तमिलनाडु सरकार ने संघ-राज्य संबंध रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक किया

T.N. govt orders that English version of Part I of Union-State Relations report be put in public domain — diagram

तमिलनाडु सरकार ने संघ-राज्य संबंध रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक किया

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✎ केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संविधान की संघीय संरचना का आधार हैं, जो संघ और राज्यों के बीच विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों का वितरण करते हैं।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: केंद्र एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघवाद  |  GS Paper II — केंद्र-राज्य संबंध
  • Prelims: केंद्र-राज्य संबंध, न्यायिक समीक्षा, संघवाद, राज्यों की स्वायत्तता, सरकारी आयोग, पुंछी आयोग
  • Essay: भारतीय संघवाद: चुनौतियाँ और समाधान, केंद्र-राज्य संबंधों में पारदर्शिता और जवाबदेही का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संविधान की संघीय संरचना का आधार हैं, जो संघ और राज्यों के बीच विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों का वितरण करते हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों पर गठित एक उच्च-स्तरीय समिति (High-Level Committee on Union-State Relations) की रिपोर्ट के पहले भाग के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में रखने का निर्देश दिया है। यह कदम पारदर्शिता सुनिश्चित करने और रिपोर्ट तक आम जनता की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है, जैसा कि पहले तमिल संस्करण के साथ किया गया था। सरकार ने रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण के लिए विशेष कॉपीराइट (exclusive copyright) को भी रद्द करने का निर्देश दिया है।

पृष्ठभूमि

  • तमिलनाडु की पिछली DMK सरकार ने 15 अप्रैल, 2025 को केंद्र-राज्य संबंधों पर एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था।
  • इस समिति की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने की थी।
  • सेवानिवृत्त IAS अधिकारी के. अशोक वर्धन शेट्टी और तमिलनाडु राज्य योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एम. नागनाथन को समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था।
  • समिति ने इस वर्ष 16 फरवरी को अपनी रिपोर्ट का पहला भाग तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को सौंपा था।
  • मुख्यमंत्री स्टालिन ने 18 फरवरी को यह रिपोर्ट विधानसभा में प्रस्तुत की थी।
  • यह कदम केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार और राज्यों की स्वायत्तता (state autonomy) की मांगों के बीच आया है।

केंद्र-राज्य संबंध क्या हैं?

  • केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संविधान की संघीय संरचना का एक मूलभूत पहलू हैं, जो संघ और राज्यों के बीच विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों के वितरण को परिभाषित करते हैं।
  • संविधान के भाग XI और XII में इन संबंधों का विस्तृत वर्णन किया गया है, जिसमें अनुच्छेद 245 से 293 तक विभिन्न प्रावधान शामिल हैं।
  • विधायी संबंध (Legislative Relations) अनुच्छेद 245 से 255 तक वर्णित हैं, जो संसद और राज्य विधानमंडलों की कानून बनाने की शक्तियों का सीमांकन करते हैं, जिसमें संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची का प्रावधान है।
  • प्रशासनिक संबंध (Administrative Relations) अनुच्छेद 256 से 263 तक विस्तृत हैं, जो केंद्र और राज्यों के बीच कार्यकारी शक्तियों के समन्वय और सहयोग को सुनिश्चित करते हैं।
  • वित्तीय संबंध (Financial Relations) अनुच्छेद 268 से 293 तक वर्णित हैं, जो कराधान शक्तियों के वितरण, राजस्व के बंटवारे और अनुदान सहायता (grants-in-aid) से संबंधित हैं।
  • इन संबंधों की समीक्षा के लिए समय-समय पर विभिन्न आयोगों का गठन किया गया है, जैसे सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) (1983) और पुंछी आयोग (Punchhi Commission) (2007), जिन्होंने केंद्र-राज्य संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं।
  • भारत में संघवाद (federalism) की प्रकृति सहकारी संघवाद (cooperative federalism) और प्रतिस्पर्धी संघवाद (competitive federalism) दोनों का मिश्रण है, जहाँ केंद्र और राज्य दोनों राष्ट्रीय विकास के लिए मिलकर काम करते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
उच्च-स्तरीय समिति का गठन केंद्र-राज्य संबंधों की जटिलताओं का अध्ययन और सुधार हेतु सिफारिशें प्रदान करना।
रिपोर्ट का सार्वजनिक डोमेन में जारी होना केंद्र-राज्य संबंधों पर पारदर्शिता और सार्वजनिक चर्चा को बढ़ावा देना।
रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण का विमोचन गैर-तमिल भाषी राज्यों और राष्ट्रीय स्तर पर रिपोर्ट की पहुंच सुनिश्चित करना।
कॉपीराइट का निरस्तीकरण रिपोर्ट की व्यापक पहुंच और उपयोग को सुविधाजनक बनाना, अकादमिक शोध और नीतिगत बहस को प्रोत्साहित करना।

