05 Aug डिजिटल इंडिया: सरकार ने साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा को किया मजबूत
✎ डिजिटल इंडिया कार्यक्रम भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलने के लिए एक व्यापक पहल है, जो डिजिटल अवसंरचना, सेवा वितरण और नागरिक सशक्तिकरण पर केंद्रित है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और संभावनाएं; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय। | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय। सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरूकता। आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्वों की भूमिका।
- Prelims: डिजिटल इंडिया कार्यक्रम, भारतनेट परियोजना, आधार, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), डिजीलॉकर, UMANG, ई-संजीवनी, सामान्य सेवा केंद्र (CSC), साइबर सुरक्षा
- Essay: डिजिटल सशक्तिकरण: भारत के विकास की कुंजी, प्रौद्योगिकी और शासन: एक नए युग की शुरुआत
त्वरित पुनरावृत्ति: डिजिटल इंडिया कार्यक्रम भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलने के लिए एक व्यापक पहल है, जो डिजिटल अवसंरचना, सेवा वितरण और नागरिक सशक्तिकरण पर केंद्रित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) ने हाल ही में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत डिजिटल अवसंरचना (Digital Infrastructure), साइबर सुरक्षा (Cyber Security) और डेटा प्रोटेक्शन (Data Protection) को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा किए गए विभिन्न प्रयासों की जानकारी दी है। यह जानकारी सुरक्षित और समावेशी डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए कानूनी ढाँचे, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और इंडिया एआई मिशन (India AI Mission) के महत्व पर प्रकाश डालती है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने जुलाई 2015 में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का शुभारंभ किया था, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी को सभी के लिए सुलभ बनाना और नागरिकों को सशक्त बनाना था।
- इस कार्यक्रम के तीन मुख्य लक्ष्य हैं: डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करना, सरकारी सेवाओं को डिजिटल रूप से प्रदान करना और डिजिटल साक्षरता व रोजगार के माध्यम से नागरिकों को सशक्त बनाना।
- पिछले दशक में, भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी, टेलीफोन कनेक्शन और इंटरनेट ग्राहकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो डिजिटल समावेशिता को दर्शाता है।
- सरकार ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure – DPI) के माध्यम से सेवा वितरण को बढ़ावा दिया है, जिससे नागरिकों को कल्याणकारी योजनाओं, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन शिक्षा तक पहुँचने में मदद मिली है।
- डेटा की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जिससे भारत दुनिया के सबसे सस्ते डेटा बाजारों में से एक बन गया है, जो डिजिटल पहुँच को और बढ़ाता है।
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम क्या है?
- डिजिटल इंडिया भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है।
- यह कार्यक्रम तीन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है: डिजिटल अवसंरचना का निर्माण, डिजिटल रूप से सेवाओं का वितरण और नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण।
- इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधार के लिए भारतनेट जैसी परियोजनाएँ शुरू की गई हैं, जिनका लक्ष्य ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुँचाना है।
- आधार एक बायोमेट्रिक पहचान प्लेटफॉर्म है जिसने सुरक्षित और तत्काल डिजिटल प्रमाणीकरण को सक्षम किया है, जिससे विभिन्न सेवाओं तक पहुँच आसान हुई है।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) के माध्यम से, कल्याणकारी योजनाओं का नकद लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित किया जाता है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ती है।
- यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface – UPI) दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान प्रणाली बन गया है, जो करोड़ों लोगों और व्यापारियों को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ता है।
- डिजीलॉकर नागरिकों को अपने महत्वपूर्ण दस्तावेजों को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने और साझा करने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे कागजी कार्रवाई कम होती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार | भारतनेट जैसी पहलों से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट की उपलब्धता बढ़ी है। |
| डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) | आधार, UPI, DigiLocker और UMANG जैसे प्लेटफॉर्म नागरिकों को कल्याणकारी योजनाओं, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं तक पहुँचने में मदद करते हैं। |
| डेटा की सामर्थ्य | डेटा की कीमतों में भारी कमी से भारत दुनिया के सबसे सस्ते डेटा बाजारों में से एक बन गया है, जिससे डिजिटल पहुँच बढ़ी है। |
| प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) | आधार से जुड़े DBT के माध्यम से, विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का नकद लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित होता है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ती है। |
