05 Aug महिला संपत्ति स्वामित्व: सरकारी योजनाओं से आर्थिक सशक्तिकरण बढ़ा
✎ भारत सरकार की विभिन्न योजनाएँ जैसे PMAY-ग्रामीण और शहरी और DAY-NRLM महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, जैसा कि NFHS-5 के आँकड़ों से भी परिलक्षित होता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय समाज, महिलाओं की भूमिका, महिला संगठन | GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप, महिला सशक्तिकरण | GS Paper III — समावेशी विकास, भूमि सुधार
- Prelims: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS), प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) – ग्रामीण, प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) – शहरी, महिला समृद्धि योजना, दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM), भूमि अधिकार अभिलेख (RoR), महिला सशक्तिकरण
- Essay: भारत में महिला सशक्तिकरण: चुनौतियाँ और सरकारी पहल, संपत्ति अधिकार और लैंगिक समानता: विकास का मार्ग
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत सरकार की विभिन्न योजनाएँ जैसे PMAY-ग्रामीण और शहरी और DAY-NRLM महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, जैसा कि NFHS-5 के आँकड़ों से भी परिलक्षित होता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री द्वारा राज्यसभा में दिए गए एक उत्तर के अनुसार, भारत सरकार की कई योजनाएँ महिलाओं द्वारा संपत्ति के स्वामित्व और उनके आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आँकड़े बताते हैं कि देश में 15-49 वर्ष आयु वर्ग की 42.3% महिलाएँ अकेले या संयुक्त रूप से घर की मालिक हैं, जबकि 31.7% महिलाएँ अकेले या संयुक्त रूप से जमीन की मालिक हैं, जो इस दिशा में हो रही प्रगति को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- भारत में महिलाओं को ऐतिहासिक रूप से संपत्ति अधिकारों से वंचित रखा गया है, जिससे उनकी आर्थिक निर्भरता और सामाजिक असुरक्षा बढ़ी है।
- संपत्ति का स्वामित्व महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता, सामाजिक प्रतिष्ठा और निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करता है, जिससे उनके समग्र सशक्तिकरण में वृद्धि होती है।
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित एक एकीकृत सर्वेक्षण है, जो जनसंख्या, प्रजनन क्षमता, परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों पर महत्वपूर्ण आँकड़े प्रदान करता है।
- NFHS-5 (2019-21) के आँकड़ों ने 15-49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं और पुरुषों के संपत्ति स्वामित्व की स्थिति पर प्रकाश डाला है।
- सरकार ने महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएँ और नीतिगत पहल शुरू की हैं, जिनमें आवास योजनाओं में महिला स्वामित्व को प्राथमिकता देना और भूमि अभिलेखों में लिंग संबंधी कॉलम शामिल करना शामिल है।
- महिलाओं के संपत्ति अधिकारों को मजबूत करना सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) विशेष रूप से SDG 5 (लैंगिक समानता) को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
महिला संपत्ति स्वामित्व और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकारी पहलें
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS): स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित यह सर्वेक्षण महिला सशक्तिकरण सहित विभिन्न स्वास्थ्य और कल्याण संकेतकों पर व्यापक डेटा एकत्र करता है, जिसमें संपत्ति स्वामित्व भी शामिल है। NFHS-5 के अनुसार, 15-49 वर्ष की 42.3% महिलाएँ घर की और 31.7% महिलाएँ जमीन की मालिक हैं।
- प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) – ग्रामीण: ग्रामीण विकास मंत्रालय की इस योजना के तहत, घर का आवंटन महिला के नाम पर या पति-पत्नी के संयुक्त नाम पर किया जाता है, जिसमें विधवा, अविवाहित, अलग हुए व्यक्ति और ट्रांसजेंडर को छोड़कर अन्य मामलों में महिला स्वामित्व को प्राथमिकता दी जाती है।
- प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) – शहरी: आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की इस योजना में परिवार की महिला मुखिया को घर का मालिक या सह-मालिक होना अनिवार्य किया गया है, जिससे शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के संपत्ति अधिकारों को बल मिलता है।
- दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM): ग्रामीण विकास मंत्रालय की यह योजना ग्रामीण गरीब परिवारों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) में संगठित करके उनकी आजीविका में सुधार और आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित है।
- भूमि अधिकार अभिलेख (RoR) में लिंग संबंधी कॉलम: भूमि संसाधन विभाग ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से भूमि अधिकार अभिलेखों में लिंग संबंधी कॉलम शामिल करने का अनुरोध किया है, जिससे महिला भूमि मालिकों की जानकारी को औपचारिक रूप से दर्ज करना आसान होगा और उनके अधिकारों को कानूनी मान्यता मिलेगी।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| महिलाओं का संपत्ति स्वामित्व | राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, 15-49 आयु वर्ग की 42.3% महिलाएं घर की और 31.7% महिलाएं जमीन की मालिक हैं (अकेले या संयुक्त रूप से)। यह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। |
| सरकारी योजनाओं का योगदान | प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) – ग्रामीण और शहरी, महिला समृद्धि योजना, तथा दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी योजनाएं महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा दे रही हैं। |
| PMAY-ग्रामीण का प्रावधान | इस योजना के तहत घर का आवंटन महिला के नाम पर या पति-पत्नी के संयुक्त नाम पर किया जाता है, जिससे महिलाओं को संपत्ति का अधिकार मिलता है। |
| PMAY-शहरी का प्रावधान | इस मिशन के तहत परिवार की महिला मुखिया को घर का मालिक या सह-मालिक होना अनिवार्य है, जो शहरी क्षेत्रों में महिला संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा देता है। |
| भूमि अधिकार अभिलेखों में लिंग संबंधी कॉलम | भूमि संसाधन विभाग ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से भूमि अधिकार अभिलेखों (ROR) में लिंग संबंधी कॉलम शामिल करने का अनुरोध किया है, जिससे महिला भूमि मालिकों की जानकारी दर्ज करना आसान होगा। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- महिलाओं का संपत्ति स्वामित्व उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है और परिवार तथा समाज में उनकी स्थिति को मजबूत करता है।
- यह लैंगिक समानता (Gender Equality) को बढ़ावा देता है और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा तथा भेदभाव को कम करने में सहायक होता है।
आर्थिक महत्व
- संपत्ति का स्वामित्व महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करता है, जिससे वे बेहतर वित्तीय निर्णय ले पाती हैं।
- यह महिलाओं को ऋण (Loan) प्राप्त करने और उद्यम शुरू करने में मदद करता है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है और गरीबी कम होती है।
- महिलाओं के नाम पर संपत्ति होने से परिवार की समग्र आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और बच्चों के स्वास्थ्य व शिक्षा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
शासनिक महत्व
- सरकारी योजनाओं के माध्यम से संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा देना समावेशी विकास (Inclusive Development) के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक है।
- भूमि अभिलेखों में लिंग संबंधी जानकारी शामिल करना डेटा संग्रह को बेहतर बनाता है, जिससे लक्षित नीतियों का निर्माण संभव होता है।
चुनौतियाँ
1. पितृसत्तात्मक सामाजिक मानदंड
- कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अभी भी पितृसत्तात्मक सोच हावी है, जो महिलाओं को संपत्ति के अधिकार से वंचित करती है।
- पारिवारिक दबाव और सामाजिक रूढ़ियाँ महिलाओं को संपत्ति का दावा करने से रोकती हैं।
यूपीएससी लिंक: भारतीय समाज में महिलाओं की भूमिका और महिला सशक्तिकरण
2. जागरूकता का अभाव
- कई महिलाओं को अपने संपत्ति अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं होती है।
- कानूनी प्रक्रियाओं की जटिलता और जानकारी की कमी भी एक बड़ी बाधा है।
यूपीएससी लिंक: सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप
3. भूमि अभिलेखों में विसंगतियां
- भूमि अभिलेखों का अद्यतन न होना और उनमें त्रुटियां महिलाओं के नाम पर संपत्ति दर्ज कराने में बाधा उत्पन्न करती हैं।
- डिजिटलीकरण के बावजूद, कई राज्यों में भूमि अभिलेखों की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है।
यूपीएससी लिंक: भूमि सुधार और उनका प्रभाव
4. वित्तीय संसाधनों की कमी
- महिलाओं के पास अक्सर संपत्ति खरीदने या निर्माण करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की कमी होती है।
- ऋण तक पहुंच का अभाव भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: समावेशी विकास और इससे उत्पन्न मुद्दे
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| महिलाओं के नाम पर संपत्ति का कम प्रतिशत | NFHS-5 के आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं का संपत्ति स्वामित्व अभी भी काफी कम है, जो लैंगिक असमानता को दर्शाता है। |
| कानूनी और प्रशासनिक बाधाएँ | संपत्ति हस्तांतरण (Property Transfer) और पंजीकरण (Registration) की जटिल प्रक्रियाएं महिलाओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। |
| योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन | सरकारी योजनाओं के बावजूद, जमीनी स्तर पर उनके प्रभावी क्रियान्वयन में अभी भी चुनौतियाँ हैं, खासकर दूरदराज के क्षेत्रों में। |
| महिलाओं की निर्णय लेने की क्षमता | संपत्ति का स्वामित्व होने के बावजूद, कई मामलों में महिलाएं संपत्ति से संबंधित निर्णय लेने में स्वतंत्र नहीं होती हैं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) – ग्रामीण
- प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) – शहरी
- दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
आगे की राह
- महिलाओं को उनके संपत्ति अधिकारों और संबंधित सरकारी योजनाओं के बारे में शिक्षित करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
- भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और अद्यतनीकरण की प्रक्रिया को तेज किया जाए तथा उनमें लिंग संबंधी कॉलम को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
- महिलाओं को संपत्ति खरीदने या निर्माण करने के लिए आसान शर्तों पर ऋण (Loan) उपलब्ध कराने हेतु वित्तीय संस्थानों को प्रोत्साहित किया जाए।
- सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी को मजबूत किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लाभ लक्षित लाभार्थियों तक पहुँच रहे हैं।
- महिलाओं के लिए कानूनी सहायता सेवाओं को सुलभ बनाया जाए ताकि वे अपने संपत्ति अधिकारों का प्रभावी ढंग से दावा कर सकें।
