08 Aug बालकों के लिए सोशल मीडिया और गेमिंग प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध: संसद में विधेयक प्रस्तावित
✎ SHIELD विधेयक, 2025 बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आयु-सत्यापन को अनिवार्य बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निजी सदस्य विधेयक है, जो डिजिटल युग में बच्चों के अधिकारों की रक्षा का प्रयास करता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: निजी सदस्य विधेयक, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, SHIELD विधेयक, 2025, बच्चों के अधिकार, ऑनलाइन सुरक्षा, डेटा गोपनीयता
- Essay: डिजिटल युग में बच्चों के अधिकार और चुनौतियाँ, भारत में ऑनलाइन सामग्री विनियमन: आवश्यकता और सीमाएँ
त्वरित पुनरावृत्ति: SHIELD विधेयक, 2025 बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आयु-सत्यापन को अनिवार्य बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निजी सदस्य विधेयक है, जो डिजिटल युग में बच्चों के अधिकारों की रक्षा का प्रयास करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, संसद में एक निजी सदस्य विधेयक, ‘सेफगार्डिंग हेल्दी इंटरनेट एनवायरनमेंट्स फॉर लिटिल डिजिटल-नेटिव्स (SHIELD) विधेयक, 2025’ पेश करने का प्रस्ताव था। इस विधेयक का उद्देश्य सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के खाते बनाने पर प्रतिबंध लगाना और नाबालिगों को लक्षित करने वाले व्यक्तिगत विज्ञापनों पर सीमाएँ लगाना है। यह विधेयक बच्चों के ऑनलाइन अधिकारों और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पृष्ठभूमि
- भारत में इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिसमें बच्चों की भागीदारी भी शामिल है।
- बच्चों के ऑनलाइन शोषण, साइबरबुलिंग और अनुचित सामग्री के संपर्क में आने की बढ़ती घटनाओं ने चिंताएँ बढ़ा दी हैं।
- मौजूदा कानूनों जैसे सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के संबंध में कुछ प्रावधान हैं, लेकिन एक व्यापक कानून की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
- डेटा गोपनीयता (Data Privacy) और बच्चों के व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग को लेकर वैश्विक स्तर पर भी बहस जारी है।
- कई विकसित देशों में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए सख्त कानून और आयु-सत्यापन प्रणालियाँ (Age-verification systems) मौजूद हैं।
- निजी सदस्य विधेयक (Private Member’s Bill) संसद के किसी भी गैर-मंत्री सदस्य द्वारा पेश किया जा सकता है, हालांकि इनके कानून बनने की संभावना कम होती है।
SHIELD विधेयक, 2025 क्या है?
- यह एक निजी सदस्य विधेयक है जिसका पूरा नाम ‘सेफगार्डिंग हेल्दी इंटरनेट एनवायरनमेंट्स फॉर लिटिल डिजिटल-नेटिव्स (SHIELD) विधेयक, 2025’ है।
- विधेयक में ‘बच्चे’ को 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है।
- यह सोशल मीडिया सेवाओं, ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल मध्यस्थों पर बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष दायित्व (Safety Obligations) आरोपित करता है।
- प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को माता-पिता की सत्यापित सहमति (Verified Parental Consent) के बिना सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर खाते बनाने से प्रतिबंधित किया जा सकता है।
- यह प्लेटफॉर्म को बच्चों के लिए ट्रैकिंग (Tracking), प्रोफाइलिंग (Profiling) या व्यक्तिगत विज्ञापन (Personalised Advertising) का उपयोग करने से प्रतिबंधित करता है और उन्हें बच्चों के व्यक्तिगत डेटा को संसाधित करने से रोकता है।
- विधेयक नाबालिगों के लिए सुलभ प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य आयु-सत्यापन प्रणाली और माता-पिता-नियंत्रण डैशबोर्ड (Parental-control dashboards) का प्रस्ताव करता है।
