यूपीएससी के लिए राष्ट्रीय स्मार्ट सार्वजनिक परिवहन मिशन: प्रमुख पहल एवं लाभ

यूपीएससी के लिए राष्ट्रीय स्मार्ट सार्वजनिक परिवहन मिशन: प्रमुख पहल एवं लाभ

Map of Delhi, Mumbai, Bangalore, Hyderabad, Chennai, Kolkata highlighted on the map of India — National Smart Public…Mind map of NSPTM for Smart Urban Mobility concept mind map — National Smart Public Transport Mission UPSC

मानचित्र व माइंड-मैप: National Smart Public Transport Mission

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — शहरीकरण, उनकी समस्याएं और उनके उपचार  |  GS Paper II — संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध  |  GS Paper III — अवसंरचना (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, हवाई अड्डे, रेलवे आदि), शहरीकरण, डिजिटल अवसंरचना
  • Prelims: राष्ट्रीय स्मार्ट सार्वजनिक परिवहन मिशन, शहरी नियोजन, राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति, 2006, मेट्रो नीति, 2017, पीएम ई-बस सेवा, राष्ट्रीय कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC), क्यूएसपार्क (qSPARC), अंतिम छोर तक संपर्क (Last-Mile Connectivity)
  • Essay: भारत में शहरीकरण और सतत परिवहन की चुनौतियाँ, डिजिटल प्रौद्योगिकियाँ और शहरी शासन में उनका योगदान

त्वरित पुनरावृत्ति: शहरी गतिशीलता को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों, एकीकृत परिवहन समाधानों और राष्ट्रीय कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) जैसी पहलों का लाभ उठाना है, हालांकि वर्तमान में कोई विशिष्ट राष्ट्रीय योजना मौजूद नहीं है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि वर्तमान में एकीकृत सार्वजनिक परिवहन, डिजिटल टिकटिंग, गैर-मोटर चालित परिवहन और अंतिम छोर तक संपर्क (लास्ट-माइल कनेक्टिविटी) के लिए कोई राष्ट्रीय स्मार्ट सार्वजनिक परिवहन योजना नहीं है। हालांकि, केंद्र सरकार राज्य सरकारों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के तहत ई-बसों की तैनाती और मेट्रो परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिसमें डिजिटल टिकटिंग और एकीकृत सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी जाती है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में ‘शहरी नियोजन’ राज्य का विषय है, जिसका अर्थ है कि सार्वजनिक परिवहन परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें विकसित करने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है।
  • केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परिवहन परियोजनाओं के व्यवस्थित नियोजन और कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति, 2006 और मेट्रो नीति, 2017 जैसे नीतिगत दिशानिर्देश जारी किए हैं।
  • केंद्र सरकार पीएम ई-बस सेवा और पीएम ई-ड्राइव जैसी विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के तहत ई-बसों की तैनाती और मेट्रो परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता पर विचार करती है।
  • राष्ट्रीय कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) ‘एक राष्ट्र, एक कार्ड’ की अवधारणा पर आधारित एक अंतर-संचालित (इंटरऑपरेबल) कार्ड है, जो विभिन्न मेट्रो और बस संचालकों के बीच निर्बाध रूप से कार्य करता है।
  • आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा विकसित क्यूएसपार्क (qSPARC) पर आधारित NCMC पारिस्थितिकी तंत्र के कार्यान्वयन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो वर्तमान में 13 मेट्रो परियोजनाओं और 11 बस परिवहन निगमों में क्रियाशील है।
  • मंत्रालय की ‘मेट्रो तथा गैर-मेट्रो परियोजनाओं के लिए शहरी परिवहन में परिवहन नियोजन एवं क्षमता निर्माण’ उप-योजना के अंतर्गत एकीकृत गतिशीलता योजना, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) और बहु-माध्यमीय एकीकरण योजनाओं के निर्माण को केंद्रीय वित्तीय सहायता के लिए पात्र घटकों में शामिल किया गया है।