महत्व

संघवाद और पारदर्शिता

  • तमिलनाडु सरकार का यह कदम संघवाद (Federalism) के सिद्धांतों को मजबूत करता है, जहां राज्य अपनी स्वायत्तता और केंद्र के साथ संबंधों पर विचार-विमर्श करते हैं।
  • रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में लाने से केंद्र-राज्य संबंधों में पारदर्शिता (Transparency) बढ़ती है, जिससे नागरिक और विशेषज्ञ इन मुद्दों पर सूचित राय बना सकते हैं।

शासन और जवाबदेही

  • उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से शासन (Governance) में जवाबदेही (Accountability) आती है, क्योंकि सिफारिशों और उनके औचित्य की सार्वजनिक जांच हो सकती है।
  • यह कदम अन्य राज्यों को भी केंद्र-राज्य संबंधों पर अपनी रिपोर्ट या अध्ययन सार्वजनिक करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वस्थ बहस छिड़ सकती है।

नीति निर्माण और सुधार

  • समिति की सिफारिशें केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार के लिए एक आधार प्रदान करती हैं, जिससे भविष्य में नीति निर्माण (Policy Making) और विधायी परिवर्तनों को दिशा मिल सकती है।
  • यह रिपोर्ट विभिन्न राज्यों की विशिष्ट चिंताओं और अपेक्षाओं को उजागर कर सकती है, जिससे केंद्र सरकार को एक अधिक समावेशी और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने में मदद मिलेगी।

चुनौतियाँ

1. केंद्र-राज्य संबंधों में असंतुलन

  • राज्यों द्वारा अक्सर वित्तीय स्वायत्तता, विधायी शक्तियों और प्रशासनिक नियंत्रण के संबंध में केंद्र के अत्यधिक हस्तक्षेप की शिकायत की जाती है।
  • राज्यों के बीच संसाधनों के वितरण और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन को लेकर मतभेद बने रहते हैं, जिससे संघीय ढांचे में तनाव उत्पन्न होता है।

2. राज्यों की वित्तीय निर्भरता

  • राजस्व के सीमित स्रोतों और केंद्र से अनुदान पर अत्यधिक निर्भरता के कारण राज्य अपनी विकासात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने में कठिनाई महसूस करते हैं।
  • राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) में सुधार की आवश्यकता है ताकि राज्यों को अधिक वित्तीय स्वतंत्रता और जवाबदेही मिल सके।

3. विधायी और प्रशासनिक मुद्दे

  • समवर्ती सूची (Concurrent List) के विषयों पर केंद्र और राज्यों के बीच कानूनों के टकराव की संभावना बनी रहती है, जिससे कार्यान्वयन में जटिलताएँ आती हैं।
  • अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के अधिकारियों की पदस्थापना और नियंत्रण को लेकर भी केंद्र और राज्यों के बीच अक्सर मतभेद देखे जाते हैं।

4. राज्यपाल की भूमिका

  • राज्यपाल (Governor) की भूमिका को लेकर अक्सर विवाद उत्पन्न होते हैं, विशेषकर जब केंद्र और राज्य में अलग-अलग राजनीतिक दल सत्ता में होते हैं।
  • राज्यपाल के विवेकाधीन अधिकारों और राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर उनकी सहमति को लेकर संवैधानिक बहस बनी रहती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
राज्यों की स्वायत्तता केंद्र द्वारा राज्यों के मामलों में अत्यधिक हस्तक्षेप, विशेषकर वित्तीय और विधायी क्षेत्रों में।
वित्तीय हस्तांतरण राज्यों को पर्याप्त और समय पर वित्तीय संसाधनों का हस्तांतरण न होना, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं।
समवर्ती सूची समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र और राज्यों के कानूनों के बीच टकराव, जिससे कार्यान्वयन में बाधाएँ आती हैं।
राज्यपाल का पद राज्यपाल की भूमिका को लेकर राजनीतिक विवाद और उनके विवेकाधीन अधिकारों का कथित दुरुपयोग।
अंतर-राज्यीय विवाद नदी जल बँटवारे, सीमा विवाद और अन्य अंतर-राज्यीय मुद्दों का समाधान न होना।

