इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल: ऊर्जा सुरक्षा और किसान कल्याण का संतुलन

भारत का इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखता है — concept mind map

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल: ऊर्जा सुरक्षा और किसान कल्याण का संतुलन

✎ भारत का इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा, किसान कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाता है।

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इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
  • Prelims: इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम, राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, प्रधानमंत्री जीवन योजना, खाद्य सुरक्षा, कच्चा तेल आयात, फीडस्टॉक
  • Essay: खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन, कृषि अपशिष्ट का आर्थिक मूल्य और ग्रामीण विकास

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत का इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा, किसान कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने हाल ही में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के संबंध में कुछ दावों का खंडन किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह कार्यक्रम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए किसानों का समर्थन करने की एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है। मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि इथेनॉल उत्पादन के लिए खाद्यान्न का उपयोग केवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) जैसी कल्याणकारी योजनाओं की आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद ही किया जाता है, और इसमें मुख्य रूप से क्षतिग्रस्त या मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त अधिशेष अनाज शामिल होता है।

पृष्ठभूमि

  • इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता को कम करना, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ती है।
  • इथेनॉल का उत्पादन विभिन्न फीडस्टॉक जैसे गन्ने का रस, शीरा, मक्का, चावल और क्षतिग्रस्त अनाज से किया जाता है, जिससे किसानों को उनके उत्पादों का अतिरिक्त बाजार मिलता है।
  • राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति (National Policy on Biofuels) 2018 में संशोधन कर इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को आगे बढ़ाया गया और जैव ईंधन के उत्पादन के लिए अधिक फीडस्टॉक की अनुमति दी गई।
  • इथेनॉल मिश्रण से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे पर्यावरण को लाभ होता है और जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिलती है।
  • प्रधानमंत्री जीवन योजना (Pradhan Mantri JI-VAN Yojana) के तहत कृषि अवशेषों से दूसरी पीढ़ी (2G) के इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे खाद्यान्नों पर निर्भरता और कम होगी।

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम क्या है?

  • इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम भारत सरकार की एक पहल है जिसका उद्देश्य पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण करना है, ताकि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो सके।
  • इस कार्यक्रम के तहत, इथेनॉल का उत्पादन विभिन्न कृषि उत्पादों जैसे गन्ने का रस, शीरा, मक्का, चावल और क्षतिग्रस्त अनाज से किया जाता है।
  • खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, इथेनॉल उत्पादन के लिए अनाज का उपयोग केवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) की आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद ही किया जाता है।
  • कार्यक्रम में मुख्य रूप से क्षतिग्रस्त अनाज, टूटे हुए चावल और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्यान्न का उपयोग किया जाता है, जिससे अपशिष्ट का धन में परिवर्तन होता है।
  • इथेनॉल के उत्पादन के लिए विभिन्न फीडस्टॉक की कीमतें सरकार द्वारा निर्धारित की जाती हैं, जिसमें एफसीआई चावल भी शामिल है, और यह किसी विशेष फीडस्टॉक पर निर्भर नहीं करता है।
  • यह कार्यक्रम किसानों को उनके अधिशेष उत्पादों के लिए एक अतिरिक्त बाजार प्रदान करके उनकी आय बढ़ाने में मदद करता है।
  • इथेनॉल एक स्वच्छ ईंधन है, और इसके उपयोग से वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे वायु प्रदूषण नियंत्रित होता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
ऊर्जा सुरक्षा कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करता है, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव होता है।
खाद्य सुरक्षा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) की आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद ही अधिशेष और अनुपयुक्त अनाज का उपयोग किया जाता है।
किसान कल्याण किसानों को उनके अधिशेष और क्षतिग्रस्त अनाज के लिए एक वैकल्पिक बाजार प्रदान करता है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है।
पर्यावरण लाभ जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम करके कार्बन उत्सर्जन में कमी लाता है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है।
कच्चे माल की विविधता गन्ने का रस, सीरा, मक्का, क्षतिग्रस्त अनाज और FCI चावल जैसे विभिन्न फीडस्टॉक का उपयोग करता है, जिससे किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम होती है।
अपशिष्ट का धन में परिवर्तन मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त या गोदामों में सड़ने वाले अनाज का उपयोग करके मूल्यवान इथेनॉल का उत्पादन करता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • कच्चे तेल के आयात बिल को कम करके विदेशी मुद्रा बचाता है, जिससे भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • इथेनॉल उत्पादन और संबंधित उद्योगों में निवेश को बढ़ावा देता है, जिससे रोजगार के अवसर सृजित होते हैं।
  • किसानों को उनकी उपज के लिए एक स्थिर और अतिरिक्त आय का स्रोत प्रदान करता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।

