30 Jul लोकसभा में पेश होगा भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक 2026: जानिए प्रमुख प्रावधान
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन
- Prelims: भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI), राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, सांख्यिकी अधिनियम, 1959, भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, अकादमिक परिषद, डेटा वैज्ञानिक, सांख्यिकी विज्ञान
- Essay: भारत में सांख्यिकी और डेटा विज्ञान का महत्व: चुनौतियाँ और अवसर, राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों की भूमिका और उनका आधुनिकीकरण
त्वरित पुनरावृत्ति: भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 का उद्देश्य भारतीय सांख्यिकी संस्थान को एक निगमित निकाय के रूप में स्थापित कर उसके शासन को मजबूत करना, अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना और सांख्यिकी तथा संबद्ध क्षेत्रों में उभरती जरूरतों को पूरा करना है, जिससे यह राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में अपनी भूमिका को और प्रभावी ढंग से निभा सके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सरकार भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute – ISI) के दायरे को व्यापक बनाने और इसके कानूनी ढांचे को विकसित हो रही आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए लोकसभा में एक विधेयक पेश करने जा रही है। भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 का उद्देश्य संस्थान को एक ‘निगमित निकाय’ (body corporate) के रूप में शामिल करना है ताकि इसके शासन को मजबूत किया जा सके, अकादमिक उत्कृष्टता और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा सके, तथा सांख्यिकी और संबद्ध क्षेत्रों में उभरती जरूरतों को पूरा किया जा सके।
पृष्ठभूमि
- भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959 ने इस संस्थान को ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ (Institution of National Importance) घोषित किया था और इसे सांख्यिकी में डिग्री और डिप्लोमा प्रदान करने का अधिकार दिया था।
- 1995 में अधिनियम में संशोधन किया गया, जिसने संस्थान को सांख्यिकी, गणित, मात्रात्मक अर्थशास्त्र, कंप्यूटर विज्ञान और सांख्यिकी से संबंधित ऐसे अन्य विषयों में डिग्री और डिप्लोमा प्रदान करने का अधिकार दिया, जैसा कि वह समय-समय पर निर्धारित कर सकता है।
- प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, 1959 के अधिनियम में संस्थान के शासन, प्रशासन, वित्त, जवाबदेही और कामकाज के संबंध में सीमित प्रावधान हैं, और यह एक विकसित अकादमिक और अनुसंधान वातावरण की आवश्यकताओं का जवाब देने के लिए पर्याप्त नहीं है।
- इसलिए, सरकार ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959 को निरस्त करने का निर्णय लिया है, ताकि भारतीय सांख्यिकी संस्थान को एक निगमित निकाय के रूप में स्थापित करने के लिए एक व्यापक कानून लाया जा सके, जो सांख्यिकी विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त केंद्र के रूप में उत्कृष्टता प्राप्त कर सके।
- यह कानूनी सुधार उच्च गुणवत्ता वाले डेटा वैज्ञानिकों और सांख्यिकीविदों की एक नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम करेगा, जिससे भारत के तकनीकी और वित्तीय क्षेत्रों में मौजूदा प्रतिभा अंतराल को पाटा जा सकेगा।
- राष्ट्रपति संस्थान के ‘विज़िटर’ होंगे और विधेयक में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का प्रावधान है, जो इसका प्रमुख नीति कार्यकारी निकाय होगा।
भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) क्या है?
- भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) सांख्यिकी अनुसंधान, शिक्षण और अनुप्रयोग के क्षेत्र में भारत का एक प्रमुख संस्थान है।
- इसकी स्थापना 1931 में प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस ने की थी, जो एक प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक और सांख्यिकीविद् थे।
- यह कोलकाता में स्थित है और इसे देश में सांख्यिकीय अनुसंधान का ‘स्वर्ण मानक’ माना जाता है।
- 1959 में संसद के एक अधिनियम द्वारा इसे ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ घोषित किया गया था, जिसने इसे सांख्यिकी में डिग्री और डिप्लोमा प्रदान करने का अधिकार दिया।
- संस्थान का उद्देश्य सांख्यिकी के अध्ययन और अनुसंधान को बढ़ावा देना, सांख्यिकीय सिद्धांतों और तरीकों को वास्तविक दुनिया की समस्याओं पर लागू करना और सांख्यिकीय शिक्षा प्रदान करना है।
- यह विभिन्न विषयों जैसे सांख्यिकी, गणित, मात्रात्मक अर्थशास्त्र, कंप्यूटर विज्ञान और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रम प्रदान करता है।
- संस्थान का एक अकादमिक परिषद (Academic Council) होगा, जो इसका प्रमुख अकादमिक निकाय होगा और संस्थान के निदेशक की अध्यक्षता में होगा। सभी पूर्णकालिक प्रोफेसर और पूर्णकालिक संकाय अकादमिक परिषद के सदस्य होंगे।
- बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्षता एक अध्यक्ष करेंगे, जो शिक्षा, उद्योग, शिक्षा, सार्वजनिक नीति और सांख्यिकीय विज्ञान के क्षेत्र से एक प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे। बोर्ड केंद्र सरकार के प्रति जवाबदेह होगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सांविधिक ढाँचा | भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute – ISI) को एक ‘निकाय कॉर्पोरेट’ (body corporate) के रूप में शामिल करने का प्रावधान, जिससे इसकी शासन-प्रणाली मजबूत होगी। |
| राष्ट्रीय महत्व का संस्थान | ISI को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में बनाए रखना, जो सांख्यिकीय अनुसंधान और शिक्षा में इसके उत्कृष्ट योगदान को दर्शाता है। |
| अकादमिक परिषद | संस्थान के निदेशक की अध्यक्षता में एक अकादमिक परिषद का गठन, जिसमें सभी पूर्णकालिक प्रोफेसर और संकाय सदस्य शामिल होंगे, जो प्रमुख अकादमिक निकाय के रूप में कार्य करेगा। |
| बोर्ड ऑफ गवर्नर्स | अकादमिक, उद्योग, शिक्षा, सार्वजनिक नीति और सांख्यिकीय विज्ञान के क्षेत्र से एक प्रतिष्ठित व्यक्ति की अध्यक्षता में एक बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का प्रावधान, जो संस्थान का प्रमुख नीति-निर्धारक कार्यकारी निकाय होगा। |
| राष्ट्रपति की भूमिका | भारत के राष्ट्रपति संस्थान के ‘विज़िटर’ होंगे, जो संस्थान के कामकाज पर एक उच्च-स्तरीय पर्यवेक्षण प्रदान करेंगे। |
| डिग्री और डिप्लोमा | संस्थान को सांख्यिकी, गणित, मात्रात्मक अर्थशास्त्र, कंप्यूटर विज्ञान और संबंधित विषयों में डिग्री और डिप्लोमा प्रदान करने का अधिकार जारी रहेगा। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह विधेयक उच्च गुणवत्ता वाले डेटा वैज्ञानिकों और सांख्यिकीविदों की एक नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम करेगा, जिससे भारत के तकनीकी और वित्तीय क्षेत्रों में मौजूदा प्रतिभा अंतराल को पाटने में मदद मिलेगी।
- मजबूत सांख्यिकीय क्षमताएं बेहतर नीति निर्माण, आर्थिक योजना और डेटा-संचालित निर्णय लेने में सहायक होती हैं, जिससे देश की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलता है।
शैक्षणिक और अनुसंधान महत्व
- ISI को एक वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त सांख्यिकीय विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों में उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है, जिससे भारत की अनुसंधान क्षमताएं मजबूत होंगी।
- संस्थान के कानूनी ढांचे को विकसित हो रही अकादमिक और अनुसंधान आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने से यह अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दे पाएगा।
शासन और जवाबदेही
- संस्थान के शासन, प्रशासन, वित्त और जवाबदेही के संबंध में व्यापक प्रावधानों से ISI के कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।
- बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को केंद्र सरकार के प्रति जवाबदेह बनाने से सार्वजनिक धन के उपयोग और संस्थान के प्रदर्शन पर उचित निरीक्षण सुनिश्चित होगा।
राष्ट्रीय महत्व
- सांख्यिकी देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण है, और ISI जैसे संस्थान को मजबूत करना राष्ट्रीय डेटा अवसंरचना और विश्लेषण क्षमताओं को मजबूत करने में योगदान देगा।
- यह विधेयक भारत को डेटा विज्ञान और सांख्यिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक कदम है।
चुनौतियाँ
1. संसाधन आवंटन
- संस्थान के व्यापक जनादेश और वैश्विक उत्कृष्टता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों का निरंतर आवंटन सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
- अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं और योग्य संकाय को बनाए रखने के लिए पर्याप्त निवेश की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास और उद्योग
2. अकादमिक स्वायत्तता और जवाबदेही का संतुलन
- संस्थान की अकादमिक स्वायत्तता (Academic Autonomy) को बनाए रखते हुए उसे केंद्र सरकार के प्रति जवाबदेह बनाना एक नाजुक संतुलन है, जिसे सावधानी से प्रबंधित करने की आवश्यकता होगी।
- बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की संरचना और शक्तियों को इस तरह से डिजाइन किया जाना चाहिए ताकि अकादमिक स्वतंत्रता बाधित न हो।
यूपीएससी लिंक: शासन, शिक्षा और संस्थान
3. बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के साथ तालमेल
- डेटा विज्ञान और सांख्यिकी के क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी परिवर्तनों के साथ संस्थान के पाठ्यक्रम और अनुसंधान को लगातार अद्यतन (update) करना एक सतत चुनौती होगी।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को पाठ्यक्रम में प्रभावी ढंग से एकीकृत करना।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी, शिक्षा
4. प्रतिभा अधिग्रहण और प्रतिधारण
- उच्च गुणवत्ता वाले डेटा वैज्ञानिकों और सांख्यिकीविदों को आकर्षित करना और उन्हें संस्थान में बनाए रखना एक चुनौती है, खासकर निजी क्षेत्र से प्रतिस्पर्धा के कारण।
- प्रतिस्पर्धी वेतन पैकेज और अनुसंधान के अवसर प्रदान करना महत्वपूर्ण होगा।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन, शिक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पुराना कानूनी ढाँचा | भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959, संस्थान के शासन, प्रशासन, वित्त और कामकाज के संबंध में सीमित प्रावधान प्रदान करता था, जो बदलते अकादमिक और अनुसंधान परिवेश की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं था। |
| सीमित जनादेश | 1959 के अधिनियम में संस्थान को केवल सांख्यिकी में डिग्री और डिप्लोमा प्रदान करने का अधिकार था, जिसे बाद में 1995 में कुछ अन्य विषयों तक बढ़ाया गया, लेकिन यह उभरते क्षेत्रों की व्यापकता को कवर नहीं करता था। |
| शासन की कमी | पुराने अधिनियम में एक ‘निकाय कॉर्पोरेट’ के रूप में ISI के निगमन का प्रावधान नहीं था, जिससे इसकी कानूनी और प्रशासनिक संरचना कमजोर थी। |
| वैश्विक प्रतिस्पर्धा | पुराना ढाँचा ISI को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त केंद्र के रूप में उत्कृष्टता प्राप्त करने में सक्षम नहीं बना रहा था, जिससे अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में पीछे रहने का जोखिम था। |
| डेटा विज्ञान की आवश्यकता | भारत के तकनीकी और वित्तीय क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले डेटा वैज्ञानिकों और सांख्यिकीविदों की भारी कमी को पूरा करने के लिए एक मजबूत संस्थागत तंत्र की आवश्यकता थी, जो पुराने अधिनियम से संभव नहीं था। |
आगे की राह
- संस्थान के लिए पर्याप्त और निरंतर वित्तीय सहायता सुनिश्चित की जाए ताकि यह अपनी अनुसंधान और शैक्षणिक गतिविधियों को बिना किसी बाधा के जारी रख सके।
- अकादमिक परिषद और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के बीच स्पष्ट भूमिकाएं और जिम्मेदारियां स्थापित की जाएं ताकि प्रभावी शासन और अकादमिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बना रहे।
- उद्योग और सरकार के साथ मजबूत संबंध स्थापित किए जाएं ताकि अनुसंधान को वास्तविक दुनिया की समस्याओं से जोड़ा जा सके और स्नातकों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलें।
- पाठ्यक्रमों को नियमित रूप से अद्यतन किया जाए ताकि वे डेटा विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग जैसे उभरते क्षेत्रों की नवीनतम आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा दिया जाए ताकि ISI वैश्विक अनुसंधान नेटवर्क का हिस्सा बन सके और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान कर सके।
- योग्य संकाय सदस्यों को आकर्षित करने और बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धी वेतन और अनुसंधान के अनुकूल वातावरण प्रदान किया जाए।
- संस्थान के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा और मूल्यांकन किया जाए ताकि इसकी प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके और आवश्यक सुधार किए जा सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भारतीय सांख्यिकी संस्थान · राष्ट्रीय महत्व का संस्थान · सांविधिक ढाँचा · डेटा वैज्ञानिक · सांख्यिकी शिक्षा · शासन सुधार · अकादमिक उत्कृष्टता · सांख्यिकी अधिनियम 1959 · बोर्ड ऑफ गवर्नर्स · अकादमिक परिषद · आर्थिक विकास · तकनीकी क्षेत्र
अवधारणा प्रवाह