| UPI की वैश्विक पहुँच | UPI भारत के 85% डिजिटल भुगतान और दुनिया भर के लगभग 50% रियल-टाइम डिजिटल भुगतान को संभालता है, जिससे यह सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान सिस्टम बन गया है। |
| ई-संजीवनी | यह प्लेटफॉर्म टेलीमेडिसिन के माध्यम से डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों तक त्वरित और आसान पहुँच प्रदान करता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच में सुधार होता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- डिजिटल अवसंरचना के विस्तार से डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है, जिससे नए रोजगार के अवसर और नवाचार को प्रोत्साहन मिला है।
- UPI जैसे डिजिटल भुगतान प्रणालियों ने वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ाया है और नकदी-रहित लेनदेन को बढ़ावा दिया है, जिससे अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता आई है।
- डेटा की कम लागत ने डिजिटल सेवाओं और ई-कॉमर्स के विकास को गति दी है, जिससे उपभोक्ताओं और व्यवसायों दोनों को लाभ हुआ है।
सामाजिक महत्व
- डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट कनेक्टिविटी के विस्तार ने नागरिकों को सशक्त बनाया है, जिससे उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं तक बेहतर पहुँच मिली है।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) ने कल्याणकारी योजनाओं के लाभों को सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाकर भ्रष्टाचार को कम किया है और लीकेज को रोका है।
- ई-संजीवनी जैसी टेलीमेडिसिन सेवाओं ने दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच में सुधार किया है, जिससे स्वास्थ्य परिणामों में सुधार हुआ है।
शासनिक महत्व
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) ने सरकारी सेवाओं के वितरण को अधिक कुशल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया है।
- UMANG और DigiLocker जैसे प्लेटफॉर्म नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाओं और दस्तावेजों तक आसानी से पहुँचने की सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे ‘ईज ऑफ लिविंग’ में सुधार हुआ है।
- साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण पर जोर देने से नागरिकों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और डिजिटल लेनदेन में विश्वास बढ़ता है।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल डिवाइड
- शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच इंटरनेट पहुँच और डिजिटल साक्षरता में अभी भी अंतर मौजूद है।
- तकनीकी ज्ञान की कमी और डिजिटल उपकरणों तक पहुँच का अभाव कुछ वर्गों को डिजिटल सेवाओं से वंचित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, शासन
2. साइबर सुरक्षा खतरे
- डिजिटल लेनदेन और डेटा के बढ़ते उपयोग से साइबर हमलों, डेटा उल्लंघनों और ऑनलाइन धोखाधड़ी का जोखिम बढ़ गया है।
- नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए मजबूत कानूनी और तकनीकी ढाँचे की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, शासन
3. डेटा गोपनीयता और संरक्षण
- व्यक्तिगत डेटा के संग्रह, भंडारण और उपयोग से संबंधित गोपनीयता संबंधी चिंताएँ बनी हुई हैं।
- डेटा संरक्षण कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: शासन, सामाजिक न्याय
4. तकनीकी अवसंरचना का रखरखाव
- भारतनेट जैसी परियोजनाओं के तहत स्थापित डिजिटल अवसंरचना के रखरखाव और उन्नयन के लिए सतत निवेश और कुशल जनशक्ति की आवश्यकता है।
- तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बिठाना और नई तकनीकों को अपनाना एक निरंतर चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा, आर्थिक विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डिजिटल साक्षरता का अभाव | विशेषकर ग्रामीण और वृद्ध आबादी में डिजिटल उपकरणों और सेवाओं का उपयोग करने की क्षमता की कमी। |
| साइबर धोखाधड़ी और फिशिंग | डिजिटल लेनदेन में वृद्धि के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी और व्यक्तिगत जानकारी चुराने के प्रयासों में वृद्धि। |
| डेटा स्थानीयकरण (Data Localisation) | डेटा को देश के भीतर संग्रहीत करने की आवश्यकता और वैश्विक डेटा प्रवाह पर इसके प्रभाव को संतुलित करना। |
| तकनीकी एकीकरण और अंतरसंचालनीयता | विभिन्न सरकारी विभागों और सेवाओं के बीच निर्बाध डेटा साझाकरण और एकीकरण सुनिश्चित करना। |
| अवसंरचना का अंतिम-मील वितरण | दूरदराज के क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं की विश्वसनीय पहुँच सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- भारतनेट परियोजना
- डिजिटल भारत निधि (DBN) मोबाइल स्कीम
- आधार
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT)
- यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI)
- DigiLocker
आगे की राह
- डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों का विस्तार करना, विशेषकर ग्रामीण और वंचित वर्गों के लिए, ताकि डिजिटल डिवाइड को कम किया जा सके।
- साइबर सुरक्षा ढाँचे को और मजबूत करना, जिसमें साइबर हमलों से बचाव, पहचान और प्रतिक्रिया तंत्र शामिल हों।