- प्लेटफॉर्म को बच्चों को अश्लील सामग्री, जुआ, हिंसक या चरमपंथी सामग्री और नशीली दवाओं से संबंधित सामग्री के संपर्क में आने से रोकने के लिए भी कदम उठाने होंगे।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए खाता बनाने पर प्रतिबंध | नाबालिगों को ऑनलाइन जोखिमों से बचाने और उनकी डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु। |
| माता-पिता की सत्यापित सहमति अनिवार्य | बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर माता-पिता का नियंत्रण बढ़ाने और उनकी निगरानी को सशक्त करने के लिए। |
| व्यक्तिगत विज्ञापन पर रोक | बच्चों को लक्षित विज्ञापनों से बचाने और उनके डेटा के अनुचित उपयोग को रोकने के लिए। |
| आयु-सत्यापन प्रणाली अनिवार्य | यह सुनिश्चित करने के लिए कि केवल उपयुक्त आयु वर्ग के उपयोगकर्ता ही विशिष्ट सामग्री या प्लेटफ़ॉर्म तक पहुंच सकें। |
| माता-पिता नियंत्रण डैशबोर्ड | अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधि, गोपनीयता सेटिंग्स और स्क्रीन समय को प्रबंधित करने में सक्षम बनाने हेतु। |
| अश्लीलता, जुआ, हिंसक सामग्री से बचाव | बच्चों को हानिकारक और अनुपयुक्त सामग्री के संपर्क में आने से रोकने के लिए। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- यह विधेयक बच्चों को ऑनलाइन उत्पीड़न (Online Harassment), साइबरबुलिंग (Cyberbullying) और हानिकारक सामग्री के संपर्क में आने से बचाने में मदद करेगा, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार होगा।
- यह माता-पिता को अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर अधिक नियंत्रण प्रदान करेगा, जिससे वे डिजिटल दुनिया में अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकेंगे।
- यह बच्चों के लिए एक सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण बनाने में सहायक होगा, जिससे वे बिना किसी डर के डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) विकसित कर सकेंगे।
नैतिक महत्व
- यह विधेयक बच्चों के डेटा गोपनीयता (Data Privacy) अधिकारों की रक्षा करेगा, क्योंकि यह प्लेटफार्मों को बच्चों के डेटा को ट्रैक करने, प्रोफाइल करने या व्यक्तिगत विज्ञापनों के लिए उपयोग करने से प्रतिबंधित करता है।
- यह डिजिटल प्लेटफार्मों की नैतिक जवाबदेही (Ethical Accountability) को बढ़ाएगा, जिससे उन्हें बच्चों के हितों को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
शासन और नियामक महत्व
- यह विधेयक भारत में ऑनलाइन सुरक्षा और बाल संरक्षण के लिए एक मजबूत नियामक ढांचा (Regulatory Framework) स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act) के तहत उल्लंघनों के लिए दंड का प्रावधान करता है, जिससे डिजिटल प्लेटफार्मों को नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
- यह विधेयक वैश्विक स्तर पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए बनाए जा रहे कानूनों और विनियमों के अनुरूप है।
चुनौतियाँ
1. आयु-सत्यापन की जटिलता
- ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर बच्चों की सही आयु का सत्यापन करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- गलत आयु-सत्यापन प्रणालियों से बच्चों को अभी भी जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, ई-गवर्नेंस
2. गोपनीयता और डेटा सुरक्षा
- आयु-सत्यापन के लिए अतिरिक्त व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करने से बच्चों की गोपनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।
- डेटा उल्लंघनों (Data Breaches) की स्थिति में बच्चों की संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम बढ़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आंतरिक सुरक्षा