सामरिक महत्व

  • भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाता है और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण होने वाले तेल आपूर्ति व्यवधानों के प्रति संवेदनशीलता को कम करता है।
  • स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर संक्रमण में सहायता करता है, जो भारत की जलवायु परिवर्तन प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।

सामाजिक महत्व

  • खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए अधिशेष अनाज का उपयोग करके ‘अपशिष्ट से धन’ के सिद्धांत को बढ़ावा देता है।
  • किसानों की आय में वृद्धि करके कृषि क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि लाता है।

पर्यावरण महत्व

  • पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे वायु प्रदूषण कम होता है।
  • कृषि अवशेषों से दूसरी पीढ़ी (2G) के इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देकर फसल जलाने जैसी प्रथाओं को हतोत्साहित करता है।

चुनौतियाँ

1. फीडस्टॉक की उपलब्धता और मूल्य निर्धारण

  • इथेनॉल उत्पादन के लिए विभिन्न फीडस्टॉक (जैसे मक्का, चावल) की पर्याप्त और स्थिर उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव इथेनॉल उत्पादन की लागत और व्यवहार्यता को प्रभावित कर सकता है।

2. खाद्य सुरक्षा बनाम ईंधन सुरक्षा

  • यह सुनिश्चित करना कि इथेनॉल उत्पादन के लिए अनाज का उपयोग खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं से समझौता न करे, विशेषकर सूखे या फसल खराब होने की स्थिति में।
  • अधिशेष अनाज की सटीक पहचान और उसे इथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित करने की प्रणाली को मजबूत करना।

3. इथेनॉल उत्पादन क्षमता और प्रौद्योगिकी

  • बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इथेनॉल उत्पादन क्षमता का विस्तार करना, विशेषकर दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल संयंत्रों का।
  • इथेनॉल उत्पादन प्रक्रियाओं में दक्षता और लागत-प्रभावशीलता में सुधार के लिए अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना।

4. वितरण और भंडारण अवसंरचना

  • इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए पर्याप्त भंडारण और वितरण अवसंरचना का विकास करना।
  • वाहनों में E20 ईंधन के उपयोग के लिए आवश्यक अनुकूलन और जागरूकता को बढ़ावा देना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
खाद्य बनाम ईंधन खाद्य सुरक्षा से समझौता किए बिना इथेनॉल उत्पादन के लिए पर्याप्त अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
कच्चे माल की लागत विभिन्न फीडस्टॉक की कीमतों में अस्थिरता इथेनॉल उत्पादन की आर्थिक व्यवहार्यता को प्रभावित कर सकती है।
तकनीकी बाधाएँ दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल उत्पादन के लिए उन्नत और लागत प्रभावी प्रौद्योगिकियों का विकास और विस्तार।
बुनियादी ढाँचा इथेनॉल के भंडारण, परिवहन और मिश्रण के लिए पर्याप्त अवसंरचना का अभाव।
पर्यावरणीय प्रभाव इथेनॉल उत्पादन से जुड़े जल उपयोग और अपशिष्ट प्रबंधन संबंधी चिंताएँ।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम
  • प्रधानमंत्री जीवन योजना (Pradhan Mantri JI-VAN Yojana)

आगे की राह

  • खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए अधिशेष और क्षतिग्रस्त अनाज के उपयोग के लिए एक मजबूत निगरानी और मूल्यांकन तंत्र स्थापित करना।
  • दूसरी पीढ़ी (2G) के इथेनॉल संयंत्रों की स्थापना को गति देना और कृषि अवशेषों के प्रभावी संग्रह और उपयोग के लिए आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना।
  • इथेनॉल उत्पादन के लिए विभिन्न फीडस्टॉक के बीच लचीलेपन को बढ़ावा देना ताकि किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम हो सके।
  • इथेनॉल उत्पादन प्रक्रियाओं में जल दक्षता में सुधार और अपशिष्ट जल उपचार के लिए नवीन प्रौद्योगिकियों को अपनाना।
  • इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लाभों और इसके सुरक्षित उपयोग के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना।
  • इथेनॉल उत्पादन और वितरण अवसंरचना में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए अनुकूल नीतिगत वातावरण बनाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम · खाद्य सुरक्षा · ऊर्जा सुरक्षा · किसान कल्याण · कच्चे तेल का आयात · अधिशेष खाद्यान्न · दूसरी पीढ़ी का इथेनॉल · प्रधानमंत्री जीवन योजना · जलवायु परिवर्तन · आर्थिक संवृद्धि

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाना’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48’, ‘note’: ‘कृषि और पशुपालन का संगठन’}