शहरी सार्वजनिक परिवहन में डिजिटल प्रौद्योगिकियों और एकीकृत समाधानों का लाभ उठाना

  • वर्तमान में, एकीकृत सार्वजनिक परिवहन, डिजिटल टिकटिंग, गैर-मोटर चालित परिवहन और अंतिम छोर तक संपर्क के लिए कोई विशिष्ट राष्ट्रीय स्मार्ट सार्वजनिक परिवहन योजना नहीं है।
  • इसका लक्ष्य शहरी आवागमन में सुधार करना, भीड़भाड़ कम करना और सार्वजनिक परिवहन को निजी वाहनों की तुलना में अधिक आकर्षक बनाना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
शहरी नियोजन राज्य का विषय राज्यों को अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार परिवहन परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें लागू करने की स्वायत्तता देता है।
नीतिगत दिशानिर्देश (राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति, 2006; मेट्रो नीति, 2017) केंद्र सरकार द्वारा सार्वजनिक परिवहन परियोजनाओं के व्यवस्थित नियोजन और कार्यान्वयन के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करता है।
राष्ट्रीय कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) विभिन्न परिवहन प्रणालियों में ‘एक राष्ट्र, एक कार्ड’ की अवधारणा के तहत निर्बाध यात्रा और डिजिटल टिकटिंग की सुविधा प्रदान करता है।
डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग टिकटिंग को सरल बनाता है, निजी वाहनों से सार्वजनिक परिवहन की ओर बदलाव को प्रोत्साहित करता है और यातायात की भीड़ को कम करता है।
केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान राज्यों द्वारा प्रस्तुत व्यवहार्य प्रस्तावों के आधार पर मेट्रो और ई-बस परियोजनाओं जैसी शहरी परिवहन पहलों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • बेहतर सार्वजनिक परिवहन प्रणाली शहरों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है, व्यापार और वाणिज्य के लिए बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करती है।
  • ईंधन की खपत और आयात पर निर्भरता कम करके आर्थिक बचत में योगदान करती है, जिससे व्यापार घाटे पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • परियोजनाओं के कार्यान्वयन और संचालन के माध्यम से रोजगार सृजन को बढ़ावा देती है।

सामाजिक महत्व

  • सभी वर्गों के लोगों के लिए सस्ती और सुलभ परिवहन सुविधाएँ प्रदान करके सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) को बढ़ाती है।
  • यातायात की भीड़ और यात्रा के समय को कम करके नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करती है।
  • अंतिम छोर तक संपर्क (Last-Mile Connectivity) प्रदान करके शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की खाई को पाटती है।

पर्यावरणीय महत्व

  • निजी वाहनों के उपयोग को कम करके वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने में मदद करती है।
  • ई-बसों और अन्य हरित परिवहन समाधानों को बढ़ावा देकर सतत शहरी विकास (Sustainable Urban Development) में योगदान करती है।
  • शहरी क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण को कम करने में सहायक है।

शासनिक महत्व

  • राष्ट्रीय कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) जैसी पहलें ‘एक राष्ट्र, एक कार्ड’ की अवधारणा को साकार करते हुए शासन में एकरूपता और दक्षता लाती हैं।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देती है, जहाँ केंद्र राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करती है।

चुनौतियाँ

1. राज्यों पर निर्भरता

  • शहरी नियोजन राज्य का विषय होने के कारण, केंद्र सरकार की पहलें राज्यों द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत करने और उनके कार्यान्वयन पर अत्यधिक निर्भर करती हैं।
  • राज्यों की अलग-अलग प्राथमिकताएँ और वित्तीय क्षमताएँ राष्ट्रीय स्तर पर एक समान कार्यान्वयन में बाधा डाल सकती हैं।

2. वित्तीय बाधाएँ

  • शहरी परिवहन परियोजनाएँ, विशेषकर मेट्रो और ई-बस सेवाएँ, अत्यधिक पूंजी-गहन होती हैं।
  • राज्य सरकारों की सीमित वित्तीय क्षमताएँ इन परियोजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधनों को जुटाने में चुनौती पेश करती हैं।

3. एकीकरण और अंतर-संचालनीयता

  • विभिन्न परिवहन माध्यमों (बस, मेट्रो, ऑटो) के बीच एकीकृत टिकटिंग और अंतिम छोर तक संपर्क सुनिश्चित करना एक जटिल कार्य है।
  • मौजूदा प्रणालियों के साथ नई डिजिटल प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने में तकनीकी और परिचालन संबंधी चुनौतियाँ आती हैं।

4. क्षमता निर्माण की कमी

  • शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) और राज्य परिवहन उपक्रमों में उन्नत परिवहन नियोजन, परियोजना प्रबंधन और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के संचालन के लिए पर्याप्त तकनीकी और प्रबंधकीय क्षमता की कमी है।
  • प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है।

5. सार्वजनिक जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन

  • निजी वाहनों से सार्वजनिक परिवहन की ओर लोगों को आकर्षित करने के लिए व्यापक सार्वजनिक जागरूकता अभियान और व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
  • डिजिटल टिकटिंग और नए भुगतान तरीकों को अपनाने में जनता को शिक्षित करना एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
राज्य सरकारों की धीमी प्रतिक्रिया केंद्र की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रस्तावों को समय पर प्रस्तुत करने में देरी।
परियोजनाओं का उच्च लागत राज्यों के लिए वित्तीय बोझ और केंद्र से पर्याप्त सहायता की आवश्यकता।
तकनीकी एकीकरण की जटिलता विभिन्न परिवहन प्रणालियों और डिजिटल प्लेटफार्मों को निर्बाध रूप से जोड़ना।
अंतिम छोर तक संपर्क की कमी सार्वजनिक परिवहन स्टेशनों से अंतिम गंतव्य तक यात्रियों के लिए सुविधाजनक पहुँच सुनिश्चित करना।
डेटा गोपनीयता और सुरक्षा डिजिटल टिकटिंग और भुगतान प्रणालियों में उपयोगकर्ता डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • पीएम ई-बस सेवा (PM e-Bus Seva)
  • राष्ट्रीय कॉमन मोबिलिटी कार्ड (National Common Mobility Card – NCMC)

आगे की राह

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच एक मजबूत समन्वय तंत्र स्थापित करना ताकि परियोजनाओं की योजना और कार्यान्वयन में तेजी लाई जा सके।
  • शहरी स्थानीय निकायों और राज्य परिवहन उपक्रमों की तकनीकी और प्रबंधकीय क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान देना।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को बढ़ावा देना ताकि शहरी परिवहन परियोजनाओं के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों को जुटाया जा सके।
  • राष्ट्रीय कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) के दायरे का विस्तार करना और इसे देश के सभी शहरी परिवहन प्रणालियों में लागू करना।
  • गैर-मोटर चालित परिवहन (Non-Motorized Transport) जैसे साइकिलिंग और पैदल चलने के लिए समर्पित अवसंरचना का विकास करना।
  • डेटा-संचालित निर्णय लेने (Data-Driven Decision Making) को बढ़ावा देने के लिए शहरी परिवहन डेटा के संग्रह और विश्लेषण के लिए एक मजबूत मंच विकसित करना।
  • नागरिकों के बीच सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने और डिजिटल भुगतान विधियों को अपनाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

शहरी नियोजन · सार्वजनिक परिवहन · राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति · मेट्रो नीति · राष्ट्रीय कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) · डिजिटल टिकटिंग · अंतिम छोर तक संपर्क · एकीकृत गतिशीलता योजना · केंद्र-राज्य संबंध · शहरी अवसंरचना

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘शहरी स्थानीय निकायों की शक्तियाँ’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची, सूची II (राज्य सूची)’, ‘note’: ‘शहरी नियोजन राज्य का विषय’}