- पंचायती राज संस्थाओं और स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups – SHGs) को महिलाओं के संपत्ति अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाने में शामिल किया जाए।
- पाठ्यक्रमों में लैंगिक समानता और संपत्ति अधिकारों के महत्व को शामिल करके सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव लाया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
महिला सशक्तिकरण · संपत्ति का स्वामित्व · आर्थिक समावेशन · राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) · प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) · दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) · महिला समृद्धि योजना · भूमि अधिकार अभिलेख (ROR) · लैंगिक समानता · सामाजिक न्याय
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 14’: ‘कानून के समक्ष समानता’}
- {‘अनुच्छेद 15’: ‘धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध’}
- {‘अनुच्छेद 39(a)’: ‘राज्य अपनी नीति का इस प्रकार संचालन करेगा कि सुनिश्चित रूप से सभी नागरिकों, पुरुष और स्त्री को समान रूप से जीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त हों’}
- {‘अनुच्छेद 39(d)’: ‘पुरुष और स्त्री दोनों के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन’}
अवधारणा प्रवाह
सरकारी योजनाएं और नीतियां → महिलाओं को संपत्ति का स्वामित्व → आर्थिक स्वतंत्रता और सुरक्षा → सामाजिक स्थिति में सुधार → लैंगिक समानता और सशक्तिकरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह सर्वेक्षण स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जाता है।
2. NFHS-5 के अनुसार, 15-49 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में घर के स्वामित्व का प्रतिशत पुरुषों की तुलना में अधिक है।
3. यह जनसंख्या की विशेषताओं, प्रजनन क्षमता और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों पर आंकड़े प्रदान करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि NFHS स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जाता है। कथन 2 गलत है क्योंकि NFHS-5 के अनुसार, 15-49 वर्ष की आयु वर्ग की 42.3% महिलाएं और 60.1% पुरुष घर के मालिक हैं, अतः पुरुषों का प्रतिशत अधिक है। कथन 3 सही है क्योंकि NFHS स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा इससे संबंधित क्षेत्रों जैसे जनसंख्या की विशेषताएं, प्रजनन क्षमता, परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, रुग्णता एवं स्वास्थ्य देखभाल, महिला सशक्तिकरण आदि पर आंकड़े प्रदान करता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सी योजना/योजनाएँ महिलाओं द्वारा संपत्ति के स्वामित्व और उनके आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है/हैं?
1. प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) – ग्रामीण
2. महिला समृद्धि योजना
3. दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) – ग्रामीण और शहरी दोनों में महिला मुखिया या संयुक्त स्वामित्व को प्राथमिकता दी जाती है। महिला समृद्धि योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की एक योजना है जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित है। दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन भी ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है। अतः सभी तीनों योजनाएँ महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देती हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा देने में सरकारी योजनाओं और नीतियों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संबंध में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के निष्कर्षों के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व के महत्व और भारत में इसकी वर्तमान स्थिति का संक्षिप्त उल्लेख करें।
मुख्य भाग 1: सरकारी योजनाओं और नीतियों की भूमिका का विश्लेषण करें।
* प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) – ग्रामीण और शहरी: महिला मुखिया या संयुक्त स्वामित्व की अनिवार्यता/प्राथमिकता।
* दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM): स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण।
* महिला समृद्धि योजना: महिलाओं के आर्थिक उत्थान हेतु प्रावधान।
* भूमि अधिकार अभिलेख (ROR) में लिंग संबंधी कॉलम शामिल करने की पहल।
* अन्य संबंधित कानूनी प्रावधान (जैसे हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 2005)।
* इन योजनाओं की सफलताएँ और सीमाएँ (जैसे जागरूकता की कमी, सामाजिक बाधाएँ, कार्यान्वयन चुनौतियाँ) का समालोचनात्मक मूल्यांकन करें।
मुख्य भाग 2: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के निष्कर्षों का महत्व।
* NFHS-5 के आंकड़े (महिलाओं और पुरुषों के घर/जमीन के स्वामित्व का प्रतिशत) प्रस्तुत करें।
* ये आंकड़े नीति निर्माताओं के लिए आधारभूत डेटा कैसे प्रदान करते हैं।
* लैंगिक अंतराल को समझने और लक्षित हस्तक्षेपों को डिजाइन करने में NFHS की भूमिका।
* प्रगति का आकलन करने और भविष्य की रणनीतियों को आकार देने में इसका महत्व।
निष्कर्ष: महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासों, नीतिगत सुधारों और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता पर बल दें, जिससे समग्र महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता प्राप्त की जा सके।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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