अवधारणा प्रवाह

कच्चे तेल का आयात  →  इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम  →  अधिशेष/क्षतिग्रस्त अनाज का उपयोग  →  ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि  →  किसानों की आय में वृद्धि  →  पर्यावरण प्रदूषण में कमी

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह कार्यक्रम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।
2. इथेनॉल उत्पादन के लिए केवल गन्ने के रस और सीरे का ही उपयोग किया जाता है।
3. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद ही अधिशेष खाद्यान्न को इथेनॉल उत्पादन के लिए अनुमोदित किया जाता है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि EBP कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि इथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का, क्षतिग्रस्त अनाज और FCI चावल जैसे कई अनुमोदित कच्चे माल का उपयोग किया जाता है। कथन 3 सही है क्योंकि खाद्य सुरक्षा संबंधी सभी दायित्वों को पूरा करने के बाद ही अधिशेष और अनुपयुक्त खाद्यान्न को इथेनॉल उत्पादन के लिए उपयोग किया जाता है।

Q2. अभिकथन (A): भारत का इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखता है।
कारण (R): यह कार्यक्रम मुख्य रूप से क्षतिग्रस्त अनाज, टूटे हुए चावल और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्यान्नों का उपयोग करता है, जिससे कचरे को धन में बदला जा सके और किसानों को लाभ हो।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि इथेनॉल कार्यक्रम का लक्ष्य इन तीनों क्षेत्रों में संतुलन स्थापित करना है। कारण (R) भी सही है क्योंकि यह कार्यक्रम अधिशेष और अनुपयुक्त खाद्यान्नों का उपयोग करके कचरे को धन में बदलने और किसानों को आर्थिक लाभ पहुँचाने पर केंद्रित है, जो अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा कार्यक्रम कृषि अवशेषों से दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल के उत्पादन को बढ़ावा देने से संबंधित है?

  1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
  2. प्रधानमंत्री जीवन योजना
  3. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना
  4. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि

उत्तर: प्रधानमंत्री जीवन योजना — प्रधानमंत्री जीवन योजना (Pradhan Mantri JI-VAN Yojana) कृषि अवशेषों (बायोमास) से दूसरी पीढ़ी (2G) के इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है, जिससे खाद्यान्नों पर निर्भरता कम हो सके।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत के इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए, विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की इसकी क्षमता के संदर्भ में। इस कार्यक्रम से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों और आगे की राह पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्यों (ऊर्जा सुरक्षा, आयात कम करना) पर प्रकाश डालते हुए।
2. खाद्य सुरक्षा के साथ संतुलन:
क. अधिशेष खाद्यान्न का उपयोग: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) की आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद ही क्षतिग्रस्त अनाज, टूटे हुए चावल और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्यान्नों का उपयोग।
ख. ‘कचरे से धन’ की अवधारणा: कैसे यह कार्यक्रम खाद्यान्न की बर्बादी को कम करता है।
ग. चावल पर निर्भरता का खंडन: FCI चावल के योगदान का उल्लेख (0.02% से 24.64% तक वृद्धि, लेकिन फिर भी अन्य फीडस्टॉक का उपयोग)।
3. किसान कल्याण पर प्रभाव:
क. आय में वृद्धि: किसानों को उनके कृषि उत्पादों (मक्का, गन्ना, क्षतिग्रस्त अनाज) के लिए एक वैकल्पिक बाजार प्रदान करना।
ख. फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन।
4. ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव:
क. कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता में कमी: वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव।
ख. विदेशी मुद्रा की बचत।
ग. स्वच्छ ईंधन: पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव (कम उत्सर्जन)।
5. चुनौतियाँ:
क. फीडस्टॉक की उपलब्धता: खाद्यान्न और अन्य कच्चे माल की पर्याप्त और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना।
ख. जल उपयोग: गन्ना और चावल जैसी फसलों की जल-गहन प्रकृति।
ग. इथेनॉल उत्पादन लागत: सब्सिडी की आवश्यकता और इसकी दीर्घकालिक स्थिरता।
घ. अवसंरचनात्मक बाधाएँ: डिस्टिलरी और वितरण नेटवर्क का विस्तार।
6. आगे की राह:
क. दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल को बढ़ावा: प्रधानमंत्री जीवन योजना के माध्यम से कृषि अवशेषों का उपयोग।
ख. अनुसंधान और विकास: इथेनॉल उत्पादन की दक्षता बढ़ाना।
ग. नीतिगत स्थिरता: दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित करना।
घ. जल-कुशल फसलों पर ध्यान केंद्रित करना।
7. निष्कर्ष: कार्यक्रम के बहुआयामी लाभों को दोहराते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करना और भविष्य की रणनीतियों का सुझाव देना।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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