3. निजी सदस्य विधेयक का पारित होना
- भारत में निजी सदस्य विधेयक (Private Member’s Bill) शायद ही कभी कानून बन पाते हैं, जिससे इस विधेयक के पारित होने की संभावना कम हो सकती है।
- सरकार के समर्थन के बिना, ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक को कानून का रूप देना मुश्किल होता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजव्यवस्था
4. प्रवर्तन की चुनौतियाँ
- ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर नियमों का प्रभावी ढंग से प्रवर्तन (Enforcement) करना, विशेषकर वैश्विक प्लेटफार्मों के लिए, एक बड़ी चुनौती है।
- उल्लंघनों का पता लगाना और उन पर कार्रवाई करना, खासकर छोटे प्लेटफार्मों के लिए, मुश्किल हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, आंतरिक सुरक्षा
5. तकनीकी विकास के साथ तालमेल
- डिजिटल परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, और नए प्लेटफार्मों तथा तकनीकों के उद्भव के साथ कानून को अद्यतन (Update) रखना चुनौतीपूर्ण होगा।
- AI जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां (Emerging Technologies) नए जोखिम पैदा कर सकती हैं जिनके लिए कानून में संशोधन की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| आयु-सत्यापन | तकनीकी जटिलता और गोपनीयता संबंधी चिंताएँ। |
| निजी सदस्य विधेयक | कानून बनने की कम संभावना। |
| प्रवर्तन | नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में कठिनाई, विशेषकर वैश्विक प्लेटफार्मों पर। |
| तकनीकी विकास | नए प्लेटफार्मों और AI जैसी प्रौद्योगिकियों के साथ तालमेल बिठाना। |
| डेटा गोपनीयता | बच्चों की संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम। |
| डिजिटल साक्षरता | बच्चों और माता-पिता दोनों के लिए डिजिटल साक्षरता की कमी। |
आगे की राह
- सरकार को इस निजी सदस्य विधेयक के प्रावधानों पर विचार करना चाहिए और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए एक व्यापक सरकारी विधेयक पेश करना चाहिए।
- आयु-सत्यापन के लिए मजबूत और गोपनीयता-अनुकूल तकनीकी समाधान विकसित किए जाने चाहिए, जिसमें निजता के अधिकार का सम्मान हो।
- डिजिटल प्लेटफार्मों के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि वे बच्चों की सुरक्षा के लिए अपनी प्रणालियों में सुधार करें और नियमों का पालन करें।
- बच्चों और माता-पिता दोनों के लिए डिजिटल साक्षरता और ऑनलाइन सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहिए।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना चाहिए ताकि सीमा-पार ऑनलाइन जोखिमों से निपटा जा सके और वैश्विक मानकों को अपनाया जा सके।
- कानून को भविष्य-प्रूफ (Future-Proof) बनाने के लिए AI और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न होने वाले नए जोखिमों को संबोधित करने के लिए प्रावधान शामिल किए जाने चाहिए।
- नियमों के उल्लंघन के लिए स्पष्ट और प्रभावी दंड तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए, जिसमें वित्तीय दंड और सेवा निलंबन शामिल हों।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
निजी सदस्य विधेयक · डिजिटल निजता · बाल संरक्षण · ऑनलाइन गेमिंग · सोशल मीडिया विनियमन · सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम · आयु सत्यापन प्रणाली · व्यक्तिगत विज्ञापन · माता-पिता की सहमति · डिजिटल साक्षरता · साइबर सुरक्षा · निजता का अधिकार
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21A’, ‘note’: ‘शिक्षा का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(f)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर’}
अवधारणा प्रवाह
