिक्षित किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राष्ट्रीय हरित अधिकरण · तटीय प्रदूषण · स्थानीय स्वशासन · पर्यावरण संरक्षण · सतत पर्यटन · अपशिष्ट प्रबंधन · जलीय पारिस्थितिकी · न्यायिक सक्रियता · अंतर-विभागीय समन्वय · पर्यावरण प्रभाव आकलन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

तटीय क्षेत्रों में प्रदूषण और कचरा जमाव  →  पर्यावरण और पर्यटन पर नकारात्मक प्रभाव  →  NGT द्वारा स्थानीय स्वशासन विभाग को निर्देश  →  अपूर्ण कार्य-योजना रिपोर्ट प्रस्तुत करना  →  NGT द्वारा आगे की रिपोर्ट और ठोस कार्य-योजना की मांग  →  दीर्घकालिक समाधान और आधुनिक उपकरणों की तैनाती पर विचार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत की गई थी।
2. NGT का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और वनों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों का प्रभावी और शीघ्र निपटान करना है।
3. NGT के पास सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत निर्धारित प्रक्रिया से बाध्य होने के बजाय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होने की शक्ति है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत की गई थी। यह कथन सही है।
कथन 2: NGT का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और वनों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों का प्रभावी और शीघ्र निपटान करना है। यह कथन सही है।
कथन 3: NGT को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत निर्धारित प्रक्रिया से बाध्य होने के बजाय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होने की शक्ति प्राप्त है। यह कथन भी सही है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कदम तटीय प्रदूषण को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता/सकते है/हैं?
1. अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों की स्थापना।
2. औद्योगिक अपशिष्टों का उचित निपटान।
3. प्लास्टिक और गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे के उपयोग पर प्रतिबंध।
4. तटीय क्षेत्रों में सतत पर्यटन प्रथाओं को बढ़ावा देना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए सभी कथन तटीय प्रदूषण को नियंत्रित करने में सहायक हैं। अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र, औद्योगिक अपशिष्टों का उचित निपटान, प्लास्टिक पर प्रतिबंध और सतत पर्यटन सभी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) पर्यावरण संरक्षण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फोर्ट कोच्चि के तटीय प्रदूषण के संदर्भ में NGT के जनादेश और पर्यावरण शासन में इसकी प्रभावशीलता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) का संक्षिप्त परिचय, इसकी स्थापना का उद्देश्य और पर्यावरण संरक्षण में इसकी भूमिका।
2. **NGT का जनादेश:** राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत NGT की शक्तियों और कार्यों का उल्लेख करें, जैसे कि पर्यावरण संबंधी विवादों का निपटान, क्षतिपूर्ति का निर्धारण, और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन।
3. **फोर्ट कोच्चि मामले का संदर्भ:** फोर्ट कोच्चि के तटीय प्रदूषण मामले का उल्लेख करें, जिसमें NGT ने स्थानीय स्वशासन विभाग (LSGD) की रिपोर्ट पर असंतोष व्यक्त किया है। यह दर्शाएं कि NGT कैसे विभिन्न हितधारकों (जैसे LSGD, केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला कलेक्टर) को जवाबदेह ठहराता है।
4. **पर्यावरण शासन में NGT की प्रभावशीलता:**
* **सकारात्मक पहलू:** त्वरित न्याय, विशेषज्ञता-आधारित निर्णय, पर्यावरणीय नियमों के प्रवर्तन में वृद्धि, जन जागरूकता में वृद्धि, और प्रदूषण फैलाने वालों पर जुर्माना लगाना। उदाहरण के तौर पर, NGT द्वारा विभिन्न राज्यों और निकायों पर लगाए गए जुर्माने का उल्लेख किया जा सकता है।
* **चुनौतियाँ/सीमाएँ (समालोचनात्मक परीक्षण):** कार्यान्वयन में देरी, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों द्वारा निर्देशों का पालन न करना, मानव संसाधन की कमी, क्षेत्राधिकार संबंधी विवाद, और NGT के निर्णयों के खिलाफ उच्च न्यायालयों में अपील की प्रवृत्ति। फोर्ट कोच्चि मामले में ‘कार्रवाई योजना की कमी’ और ‘कार्यान्वित उपायों का विवरण न होना’ जैसी कमियाँ इसकी प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
5. **सुधार के सुझाव:** बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय, क्षमता निर्माण, NGT के निर्णयों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए तंत्र को मजबूत करना, और स्थानीय निकायों को अधिक सशक्त बनाना।
6. **निष्कर्ष:** NGT की भूमिका को स्वीकार करते हुए, पर्यावरण शासन को मजबूत करने के लिए इसकी चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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