पुराना ISI अधिनियम, 1959 अपर्याप्त → बदलती अकादमिक/अनुसंधान आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं → नया भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 → ISI को ‘निकाय कॉर्पोरेट’ के रूप में निगमित करना → मजबूत शासन, अकादमिक उत्कृष्टता, अनुसंधान → डेटा वैज्ञानिकों/सांख्यिकीविदों को प्रशिक्षित करना → आर्थिक संवृद्धि और नीति निर्माण में योगदान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute – ISI) विधेयक, 2026 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह विधेयक भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959 का स्थान लेगा।
2. विधेयक के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति संस्थान के ‘विज़िटर’ होंगे।
3. संस्थान का ‘बोर्ड ऑफ गवर्नर्स’ इसका प्रमुख नीति कार्यकारी निकाय होगा और इसकी अध्यक्षता संस्थान के निदेशक करेंगे।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि विधेयक 1959 के अधिनियम को निरस्त कर एक व्यापक कानून लाएगा। कथन 2 सही है क्योंकि विधेयक में राष्ट्रपति को संस्थान का ‘विज़िटर’ बनाने का प्रावधान है। कथन 3 गलत है क्योंकि ‘बोर्ड ऑफ गवर्नर्स’ की अध्यक्षता एक अध्यक्ष करेंगे, जो शिक्षा, उद्योग, सार्वजनिक नीति आदि के क्षेत्र से एक प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे, न कि संस्थान के निदेशक। निदेशक ‘अकादमिक परिषद’ के प्रमुख होंगे।
Q2. भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- ISI की स्थापना केवल सांख्यिकी में डिग्री और डिप्लोमा प्रदान करने के लिए की गई थी।
- ISI को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करने वाला अधिनियम 1995 में पारित किया गया था।
- वर्तमान विधेयक का उद्देश्य भारत के तकनीकी और वित्तीय क्षेत्रों में डेटा वैज्ञानिकों की कमी को दूर करना है।
- ISI का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
उत्तर: वर्तमान विधेयक का उद्देश्य भारत के तकनीकी और वित्तीय क्षेत्रों में डेटा वैज्ञानिकों की कमी को दूर करना है। — विकल्प (A) गलत है क्योंकि 1995 के संशोधन के बाद ISI को सांख्यिकी के अलावा गणित, मात्रात्मक अर्थशास्त्र, कंप्यूटर विज्ञान आदि में भी डिग्री प्रदान करने का अधिकार मिला। विकल्प (B) गलत है क्योंकि ISI को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान 1959 के अधिनियम द्वारा घोषित किया गया था। विकल्प (C) सही है क्योंकि विधेयक का एक मुख्य उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले डेटा वैज्ञानिकों और सांख्यिकीविदों की नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करके भारत के तकनीकी और वित्तीय क्षेत्रों में प्रतिभा के अंतर को पाटना है। विकल्प (D) गलत है क्योंकि ISI का मुख्यालय कोलकाता में है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारतीय सांख्यिकी संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा कीजिए और विश्लेषण कीजिए कि यह विधेयक भारत में सांख्यिकी शिक्षा और अनुसंधान के आधुनिकीकरण में किस प्रकार सहायक होगा। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) और उसके राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में संक्षिप्त परिचय। विधेयक की आवश्यकता पर प्रकाश डालें।
2. **विधेयक के प्रमुख प्रावधान:**
* 1959 के अधिनियम का निरसन और व्यापक कानून का प्रावधान।
* संस्थान को ‘बॉडी कॉर्पोरेट’ के रूप में निगमित करना।
* भारत के राष्ट्रपति को संस्थान का ‘विज़िटर’ बनाना।
* ‘बोर्ड ऑफ गवर्नर्स’ का गठन: प्रमुख नीति कार्यकारी निकाय, अध्यक्ष की भूमिका (शिक्षा, उद्योग, सार्वजनिक नीति से प्रतिष्ठित व्यक्ति)।
* ‘अकादमिक परिषद’ का गठन: प्रमुख अकादमिक निकाय, निदेशक की अध्यक्षता, पूर्णकालिक प्रोफेसरों और संकाय सदस्यों की सदस्यता।
* शासन, प्रशासन, वित्त और जवाबदेही में सुधार।
* सांख्यिकी और संबद्ध क्षेत्रों में डिग्री और डिप्लोमा प्रदान करने की क्षमता का विस्तार।
3. **सांख्यिकी शिक्षा और अनुसंधान के आधुनिकीकरण में सहायता:**
* **वैश्विक मान्यता:** संस्थान को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त केंद्र के रूप में विकसित करना।
* **अकादमिक उत्कृष्टता:** बेहतर शासन और स्वायत्तता से अकादमिक मानकों में वृद्धि।
* **पाठ्यक्रम का आधुनिकीकरण:** उभरती आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम और अनुसंधान क्षेत्रों का विकास (जैसे डेटा विज्ञान, AI)।
* **प्रतिभा अंतराल को भरना:** उच्च गुणवत्ता वाले डेटा वैज्ञानिकों और सांख्यिकीविदों को प्रशिक्षित कर तकनीकी और वित्तीय क्षेत्रों की मांग पूरी करना।
* **अंतर-विषयक अनुसंधान:** संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा देना।
* **जवाबदेही और पारदर्शिता:** बेहतर वित्तीय और प्रशासनिक जवाबदेही तंत्र।
4. **निष्कर्ष:** भारत के आर्थिक विकास और डेटा-संचालित निर्णय लेने में ISI की भूमिका के महत्व को रेखांकित करते हुए, विधेयक के दूरगामी सकारात्मक प्रभावों का सारांश।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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