आगे की राह

  • केंद्र-राज्य संबंधों पर गठित विभिन्न आयोगों (जैसे सरकारी आयोग, पुंछी आयोग) की सिफारिशों को गंभीरता से लागू करना।
  • राज्यों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करना और राजकोषीय संघवाद को मजबूत करना, जिससे वे अपनी विकासात्मक प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर सकें।
  • अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) और राष्ट्रीय विकास परिषद (National Development Council) जैसे मंचों को सक्रिय करना ताकि केंद्र और राज्यों के बीच नियमित संवाद और समन्वय स्थापित हो सके।
  • समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाते समय राज्यों के साथ प्रभावी परामर्श सुनिश्चित करना और उनके हितों का ध्यान रखना।
  • राज्यपाल के पद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए संवैधानिक प्रावधानों का सख्ती से पालन करना और उनके विवेकाधीन अधिकारों के उपयोग में पारदर्शिता लाना।
  • अंतर-राज्यीय विवादों के समाधान के लिए एक प्रभावी और समयबद्ध तंत्र विकसित करना, जिसमें न्यायिक और गैर-न्यायिक दोनों प्रकार के उपाय शामिल हों।
  • सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) और प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) दोनों को बढ़ावा देना ताकि राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और सहयोग की भावना विकसित हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

केंद्र-राज्य संबंध · संघवाद · राज्यों की स्वायत्तता · सरकारी आयोग · पुंछी आयोग · राज्यों के अधिकार · न्यायिक समीक्षा · सहकारी संघवाद · वित्तीय संबंध · प्रशासनिक संबंध · विधायी संबंध · तमिलनाडु सरकार

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 245-255’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य विधायी संबंधों का वर्णन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 256-263’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंधों का वर्णन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 268-281’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों का वर्णन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 356’, ‘note’: ‘राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 263’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय परिषद का गठन’}

अवधारणा प्रवाह

राज्य सरकार द्वारा समिति का गठन  →  समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करना  →  रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में जारी करना  →  केंद्र-राज्य संबंधों पर सार्वजनिक बहस  →  संघीय ढांचे में सुधार हेतु सिफारिशें

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत का संविधान केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के वितरण के लिए सातवीं अनुसूची का प्रावधान करता है।
2. सरकारी आयोग की स्थापना केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए की गई थी।
3. अनुच्छेद 263 अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) के गठन से संबंधित है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। सातवीं अनुसूची में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची शामिल हैं जो केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण करती हैं। कथन 2 सही है। सरकारी आयोग (1983) का गठन केंद्र-राज्य संबंधों पर सिफारिशें देने के लिए किया गया था। कथन 3 सही है। अनुच्छेद 263 राष्ट्रपति को अंतर-राज्यीय परिषद के गठन का अधिकार देता है ताकि केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित किया जा सके।

Q2. अभिकथन (A): तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों पर अपनी उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने का आदेश दिया है।
कारण (R): यह कदम केंद्र-राज्य संबंधों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि तमिलनाडु सरकार ने अपनी समिति की रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने का आदेश दिया है। कारण (R) भी सही है और यह A की सही व्याख्या है, क्योंकि सरकार का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में केंद्र-राज्य संबंधों की प्रकृति का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, विभिन्न आयोगों द्वारा की गई प्रमुख सिफारिशों पर भी चर्चा कीजिए कि उन्होंने इन संबंधों को कैसे प्रभावित किया है। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय में भारत में केंद्र-राज्य संबंधों की संघीय प्रकृति का संक्षिप्त उल्लेख करें। मुख्य भाग में, विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय संबंधों का विश्लेषण करें, जिसमें केंद्र की ओर झुकाव और राज्यों की स्वायत्तता की मांगों पर प्रकाश डाला जाए। सरकारी आयोग (Justice R.S. Sarkaria Commission) और पुंछी आयोग (Justice M.M. Punchhi Commission) जैसे प्रमुख आयोगों की स्थापना के कारणों और उनकी महत्वपूर्ण सिफारिशों का विस्तार से वर्णन करें। विशेष रूप से, राज्यपाल की भूमिका, अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग, वित्तीय हस्तांतरण, अंतर-राज्यीय परिषद और समवर्ती सूची के विषयों पर सिफारिशों पर ध्यान केंद्रित करें। निष्कर्ष में, सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के महत्व और केंद्र-राज्य संबंधों को मजबूत करने के लिए आगे के उपायों पर विचार प्रस्तुत करें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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