02 Aug हाथ से मैला ढोने वालों पर सरकार का बड़ा दावा: सर्वेक्षण में एक भी नहीं मिला
✎ हाथ से मैला ढोने की प्रथा को समाप्त करने और सीवर व सेप्टिक टैंक कर्मचारियों की सुरक्षा व सम्मान सुनिश्चित करने के लिए 'एमएस अधिनियम, 2013' तथा 'नमस्ते' योजना भारत सरकार के प्रमुख प्रयास हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएँ | GS Paper III — समावेशी विकास
- Prelims: हाथ से मैला ढोने की प्रथा, एमएस अधिनियम, 2013, नमस्ते योजना, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U) 2.0, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE)
- Essay: भारत में सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों की चुनौतियाँ, समावेशी विकास और हाशिए पर पड़े समुदायों का सशक्तिकरण
त्वरित पुनरावृत्ति: हाथ से मैला ढोने की प्रथा को समाप्त करने और सीवर व सेप्टिक टैंक कर्मचारियों की सुरक्षा व सम्मान सुनिश्चित करने के लिए ‘एमएस अधिनियम, 2013’ तथा ‘नमस्ते’ योजना भारत सरकार के प्रमुख प्रयास हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, भारत सरकार ने राज्यसभा को सूचित किया कि ‘मैनुअल स्कैवेंजर्स के तौर पर रोजगार पर रोक और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013’ (एमएस अधिनियम, 2013) के तहत किए गए एक नए सर्वेक्षण में देश के सभी जिलों में कोई भी हाथ से मैला ढोने वाला नहीं पाया गया है। सरकार ने हाथ से मैला ढोने की प्रथा को समाप्त करने और सीवर व सेप्टिक टैंक कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने संकल्प को दोहराया है, जिसके तहत ‘नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम’ (नमस्ते) योजना के तहत 89,915 ऐसे कर्मचारियों की पहचान की गई है।
पृष्ठभूमि
- हाथ से मैला ढोने की प्रथा भारत में एक गंभीर सामाजिक बुराई और मानवाधिकारों का उल्लंघन रही है, जिसमें व्यक्ति हाथ से मानव अपशिष्ट को साफ करते हैं।
- इस प्रथा को समाप्त करने के लिए कई कानून बनाए गए हैं, जिनमें ‘मैनुअल स्कैवेंजर्स के तौर पर रोजगार पर रोक और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013’ (एमएस अधिनियम, 2013) सबसे महत्वपूर्ण है।
- यह अधिनियम अस्वच्छ शौचालयों के निर्माण और रखरखाव पर प्रतिबंध लगाता है, साथ ही सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक मैनुअल सफाई के लिए किसी भी व्यक्ति को काम पर रखने या लगाने पर भी रोक लगाता है।
- पूर्व में ‘मैनुअल स्कैवेंजर्स के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 1993’ भी अस्तित्व में था, जिसे 2013 के अधिनियम ने प्रतिस्थापित किया।
- सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस प्रथा को समाप्त करने और प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए कई निर्देश दिए हैं।
- सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय इस प्रथा के उन्मूलन और प्रभावित व्यक्तियों के कल्याण के लिए नोडल मंत्रालय है।
नमस्ते योजना क्या है?
- नमस्ते (NAMASTE) योजना का पूर्ण रूप ‘नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम’ है, जिसे 2023-24 में शुरू किया गया था।
- इस योजना का मुख्य उद्देश्य मशीनीकरण और व्यापक कल्याणकारी उपायों के माध्यम से सीवर और सेप्टिक टैंक में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण सुनिश्चित करना है।
- यह योजना हाथ से मैला ढोने की प्रथा को पूरी तरह से समाप्त करने और सीवर व सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई को मशीनीकृत करने पर केंद्रित है।
- इसके तहत, पूरे देश में 89,915 सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारियों की पहचान की पुष्टि की गई है।
- योजना के तहत व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) किट वितरित किए जाते हैं और काम से जुड़ी सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाता है।
- यह इमरजेंसी रिस्पॉन्स सैनिटेशन यूनिट्स (ERSU) को सुरक्षा उपकरण प्रदान करती है और सफाई कर्मचारियों, उनके समूहों तथा प्राइवेट सैनिटेशन सर्विस ऑपरेटर्स (PSSO) को सफाई से जुड़ी मशीनों के लिए पूंजीगत सब्सिडी देती है।
- स्वास्थ्य बीमा (हेल्थ कवर) प्रदान करना और सीवर व सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई को रोकने के बारे में कार्यशालाएँ आयोजित करना भी इसके प्रमुख घटकों में शामिल है।
- स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U) 2.0 में ‘यूज्ड वॉटर मैनेजमेंट’ (UWM) एक अहम हिस्सा है, जो नमस्ते योजना के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| MS अधिनियम, 2013 के तहत नया सर्वेक्षण | यह सर्वेक्षण देश के सभी जिलों में किया गया, जिसमें सरकार के अनुसार कोई भी हाथ से मैला ढोने वाला नहीं पाया गया। यह प्रथा को समाप्त करने के सरकारी प्रयासों की प्रभावशीलता का दावा करता है। |
| नमस्ते योजना (NAMASTE) | यह योजना मशीनीकरण और कल्याणकारी उपायों के माध्यम से सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य खतरनाक मानवीय हस्तक्षेप को समाप्त करना है। |
| 89,915 सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारियों की पहचान | नमस्ते योजना के तहत इन कर्मचारियों की पहचान की गई है, जिससे उन्हें लक्षित सहायता, प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरण प्रदान किए जा सकें। |
| स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U) 2.0 | यह मिशन ‘यूज्ड वॉटर मैनेजमेंट’ (UWM) पर जोर देता है और मशीनीकृत सीवर तथा सेप्टिक टैंक सफाई को बढ़ावा देकर खतरनाक मानवीय सफाई को खत्म करने का लक्ष्य रखता है। |
| सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षण | नमस्ते योजना के तहत व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) किट का वितरण, काम से जुड़ी सुरक्षा का प्रशिक्षण और आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयों (ERSU) को उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं। |
| पूंजीगत सब्सिडी और स्वास्थ्य बीमा | सफाई कर्मचारियों, उनके समूहों और निजी स्वच्छता सेवा ऑपरेटरों (PSSO) को मशीनों के लिए पूंजीगत सब्सिडी तथा स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जा रहा है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- यह पहल समाज के सबसे कमजोर वर्गों में से एक के सम्मान और मानवाधिकारों को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- हाथ से मैला ढोने की प्रथा को समाप्त करना जाति-आधारित भेदभाव और सामाजिक असमानता को कम करने में सहायक है, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिलता है।
- सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारियों के लिए सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है और उन्हें मुख्यधारा में लाता है।
मानवाधिकार और गरिमा
- यह प्रथा मानवीय गरिमा का उल्लंघन करती है और इसे समाप्त करना भारत के संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, विशेषकर अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के अनुरूप है।
- सुरक्षित कार्य वातावरण और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करके, सरकार इन श्रमिकों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है।
शासन और नीतिगत प्रभाव
- MS अधिनियम, 2013 का प्रभावी कार्यान्वयन और नमस्ते योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं का शुभारंभ सरकार की नीतिगत दृढ़ता को दर्शाता है।
- मशीनीकरण को बढ़ावा देना और जागरूकता कार्यक्रम चलाना एक स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जो भविष्य में इस प्रथा को रोकने में मदद करेंगे।
चुनौतियाँ
1. प्रथा का जारी रहना और पहचान की चुनौती
- सरकार के सर्वेक्षण में ‘कोई मैनुअल स्कैवेंजर नहीं’ पाए जाने के बावजूद, जमीनी स्तर पर इस प्रथा के जारी रहने की खबरें आती रहती हैं।
- असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की सही पहचान करना और उन्हें योजनाओं के दायरे में लाना एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों का कल्याण
2. मशीनीकरण का धीमा कार्यान्वयन
- देश के कई हिस्सों में अभी भी मशीनीकृत सफाई उपकरणों की कमी है या उनका उपयोग सीमित है।
- छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में मशीनीकरण के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और जागरूकता का अभाव है।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियों का कार्यान्वयन
3. पुनर्वास और वैकल्पिक रोजगार
- हाथ से मैला ढोने वाले व्यक्तियों के लिए स्थायी और सम्मानजनक वैकल्पिक रोजगार के अवसर प्रदान करना एक चुनौती है।
- इन श्रमिकों को कौशल विकास प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान करने में अक्सर बाधाएं आती हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: मानव संसाधन का विकास
4. सामाजिक कलंक और जागरूकता का अभाव
- हाथ से मैला ढोने की प्रथा से जुड़ा सामाजिक कलंक अभी भी मौजूद है, जिससे इन श्रमिकों का सामाजिक एकीकरण मुश्किल हो जाता है।
- लोगों में इस प्रथा की अमानवीयता और इसके कानूनी निषेध के बारे में जागरूकता की कमी है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे: कमजोर वर्गों से संबंधित मुद्दे
5. निगरानी और प्रवर्तन
- MS अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का प्रभावी ढंग से प्रवर्तन सुनिश्चित करना एक चुनौती है, विशेषकर उन मामलों में जहाँ निजी व्यक्ति या संस्थाएं इस प्रथा में शामिल हैं।
- राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय की कमी भी प्रवर्तन को प्रभावित करती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: पारदर्शिता और जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सर्वेक्षण की विश्वसनीयता | सरकार द्वारा ‘कोई मैनुअल स्कैवेंजर नहीं’ पाए जाने का दावा जमीनी हकीकत से भिन्न हो सकता है, जिससे समस्या की गंभीरता को कम आंका जा सकता है। |
| नमस्ते योजना का कवरेज | पहचाने गए 89,915 कर्मचारियों के अलावा, अभी भी कई ऐसे श्रमिक हो सकते हैं जो योजना के दायरे से बाहर हैं और असुरक्षित परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। |
| मशीनीकरण की पहुंच | छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में मशीनीकृत सफाई उपकरणों की उपलब्धता और पहुंच सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। |
| कानून का प्रवर्तन | MS अधिनियम, 2013 के तहत प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। |
| पुनर्वास की गुणवत्ता | पुनर्वास कार्यक्रमों की प्रभावशीलता और इन श्रमिकों को स्थायी, सम्मानजनक आजीविका प्रदान करने की क्षमता पर सवाल उठते हैं। |
| सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव | हाथ से मैला ढोने की प्रथा के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण और मानसिकता में मूलभूत परिवर्तन लाना अभी भी एक लंबी प्रक्रिया है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मैनुअल स्कैवेंजर्स के तौर पर रोजगार पर रोक और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013 (MS अधिनियम, 2013)
- नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (नमस्ते) योजना
- स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U) 2.0
आगे की राह
- जमीनी स्तर पर एक व्यापक और विश्वसनीय सर्वेक्षण किया जाए, जिसमें नागरिक समाज संगठनों को भी शामिल किया जाए, ताकि वास्तविक मैनुअल स्कैवेंजर्स की पहचान हो सके।
- नमस्ते योजना के तहत पहचाने गए सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारियों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) किट, स्वास्थ्य बीमा और नियमित सुरक्षा प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से प्रदान किया जाए।
- मशीनीकृत सफाई उपकरणों की खरीद के लिए पूंजीगत सब्सिडी को बढ़ाया जाए और छोटे शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों तक इनकी पहुंच सुनिश्चित की जाए।
- हाथ से मैला ढोने वाले व्यक्तियों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम और वैकल्पिक रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएं, ताकि वे सम्मानजनक आजीविका कमा सकें।
- MS अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का कड़ाई से प्रवर्तन किया जाए और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
- जन जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि समाज में इस प्रथा के प्रति संवेदनशीलता बढ़े और लोग इसके उन्मूलन में सहयोग करें।
- राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय को मजबूत किया जाए, ताकि नीतियों और कार्यक्रमों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
हाथ से मैला ढोने की प्रथा · एमएस अधिनियम, 2013 · नमस्ते योजना · स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 · मानवाधिकार · सामाजिक न्याय · मशीनीकृत स्वच्छता · पुनर्वास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 17’, ‘note’: ‘अस्पृश्यता का उन्मूलन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 23’, ‘note’: ‘मानव दुर्व्यापार और बलात्श्रम का निषेध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39 (a)’, ‘note’: ‘नागरिकों को आजीविका का पर्याप्त साधन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 42’, ‘note’: ‘काम की न्यायसंगत और मानवीय दशाएं’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा’}