अवधारणा प्रवाह

शहरीकरण में वृद्धि और यातायात की भीड़  →  सार्वजनिक परिवहन में सुधार की आवश्यकता  →  केंद्र सरकार द्वारा नीतिगत दिशानिर्देश और वित्तीय सहायता  →  राज्यों द्वारा प्रस्तावों का प्रस्तुतीकरण और कार्यान्वयन  →  डिजिटल प्रौद्योगिकियों का एकीकरण (NCMC)  →  बेहतर शहरी आवागमन और सतत विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘शहरी नियोजन’ भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत राज्य सूची का विषय है।
2. राष्ट्रीय कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) का उद्देश्य ‘एक राष्ट्र, एक कार्ड’ की परिकल्पना को साकार करना है, जो विभिन्न परिवहन प्रणालियों में परस्पर संचालित हो सके।
3. केंद्र सरकार द्वारा पीएम ई-बस सेवा जैसी योजनाएँ राज्य सरकारों के प्रस्तावों के आधार पर शहरी सार्वजनिक परिवहन परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1: ‘शहरी नियोजन’ राज्य सूची का विषय है, यह सही है।
कथन 2: राष्ट्रीय कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) ‘एक राष्ट्र, एक कार्ड’ की परिकल्पना पर आधारित एक परस्पर संचालित कार्ड है, यह भी सही है।
कथन 3: केंद्र सरकार पीएम ई-बस सेवा जैसी योजनाओं के तहत राज्य सरकारों से प्रस्ताव प्राप्त होने पर वित्तीय सहायता प्रदान करती है, यह भी सही है।

Q2. राष्ट्रीय कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा विकसित RuPay चिप के लिए त्वरित विशिष्टता (qSPARC) पर आधारित है।
2. यह वर्तमान में केवल मेट्रो परियोजनाओं में ही क्रियाशील है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2

उत्तर: केवल 1 — कथन 1: NCMC पारिस्थितिकी तंत्र भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा विकसित qSPARC पर आधारित है, यह सही है।
कथन 2: NCMC 13 मेट्रो परियोजनाओं और 11 बस परिवहन निगमों में क्रियाशील है, इसलिए यह केवल मेट्रो परियोजनाओं तक ही सीमित नहीं है। अतः कथन 2 गलत है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में शहरी सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने में केंद्र और राज्य सरकारों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। राष्ट्रीय कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) जैसी पहलें इस दिशा में कितनी सफल रही हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: शहरीकरण के संदर्भ में सार्वजनिक परिवहन के महत्व और ‘शहरी नियोजन’ के राज्य सूची का विषय होने का उल्लेख।
2. केंद्र सरकार की भूमिका: नीतिगत दिशानिर्देश (राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति, 2006; मेट्रो नीति, 2017), वित्तीय सहायता (पीएम ई-बस सेवा, मेट्रो परियोजनाएँ), तकनीकी सहायता और नवाचार (NCMC) का विस्तृत वर्णन।
3. राज्य सरकारों की भूमिका: परियोजनाओं की योजना, कार्यान्वयन, भीड़भाड़ कम करने के उपाय, शहरी अवसंरचना विकास, प्रस्ताव प्रस्तुत करना और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलन।
4. केंद्र-राज्य संबंधों में चुनौतियाँ: समन्वय की कमी, वित्तीय संसाधनों का आवंटन, प्राथमिकताएँ, कार्यान्वयन में देरी।
5. NCMC की सफलता का मूल्यांकन: ‘एक राष्ट्र, एक कार्ड’ की परिकल्पना, विभिन्न परिवहन प्रणालियों में अंतर-संचालनीयता, डिजिटल टिकटिंग को सरल बनाना, निजी वाहनों से सार्वजनिक परिवहन की ओर बदलाव को प्रोत्साहन, वर्तमान में क्रियाशील परियोजनाओं की संख्या (13 मेट्रो, 11 बस निगम)।
6. NCMC की सीमाएँ/चुनौतियाँ: व्यापक अंगीकरण की आवश्यकता, तकनीकी एकीकरण की चुनौतियाँ, जागरूकता का अभाव, अंतिम छोर तक संपर्क में सुधार की गुंजाइs।
7. निष्कर्ष: शहरी गतिशीलता में सुधार के लिए केंद्र और राज्य के बीच सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) और डिजिटल समाधानों के महत्व पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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