- व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक (Personal Data Protection Bill) जैसे कानूनों का शीघ्र कार्यान्वयन सुनिश्चित करना और डेटा गोपनीयता अधिकारों को मजबूत करना।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के नवाचार और विस्तार में निरंतर निवेश करना, जिसमें 5G और भविष्य की प्रौद्योगिकियाँ शामिल हों।
- सरकारी सेवाओं के वितरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों का नैतिक और प्रभावी उपयोग करना।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को बढ़ावा देना ताकि डिजिटल अवसंरचना के विकास और रखरखाव में तेजी लाई जा सके।
- सीमा पार डिजिटल सहयोग को मजबूत करना ताकि वैश्विक साइबर खतरों से निपटा जा सके और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लाभों को साझा किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम · डिजिटल अवसंरचना · साइबर सुरक्षा · डेटा प्रोटेक्शन · डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) · भारतनेट परियोजना · प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) · यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) · डिजिटल साक्षरता · ई-गवर्नेंस
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘निजता का अधिकार (Right to Privacy)’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(a)’, ‘note’: ‘सूचना तक पहुँच का अधिकार’}
अवधारणा प्रवाह
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का शुभारंभ → डिजिटल अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण (भारतनेट, DPI) → इंटरनेट कनेक्टिविटी और डेटा की सामर्थ्य में वृद्धि → डिजिटल सेवाओं का विस्तार (आधार, UPI, DBT, DigiLocker) → नागरिकों का सशक्तिकरण और ई-शासन में सुधार → आर्थिक संवृद्धि और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का शुभारंभ वर्ष 2015 में हुआ था।
2. भारतनेट परियोजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट प्रदान करना है।
3. UPI भारत के लगभग 85% डिजिटल भुगतानों को सपोर्ट करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम जुलाई 2015 में शुरू किया गया था। कथन 2 गलत है क्योंकि भारतनेट परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट प्रदान करना है। कथन 3 सही है क्योंकि UPI भारत के 85% डिजिटल भुगतानों को सपोर्ट करता है।
Q2. भारत में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. आधार एक विश्वसनीय बायोमेट्रिक पहचान प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।
2. DigiLocker नागरिकों को अपने दस्तावेज़ों को डिजिटल रूप से संग्रहीत करने में सहायता करता है।
3. UMANG प्लेटफॉर्म विभिन्न सरकारी सेवाओं को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि आधार सुरक्षित डिजिटल प्रमाणीकरण के लिए बायोमेट्रिक पहचान प्लेटफॉर्म है। कथन 2 सही है क्योंकि DigiLocker डिजिटल दस्तावेज़ों के लिए एक प्लेटफॉर्म है। कथन 3 सही है क्योंकि UMANG विभिन्न सरकारी सेवाओं को एक एकीकृत प्लेटफॉर्म पर प्रदान करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने भारत में डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करने और नागरिकों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्यों और उपलब्धियों का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, साइबर सुरक्षा और डेटा प्रोटेक्शन से संबंधित चुनौतियों का भी उल्लेख कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** डिजिटल इंडिया कार्यक्रम (जुलाई 2015) का संक्षिप्त परिचय, इसके विज़न और तीन मुख्य लक्ष्यों (डिजिटल अवसंरचना, डिजिटल सेवा वितरण, डिजिटल साक्षरता) का उल्लेख।
2. **प्रमुख उद्देश्य:**
* डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करना।
* सरकारी सेवाओं को डिजिटल रूप से प्रदान करना।
* डिजिटल साक्षरता और रोजगार के माध्यम से नागरिकों को सशक्त बनाना।
3. **प्रमुख उपलब्धियाँ (डेटा और योजनाओं के साथ):**
* **इंटरनेट कनेक्टिविटी:** भारतनेट परियोजना, टेलीफोन/इंटरनेट ग्राहकों की संख्या में वृद्धि (मार्च 2014 से मार्च 2026 तक के आंकड़े)।
* **डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI):** डेटा की कीमतों में कमी (2014 से 2025-26 तक), आधार (1.44 अरब से अधिक नंबर), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) (52 लाख करोड़ रुपये से अधिक), UPI (दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम), DigiLocker (71.66 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता), UMANG (2,575 सेवाएं), e-Sanjeevani (48 करोड़ से अधिक मरीज)।
* **डिजिटल साक्षरता:** सामान्य सेवा केंद्र (CSC) की भूमिका।
4. **साइबर सुरक्षा और डेटा प्रोटेक्शन से संबंधित चुनौतियाँ:**
* बढ़ते साइबर हमले और डेटा उल्लंघनों का खतरा।
* डिजिटल डिवाइड (ग्रामीण-शहरी, अमीर-गरीब) को कम करना।
* डेटा गोपनीयता और व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक (Personal Data Protection Bill) जैसे कानूनी ढांचों का प्रभावी कार्यान्वयन।
* डिजिटल साक्षरता और जागरूकता का अभाव, विशेषकर कमजोर वर्गों में।
* डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा और लचीलापन सुनिश्चित करना।
5. **निष्कर्ष:** डिजिटल इंडिया के महत्व को रेखांकित करते हुए, भविष्य की चुनौतियों का समाधान करने और एक सुरक्षित व समावेशी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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