अवधारणा प्रवाह
हाथ से मैला ढोने की प्रथा (अमानवीय कार्य) → MS अधिनियम, 2013 (कानूनी निषेध और पुनर्वास) → नमस्ते योजना (मशीनीकरण और कल्याणकारी उपाय) → सीवर/सेप्टिक टैंक कर्मचारियों की पहचान (लक्ष्यीकरण) → सुरक्षा उपकरण व प्रशिक्षण (कार्य सुरक्षा) → मशीनीकृत सफाई को बढ़ावा (मानवीय हस्तक्षेप का अंत) → मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय (अंतिम लक्ष्य)
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘मैनुअल स्कैवेंजर्स के तौर पर रोजगार पर रोक और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013’ (एमएस अधिनियम, 2013) अस्वच्छ शौचालयों के निर्माण और रखरखाव पर रोक लगाता है।
2. ‘नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम’ (नमस्ते) योजना का उद्देश्य सीवर और सेप्टिक टैंक में काम करने वालों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना है।
3. स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) 2.0 में ‘यूज्ड वॉटर मैनेजमेंट’ (यूडब्ल्यूएम) एक अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मशीनों से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई को बढ़ावा देना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि एमएस अधिनियम, 2013 अस्वच्छ शौचालयों के निर्माण और रखरखाव पर रोक लगाता है। कथन 2 सही है क्योंकि नमस्ते योजना का मुख्य उद्देश्य मशीनीकरण और कल्याणकारी उपायों के माध्यम से सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना है। कथन 3 भी सही है क्योंकि एसबीएम-यू 2.0 का एक महत्वपूर्ण घटक यूज्ड वॉटर मैनेजमेंट है, जो मशीनीकृत सफाई को बढ़ावा देकर खतरनाक मैन्युअल सफाई को समाप्त करने पर केंद्रित है।
Q2. अभिकथन (A): भारत सरकार ने ‘मैनुअल स्कैवेंजर्स के तौर पर रोजगार पर रोक और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013’ (एमएस अधिनियम, 2013) के तहत किए गए एक नए सर्वेक्षण में कोई भी मैनुअल स्कैवेंजर नहीं पाया है।
कारण (R): ‘नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम’ (नमस्ते) योजना का उद्देश्य मशीनीकरण और व्यापक कल्याणकारी उपायों के जरिए सीवर और सेप्टिक टैंक में काम करने वालों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं। सरकार ने नए सर्वेक्षण में कोई मैनुअल स्कैवेंजर नहीं पाया है, और नमस्ते योजना का उद्देश्य मशीनीकृत स्वच्छता के माध्यम से इन श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, नमस्ते योजना सीधे तौर पर ‘कोई मैनुअल स्कैवेंजर नहीं मिला’ इस सर्वेक्षण के परिणाम की व्याख्या नहीं करती, बल्कि यह उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक सक्रिय कदम है। सर्वेक्षण का परिणाम अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन का दावा करता है, जबकि नमस्ते योजना भविष्य के लिए एक निवारक और कल्याणकारी उपाय है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में हाथ से मैला ढोने की प्रथा को समाप्त करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विधायी और योजनागत उपायों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या ये उपाय इस अमानवीय प्रथा को पूरी तरह से समाप्त करने में सफल रहे हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:
1. **परिचय:** हाथ से मैला ढोने की प्रथा की संक्षिप्त परिभाषा और इसके सामाजिक-आर्थिक निहितार्थ।
2. **विधायी उपाय:**
* ‘मैनुअल स्कैवेंजर्स के तौर पर रोजगार पर रोक और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013’ (एमएस अधिनियम, 2013) के प्रमुख प्रावधानों का उल्लेख। (अस्वच्छ शौचालयों पर प्रतिबंध, खतरनाक सफाई पर रोक, पुनर्वास का प्रावधान)।
* अधिनियम के तहत किए गए सर्वेक्षणों और उनके परिणामों पर चर्चा।
3. **योजनागत उपाय:**
* ‘नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम’ (नमस्ते) योजना का विस्तृत विवरण। (उद्देश्य, मशीनीकरण पर जोर, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण, पूंजीगत सब्सिडी, स्वास्थ्य बीमा, कार्यशालाएं)।
* स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) 2.0 और ‘यूज्ड वॉटर मैनेजमेंट’ (यूडब्ल्यूएम) की भूमिका।
4. **सफलता का समालोचनात्मक परीक्षण:**
* सरकार के दावों (जैसे नए सर्वेक्षण में कोई मैनुअल स्कैवेंजर नहीं मिला) का उल्लेख।
* जमीनी हकीकत और विभिन्न रिपोर्टों/गैर-सरकारी संगठनों के दावों के बीच संभावित अंतर पर चर्चा। (क्या वास्तव में प्रथा समाप्त हो गई है या केवल अदृश्य हो गई है?)
* सीवर और सेप्टिक टैंक में होने वाली मौतों और दुर्घटनाओं का संदर्भ।
* सामाजिक-आर्थिक कारकों (जातिगत भेदभाव, गरीबी) की निरंतर भूमिका।
5. **चुनौतियाँ और आगे की राह:**
* कानून के प्रभावी प्रवर्तन में चुनौतियाँ।
* जागरूकता की कमी और वैकल्पिक आजीविका के अवसरों का अभाव।
* प्रौद्योगिकी के पूर्ण उपयोग और मशीनीकरण को बढ़ावा देने की आवश्यकता।
* सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन की आवश्यकता।
6. **निष्कर्ष:** इस अमानवीय प्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए एक समग्र और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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