फार्मा पीएलआई योजना: 6,659 करोड़ रु. मिले, जानिए थोक दवाओं की चुनौतियाँ

फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना — diagram

फार्मा पीएलआई योजना: 6,659 करोड़ रु. मिले, जानिए थोक दवाओं की चुनौतियाँ

फार्मा पीएलआई योजना: 6,659 करोड़ रु. मिले, जानिए थोक दवाओं की चुनौतियाँ — फार्मास्युटिकल पीएलआई योजनाओं के तहत वितरित प्रोत्साहन राशि
आरेख: फार्मास्युटिकल पीएलआई योजनाओं के तहत वितरित प्रोत्साहन राशि

✎ उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना का उद्देश्य फार्मास्युटिकल क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाना है, हालांकि थोक दवाओं के लिए इसके कार्यान्वयन में कुछ…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।  |  GS Paper III — निवेश मॉडल।
  • Prelims: उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI), फार्मास्युटिकल क्षेत्र, थोक दवाएं, चिकित्सा उपकरण, किण्वन (Fermentation), आत्मनिर्भर भारत अभियान
  • Essay: आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका।, भारत में औद्योगिक विकास: चुनौतियाँ और अवसर।

त्वरित पुनरावृत्ति: उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना का उद्देश्य फार्मास्युटिकल क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाना है, हालांकि थोक दवाओं के लिए इसके कार्यान्वयन में कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ा है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने हाल ही में लोकसभा में बताया कि फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना वित्त वर्ष 2022-23 में शुरू हुई थी। इस योजना के तहत मार्च 2026 तक कुल 15,000 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय में से 6,659 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की जा चुकी है। थोक दवाओं के लिए PLI योजना के तहत कार्यान्वयन में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और किण्वन आधारित औषधियों के लिए लंबी निर्माण अवधि जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ा है, जिससे परियोजनाओं के आरंभ होने में देरी हुई है और निधि वितरण प्रभावित हुआ है।

पृष्ठभूमि

  • भारत विश्व में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा प्रदाता है, जो वैश्विक आपूर्ति का 20% से अधिक हिस्सा है।
  • भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग मूल्य के हिसाब से तीसरा सबसे बड़ा और मात्रा के हिसाब से सबसे बड़ा है।
  • COVID-19 महामारी ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान पैदा किया, जिससे भारत को महत्वपूर्ण सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (API) और मध्यवर्ती उत्पादों के लिए अन्य देशों पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता महसूस हुई।
  • सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत विभिन्न क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए PLI योजनाओं की शुरुआत की।
  • फार्मास्युटिकल क्षेत्र में PLI योजना का उद्देश्य उच्च मूल्य वाले उत्पादों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक फार्मास्युटिकल आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाना है।

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना क्या है?

  • उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल है जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और आयात बिलों को कम करना है।
  • यह योजना पात्र कंपनियों को भारत में निर्मित उत्पादों की वृद्धिशील बिक्री पर प्रोत्साहन प्रदान करती है।
  • फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए PLI योजना का लक्ष्य भारत को उच्च मूल्य वाले उत्पादों के विनिर्माण के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाना है, जिसमें जटिल जेनेरिक, पेटेंट से बाहर हो चुकी दवाएं और बायोफार्मास्युटिकल्स शामिल हैं।
  • इस योजना में तीन मुख्य घटक शामिल हैं: दवाओं के लिए PLI योजना, थोक दवाओं के लिए PLI योजना और चिकित्सा उपकरणों के लिए PLI योजना।
  • थोक दवाओं के लिए PLI योजना का उद्देश्य देश में महत्वपूर्ण सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (API) और प्रमुख शुरुआती सामग्री (KSM) के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
  • योजना के तहत प्रोत्साहन राशि परियोजनाओं में निर्मित उत्पादों की बिक्री के आधार पर जारी की जाती है, जिससे उत्पादन और बिक्री के बीच सीधा संबंध स्थापित होता है।
  • किण्वन (Fermentation) आधारित थोक औषधियों के विनिर्माण में जैविक प्रक्रियाओं के कारण लंबी निर्माण अवधि और विशिष्ट तकनीकी आवश्यकताएं होती हैं, जो रासायनिक संश्लेषण से भिन्न होती हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए
वित्तीय वर्ष 2022-23 में आरंभ कोविड-19 महामारी के बाद फार्मास्युटिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता को दर्शाता है
कुल वित्तीय परिव्यय 15,000 करोड़ रुपये सरकार की इस क्षेत्र में निवेश और संवृद्धि के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है
मार्च 2026 तक 6,659 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित योजना के प्रारंभिक चरण में प्रगति और कार्यान्वयन को दर्शाता है
थोक दवाओं के लिए अलग PLI योजना महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री (APIs) के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान
प्रोत्साहन राशि उत्पादों की बिक्री पर आधारित उत्पादन और बिक्री के बीच सीधा संबंध स्थापित करता है, जिससे वास्तविक उत्पादन को बढ़ावा मिलता है

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह योजना फार्मास्युटिकल क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देती है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होती है और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलती है।
  • बढ़े हुए उत्पादन से रोजगार सृजन होता है और अर्थव्यवस्था में मूल्यवर्धन होता है।
  • थोक दवाओं के उत्पादन में आत्मनिर्भरता से देश की दवा सुरक्षा सुनिश्चित होती है, विशेषकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के समय।

सामरिक महत्व

  • भारत को ‘विश्व की फार्मेसी’ के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलती है, खासकर उच्च मूल्य वाले और जटिल फार्मास्युटिकल उत्पादों के विनिर्माण में।
  • यह योजना वैश्विक फार्मास्युटिकल आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका को बढ़ाती है और निर्यात क्षमता को मजबूत करती है।

सामाजिक महत्व

  • सस्ती और सुलभ दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद करती है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होता है।
  • अनुसंधान और विकास (R&D) को प्रोत्साहित करती है, जिससे नई दवाओं और उपचारों का विकास होता है।

चुनौतियाँ

1. भूमि अधिग्रहण में देरी

  • नई विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए आवश्यक भूमि के अधिग्रहण में लगने वाला लंबा समय परियोजनाओं के आरंभ होने में विलंब का एक प्रमुख कारण है।

2. पर्यावरण मंजूरी

  • फार्मास्युटिकल इकाइयों को स्थापित करने के लिए आवश्यक पर्यावरण संबंधी अनुमतियाँ प्राप्त करने में जटिल प्रक्रिया और समय लगता है, जिससे परियोजनाएँ बाधित होती हैं।

3. उच्च उपयोगिता लागत

  • बिजली, पानी और अन्य आवश्यक संसाधनों की उच्च लागत विनिर्माण इकाइयों के परिचालन व्यय को बढ़ाती है, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होती है।

4. किण्वन आधारित थोक औषधियों की लंबी निर्माण अवधि

  • किण्वन (Fermentation) प्रक्रिया, जो जीवित कोशिकाओं पर निर्भर करती है, रासायनिक संश्लेषण की तुलना में धीमी और अधिक समय लेने वाली होती है, जिससे उत्पादन चक्र लंबा हो जाता है।

5. निधि वितरण में बाधा

  • प्रोत्साहन राशि उत्पादों की बिक्री के आधार पर जारी की जाती है। परियोजनाओं के आरंभ होने में देरी के कारण बिक्री भी प्रभावित होती है, जिससे प्रोत्साहन राशि के वितरण में विलंब होता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
भूमि अधिग्रहण परियोजनाओं के कार्यान्वयन में अत्यधिक देरी का कारण बनता है
पर्यावरण मंजूरी जटिल और लंबी प्रक्रिया, जिससे परियोजनाओं की समय-सीमा प्रभावित होती है
उच्च उपयोगिता लागत विनिर्माण की लागत बढ़ाती है, जिससे घरेलू उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता कम होती है
किण्वन आधारित उत्पादन प्राकृतिक रूप से धीमी प्रक्रिया, जिसके कारण उत्पादन चक्र लंबा होता है
प्रोत्साहन वितरण परियोजनाओं में देरी के कारण उत्पादों की बिक्री प्रभावित होती है, जिससे प्रोत्साहन राशि के वितरण में बाधा आती है

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • दवाओं के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI)
  • थोक दवाओं के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI)
  • चिकित्सा उपकरणों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI)

आगे की राह

  • भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और तेज करना, एकल खिड़की मंजूरी प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करना।
  • पर्यावरण मंजूरी प्रक्रियाओं को तर्कसंगत बनाना और समयबद्ध तरीके से निपटाना, साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ाना।
  • विनिर्माण इकाइयों के लिए बिजली और अन्य उपयोगिताओं की लागत को कम करने हेतु विशेष सब्सिडी या रियायती दरें प्रदान करना।
  • किण्वन आधारित उत्पादन प्रक्रियाओं में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना ताकि दक्षता और गति में सुधार हो सके।
  • प्रोत्साहन वितरण तंत्र की समीक्षा करना और प्रारंभिक चरणों में कुछ अग्रिम प्रोत्साहन या मील के पत्थर-आधारित भुगतान पर विचार करना।
  • घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक स्थिर और अनुकूल नीतिगत माहौल बनाए रखना।
  • कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना ताकि फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए आवश्यक कुशल कार्यबल उपलब्ध हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

PLI योजना का शुभारंभ  →  घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन  →  परियोजना कार्यान्वयन में बाधाएँ (भूमि, मंजूरी, लागत)  →  उत्पादन और बिक्री में देरी  →  प्रोत्साहन राशि के वितरण में विलंब  →  योजना के उद्देश्यों की धीमी प्राप्ति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना वित्त वर्ष 2022-23 में आरंभ हुई थी।
2. फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए कुल वित्तीय परिव्यय 15,000 करोड़ रुपये है।
3. थोक दवाओं के लिए PLI योजना के तहत मार्च 2026 तक 87.70 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि PLI योजना फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2022-23 में आरंभ हुई थी। कथन 2 सही है क्योंकि इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 15,000 करोड़ रुपये है। कथन 3 भी सही है क्योंकि थोक दवाओं के लिए PLI योजना के तहत मार्च 2026 तक 87.70 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कारक थोक दवाओं के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) परियोजनाओं के कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न कर रहा/रहे है/हैं?
1. भूमि अधिग्रहण में लगने वाला समय
2. पर्यावरण मंजूरी
3. उच्च उपयोगिता लागत
4. किण्वन आधारित थोक औषधियों के लिए लंबी निर्माण अवधि
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 3 और 4
  3. केवल 1, 2 और 3
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए समाचार के अनुसार, थोक दवाओं संबंधी PLI परियोजनाओं के कार्यान्वयन में भूमि अधिग्रहण में लगने वाले समय, पर्यावरण मंजूरी, उच्च उपयोगिता लागत और किण्वन आधारित थोक औषधियों के लिए लंबी निर्माण अवधि जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ा है। अतः सभी कथन सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना का उद्देश्य भारत के विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देना है। फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए इस योजना के उद्देश्यों और इसके कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना का संक्षिप्त परिचय और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में इसके महत्व को रेखांकित करें।
मुख्य भाग:
1. PLI योजना के उद्देश्य: घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना, आयात निर्भरता कम करना, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति मजबूत करना, रोज़गार सृजन, आर्थिक संवृद्धि और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को आकर्षित करना। विशेष रूप से फार्मास्युटिकल क्षेत्र में दवा सुरक्षा और सस्ती दवाओं की उपलब्धता।
2. फार्मास्युटिकल PLI योजना का विवरण: वित्तीय परिव्यय (15,000 करोड़ रुपये), आरंभ होने का वर्ष (वित्त वर्ष 2022-23), थोक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के लिए उप-योजनाएं।
3. कार्यान्वयन में चुनौतियाँ: भूमि अधिग्रहण में देरी, पर्यावरण मंजूरी में लगने वाला समय, उच्च उपयोगिता लागत, किण्वन आधारित थोक औषधियों के लिए लंबी निर्माण अवधि (जैविक गतिविधि पर निर्भरता और धीमी वृद्धि), और प्रोत्साहन राशि का वितरण उत्पादन व बिक्री पर आधारित होने के कारण परियोजनाओं के आरंभ होने में देरी से प्रभावित होना।
4. समालोचनात्मक विश्लेषण: योजना के सकारात्मक प्रभाव (घरेलू क्षमता निर्माण, निर्यात प्रोत्साहन) और चुनौतियों के कारण संभावित कमियाँ (लक्ष्यों की प्राप्ति में देरी, निवेश पर प्रभाव)। सरकार द्वारा इन चुनौतियों के समाधान के लिए उठाए जा सकने वाले कदम (प्रक्रियाओं का सरलीकरण, प्रोत्साहन संरचना में लचीलापन)।
निष्कर्ष: योजना के महत्व को दोहराते हुए, इन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करके भारत को वैश्विक फार्मास्युटिकल हब बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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