निजी सदस्य विधेयक का प्रस्ताव → नाबालिगों के लिए ऑनलाइन जोखिमों की पहचान → बच्चों के लिए खाता बनाने पर प्रतिबंध → प्लेटफार्मों पर सुरक्षा दायित्व → उल्लंघन पर दंड का प्रावधान → बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत में एक निजी सदस्य विधेयक (Private Member’s Bill) केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है।
2. निजी सदस्य विधेयकों को संसद में पारित होने की संभावना सरकारी विधेयकों की तुलना में बहुत कम होती है।
3. ‘सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000’ की धारा 69A सरकार को कुछ विशेष परिस्थितियों में किसी भी कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से किसी भी जानकारी को ब्लॉक करने का अधिकार देती है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि निजी सदस्य विधेयक लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पेश किए जा सकते हैं। कथन 2 सही है, स्वतंत्रता के बाद से केवल लगभग एक दर्जन निजी सदस्य विधेयक ही कानून बन पाए हैं। कथन 3 सही है, धारा 69A सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था आदि के आधार पर सामग्री को ब्लॉक करने की शक्ति देती है।
Q2. अभिकथन (A): ‘सेफगार्डिंग हेल्दी इंटरनेट एन्वायरनमेंट्स फॉर लिटिल डिजिटल-नेटिव्स (SHIELD) विधेयक, 2025’ बच्चों के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत विज्ञापन को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव करता है।
कारण (R): यह विधेयक बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने और उनकी डिजिटल निजता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि SHIELD विधेयक बच्चों के लिए व्यक्तिगत विज्ञापन पर रोक लगाने का प्रस्ताव करता है। कारण (R) भी सही है और यह A का सही स्पष्टीकरण है क्योंकि विधेयक का मुख्य उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन जोखिमों से बचाना और उनकी निजता की रक्षा करना है, जिसमें व्यक्तिगत विज्ञापनों पर प्रतिबंध भी शामिल है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में बच्चों के लिए डिजिटल निजता (Digital Privacy) और ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रस्तावित ‘सेफगार्डिंग हेल्दी इंटरनेट एन्वायरनमेंट्स फॉर लिटिल डिजिटल-नेटिव्स (SHIELD) विधेयक, 2025’ के संभावित प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही, इस संबंध में निजी सदस्य विधेयक की सीमाओं पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: बच्चों की डिजिटल निजता और ऑनलाइन सुरक्षा के महत्व तथा वर्तमान संदर्भ में प्रस्तावित SHIELD विधेयक, 2025 का संक्षिप्त परिचय।
2. SHIELD विधेयक के संभावित प्रभाव (सकारात्मक):
क. आयु सत्यापन प्रणाली और माता-पिता की सहमति का प्रावधान।
ख. व्यक्तिगत विज्ञापनों पर प्रतिबंध।
ग. अश्लीलता, जुआ, हिंसक सामग्री आदि से बच्चों को बचाने के उपाय।
घ. माता-पिता के लिए नियंत्रण डैशबोर्ड की सुविधा।
ङ. उल्लंघनों के लिए दंड का प्रावधान (₹10 करोड़ तक का जुर्माना, IT अधिनियम की धारा 69A के तहत सेवाओं का निलंबन)।
3. SHIELD विधेयक के संभावित प्रभाव (चुनौतियाँ/नकारात्मक पक्ष):
क. आयु सत्यापन प्रणालियों को लागू करने की व्यवहार्यता और निजता संबंधी चिंताएं।
ख. प्लेटफॉर्म पर अनुपालन का बोझ।
ग. बच्चों के लिए ऑनलाइन अनुभवों पर संभावित प्रतिबंध।
घ. डिजिटल साक्षरता और जागरूकता की आवश्यकता।
4. निजी सदस्य विधेयक की सीमाएँ:
क. संसद में पारित होने की ऐतिहासिक रूप से कम संभावना (स्वतंत्रता के बाद से केवल लगभग एक दर्जन)।
ख. सरकार का समर्थन और विधायी प्राथमिकता का अभाव।
ग. व्यापक नीतिगत परिवर्तनों के लिए सरकारी पहल की आवश्यकता।
5. निष्कर्ष: बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता, जिसमें विधायी प्रयासों के साथ-साथ डिजिटल साक्षरता और अभिभावकीय भागीदारी भी शामिल हो।
स्रोत: Hindustan Times
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments